खुशी के साथ चला गया घर की खुशी

खुशी के साथ चला गया घर की खुशी  

आयुश्चलोक यात्राश्च, शास्त्रेस्मिंस्तत् प्रयोजनम् निश्चेतुं तन्न शक्नोति वसिष्ठो वा बृहस्पति। कि पुनर्मनुजास्तत्र विशेषात्तु कलौयुगे अर्थात् महर्षि पराशर के अनुसार आयु गणना और जीवन संग्राम में घटने वाली घटनाओं को देवाचार्य बृहस्पति और वसिष्ठ जैसे देवर्षि तक ठीक ठीक निश्चय नहीं कर सकते तो मनुष्यों की विशेषतः कलियुगी मनुष्यों की तो बात ही क्या है। खुशप्रीत की कुंडली में ध्यान देने योग्य तथ्य है कि उसकी कुंडली में चारो केंद्र खाली है लग्न पर किसी भी शुभ ग्रह की दृष्टि भी नहीं है। अधिकतम शुभ ग्रह अष्टम और द्वादश में है। इसी प्रकार का योग भी अल्प आयु की ओर इशारा करता है। दिसंबर 2010 की 21 तारीख। पांच वर्षीय बालक खुषप्रीत सिंह, स्कूल से लौटकर घर की दूसरी मंजिल पर दोपहर 1 बजे ड्रेस बदलने गया और 2.55 बजे तक नीचे नहीं आया तो उसके बड़े भाई इंद्रजीत ने आवाज लगाई। खुषप्रीत जिसे प्यार से सब खुषी पुकारते थे, पूरे बुड़ैल में कहीं नहीं मिला तो उसके पिता लखबीर सिंह ने चैकी में 4 बजे रिपोर्ट लिखवाई। 4.22 पर एक फोन काल से पता चला कि बच्चे को अगवा कर लिया गया है और 10 लाख की फिरौती मांगी गई है। रिपोर्ट रात 10 बजे लिखाई जाती है। मामला 4 लाख में तय होता है। पुलिस टीम के 24 सदस्यों के साथ खुषी के चाचा सुखविन्द्र सिंह बैग लेकर जाते हैं। अपहरणकर्ता स्थान बदल-बदल कर छकाते हैं और एक जगह रुपयों का बैग लेकर भाग जाते हैं। पुलिस हाथ मलती रह जाती है। 5 जनवरी की सायं, खुषी का शव उसी बैग में बुड़ैल-मोहाली की सीमा पर झाड़ियों में मिलता है और पुलिस की नाकामी और बच्चे की क्रूर हत्या पर जन आंदोलन छिड़ जाता है। प्रषासन सूचना देने वालों को 5 लाख का इनाम घोषित करता है। परिवार को अपने कोष से 4 लाख का मुआवज़ा देता है। इस अपहरण व हत्या कांड के बाद कैंडल मार्च, जन आन्दोलन,न्यायिक जांच, पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई आदि का सिलसिला चलता है। 7 जनवरी को बच्चे का अंतिम संस्कार कर दिया जाता है और 19 जनवरी को कुछ पुलिसकर्मी निलंबित कर दिए जाते हैं। शक की सुई कई लोगों पर घूमती है, पर कातिल एक महीने के बाद भी पकड़े नहीं जाते। आइए, करते हैं पूरे केस का ज्योतिषीय विवेचन। क्या खुषप्रीत के जन्मांग में अल्पायु योग था? बालक की जन्म तिथि 18.6.2005 समय: 18.20, चंडीगढ़। बृष्चिक लग्न व तुला राषि की कुंडली में 3.2.2010 से राहु में चंद्रमा का अंतर चल रहा है। राहु की कुल दषा 22.8.2012 तक है। तुला राषि पर साढ़े साती का पूर्ण प्रभाव है। इसके अलावा कुंडली में आंषिक काल सर्प योग, विषेषतः राहु की दषा में अप्रत्याषित घटना की ओर संकेत करता है। लग्नेष मंगल, पंचम भाव में राहु के साथ विराजमान है और छठे शत्रु भाव का भी स्वामी है। लग्न पर मंगल युक्त राहु की नवम दृष्टि है। ये दो योग लग्न को कमजोर बना रहे हैं। शनि चंद्र की राषि में है और चंद्र निर्बल है। अल्प आयु योग का एक कारण और भी है। यदि धनु नवांष हो और नवांष कुंडली में लग्नेष छठे भाव में चला जाए तो जातक का 5 वां या 9 वां साल जान के लिए खतरनाक होता है। खुषप्रीत का 5 वां साल ही चल रहा था। कुछ अन्य योग भी ऐसी दुर्घटना की ओर इषारा कर रहे हैं। छठे भाव का स्वामी यदि पंचम में हो तो रिष्तेदारों या जानकारों से शत्रुता व शरीर की हानि का भय जीवन में अवष्य होता है। आठवें घर का मालिक 8 वें में ही स्थित है जो जीवन काल को छोटा बनाता है। नवमेष का व्यय भाव में बैठना भाग्य की न्यूनता दर्षाता है जिसे आम भाषा में कहा जाता है कि इसकी तो किस्मत ही खराब है। इसके अतिरिक्त द्वादषेष शुक्र मृत्यु स्थान अर्थात 8 वें भाव में स्थित है जो जीवन का अल्पकाल दर्षाते हैं। एक अन्य ज्योतिषीय सूत्र है कि यदि सूर्य मिथुन राषिगत हो और मंगल की दृष्टि हो तो जातक की