पंचपक्षी शास्त्र के उपयोग

पंचपक्षी शास्त्र के उपयोग  

प्रत्येक मनुष्य का जन्म या तो दिन अथवा रात्रि, कृष्ण पक्ष अथवा शुक्ल पक्ष एवं सप्ताह के किसी एक वार को होता है। पंच पक्षी पांच तात्त्विक स्पंदन के आधार पर पांच तरीके से शुक्ल पक्ष एवं कृष्ण पक्ष में चंद्र के बढ़ते एवं घटते कलाओं के प्रभाव के अनुरूप कार्य करते हैं। इन पांचों तत्वों का स्पंदन 5 स्तरों में एक निश्चित समयावधि के लिए क्रियाशील रहता है। पक्षियों की क्रियाविधि एवं क्रियाशीलता में पक्ष, तिथि एवं दिवस के आधार पर परिवर्तन आता रहता है। यदि इनमें से कोई एक अपनी उच्च अवस्था में होता है तो दूसरे चार अन्य भिन्न अवस्थाओं में घटते हुए क्रम में होते हैं। हममें से प्रत्येक किसी एक पक्षी के प्रभाव में रहते हैं। पंचपक्षी शास्त्र प्राचीन तमिल संतों की अनमोल धरोहर है। यह शास्त्र इतना प्रभावशाली है कि इसका उपयोग जीवन के हर क्षेत्र में करके सफलता प्राप्त की जा सकती है। विगत अंकों में विस्तार से इस बात की चर्चा की गई कि कैसे आप पता करेंगे कि आपका जन्म पक्षी क्या है? शुक्ल पक्ष एवं कृष्ण पक्ष के प्रत्येक वार को किस समय आपका जन्म पक्षी अत्यधिक क्रियाशील है? आपके जन्म पक्षी से किस पक्षी की मित्रता अथवा शत्रुता है? यदि आप इन सभी बातों का ख्याल रखकर अपनी भावी रणनीति तैयार करेंगे तो निश्चय ही आपको हर कार्य में सफलता मिलेगी। पंचपक्षी शास्त्र का उपयोग व्यापक तौर पर वैवाहिक मिलान, यात्रा, किसी से आवश्यक कार्य के लिए मिलना, नींव डालना, गृह प्रवेश, क्रय-विक्रय, शत्रु पर विजय आदि यानि हर कार्य को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए किया जा सकता है। हर व्यक्ति जीवन में असफलता से दूर रहना चाहता है तथा उसकी यह इच्छा होती है कि वह सफलता की गगनचुंबी ऊंचाइयां छूए। यह काफी हद तक संभव है यदि आप अपने जन्मपक्षी के शासन करने की गतिविधि के दौरान सारे कार्य को अंजाम दें। बेहतर तो यह होगा कि पूरे महीने अथवा पूरे साल का कैलेंडर बना लें तथा उसी से समय देखकर महत्वपूर्ण कार्य करें। ध्यान देने योग्य बातें Û हमेशा ध्यान रखें कि आपको किसी आवश्यक कार्य को तभी अंजाम देना है जब आपका जन्म पक्षी शासन करने अथवा खाना खाने की गतिविधि में संलग्न हो। यदि आपका जन्मपक्षी अन्य किसी गतिविधि में संलग्न हो तो ऐसे समय में आवश्यक कार्य को टाल दें। Û यदि आपने आवश्यकतावश किसी कार्य को तब प्रारंभ कर दिया जब आपका जन्म पक्षी घूमने की गतिविधि में संलग्न था तो आपका कार्य न सफल होगा और न ही असफल बल्कि हो सकता है कि अड़चनवश वह कार्य कुछ समय के लिए लंबित हो जाय। यदि कार्य प्रारंभ करने के समय शुक्ल पक्ष है तो कार्य के सफल होने की संभावना है। यदि इस समय कृष्ण पक्ष है तो कार्य के असफल होने की संभावना अधिक है। Û यदि आपका जन्मपक्षी सोने अथवा मरने की गतिविधि में संलग्न है तो निश्चित तौर पर इस समय किया गया हर कार्य असफल होगा। अतः निश्चित सफलता के लिए सदैव उस समय का चयन करें जब आपके जन्मपक्षी की गतिविधि शासन करना तथा उपगतिविधि शासन करना/ खाना हो अथवा गतिविधि खाना तथा उपगतिविधि शासन करना/खाना हो। सफलता का प्रतिशत हमेशा इसी क्रम में होगा। पंच पक्षी एवं दिशाएं शुक्ल पक्ष एवं कृष्ण पक्ष में पंच पक्षी की दिशा निर्धारित की गई है जिसमें ये सर्वाधिक शक्तिशाली माने जाते हैं। नीचे सारणी में इसका विवरण प्रस्तुत है: पंचपक्षी शुक्ल पक्ष कृष्ण पक्ष गिद्ध पूर्व पूर्व उल्लू दक्षिण उत्तर कौआ पश्चिम,उत्तर-पश्चिम दक्षिण मुर्गा उत्तर एवं उत्तर-पूर्व मध्य मयूर मध्य पश्चिम पंच पक्षी एवं तत्व पंचपक्षी शुक्ल पक्ष कृष्ण पक्ष गिद्ध अग्नि पृथ्वी उल्लू वायु जल कौआ पृथ्वी अग्नि मुर्गा जल वायु मयूर आकाश आकाश उपयोग पंच पक्षी की दिशाओं को समझकर इसका लाभ उठाया जा सकता है। मान लीजिए कि आप किसी डील के लिए किसी से मिलने जा रहे हैं। मिलने का जो समय निश्चित किया गया है उस समय आपका और मिलने वाले व्यक्ति का जन्म पक्षी एक समान उच्च गतिविधि में संलग्न है। ऐसी स्थिति में यदि आप विजेता साबित होना चाहते हैं तो उस पक्षी की दिशा में बैठकर वार्ता आरंभ करें जिसकी उस समय सर्वाधिक शक्तिशाली गतिविधि चल रही हो। दूसरे उदाहरण के रूप में यह मान लें कि वार्ता के निर्धारित काल खंड में आपका जन्मपक्षी दूसरे वार्ताकार के जन्म पक्षी की तुलना में कमजोर गतिविधि में संलग्न है। आपके पास दूसरा कोई विकल्प नहीं है, वार्ता उसी समय होनी ही है तो आप उस समय सर्वाधिक शक्तिशाली गतिविधि में संलग्न पक्षी की दिशा में बैठकर वार्ता करें, आपको इससे अवश्य लाभ मिलेगा तथा वार्ता सफल होगी। इसी प्रकार से आप अपने जन्मपक्षी के अनुसार तत्व का भी उपयोग कर सकते हैं। जिस समय आपका जन्मपक्षी सर्वाधिक शक्तिशाली गतिविधि में संलग्न होगा, उस समय आपके जन्मपक्षी से संबंधित वह तत्व सर्वाधिक क्रियाशील होगा। पंचपक्षी एवं उनके रंग पंचपक्षी शुक्ल पक्ष कृष्ण पक्ष गिद्ध सफेद काला उल्लू सुनहरा लाल कौआ लाल सुनहरा मुर्गा हरा सफेदे मयूर काला हरा अपने जन्मपक्षी के रंग के अनुसार वस्त्र पहनना लाभदायक होता है। वार्ता के दौरान यदि आप उस समय शक्तिशाली गतिविधि में संलग्न पक्षी के रंग के वस्त्र पहनें तो वह भी लाभदायक साबित होगा। कलर थेरेपी में भी जन्म पक्षी के अनुसार रंग का चयन लाभकारी साबित होता है। पंचपक्षी के लिंग दोनों पक्षों अर्थात् शुक्ल पक्ष एवं कृष्ण पक्ष में पंच पक्षियों के लिंग समान होते हैं। पंच पक्षी लिंग गिद्ध पुल्लिंग उल्लू स्त्रीलिंग कौआ पुल्लिंग मुर्गा स्त्रीलिंग मयूर पुल्लिंग व्यापारिक साझेदारी एवं वैवाहिक मिलान में दोनों पक्षों के जन्म पक्षी के लिंग एवं मित्रता शत्रुता का ध्यान अवश्य रखना चाहिए। उदाहरण स्वरूप मान लीजिए कि वर का जन्म पक्षी पुल्लिंग तथा कन्या का जन्म पक्षी स्त्रीलिंग है तथा दोनों आपस में मित्र हैं तो निश्चित तौर पर वैवाहिक जीवन काफी सुखी तथा सौहार्दपूर्ण होगा। यदि किसी के यहां चोरी हो जाती है और वह आपसे चोर के संबंध में पूछता है तो पंचपक्षी शास्त्र की मदद से आप यह बता पाने में सक्षम हैं कि चोर पुरूष है अथवा स्त्री, किस रंग के कपड़े उसने पहने होंगे अथवा किस दिशा में चोर गया होगा? किसी के बच्चा होना है तो वह आपसे पूछ सकता है कि बताएं होने वाला बच्चा लड़का होगा या लड़की? इसका निर्धारण करने हेतु देखें कि प्रश्न पूछे जाने के समय कौन सा नक्षत्र चल रहा है अर्थात् उस समय चंद्रमा किस नक्षत्र में है। उस नक्षत्र एवं पक्ष के हिसाब से पक्षी का निर्धारण करें तथा देखें कि वह पक्षी पुल्लिंग है या स्त्रीलिंग, तदनुरूप प्रश्न के उत्तर दें।


