विभिन्न लग्नों के लिए रत्न / रूद्राक्ष चयन

विभिन्न लग्नों के लिए रत्न / रूद्राक्ष चयन  

व्यूस : 12847 | मई 2014

प्रत्येक लग्न के लिए एक ग्रह ऐसा होता है जो योगकारक होने के कारण शुभ फलदायी होता है। यदि ऐसा ग्रह कुण्डली में बलवान अर्थात् उच्चराशिस्थ, स्वराशिस्थ या वर्गोत्तमी होकर केन्द्र या त्रिकोण भाव में शुभ ग्रह के प्रभाव में स्थित हो व इस पर किसी भी पाप ग्रह का प्रभाव न हो तो यह अकेला ही जातक को उन्नति देने में सक्षम होता है। अतः इसका रत्न धारण करना विशेष शुभ फलदायी तथा चमत्कारी प्रभाव देने वाला होगा परन्तु यदि यह अशुभ भाव में अशुभ ग्रहों के प्रभाव से ग्रस्त हो तो जातक इस योगकारक ग्रह के चमत्कारी प्रभाव से वंचित रह जाता है। ऐसी स्थिति में इसकी अशुभता को नष्ट करने हेतु इसके लिये रुद्राक्ष धारण किया जाना चाहिए।

ग्रह अनुसार रुद्राक्ष एवं रत्न

सूर्य के लिए 1 मुखी रुद्राक्ष, चंद्र-2 मुखी, मंगल-3 मुखी, बुध- 4 मुखी, गुरु-5 मुखी, शुक्र-6 मुखी, शनि-7 मुखी, राहु-8 मुखी एवं केतु के लिए 9 मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। व्यावसायिक व्यवधान हेतु 10 मुखी, लाभ एवं उन्नति हेतु 11 मुखी, रोग व ऋण मुक्ति हेतु 12 मुखी, आकर्षण करने व बुरी नजर से बचने के लिए 13 मुखी, शनि पीड़ा निवारण हेतु 14 मुखी, सर्व सम्पन्नता व विशेष लाभ हेतु 15 मुखी, संतान प्राप्ति हेतु गणेश गौरी रुद्राक्ष, वैवाहिक खुशहाली के लिए गौरी शंकर रुद्राक्ष व सभी विघ्नों को दूर करने और दुर्घटनाआंे से बचने हेतु गणेश रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।

रत्नों में सूर्य के लिए माणिक्य, चंद्र के लिए मोती या चंद्रमणि, मंगल-मूंगा, बुध-पन्ना, गुरु-पुखराज या सुनैला, शुक्र-हीरा व ओपल, शनि-नीलम, राहु-गोमेद व केतु के लिए लहसुनिया धारण करना श्रेयस्कर है। रत्न व रुद्राक्ष पहनने से तुरन्त लाभ होता है लेकिन पूर्ण फल प्राप्त करने हेतु धारक को नियमित रूप से ग्रह पूजा करनी चाहिए। जहां शुभ, योगकारक व बली ग्रहों के प्रभाव को बढ़ाने के लिए रत्न धारण करना चाहिए वहीं अकारक, नीच राशिस्थ व अशुभ भाव में स्थित ग्रह के शुभ फल प्राप्त्यर्थ रुद्राक्ष धारण करना श्रेष्ठ होता है।

राशि अनुसार रत्न

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मेष: आपके लिए सूर्य, चन्द्र, मंगल व गुरु योगकारक ग्रह हैं। अतः इनके लिए माणिक्य, मोती, मंूगा व पुखराज धारण कर सकते हैं लेकिन मंगल अष्टमेश है अतः मंगल के लिए 3 मुखी रुद्राक्ष स्वास्थवर्द्धक हो सकता है। गुरु के लिए द्वादशेश होने के कारण पंचमुखी रुद्राक्ष धारण करना समृद्धि कारक होगा। बुध, शुक्र व शनि इस लग्न के लिए बाधाकारक हैं अतः इन ग्रहों के लिए रत्न धारण न कर 4 मुखी, 6 मुखी व 7 मुखी रुद्राक्ष धारण करना श्रेष्ठ है। यदि सूर्य, चन्द्र भी छठे, आठवें एवं बारहवें स्थान पर आ जाते हैं तो रत्न की अपेक्षा 1 मुखी व 2 मुखी रूद्राक्ष धारण करना ही श्रेष्ठ है।

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वृष: वृष लग्न के लिए शनि, शुक्र व बुध योगकारक हैं इसलिए नीलम, हीरा व पन्ना पहनना आपके लिए शुभ है। अष्टमेश गुरु एवं द्वादशेश मंगल के अशुभ प्रभाव से मुक्ति हेतु 5 मुखी एवं 3 मुखी रूद्राक्ष धारण करें। सूर्य व चन्द्रमा भी इस लग्न के लिए बाधाकारक हैं इसलिए इनके लिए भी 1 मुखी व 2 मुखी रुद्राक्ष धारण करें। शनि, शुक्र व बुध भी यदि छठे, आठवें या बारहवें स्थान पर आ जाते हैं तो रत्न की अपेक्षा 7, 6 व 4 मुखी रुद्राक्ष धारण करना ही श्रेष्ठ है।

