विवाह में विलम्ब

विवाह में विलम्ब  

विवाह हमारे जीवन प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण अंग है। विवाह संस्कार के बिना इंसान का जीवन हमारे शास्त्रों के अनुसार अधूरा है। विवाह के साथ ही स्त्री पुरुष मिलकर सृष्टि को आगे बढ़ने के लिए क्रियान्वित करते हैं। किंतु आज के इस औद्योगिक युग में लड़के-लड़कियां इस विवाह संस्कार को इतना महत्व नहीं देते व अपने करियर के प्रति ज्यादा चिंतित रहते हैं जिस वजह से विवाह में विलंब करते रहते हैं और फिर एक समय अवधि के बाद विवाह करना चाहते हैं तो विवाह होता ही नहीं व विवाह में विलंब होता चला जाता है या इसके अलावा कुछ पारिवारिक परिस्थितियांे के चलते या किन्हीं और कारणों से अगर विवाह विलंब होने से चिंतित हैं तो ज्योतिष शास्त्र आपकी कैसे मदद कर सकता है ताकि आप का विवाह शीघ्र हो सके। आप क्या करें? कुंडली में चंद्र, बृहस्पति व शुक्र अगर कमजोर है व इन ग्रहों पर पाप प्रभाव यानि शनि, राहु व केतु द्वारा दूषित या पीड़ित हो तो, कुंडली में मंगल दोष हो, कुंडली के दूसरे व आठवें भाव का पीड़ित होना, सप्तम भाव, भावेश व कारक पीड़ित होने पर विवाह में विलंब होता है। यदि आपकी कुंडली में विवाह बाधक मंगल ग्रह या मंगल दोष हो तो क्या करें? शुक्ल पक्ष के मंगलवार को जातक स्नान व नित्यकर्म उपरांत दोपहर में हनुमान जी के मंदिर में जायंे और 125 ग्राम सिंदूर, 100 मि. लिचमेली का तेल, प्रसाद हेतु गुड़ और चने तथा यथाशक्ति लाल वस्त्र साथ ले जायें। चमेली के तेल में सिंदूर डालकर हनुमान जी पर लगावें। स्त्री जातक तेल लगाने की बजाय चरणों पर चढ़ायें। हनुमान जी की प्रतिमा समक्ष शीघ्र विवाह संपन्न होने की प्रार्थना करते हुए हनुमान चालीसा का पाठ करें, गुड़ व चने का भोग लगावें तथा प्रसाद को बच्चों में बांट दें। मंदिर के बाहर बैठे किसी भी भिखारी को अपने साथ लायंे, लाल वस्त्र का दान उसे करें। यह प्रयोग 7 मंगलवार तक करें, शीघ्र ही विवाह प्रस्ताव आने शुरू हो जायेंगे। यदि आपकी कुंडली में विवाह बाधक ग्रह शनि हो तो क्या करें? शुक्ल पक्ष शनिवार के दिन जातक हनुमान मंदिर में तिल के तेल का दान करें तथा काले तिल शिव मंदिर में चढ़ाएं। प्रतिदिन पीपल के पेड़ को जल से सींचें (रविवार के दिन छोड़कर) और हर शनिवार सायं को पीपल के पेड़ के नीचे सरसांे के तेल का दीपक जलायें व ऊँ शं शनैश्चराय नमः का जप करते हुए 8 बार परिक्रमा करें और मन ही मन शीघ्र विवाह होने की कामना करें। विवाह होने में जो रूकावटें हांेगी अवश्य दूर हो जायेंगी। यदि कुंडली में विवाह विलंब का कारण स्त्रियों में पति कारक ग्रह गुरु व पुरुषों में पत्नी कारक ग्रह शुक्र पीड़ित हो तो क्या करें? स्त्रियों के लिए - शुक्ल पक्ष में किसी गुरुवार के दिन प्रातःकाल उठकर सिर से स्नान करें। पीले वस्त्र धारण करें। 11 लड्डू बाजार से या घर में देसी घी से बनायंे। पीले रंग की टोकरी में पीले रंग के कपड़े बिछाकर उन पर लड्डू रखें व इच्छानुसार दक्षिणा रखें। शिव पार्वती जी को एक माला संयुक्त रूप से अर्पित करें। एक माला जप: ऊँ गौरी शंकराय नमः का करें और मन ही मन अच्छे वर की कामना करें। यह प्रक्रिया 11 बृहस्पतिवार तक करें, अवश्य ही आपकी मनोकामना पूर्ण होगी। पुरुष की कुंडली में शुक्र कमजोर, अस्त व पाप ग्रस्त हो तो जातक स्वर्ण अंगूठी में हीरा रत्न या उपरत्न ओपल धारण करें। हर शुक्रवार को स्नान उपरांत शिव मंदिर जायें, 108 बेल पत्र लें और हर पत्र पर चंदन के द्वारा अनामिका उंगली से राम लिखें और एक-एक कर ‘ऊँ नमः शिवाय’ का जप करते हुए शिवलिंग पर चढ़ायें और मन ही मन अच्छी पत्नी की कामना करें। यह प्रक्रिया 7 शुक्रवार करें आपकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होगी। इसके अलावा कुछ सरल उपाय भी आप कर सकते हैं। - रामचरित मानस के बालकांड में शिव पार्वती विवाह प्रकरण का नित्य पाठ करें। - दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। - शुक्ल पक्ष के रविवार से प्रातःकाल सूर्योदय के समय तांबे के पात्र में जल भर कर इसमें रोली, लाल पुष्प, चावल आदि डालकर सूर्य मंत्र या गायत्री मंत्र का उच्चारण कर सूर्य को अघ्र्य देना चाहिए। यह प्रक्रिया प्रतिदिन करें।


वक्री ग्रह विशेषांक  अप्रैल 2015

फ्यूचर समाचार के वक्री ग्रह विषेषांक में वक्री, अस्त व नीच ग्रहों के शुभाषुभ प्रभाव के बारे में चर्चा की गई है। बहुत समय से पाठकों को ऐसे विशेषांक का इंतजार था जो उन्हें ज्योतिष के इन जटिल रहस्यों को उद्घाटित करे। ज्ञानवर्धक और रोचक लेखों के समावेष से यह अंक पाठकों में अत्यन्त लोकप्रिय हुआ। इस अंक के सम्पादकीय लेख में वक्री ग्रहों के प्रभाव की सोदाहरण व्याख्या की गई है। इस अंक में वक्र ग्रहों का शुभाषुभ प्रभाव, अस्त ग्रहों का प्रभाव एवं उनका फल, वक्री ग्रहों का प्रभाव, नीच ग्रह भी देते हैं शुभफल, क्या और कैसे होते हैं उच्च-नीच, वक्री एवं अस्तग्रह, कैसे बनाया नीच ग्रहों ने अकबर को महान आदि महत्वपूर्ण लेखों को शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त बी. चन्द्रकला की जीवनी, पंचपक्षी के रहस्य, लाल किताब, फलित विचार, टैरो कार्ड, वास्तु, भागवत कथा, संस्कार, हैल्थ कैप्सूल, विचार गोष्ठी, वास्तु परामर्ष, ज्योतिष और महिलाएं, व्रत पर्व, क्या आप जानते हैं? आदि लेखों व स्तम्भों के अन्तर्गत बेहतर जानकारी को साझा किया गया है।

सब्सक्राइब

अपने विचार व्यक्त करें

blog comments powered by Disqus
.