वक्री ग्रह विशेषांक  अप्रैल 2015

फ्यूचर समाचार के वक्री ग्रह विषेषांक में वक्री, अस्त व नीच ग्रहों के शुभाषुभ प्रभाव के बारे में चर्चा की गई है। बहुत समय से पाठकों को ऐसे विशेषांक का इंतजार था जो उन्हें ज्योतिष के इन जटिल रहस्यों को उद्घाटित करे। ज्ञानवर्धक और रोचक लेखों के समावेष से यह अंक पाठकों में अत्यन्त लोकप्रिय हुआ। इस अंक के सम्पादकीय लेख में वक्री ग्रहों के प्रभाव की सोदाहरण व्याख्या की गई है। इस अंक में वक्र ग्रहों का शुभाषुभ प्रभाव, अस्त ग्रहों का प्रभाव एवं उनका फल, वक्री ग्रहों का प्रभाव, नीच ग्रह भी देते हैं शुभफल, क्या और कैसे होते हैं उच्च-नीच, वक्री एवं अस्तग्रह, कैसे बनाया नीच ग्रहों ने अकबर को महान आदि महत्वपूर्ण लेखों को शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त बी. चन्द्रकला की जीवनी, पंचपक्षी के रहस्य, लाल किताब, फलित विचार, टैरो कार्ड, वास्तु, भागवत कथा, संस्कार, हैल्थ कैप्सूल, विचार गोष्ठी, वास्तु परामर्ष, ज्योतिष और महिलाएं, व्रत पर्व, क्या आप जानते हैं? आदि लेखों व स्तम्भों के अन्तर्गत बेहतर जानकारी को साझा किया गया है।

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