फर्श से अर्श तक पंच कोटि महामनी के विजेता सुशील कुमार

फर्श से अर्श तक पंच कोटि महामनी के विजेता सुशील कुमार  

बिहार राज्य के मोतीहारी जिले के सुशील कुमार ने कौन बनेगा करोड़पति प्रतियोगिता में पांच करोड़ जीतकर अपने प्रदेश एवं जिले का नाम तो रोशन किया ही है साथ ही अपने घर की दयनीय आर्थिक स्थिति भी सुधार ली। एक गरीब परिवार में पैदा हुए सुशील एकाएक करोड़पति बने। ऐसे में यह देखना दिलचस्प है कि इनकी कुंडली में ऐसे कौन से ग्रह योग हैं जो इन्हें फर्श से अर्श तक का सफर तय कराने में सहायक हुए। कौन बनेगा करोड़पति’ प्रोग्राम सोनी पर पिछले एक दशक से प्रसारित किया जा रहा है और जब भी यह प्रोग्राम प्रसारित होता है देश भर की आम जनता इस प्रोग्राम से दिल से जुड़ जाती है। सिनेमा जगत की जान श्री अमिताभ बच्चन जी का जादू जहां इस प्रोग्राम को सबसे अधिक टी. आर. पी. देता है वहीं करोड़पति बनने की ख्वाइश भी आम जनता को इस प्रोग्राम से जोड़ कर रखती है। जब भी कोई पिछड़े वर्ग का व्यक्ति लाखों में भी कुछ रकम जीतता है तो उसी वर्ग का व्यक्ति भी जीतने वाले की खुशी में शामिल हो जाता है और उन्हें उसकी जीत पर जहां गर्व महसूस होता है वहीं एक आशा भी जगती है कि शायद वे भी ऐसा कुछ कर सकते हैं और यह उनकी पहुंच से बाहर नहीं है। के. बी. सी. में पांच करोड़ की राशि जीतने वाले पहले प्रत्याशी सुशील कुमार बने। इस जीत ने सुशील कुमार व उसके परिवार दोनों को ही रातो रात न केवल मालामाल कर दिया बल्कि दुनिया भर में मशहूर कर दिया। सुशील कुमार बिहार के मोतीहारी जिले से हैं तथा पिछले ग्यारह वर्षों से के. बी. सी. के इतने शौकीन थे कि अपने घर टेलीविजन न होने के कारण पड़ौसी के घर टी. वी. देखने जाया करते थे और के. बी. सी. में पूछे अधिकतर सभी सवालों के जबाब दे दिया करते थे। वे विभिन्न प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी भी कर रहे थे। जिसके कारण उनको सामान्य ज्ञान की अच्छी जानकारी थी। नियमित रूप से अखबार पढ़ने की आदत ने भी उन्हें के. बी. सी. जीतने में मदद की। सुशील कुमार आर्थिक रूप से काफी सामान्य परिवार से हैं। परिवार में माता-पिता के अतिरिक्त तीन बड़े भाई भी हैं घर में हमेशा से आर्थिक तंगी रही जिसके चलते अपनी पढ़ाई को भी उन्हें ट्यूशन पढ़ाकर खर्चा निकालना पड़ा और चाह कर भी अपनी पढ़ाई को आगे नहीं चला पाए। आजकल एक एन. जी. ओ. में कंप्यूटर आॅपरेटर की हैसियत से काम कर रहे हैं। मात्र 6 हजार रुपये की वेतन पर अपनी और अपनी पत्नी का खर्चा चला रहे हैं। के. बी. सी. में पांच करोड़ की जीत उनके लिए बिल्कुल अप्रत्याशित थी वे 25-50 लाख जीतने का ख्वाब लेकर आए थे। पर लक्ष्मी जी जब मेहरबान होती हैं तो छप्पर फाड़ कर के घर भर देती हैं यही सुशील कुमार के साथ हुआ 24 अक्तूबर को धन तेरस के दिन सुशील कुमार के ऊपर लक्ष्मी जी विशेष मेहरबान हो गई और उन्हें 5 करोड़ की राशि से मालामाल कर दिया। अब सुशील कुमार इस धनराशि से अपने जीवन के सपने पूरे करना चाहते हैं। वह एक लाइब्रेरी खोलना चाहतें है। गिरवी पड़े घर के पेपर बैंक से छुड़ाना, भाइयों की मदद करना तथा दिल्ली आकर यू पी. एस. सी. की तैयारी करना उनके सपनों में शामिल है। आइये करें सुशील की कुंडली का अवलोकन जिसमें ग्रहों की स्थिति ने जबरदस्त धन योग की बारिश कर दी है। सुशील की कुंडली का अवलोकन करें तो लग्नेश धनेश के साथ कर्म स्थान दशम भाव में बैठ कर राज योग बना रहे हैं। द्वितीय भाव में केतु की स्थिति