बारहवें भाव में बुध, गुरु्र एवं शुक्र का फल एवं उपाय

बारहवें भाव में बुध, गुरु्र एवं शुक्र का फल एवं उपाय  

बारहवें घर का बुध जिंदगी में बहुत सारे सुनहरे मौकों के खो जाने का संकेत देता है। बुद्धि का कारक ग्रह इस घर में आकर समझ का ठीक इस्तेमाल नहीं कर पाता। ऐसा बुघ होने पर जुआ सट्टा शेयर आदि कामों में धोखा मिलता है। ऐसा व्यक्ति जो पैसा जोड़ता है वह दूसरों के काम ज्यादा आता है। लाल किताब में इस घर के बुघ को पागल कुत्ता कहा गया है। ऐसा इंसान यदि पिता के साथ रहे तो दोनों दुखी रहते हंै। परन्तु यदि 25 साल के बाद शादी हो तो अशुभ फल काफी हद तक कम हो जाएगा। अगर शादी उम्र के 25 वें बरस से पहले हो तो शादी का फल खराब हो जाएगा। पिता पर भी अशुभ प्रभाव पड़ेगा। विशेष बात यह है कि औरत की कुंडली में बारहवें घर का बुध बुरा प्रभाव नहीं देता। उपाय यदि बारहवें घर में बुध अकेला हो और दूसरा घर खाली हो तो मंदिर जाने से बुघ के गर्म स्वभाव में शीतलता आ जाती है। यदि बुध के अशुभ होने से दांतों में तकलीफ हो या मित्र के साथ गलतफहमी पैदा हो जाए तो बारहवें घर के मालिक बृहस्पति को मजबूत करना चाहिए। इसके लिए 41 दिन लगातार केसर या हल्दी का तिलक लगाएँ। बृहस्पति बारहवें घर का गुरु सीधा संकेत देता है कि पिछला जन्म खुशहाल जिंदगी का था। ऐसा इंसान इस जन्म में आशावादी होता है। इस घर के गुरु के पास दूसरों के लिए हमदर्दी की बहुत दौलत होती है। दूसरों के लिए हमदर्दी का खजाना बाँटते वक्त वह इस बात की ओर ध्यान नहीं देता कि सामने वाला दुष्ट है या धर्मात्मा, साध् ाु है या चांडाल। इस घर का बृहस्पति इंसान की जिंदगी में एक बार मान हानि जरूर करता है परन्तु ऐसे इंसान को अपमान की परवाह नहीं होती। ऐसे इंसान को सताने वाला खुद ही शापित हो जाता है और उसे खुश रखने वाला फलता- फूलता है। ऐसे इंसान को एयरफोर्स या स्पेस रिसर्च के काम में कामयाबी मिलती है। ऐसे बृहस्पति के फल को और शुभ करने के लिए निम्नलिखित उपाय करने चाहिए। उपाय केसर या हल्दी का तिलक लगाना चाहिए। गले में कभी माला न पहनें। शुक्र बारहवें घर का शुक्र बड़ा खुश तवीयत होता है। जिंदगी को हर पहलू से जी भर कर जीना चाहता है। ऐसा इंसान


विवाह विशेषांक  मार्च 2014

फ्यूचर समाचार पत्रिका के विवाह विशेषांक में सुखी वैवाहिक जीवन के ज्योतिषीय सूत्र, वैदिक विवाह संस्कार पद्धति, कुंडली मिलान का महत्व, विवाह के प्रकार, वर्तमान परिपेक्ष्य में कुंडली मिलान, तलाक क्यों, शादी के समय निर्धारण में सहायक योग, शनि व मंगल की वैवाहिक सुख में भूमिका, शादी में देरी: कारण-निवारण, दाम्पत्य जीवन सुखी बनाने के उपाय तथा कन्या विवाह का अचूक उपाय आदि विषयों पर विस्तृत जानकारी देने वाले आलेखों को सम्मिलित किया गया है।

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