लाल किताब के अनुसार राहु-केतु का विष्लेषण

लाल किताब के अनुसार राहु-केतु का विष्लेषण  

लाल-किताब के अनुसार राहु-केतु का विद्गलेषण रद्गिम चौधरी ज्योतिष में राहु-केतु को छाया ग्रह कहा गया है, किंतु लाल-किताब के अनुसार ये छाया ग्रह भी अपना शुभ-अशुभ प्रभाव देने में पीछे नहीं रहते हैं। प्रस्तुत लेख में लाल किताब के आधार पर राहु केतु से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों की विवेचना की जा रही है। लाल किताब' में राहु को 'सरस्वती' कहा गया है क्योंकि ये अच्छे-बुरे दोनों प्रकार के विचारों का कारक ग्रह है। इसका रंग नीला है। बुध, शनि, केतु इसके मित्र तथा सूर्य, मंगल, शुक्र शत्रु हैं। गुरु, चंद्र राहु के लिए सम-ग्रह हैं। 'लाल किताब' में इसे 'कड़कती हुई बिजली' कहा गया है जिसमें पल भर में सब कुछ जलाकर खाक कर देने की ताकत है। इसके लिए 3, 4, 5, 6, 10 भाव शुभ तथा 1, 2, 7, 8, 9, 11, 12 भाव अशुभ माने गये हैं। सूर्य के साथ या सूर्य से दृष्ट राहु-सूर्य को ग्रहण लगा देता है। चंद्र के साथ होने पर चंद्र के फल को मंदा कर देता है किंतु अपने मंदे प्रभाव को कम कर लेता है। मंगल के साथ राहु कठोर दिल वाला इंसान बनाते हैं। बुध व राहु अच्छा फल देते हैं। गुरु के साथ या दृष्टि संबंध होने से राहु गुरु के फल को बहुत अशुभ कर देता है। शुक्र के साथ राहु शादी में देरी करवाता है एवं चारित्रिक दोष भी देता है। शनि व राहु इकट्ठे शनि का 'गुलाम' है। यदि कुंडली में राहु अशुभ होकर मंदी असर कर रहा हो तो गुरुवार को मूली दान करें या शनिवार को कच्चे कोयले चलते पानी में बहाएं। राहु के मंदी के असर को कम करने के लिए चांदी का चौकोर टुकड़ा हमेशा अपने पास रखें। राहु के अशुभ असर को कम करने के लिए सुर्ख रंग वाली मसूर की दाल प्रातःकाल सफाईकर्मी को देनी चाहिए या कभी-कभी कुछ पैसे देने चाहिए। यदि राहु अचानक बीमारी पैदा करे, तो मरीज के वजन के बराबर जौं बहते पानी में बहाएं या किसी गरीब को जौं दान करें। तंबाकू का सेवन न करें एवं जब तक हो सके, संयुक्त परिवार में ही रहें। देखने में आया है कि सूर्य के साथ स्थित राहु, व्यक्ति की आर्थिक स्थिति एवं नौकरी-व्यवसाय को हानि पहुंचाता है। इसका असर न केवल उस भाव पर पड़ता है जिसमें राहु बैठा है बल्कि उसके साथ वाला घर भी जल जाता है। राहु : उड़द, गर्म कपड़े, सरसों, काला फूल, राई, तेल, कुल्फी आदि में जो भी उपलब्ध हो उसका यथाशक्ति दान करने से राहु से संबंधित कष्टों से छुटकारा मिलता है। राहु का दिन शनिवार है अतः इसका दान भी शनिवार को ही करना चाहिए। केतु : केतु का रंग चितकबरा तथा दिन रविवार है। शुक्र, राहु इसके मित्र तथा चंद्र, मंगल शत्रु ग्रह है। सूर्य, बुध, गुरु, शनि सम ग्रह हैं। कुंडली में छठा भाव केतु का अपना घर होता है। लड़का, भांजा, केला, चारपाई, टांगे, छिपकली, चूहा, नर गौरेय्या, गुप्तांग, तिल, असंगध, रीढ़ की हड्डी, जोड़, प्याज, लहसुन आदि सब चीजें केतु से संबंधित हैं। लाल किताब के अनुसार चंद्र को दूध एवं केतु को नींबू कहा गया है अर्थात् दोनों एक दूसरे के पक्के शत्रु हैं। केतु यदि चं्रदमा के साथ है तो यह 'ग्रहण योग' बना देता है। चंद्रमा 'मन' का कारक ग्रह है। चंद्र-केतु का मिलन मन की शांति भंग करने वाला होता है। मंगल-केतु का एक भाव में होना दोनों का फल अशुभ करता है। यदि बुध-केतु साथ हों तब भी केतु का फल शुभ नहीं रहता। गुरु के साथ केतु प्रायः बुरा फल नहीं देता। लाल किताब के अनुसार केतु के लिए 1, 2, 5, 7, 10, 12 शुभ एवं 3, 3, 4, 6, 8, 9, 11 अशुभ माने गये हैं। यदि केतु लग्न में बुध के साथ हो तो लोहे की गोली पर लाल रंग करके अपने पास रखें। केतु तीसरे भाव में हो तो चने की दाल बहते पानी में बहाएं। केतु भाव 4 में हो तो पुराहित को पीले रंग की वस्तुएं दान करें। यदि केतु 5वें घर में हो तो गाजर या मूली को रात में सिरहाने रखकर प्रातः धर्मस्थल में दान करें। केतु छठे भाव हो तो छः प्याज जमीन में घर के बाहर दबा दें। सातवां घर शुक्र का 'पक्का घर' है और केतु का मित्र शुक्र है अतः भाव 7वें में केतु प्रायः ठीक-ठाक फल देता है। आठवां मंगल का घर है और मंगल केतु का शत्रु है अतः 'दुश्मन' के घर में केतु अशुभ ही रहता है। यदि केतु आठवें भाव में हो तो गणेश जी की पूजा करें या चितकबरा कंबल मंदिर में दान करें। यदि केतु बारहवें घर में हो और व्यक्ति कुत्तों को परेशान करे तो संतान पर बहुत गंदा असर होगा। इस स्थिति में दूध में अंगूठा डालकर चूसना शुभदायक होता है। दान योग्य वस्तुएं : तिल, बकरा, झण्डी, काजल, ऊनी कंबल, सतनजा, मूली आदि में जो भी उपलब्ध हो उनका यथाशक्ति रविवार को दान करने से लाभ होता है।
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lal-kitab ke anusarrahu-ketu ka vidgaleshanaradgim chaudhrijyotish men rahu-ketu ko chaya grah kaha gaya hai, kintu lal-kitab ke anusar ye chaya grahbhi apna shubh-ashubh prabhav dene men piche nahin rahte hain. prastut lekh men lal kitab ke adharapar rahu ketu se sanbandhit kuch mahatvapurn tathyon ki vivechna ki ja rahi hai.lal kitab' men rahu ko'sarasvati' kaha gaya haikyonki ye achche-bure donon prakar kevicharon ka karak grah hai. iska rangnila hai. budh, shani, ketu iske mitrattha surya, mangal, shukra shatru hain. guru,chandra rahu ke lie sam-grah hain. 'lalkitab' men ise 'karkti hui bijli'kha gaya hai jismen pal bhar men sabkuch jalakar khak kar dene ki takthai. iske lie 3, 4, 5, 6, 10 bhavshubh tatha 1, 2, 7, 8, 9, 11, 12 bhavashubh mane gaye hain.surya ke sath ya surya se drisht rahu-suryako grahan laga deta hai. chandra ke sathhone par chandra ke fal ko manda kar detahai kintu apne mande prabhav ko kam karleta hai. mangal ke sath rahu kathordil vala insan banate hain. budh v rahuachcha fal dete hain. guru ke sath yadrishti sanbandh hone se rahu guru ke falko bahut ashubh kar deta hai. shukra kesath rahu shadi men deri karvata hai evancharitrik dosh bhi deta hai. shani v rahuikatthe shani ka 'gulam' hai. yadi kundli men rahu ashubh hokrmandi asar kar raha ho to guruvarko muli dan karen ya shanivar kokachche koyle chalte pani men bahaen. rahu ke mandi ke asar ko kam karneke lie chandi ka chaukor tukrahmesha apne pas rakhen. rahu ke ashubh asar ko kam karneke lie surkh rang vali masur kidal pratahkal safaikarmi ko denichahie ya kabhi-kabhi kuch paise denechahie. yadi rahu achanak bimari paida kare,to marij ke vajan ke barabar