मृत्यु शत्रु या शत्रुता के कारण होती है। इस केस में यद्यपि कातिल पकड़े नहीं गए हैं,ज्योतिष के अनुसार यह किसी पारिवारिक या किसी संबंधी की शत्रुता का ही परिणाम है जो आने वाले समय में सच का पर्दा फाष करेगा। एक योग के अनुसार यदि मंगल- राहु की अंगारक युति हो तो जातक की अचानक मृत्यु किसी हथियार, लोहे या एक्सीडेंट से होती है और खुषप्रीत की भी किसी हथियार से ही जीवन लीला समाप्त की गई। अपहरण के समय योग खुषप्रीत का अपहरण 21.12.2010 को दोपहर 2 और 2.55 के मध्य किया गया। उस समय लग्नेष मंगल ,राहु बुध और सूर्य के साथ हैं। अर्थात् दुःस्थानों 3, 6 व 8 वें भावों के स्वामियों का जमावड़ा एक ही भाव में है। चंद्र कुंडली में ये विघटनकारी ग्रह, लग्न को पूर्ण दृष्टि से देख रहे हैं। यहां राहु धोखे का कारक है और शेष योग मृत्यु कारक या अनहोनी दुर्घटना का संकेत देते हैं। बालक का शव एक बैग में एक व्यक्ति को 5 जनवरी की सायं 4 बजकर 22 मिनट पर दिखा। खुशप्रीत की कुंडली में ध्यान देने योग्य तथ्य है कि उसकी कुंडली में चारो केंद्र खाली है, लग्न पर किसी भी शुभ ग्रह की दृष्टि भी नहीं है। अधिकतम शुभ ग्रह अष्टम और द्वादश में है। इसी प्रकार का योग भी अल्प आयु की ओर इशारा करता है। वृश्चिक लग्न के लिए शुक्र अत्यधिक मारकेश ग्रह है और यहां शुक्र मारकेश होकर अष्टम भाव (मृत्यु भाव) में शत्रु ग्रह सूर्य के साथ स्थित होकर अप्रत्याशित मृत्यु की ओर संकेत कर रहे हैं। प्रायः देखने में आता है कि यदि चंद्रमा निर्बल हो, पापदृष्ट हो, शुभ ग्रह युक्त न हो, दुःस्थानगत हो तो बालक के लिए अरिष्टकर होता है। खुशप्रीत की कुंडली में चंद्रमा द्वादश स्थान में पाप ग्रह मंगल से दृष्ट है और किसी भी शुभ ग्रह की दृष्टि में नहीं है। अपहरण के दिन का गोचर देखंे तो 21 दिसंबर को राहु, सूर्य, मंगल और बुध (अस्त तथा वक्री) धनु राशि में गोचर कर रहे है और चंद्र व केतु मिथुन राशि में भ्रमण कर रहे हैं। अर्थात् खुशप्रीत का मारक भाव क्रूर ग्रहों की उपस्थिति से बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है और रही सही कसर अष्टम में बैठे चंद्र और केतु और उनकी द्वितीय भाव पर दृष्टि पूरी कर रही है। जन्म कुंडली के अनुसार अपहरण के समय राहु में चंद्रमा में शनि और मृत्यु के समय बुध की प्रत्यंतर दशा चल रही थी। इस वक्त खुशप्रीत की शनि की साढ़ेसाती चल रही थी और मृत्यु के समय (5 जनवरी 2011) धनु राशि में घात चंद्र थे और बुध अष्टम भाव में अस्त होकर बैठे थे। और इस तरह खुशप्रीत इतनी अल्प आयु में ही अपने घर की खुशियों को अलविदा कर सदा के लिए प्रभु के पास चला गया। कुल मिलाकर यदि देखा जाए तो खुशप्रीत की कुंडली में तो अल्प आयु योग के सभी लक्षण विराजमान हैं और ऐसी अपहरण और हत्यायें हमारे देष में होती रहती हैं लेकिन ऐसे कौन से योग हैं जिसने प्रषासन को हिला दिया, लाखों लोग सड़कों पर उतर आए, कफर््यू जैसी स्थिति हो गई, सांसद एवं केंद्रीय मंत्री पवन बंसल ंअफसोस प्रकट करने गए, पंजाब के राज्यपाल पाटिल को केस में हस्तक्षेप करना पड़ा, फिरौती की रकम पुलिस अपने खजाने से लौटा रही है, प्रषासन मुआवजा दे रहा है, खुषप्रीत का भोग दिवस उसे एक शहीद की संज्ञा दिलवा गया। यह है शनि का गुरु पर तीसरा नेत्र और गुरु का 11 वें भाव में चंद्रमा के नक्षत्र में स्थित होना। यदि चतुर्थेष नवम में हो तो जातक सबका प्यारा लाडला और सार्वंजनिक हो जाता है। खुषप्रीत बुड़ैल के मोहल्ले और अपने स्कूल में हरमन प्यारा था। उसकी अंत्येष्टि पर चंडीगढ़ के इतने लोग एकत्रित थे जितने एक बड़े राजनेता के संस्कार में भी सम्मिलित होते। संस्कार स्थल पर चंडीगढ़ पुलिस के वरिष्ठ अधीक्षक नौनिहाल सिंह की आखें में भी आंसू छलक आए। भोग के समय सड़कें जाम हो गई और अपार जनसमूह श्रद्धांजलि देने जा पहुंचा।


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