आकस्मिक धन लाभ का योग बना रही है। चतुर्थ भाव में चंद्र पूर्ण बली होकर बैठे हैं और गुरु एवं चंद्र की आपसी दृष्टि एवं एक दूसरे से केंद्र में स्थिति गजकेसरी योग बना रहे हैं। भाग्य स्थान में लाभेश शुक्र तथा लाभ स्थान में भाग्येश सूर्य परिवर्तन योग में बैठे हैं इससे परिवर्तन लाभ योग बना रहे हैं। इन योगों के प्रभाव से तथा पंचम से पंचम नवम भाव के स्वामी सूर्य एवं लाभेश शुक्र के परिवर्तन योग से अपनी बुद्धि, विद्या एवं अंतरज्ञान शक्ति से सुशील पंच कोटि के विजेता बने। कर्म भाव में शनि और गुरु की युति बहुत शुभ है और इसी युति के फलस्वरूप इन्होंने अपने आपको धैर्य, ज्ञान, बुद्धि व पराक्रम से सफलता की सीढ़ियों पर चढ़ाया और धनवान बनाया। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सुशील जी की कुंडली में बहु संख्या में धन योग, राज योग, संपत्ति आदि अनेक शुभ विशिष्ट योग विद्यमान हैं। जिनका विस्तृत विवरण निम्नलिखित है। गोपकुलोत्पन्न राजयोग Û यदि जन्मकुंडली में लग्नेश बलवान होकर केंद्र (1, 4, 7, 10) भाव में स्थित हो तो गोपकुलोत्पन्न राजयोग बनता है जैसा कि कुंडली में विद्यमान है। इस योग के अनुसार व्यक्ति यदि ग्वालों के कुल में भी उत्पन्न हो तो भी वह जीवन में राजा या राजनेता के समान धन ऐश्वर्यशाली बनता है। (-सारावली 11 अ. 35/श्लोक 118 ) भाग्यवान योग Û यदि भाग्येश लाभ भाव मंे हो तो जातक भाग्यवान होता है। जैसा कि कुंडली में वर्णित है। (भारतीय ज्योतिष पृ. संख्या 317) धन प्राप्ति योग Û यदि दशम स्थान में बृहस्पति शुभ होकर स्थित हो तो धन प्राप्ति योग बनता है। (जातक भरण - दशम भाव-11) उत्तम भाग्योदय धन योग Û यदि चतुर्थेश, नवमेश, एकादशेश और धनेश बलवान हो तथा इन ग्रहों में से कोई ग्रह लग्न से संबंध रखता हो, तो इन ग्रहों की दशा काल में भाग्योदय, उत्तम धन, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, यह सब योग इनकी कुंडली में घटित हो रहे हैं। (जातक परिजात- 12/श्लोक 111 ) श्रीमान योग Û उपरोक्त योग के अनुसार यदि बली होकर शुभ ग्रह लाभ भाव में स्थित हो तो व्यक्ति लक्ष्मीवान बनता है। इनकी कुंडली में बुध शुभ ग्रह होकर लाभ भाव में है एवं षडबल में बली हैं। (भारतीय ज्योतिष पृ. संख्या 318-5) बहुलाभ योग वृहद् पाराशर होराशास्त्र के अनुसार इनकी कुंडली में निम्न श्लोक के अनुसार बहुलाभ योग विद्यमान है। लाभाधिपो यदा लाभे तिष्ठेत्केन्द्र त्रिकोणयो। बहुलाभं तदा कुर्यादुच्चसूर्यांशगोऽपिना।। अर्थात्- इनकी कुंडली में लाभ भाव का स्वामी शुक्र त्रिकोण भाव में स्थित हैं जिसके फल स्वरूप इनको बहुधन लाभ का संयोग बन रहा है। निश्चित धनयोग सुशील की कंुडली में निश्चित धनयोग बन रहा है। भारतीय ज्योतिष - पृष्ठ 276-16 Û इस योग के अनुसार यदि कुंडली में लग्नेश और द्वितीयेश का संबंध बनता हो तो ऐसा जातक अवश्य धनी बनता है। इनकी जन्म पत्रिका में लग्नेश बृहस्पति, द्वितीयेश शनि की युति संबंध शुभ भाव दशम में बन रहा। जिसके फलस्वरूप कम उम्र में ही करोड़पति बने। महायोग Û यदि जन्मांग में भाग्येश लाभ में और लाभेश भाग्य भाव में स्थित हो तो महायोग बनता है। इससे व्यक्ति निम्न स्थिति से उच्च स्थिति में पहुंच जाता है। (फलदीपिका अ. 6 श्लोक 32) बुधादित्य योग इसके अतिरिक्त इनकी जन्मपत्रिका के लाभ भाव में बुधादित्य योग बना है तथा षड्बल सूर्य और बुध दोनों ही सबसे बलवान है। इस योग ने भी इन्हें अचानक ही करोड़पति बनने में अहम भूमिका निभाई। अधिक धन लाभ योग Û यदि लाभ भाव में शुभ ग्रह का योग तथा शुभ ग्रह का वर्ग हो या दृष्टि हो तो ऐसे जातक को अधिक धन की प्राप्ति होती है। यह योग बुध से बन रहा है। क्योंकि बुध शुभ ग्रह है तथा वह नैसर्गिक शुभ ग्रह शुक्र के घर में स्थित है। जातका भरणम्-एकादश भाव-9 ।। इसके अतिरिक्त इस जातक की कुंडली में बहुत सारे शुभ योग विद्यमान है। गजकेसरी योग, सुखी जन श्रेष्ठ योग, राज योग, वाशि योग, सम्मान योग, धर्मात्मा योग, विमल योग, धीरपुरूष योग, भवन प्राप्ति योग, तीक्ष्णस्मरण शक्ति योग, केमद्रुम भंग योग, यज्ञादिशुभकर्म योग, अमलयोग शुभ योग, भाग्यशाली योग, गुणी योग आदि के अनुसार इस जातक को बिल्कुल सामान्य स्थिति से विशेष उच्च स्थिति में पहुंचाया। अब प्रश्न यह उठता है कि यदि सुशील की कुंडली में इतने सारे धन योग हैं तो यह धन बचपन से ही क्यों नहीं मिला और शुक्र की दशा में ही क्यों करोड़पति होने का सुख प्राप्त हुआ? सुशील के जन्म के समय शनि की महादशा चल रही थी। 6 वर्ष पश्चात बुध की महादशा 17 वर्ष तक चली और फिर 7 वर्ष तक केतु की महादशा आयी। बुध ग्रह सुशील की कुंडली के लिए बाधक ग्रह है परंतु फिर भी बुध की महादशा में ही सुशील ने पोस्टग्रेजुएट तक की पढ़ाई की और पढ़ाई में इनकी गहन दिलचस्पी बनी रही और आर्थिक तंगी होने के बावजूद सुशील ने टयूशन द्वारा अपनी उच्च शिक्षा को जारी रखा। अपनी तीक्ष्ण बुद्धि के कारण ही इनकी पढ़ाई में गहन रूचि थी और सन् 2000 से ही ये के. बी. सी. के बहुत शौकीन थे तथा अधिकतर प्रश्नों के उत्तर अपने सामान्य ज्ञान से दे दिया करते थे। केतु की महादशा में इन्होंने नौकरी शुरू की और केतु अपनी शत्रु राशि में स्थित है। इसलिए अधिक लाभ नहीं पहुंचा पाए लेकिन सुशील के लेखन और बौद्धिक ज्ञान में जरूर वृद्धि की। फरवरी 2011 में सुशील की शुक्र की महादशा प्रारंभ हुई और आजकल शुक्र की महादशा में शुक्र का अंतर तथा सूर्य का प्रत्यंतर चल रहा है। कुंडली में शुक्र और सूर्य का लाभेश व भाग्येश होकर परिवर्तन योग राज योग बना रहा है। इसलिए इसी समय यह पंच कोटि महामनी के विजेता बने और विश्व भर में प्रसिद्ध हो गये। धनेश शनि के अपनी उच्च राशि तुला में लाभ स्थान में गोचर के पश्चात ही सुशील को यह धन राशि प्राप्त होगी और वास्तविक रूप में करोड़ों में खेलेंगे। सूर्य की प्रत्यंतर दशा के पश्चात अब चंद्र, मंगल, राहु, गुरु और शनि सभी ग्रहों की प्रत्यंतर दशाएं अत्यंत शुभ रहेंगी और मंगल और राहु की अंतर दशा में विदेश भ्रमण भी होगा और विदेश से भी लाभ प्राप्त होगा। 2014 के पश्चात सूर्य की अंतर्दशा में सरकारी पद प्राप्त कर सकते हैं तथा राजनीति के क्षेत्र में पद प्रतिष्ठा प्राप्त हो सकती है। सामाजिक क्षेत्र में भी किसी संस्था का प्रतिष्ठित पद प्राप्त हो सकता है। शुक्र की अंतर्दशा जहां इन्हें उत्तम भवन, उत्तम वाहन, उत्तम भ्रमण, उत्तम पारिवारिक सुख व भाग्य वृद्धि, का सुख प्रदान करेगी और अपने कुटुम्बियों से परस्पर सहयोग करवाएगी वहीं सूर्य की अंतर्दशा राजनीतिक, सामाजिक एवं व्यवसायिक क्षेत्र में लाभ प्रदान करेगी और यश एवं सम्मान में वृद्धि करेगी।


वास्तु विशेषांक  दिसम्बर 2011

वास्तु शास्त्र भारत की एक प्राचीन गूढ विद्या है। वास्तु शास्त्र का आधार मानव जीवन में संतुलन का प्रतिपादन करना है। वास्तु का मूलभूत सिद्धांत प्रकृति के सूक्ष्म एवं स्थूल प्रभावों को मानव मात्र के अनुरूप प्रयोग में लाना है।

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