jaunbhte pani men bahaen ya kisi garibko jaun dan karen. tanbaku ka sevan n karen evan jab takho sake, sanyukt parivar men hi rahen. dekhne men aya hai ki surya ke sathasthit rahu, vyakti ki arthik sthitievan naukri-vyavsay ko haniphunchata hai. iska asar n kevlaus bhav par parta hai jismen rahubaitha hai balki uske sath vala gharbhi jal jata hai.rahu :urad, garm kapre, sarson, kala ful,rai, tel, kulfi adi men jo bhi upalabdhaho uska yathashakti dan karne serahu se sanbandhit kashton se chutkaramilta hai. rahu ka din shanivar haiatah iska dan bhi shanivar ko hikrna chahie.ketu :ketu ka rang chitkbra tatha dinrvivar hai. shukra, rahu iske mitra tathachandra, mangal shatru grah hai. surya, budh, guru,shani sam grah hain. kundli men chatha bhavketu ka apna ghar hota hai.lrka, bhanja, kela, charpai, tange,chipkli, chuha, nar gaureyya, guptang,til, asangadh, rirh ki haddi, jor,pyaj, lahsun adi sab chijen ketu sesanbandhit hain. lal kitab ke anusar chandra kodudh evan ketu ko ninbu kaha gaya haiarthat donon ek dusre ke pakke shatruhain. ketu yadi chanradma ke sath hai toyah 'grahan yog' bana deta hai. chandrama'mn' ka karak grah hai. chandra-ketuka milan man ki shanti bhang karnevala hota hai. mangl-ketu ka ekbhav men hona donon ka fal ashubhkrta hai. yadi budh-ketu sath hontab bhi ketu ka fal shubh nahin rahta.guru ke sath ketu prayah bura falnhin deta. lal kitab ke anusar ketu kelie 1, 2, 5, 7, 10, 12 shubh evan 3,3, 4, 6, 8, 9, 11 ashubh mane gaye hain. yadi ketu lagn men budh ke sath ho tolohe ki goli par lal rang karkeapne pas rakhen. ketu tisre bhav menho to chane ki dal bahte pani menbhaen. ketu bhav 4 men ho to purahitko pile rang ki vastuen dan karen.ydi ketu 5ven ghar men ho to gajar yamuli ko rat men sirhane rakhakarapratah dharmasthal men dan karen. ketu chathebhav ho to chah pyaj jamin men gharke bahar daba den. satvan ghar shukra ka 'pakka ghar' haiaur ketu ka mitra shukra hai atah bhav7ven men ketu prayah thik-thak faldeta hai. athvan mangal ka ghar hai aur manglketu ka shatru hai atah 'dushmana' ke gharmen ketu ashubh hi rahta hai. yadi ketuathven bhav men ho to ganesh ji kipuja karen ya chitkbra kanbal mandirmen dan karen. yadi ketu barhven ghar men ho auravyakti kutton ko pareshan kare tosantan par bahut ganda asar hoga.is sthiti men dudh men angutha dalkrchusna shubhdayak hota hai.dan yogya vastuen : til, bakra,jhandi, kajal, uni kanbal, satnja,muli adi men jo bhi upalabdh ho unkaythashakti ravivar ko dan karne selabh hota hai.
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लाल-किताब  मार्च 2011

लाल किताब नामक प्रसिद्ध ज्योतिष पुस्तक का परिचय, इतिहास एवं अन्य देषों के भविष्यवक्ताओं से इसका क्या संबंध रहा है तथा इसके सरल उपायों से क्या प्राप्तियां संभव हैं वह सब जानने का अवसर इस पुस्तक में मिलेगा।

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