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मिथुन: मिथुन लग्न के लिए बुध, शुक्र व शनि योगकारक हैं इसलिए आप पन्ना, हीरा व नीलम धारण कर सकते हैं परन्तु शुक्र द्वादशेश व शनि अष्टमेश भी हैं इसलिए इनके फल प्राप्ति हेतु 4 व 7 मुखी रुद्राक्ष भी धारण करेंगे तो पूर्ण फल मिलेगा। सूर्य, चन्द्रमा व मंगल की शुभता के लिए एक, दो व तीन मुखी रुद्राक्ष धारण करें। गुरु के केन्द्राधिपति दोष के कारण गुरु का रत्न पुखराज अशुभ फलदायी होता है अतः गुरु के शुभ फल हेतु पंचमुखी रुद्राक्ष माला या पंचमुखी रुद्राक्ष धारण करें।

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कर्क: कर्क लग्न के लिए चन्द्र, मंगल व गुरु योगकारक हैं इसलिए मोती, मूंगा व पुखराज धारण करना शुभ रहेगा परन्तु गुरु के षष्ठेश होने के अशुभ प्रभाव को कम करने हेतु साथ में पंचमुखी रुद्राक्ष भी धारण करना चाहिए। शनि, बुध, शुक्र इस लग्न के लिए अकारक हैं तथा सूर्य में मारक प्रभाव है अतः इनके लिए 7, 4, 6 व 1 मुखी रुद्राक्ष धारण करना ही बेहतर होगा। यदि चन्द्र, मंगल व गुरु भी अशुभ भाव में आ जाएं तो रत्न की अपेक्षा 2, 3 व पंचमुखी रुद्राक्ष पहनें।

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सिंह: स्थिर लग्न के लिए भाग्येश बाधक हो जाता है। अतः सिंह लग्न में मूंगा न धारण करना ही बेहतर है। सिंह लग्न में विशेष रूप से माणिक्य धारण करें। पंचमेश गुरु के लिए पुखराज धारण करने से सम्पन्नता प्राप्त होती है। शनि के लिए 7 मुखी व मंगल के लिए 3 मुखी रुद्राक्ष धारण करना श्रेष्ठ रहता है।

 
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कन्या: कन्या लग्न के लिए बुध, शुक्र व शनि योगकारक हैं इसलिए पन्ना, हीरा व नीलम धारण करना शुभ होगा परन्तु अष्टमेश शनि व द्वितीयेश शुक्र के साथ में 7 व 6 मुखी रुद्राक्ष भी धारण करंे। यदि बुध, शुक्र व शनि अशुभ भाव में हों तो रत्न की अपेक्षा रुद्राक्ष ही धारण करें। कन्या लग्न के लिए सूर्य, चन्द्र व मंगल अकारक हैं इसलिए इनकी शांति हेतु 1, 2 व 3 मुखी रुद्राक्ष धारण करें। गुरु के केन्द्राधिपति दोष के निवारणार्थ पंचमुखी रुद्राक्ष या रुद्राक्ष माला धारण करें।

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तुला: तुला लग्न के लिए शुक्र, शनि व बुध योगकारक हैं इसलिए हीरा, नीलम व पन्ना धारण करें। अष्टमेश शुक्र व षष्ठेश बुध के लिए इनके साथ 6 व 4 मुखी रुद्राक्ष भी धारण करना चाहिए। सूर्य, चन्द्र, मंगल व गुरु इस लग्न के लिए अकारक हैं अतः इनके लिए रत्न की अपेक्षा 1, 2, 3 व 5 मुखी रुद्राक्ष धारण करें। यदि बुध अशुभ भाव में बैठे हों तो रत्न की अपेक्षा 4 मुखी रुद्राक्ष धारण करना ही उचित होगा।

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वृश्चिक: वृश्चिक लग्न के लिए सूर्य, चन्द्र, मंगल व गुरु योगकारक हैं इसलिए इनके रत्न माणिक्य, मोती, मंूगा व पुखराज धारण करें। मंगल के षष्ठेश होने के अशुभ प्रभाव से मुक्ति हेतु 3 मुखी रुद्राक्ष भी साथ में धारण करें। अकारक शनि, शुक्र व बुध के लिए 7, 6 व 4 मुखी रुद्राक्ष धारण करें। यदि सूर्य, चन्द्र एवं गुरु अशुभ भाव में स्थित हों तो इनके लिए रत्न के साथ 1, 2 व 5 मुखी रुद्राक्ष भी धारण करें।


