ललाट से फलादेश

ललाट से फलादेश  

व्यूस : 4224 | मार्च 2016

ललाट को देखकर भविष्य की जानकारी अतः उस पर उभरी रेखाओं के विषय में सरलता पूर्वक बहुत कुछ कहा जा सकता है। मनुष्य का भूत, भविष्य और वर्तमान सभी कुछ उसके ललाट को देखकर उसका चरित्र, स्वभाव, मनोदशा का सारा हाल जाना जा सकता है। ललाट या मस्तक को दो भागों में बांटा गया है-

1. ऊपरी ललाट

2. निचला भाग।

ऊपरी मस्तक सिर के सामने के भाग से मध्य तक के भाग को लेते हैं। निचले को हम मध्य ललाट से भौंहों तक के भाग को ले सकते हैं। ऊपरी ललाट (मस्तक) हल्का गोल: ऊपरी ललाट सुंदर गोलाई में उभार लेते हुये मध्य तक आये तो इस प्रकार का व्यक्ति विद्या में मेधावी, चालाक तथा बुद्धिमान होता है। गोलाई में नुकीलापन न हो अन्यथा व्यक्ति बुद्धिहीन तथा मूर्ख होगा। हल्के गोलाई से व्यक्ति दयालु स्वभाव का तथा परोपकारी होता है। ऐसा व्यक्ति तर्कशील और तीव्र स्मरणशक्ति वाला होता है। ऐसे व्यक्ति जिद्दी स्वभाव के होते हैं तथा यात्राओं में रूचि रखता है। अविकसित ललाट: यह ललाट गद्देदार, चपटा या नुकीला होता है। ऐसे व्यक्ति के गुणांे में कमी होती है। बेकार के और भद्दे विचारों वाला, उतावलापन, शीघ्र क्रोध में आनेवाला, बने काम को बिगाड़ने वाला होता है।

पुलिस या सेना में ऐसे लोग सफल होते हैं। यदि ललाट अत्यधिक अविकसित हो तो व्यक्ति धोखेबाज होता है। इनकी स्मरण शक्ति बहुत कमजोर होते हंै। मस्तक पर बाल: यदि मस्तक पर बाल उगे हों तो ऐसा व्यक्ति सामान्य से अधिक चतुर तथा बुद्धिमान होता है। छोटे तंग ललाट पर भी बाल दूर से उगे हों तो भी व्यक्ति बुद्धिमान होता है। यदि बाल नजदीक से हांे तो इनका माता-पिता से व्यवहार ठीक नहीं होता। यदि कोने में बाल उगे हों तो ऐसा व्यक्ति सामान्य से अधिक मेहनती होता है। इनके मित्र कम होते हैं। इन्हें पुश्तैनी बीमारी भी हो सकती है। ये समय का सदुपयोग नहीं कर पाते। यदि बालों द्वारा ट की आकृति बनी हो तो मित्र बनाने में निपुण होते हैं। निचला मस्तक: निचला मस्तक अर्थात भौहों से ऊपर का भाग जिन व्यक्तियों का सुंदर, समतल परंतु हल्का सा उभार लिये हो तो ऐसा व्यक्ति कार्य करने से पहले उस पर पूरा विचार करता है फिर वह कार्य करता है।


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ऐसे व्यक्ति सुंदरता के उपासक होते हैं। इनके कार्य की प्रशंसा होती है। इसका ऊपरी भाग जीवन में लक्ष्य के प्रति सजगता दर्शाता है। यदि यह भाग स्पष्ट एवं उन्नत हो तो वे विषम एवं प्रतिकूल परिस्थितियों के होते हुये भी अपने लक्ष्य के प्रति अत्यंत धैर्य से कार्य को संपन्न करते हैं। इस प्रकार के ललाट वाले व्यक्ति कवि, संगीतकार और कलाकार होते हैं। निचले हिस्सों के कोनों से चैड़ाई यदि हो तो स्वतंत्र विचार होते हैं। ऐसे व्यक्तियों को जल्दी कार्य करने की क्षमता होती है तथा वे धनी व संगीत प्रेमी होते हैं। मध्य भाग: मस्तक का यह भाग स्मरण शक्ति का द्योतक है। जिनका यह भाग सुंदर गोलाई एवं किनारों में हल्की ढलान लिये हो तो ऐसे लोग विश्वसनीय स्वभाव के होते हैं। मध्य भाग फैला तथा चपटा हो तो व्यक्ति क्रोधी होता है।

यदि यह भाग दबा हुआ हो तो व्यक्ति शंकालु होता है। इस प्रकार के व्यक्ति स्वभाव के चिड़चिडे़ होते हैं। ललाट के इस हिस्से में बाल उगे हुये होते हैं वे कम मिलनसार, दब्बू तथा किसी के द्वारा की गई गलती को जल्द माफ नहीं करते। कोनों तथा अंतिम हिस्से पर अधिक बाल हों तो ऐसे व्यक्ति का जीवन संघर्ष में गुजरता है, अधिक मेहनत पर लाभ प्राप्त नहीं होता। मस्तक के कोनों का तथा कानांे के ऊपर का भाग जिनका अधिक उठा होता है वे स्वभाव के निर्दयी एवं क्रूर होते हैं।

सारांश यह है कि सुंदर ललाट बुद्धिमानी का प्रतीक तथा अच्छे गुणों से युक्त होता है। यदि यह गद्देदार न हो कर गहरा हो तो ऐसे व्यक्ति चालाक एवं कुशल व्यवहारी होते हैं। यदि समतल हो तो बिना विचार किये काम करते हैं।


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फेस रीडिंग विशेषांक  मार्च 2016

भविष्य कथन की महत्वपूर्ण पद्धतियां श्रष्टि के प्रारम्भ से ही इस धरा के विभिन्न हिस्सों में मौजूद रही हैं। प्रत्येक सभ्यता में किसी न किसी रूप में भविष्यवक्ता अथवा अन्तर्द्रष्टा भूत एवं भविष्य के विषय में किसी न किसी प्रकार से लोगों को अवगत कराते रहे हैं। भारत में भी इन विधाओं की समृद्ध विरासत रही है जहां हर काल में ज्योतिष, हस्तरेखा शास्त्र, अंक शास्त्र, मुखाकृति विज्ञान आदि पुष्पित-पल्लवित होते रहे हैं तथा इन्होंने लोगों के भविष्य को आकार देने में महती भूमिका अदा की है। फ्यूचर समाचार के इस वर्तमान विशेषांक में मुखाकृति विज्ञान पर विशेष जोर दिया गया है। इस विषय पर अनेक महत्वपूर्ण आलेख समाविष्ट किये गये हैं जिनमें से कुछ अति महत्वपूर्ण आलेख हैं: नैन अन्तःकरण के झरोखे हैं, बनावट के अनुसार भौहें तथा उनके फल, आंखे व्यक्तित्व का आईना, नाक की आकृति स्वभाव एवं भविष्य आदि। इन विशिष्ट आलेखों के अतिरिक्त पूर्व की भांति सभी स्थायी स्तम्भ मौजूद हैं जिनमें विज्ञ ज्योतिर्विदों के आलेखों को स्थान दिया गया है।

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