चित्र, प्रतिमा, वाहन का वास्तु से संबंध

चित्र, प्रतिमा, वाहन का वास्तु से संबंध  

चित्र, प्रतिमा, वाहन का वास्तु से संबंध डा. भगवान सहाय श्रीवास्तव प्राचीन हिंदू शास्त्र के साथ-साथ आधुनिक वास्तु शास्त्र और फेंगशुई में जानवरों, वाहनों उनके चित्रों को भी शुभ बताया गया है। फेंगशुई के अनुसार कुŸाा, घोड़ा, कछुआ, हाथी, बाघ आदि की छोटी प्रतिमा घर में उचित स्थान पर रखने से घर में रहने वाले लोगों के जीवन में सार्थकता सफलता एवं संपन्नता आती है। सौभाग्य और शक्ति प्राप्त होती हैं। तो घर में ऊर्जा का संचार होता है और जिंदगी को जिंदादिली से जीने का संदेश मिलता है। स्टैरोलाइट: इसे ट्विन क्रिस्टल भी कहा जाता है। इसे फेयरी क्रास भी कहते हैं। इसे घर में रखने से घर के लोगों के बीच अच्छी आदतों का संचार घोड़ घड़ी: घड़ी आमतौर पर घर में होती है, परंतु फेंगशुई के अनुसार यह भी सौभाग्य प्रदान कर सकती है। इसकी सुईयां या पेंडुलम भी ऊर्जा को आमंत्रित करते हैं। घड़ी को मुख्य दरवाजे के बिल्कुल सामने न लगाएं। घड़ियां प्रायः गोल, अंडाकार, षट्भुजाकार और अष्टभुजाकार की होनी चाहिए। पाई याओ: फेंगशुई में इसे रहस्यमयी कृति माना जाता है। इसे सौभाग्य और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। अगर इसे व् य ा व स ा िय क प्रतिष्ठान में रखा जाए, तो वहां केवल धन आता है, जाता नहीं। इसीलिए इसे बैंकों, कैसीनांे और विŸाीय संस्थानांे में रखा जाता है। वेल्थ शिप: फेंगशुई में वेल्थशिप काफी लोकप्रिय है घर या प्रतिष्ठानों में उपयोग में लाते हैं। यह एक जहाज होता है, जो सोने के सिक्कों या चीजों से लदा होता है और संपन्नता का संदेश देता है पर इस जहाज का मुंह कभी भी दरवाजे की ओर नहीं होना चाहिए। वरना आपका धन घटने की आशंका हो सकती है। हिप्पो: फेंगशुई के अनुसार यह सच्चाई और अपने लक्ष्य की ओर एकाग्रचित रहने का संदेश देता है। यह जमीन और पानी दोनों में रह सकता है। पानी में वह सांस भी ले सकता है। वह हमें क्षमतावान होना सिखाता है। इसे जन्म, मातृत्व और युवाओं की सुरक्षा का प्रतीकमाना जाता है। घर में यदि हिप्पो की छोटी सी आकृति लाकर रखी जाए होता है और उसमें सुरक्षा भावना प्रबल होती है। यदि किसी की दूरदृष्टि बढ़ानी हो तो यह लाभप्रद हो सकता है। साथ ही खोई हुई चीजों का पाने, दूसरों से संपर्क बढ़ाने, खराब आदतों से छुटकारा पाने एवं स्वस्थ रखने में मुख्य भूमिका निभाता है। बाघ: यह पशु बहादुरी और मजबूती का प्रतीक है अगर इनकी फेंगशुई मूर्ति कार्यालय में रखी जाये तो कर्मचारी और अधिकारियों का उत्साहवर्द्धन होता है। परंतु यह कभी आक्रामक अवस्था का चित्र नहीं होना चाहिए और इसका मुंह भी बंद होना चाहिए। प्राचीन हिंदू शास्त्र के साथ-साथ आधुनिक वास्तु शास्त्र और फेंगशुई में जानवरों, वाहनों उनके चित्रों को भी शुभ बताया गया है। फेंगशुई के अनुसार कुŸाा, घोड़ा, कछुआ, हाथी, बाघ आदि की छोटी प्रतिमा घर में उचित स्थान पर रखने से घर में रहने वाले लोगों के जीवन में सार्थकता सफलता एवं संपन्नता आती है। सौभाग्य और शक्ति प्राप्त होती हैं। तो घर में ऊर्जा का संचार होता है और जिंदगी को जिंदादिली से जीने का संदेश मिलता है। स्टैरोलाइट: इसे ट्विन क्रिस्टल भी कहा जाता है। इसे फेयरी क्रास भी कहते हैं। इसे घर में रखने से घर के लोगों के बीच अच्छी आदतों का संचार घोड़ा: मेहनत, ऊर्जा और सक्रियता का प्रतीक माने जाने वाले घोड़े की फेंगशुई मूर्ति ही नहीं पेंटिंग भी कारगर साबित होती है। अगर इसकी छोटी सी प्रतिमा या पेंटिंग को अधिकारी अपनी टेबिल के आसपास रखें तो उनका व्यक्तित्व और अधिक उभरकर आयेगा। किंतु ध्यान रखें कि घोड़े की पेंटिंग या प्रतिमा की दिशा दरवाजे की ओर न हो। कुŸो: फेंगशुई में इन्हें फू डाग्स या टेंपल लायन्स कहा जाता है। इन्हें दरवाजे का भगवान कहते हैं। ये बुरी आत्माओं और लोगों को हानि पहुंचाने वाली ताकतों को रोकते हैं। घर में तस्वीरें, कैलेंडर, पोस्टर आदि दीवारों पर लगाना आम बात है। परंतु यह जानना अत्यंत आवश्यक है कि घर में किस जगह पर तस्वीर लगानी ताकत मिलती है। परंतु हमेशा अपनी हंसती, मुस्कुराती, खिलखिलाती तस्वीर ही लगाएं। इससे आपको भी ऊर्जा मिलेगी। रोती हुई या उदास मुद्रा वाली तस्वीर न लगाएं। Û अगर बुजुर्गों की तस्वीर लगानी हो, तो इसके लिए उŸार दिशा में स्थित दीवार सही मानते हैं। जिससे घर में आरोग्य व संपन्ता आती है। मृत सदस्यों की तस्वीर यम की दिशा दक्षिण दिशा में लगाना श्रेयस्कर है। बच्चों की तस्वीरों के लिए पूर्व दिशा उपयुक्त है। अगर शयनकक्ष में लगाई गई तस्वीर सकारात्मक संकेत देती है तो वह पूरे परिवार के लिए शुभ संकेत माना जायेगा इसलिए अपने शयनकक्ष में अपने प्रिय लोगों की तस्वीर लगाना उपयुक्त रहेगा। जो हमेशा सकारात्मक ऊर्जा देती रहेगी। यदि आप घर में प्राकृतिक दृश्य वाली तस्वीरे लगाते हैं तो यह पूरे घर में सकारात्मक वातावरण बनायेंगे। इसके लिए आप पहाड़ों, समुद्रों या हरी-भरी घास से भरे मैदान की तस्वीर लगा सकते हैं। जो आपकी अंतरात्मा के लिए उपयुक्त मानी जाती है। एक गुलाब की तस्वीर घर में संबंधों के बीच प्यार बढ़ाती है। झरने की तस्वीर ऊर्जा व ताजगी अनुभव कराती है जबकि पहाड़ी झील की तस्वीर शांति का संदेश देती है। ऐसे चित्र (तस्वीर) न लगाएं: अगर एक जंगली जानवर आक्रामक मुद्रा में हो, तो ऐसी तस्वीर लगाने से परहेज करें। इसके बजाय आप घोड़ों की तस्वीर लगा सकते हैं जो ताकत और विस्तार को बोध कराते है। गाय की तस्वीर लगा सकते हैं जो शांति का संदेश देती है। इसी प्रकार हाथी की तस्वीर लगा सकते हैं जो धीमी गति पर सफलता मिलने की गारंटी का बोध कराते हैं भूस्खलन जैसी आपदाओं व नोकीले वृक्षों की तस्वीर हानिकारक है। कमरे में हमेशा अच्छे व उत्साहवर्धक चित्र लगाएं। इससे परस्पर प्रेम व सद्भाव बना रहेगा। शयनकक्ष में गोलाकार दर्पण नहीं रखें। यदि बिस्तर के सामने डेªसिंग टेबिल या अन्य दर्पण रहेगा तो नकारात्मक होता है। सकारात्मक चित्रों से सुरक्षा संपन्नता: फेंगशुई के अनुसार नव विवाहित जोड़े अपने कमरे में क्रिस्टल रखें तो उनके रिश्तों में एक जुटता एकता प्रबल होती है। घर में एक घंटी लटका दें। यह घंटी सकारात्मक ध्वनि निकालेगी। वहीं दो कमरों के बीच में नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होगी। इसके अलावा कमरे या पूरे घर में तेज व संपूर्ण रोशनी की व्यवस्था चाहिए और किस जगह पर नहीं? वास्तव में इन सभी बातों का हमारे जीवन पर शुभ-अशुभ प्रभाव पड़ता है कि तस्वीरों को सही कोण व दिशा में लगाया है या नहीं। वास्तु शास्त्र में इन सभी बातों की जानकारी दी है इनको बारे में प्रस्तुत है। अगर आप फल, फूल और हरे-भरे वृक्षों की तस्वीर लगाना चाहते हैं, तो इन्हें पूर्व या उŸार की दीवार पर लगाना ठीक रहेगा। लक्ष्मी, रत्न