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धनु: धनु लग्न के लिए गुरु, सूर्य व मंगल योगकारक हैं। अतः पुखराज, माणिक्य व मंूगा धारण करें। मंगल द्वादशेश भी है इसलिए 3 मुखी रुद्राक्ष पहनना भी आवश्यक है। अष्टमेश चन्द्रमा के लिए 2 मुखी रुद्राक्ष धारण करें। अकारक शुक्र, बुध व शनि के लिए 6, 4 व 7 मुखी रुद्राक्ष धारण करना शुभत्व देता है। यदि सूर्य, मंगल व गुरु अशुभ भाव में बैठे हों तो इनके लिए 1, 3 व 5 मुखी रुद्राक्ष धारण करें।

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मकर: मकर लग्न के लिए शनि, शुक्र व बुध योगकारक हैं अतः नीलम, हीरा व पन्ना धारण करना चाहिए। सूर्य, चन्द्र, मंगल व गुरु इस लग्न के लिए अशुभ हैं अतः 1, 2, 3 व 5 मुखी रुद्राक्ष धारण करें। यदि बुध, शुक्र व शनि अशुभ भाव में स्थित हों तो इनके लिए भी रत्न की अपेक्षा 4, 6 व 7 मुखी रुद्राक्ष धारण करें।

 
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कुम्भ: कुम्भ लग्न के लिए शनि, शुक्र व बुध योगकारक हैं अतः नीलम, हीरा व पन्ना धारण करें। शनि द्वादशेश भी है और बुध भी अष्टमेश का दोष होने से ग्रसित है इसलिए रत्नों के साथ 7 व 4 मुखी रुद्राक्ष धारण करें। सूर्य, चन्द्र, मंगल व गुरु अकारक हैं अतः इनका शुभ प्रभाव प्राप्त करने के लिए 1, 2, 3 व 5 मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। यदि बुध, शुक्र व शनि अशुभ भाव में स्थित हों तो इनके लिए भी रत्न की अपेक्षा 4, 6 व 7 मुखी रुद्राक्ष धारण करें।

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मीन: मीन लग्न के लिए शुक्र, बुध व शनि अशुभ हैं अतः इनके लिए 4, 6, व 7 मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। चन्द्र, मंगल व गुरु योग कारक हैं अतः इनके लिए मोती, मूंगा व पुखराज धारण करें। अशुभ भाव में स्थित होने की स्थिति में रत्न की अपेक्षा 2, 3 व 5 मुखी रुद्राक्ष धारण करना शुभ रहेगा। षष्ठेश सूर्य का शुभ प्रभाव प्राप्त करने के लिए 1 मुखी रुद्राक्ष धारण करें।

 

रत्न एवं रुद्राक्ष जानकारी

यदि कुण्डली में अधिकांश ग्रह उच्च राशिस्थ, स्वराशिस्थ या वर्गोत्तमी होकर शुभ भाव में बैठे हों तो सभी ग्रहों के रत्न धारण किये जा सकते हैं। अर्थात नवरत्न अंगूठी या लाॅकेट धारण कर सकते हंै। इसके विपरीत यदि अधिकांश ग्रह नीच राशिस्थ, शत्रु राशिस्थ या नीच नवांश में स्थित होकर अशुभ भावों में स्थित हों तो इनकी शुभता हेतु 1 से 14 मुखी रुद्राक्ष धारण करना श्रेष्ठ होता है। शनि की साढ़ेसाती में 14 मुखी रुद्राक्ष पहनना विशेष लाभदायक है। कालसर्प दोष निवारण हेतु 8 व 9 मुखी रुद्राक्ष पहनने से शांति मिलती है।


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रत्न एवं रूद्राक्ष विशेषांक  मई 2014

फ्यूचर समाचार के रत्न एवं रूद्राक्ष विशेषांक में अनेक रोचक और ज्ञानवर्धक आलेख हैं जैसे- रूद्राक्ष की ऐतिहासिक पृष्ठ भुमि, रूद्राक्ष की उत्पत्ति, रूद्राक्ष एक वरदान, रूद्राक्ष धारण करने के नियम, ज्योतिष में रत्नों का महत्व, रत्न धारण का समुचित आधार, रत्न धारण से रोगों का निदान, उपरत्न, लग्नानुसार रत्न निर्धारण, रत्नों का महत्व और स्वास्थ्य आदि। इसके अतिरिक्त पंच पक्षी के रहस्य, वट सावित्री व्रत, अक्षय तृतिया एवं आपकी राशि, ग्रह और वकालत, एक सभ्य समाज के निर्माण की प्रक्रिया, अगला प्रधानमंत्री कौन, कुण्डली के विभिन्न भावों में केतु का फल, सत्य कथा, पुंसवन संस्कार, हैल्थ कैप्सूल, शंख थेरेपी, ज्योतिष और महिलाएं तथा वास्तु प्रश्नोत्तरी व वास्तु परामर्श जैसे अन्य रोचक आलेख भी सम्मिलित किये गये हैं।

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