और ज्वैलरी की तस्वीर भी उŸार की दीवार पर टांगनी चाहिए। कई बार लोग कमरे में अपनी तस्वीर लगाना पसंद करते हैं। इससे भी उन्हें रखें। इससे सकारात्मक ऊर्जा के संचालन में मदद मिलेगी। मनपंसद चमकदार रोशनी से ऊर्जा के स्तर को बढ़ा सकते हैं। किसी भी उत्सव या पार्टी में जाने से पहले अपनी जेब में क्रिस्टल और गुलाब की 12 पंखुड़ियां रखें। इससे संबंध प्रगाढ़ होंगे। अपने कमरे में दो पक्षियों को इसी तरह के प्रेम भाव का प्रदर्शन करते हुए चित्र लगाएं इससे पति-पत्नी के रिश्तों में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है शयनकक्ष में बिस्तर के दोनों किनारों पर नाइट लैंप रखें। तो रिश्तों में नरमी बनी रहती है शयनकक्ष में टीवी., विद्युत उपकरण आदि नहीं रखने चाहिए। नकारात्मक ऊर्जा फैलने से बचाने के लिए ऐसी चीजों के उपयोग के बाद ढक देना चाहिए। घर में पूजा कक्ष की तरह विश्राम कक्ष भी साफ सुथरा और अनावश्यक सामानों से रहित रखें। दरवाजे के सामने फर्नीचर न रखें। इससे उत्पन्न नकारात्मक ऊर्जा से घर के सदस्यों के बीच वैमनस्यता में वृद्धि होती है। शयनकक्ष में कभी भी धातुओं से बने बिस्तर इस्तेमाल में न लाएं। इनके छिद्र (छेद) पति-पत्नी के बीच दूरियों का घोतक माने जाते हैं। कमरे में न तो ज्यादा गहरे रंग होने चाहिए और न ही कूल रंग। यदि जरूरत से ज्यादा कूल रंग होंगे तो इससे रिश्तों में उदासीनता आ सकती है। कुल मिलाकर इन उपायों को अपनाकर मनुष्य एक सुखद और अनुकूल वातावरण तैयार कर सकते हैं जिससे शरीर और आत्मा को शांति मिलती है तथा समस्याओं को कमजोर करते हुए हमें लाभ मिलता है जिससे हमारे जीवन में चमत्कारी परिवर्तन हो सकता है। ‘‘शुभता व देव शक्ति’’ ‘वाहन’ भी पूज्यनीय: शास्त्रों में देवताओं के साथ-साथ उनके वाहन का भी वर्णन है। पूजन में भी इनकी पूजा करने का विधान है। वाहन की पूजा से ही देव-पूजा पूर्ण होती है। दरअसल वह जानवर या पक्षी जिस भगवान का वाहन होगा, वह देवता उस जातक पर प्रसन्न होंगे। इसलिए आज भी देवी-देवताओं के साथ-साथ उनके वाहनों का भी पूजन किया जाता है। आठ हाथियों का समूह दिशाओं का सूचक है। यह पशु देवी लक्ष्मी से भी संबंधित है और भगवान इंद्र का वाहन भी है। प्रथम पूज्यनीय श्री गणेश का मस्तक भी हाथी का ही है, जो शुभता और संपन्नता के प्रतीक हैं। इसलिए हाथी की पूजा करना लाभप्रद है। इसी प्रकार भगवान विष्णु का संबंध मछली और शंख से बताया गया है। शंख भगवान विष्णु का प्रतीक है। इसे इस्तेमाल करना या पूजा घर में रखना शुभ है। मछली भी इसी प्रकार सौभाग्य और संपन्नता का घोतक मानते हैं। भगवान विष्णु के कई अवतारों में पशुओं का वर्णन भी मिलता है उनके नृसिंह रूप में शेर और कच्छप अवतार में कछुए का वर्णन है शास्त्रों में विष्णु को गरुण (गरुड़) की सवारी करते देखा गया है जिसकी चर्चा रामायण में भी है। इसी प्रकार देवी-दुर्गा का वाहन भी बाघ है जो शौर्य और साहस का प्रतीक है। वास्तुशास्त्र के अनुसार बाघ की छोटी मूर्ति घर में रखी जा सकती है।



वास्तु विशेषांक  दिसम्बर 2011

वास्तु शास्त्र भारत की एक प्राचीन गूढ विद्या है। वास्तु शास्त्र का आधार मानव जीवन में संतुलन का प्रतिपादन करना है। वास्तु का मूलभूत सिद्धांत प्रकृति के सूक्ष्म एवं स्थूल प्रभावों को मानव मात्र के अनुरूप प्रयोग में लाना है।

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