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सलमान खान के लिए कठिन समय

सलमान खान के लिए कठिन समय  

मनुष्य के जीवन में सुख-दुख का मिश्रण उनके पूर्वजन्म के कर्मफल के अनुसार होता है। पीढ़ियों के अनुभव ने इस तथ्य को ‘‘सब दिन होत न एक समान’’ लोकोक्ति का रूप दे दिया है। ‘‘उत्तरकालामृत गं्रथ (6.2) के अनुसार ः ‘‘पुष्यंवाप्यथ पापरूपभपिवा कर्मार्जितं प्रागभवे। तत्पाकोऽत्र तु खेचरस्य हि दशाभुक्तयादिभिज्र्ञायते।।’’ अर्थात्, ‘‘पुण्य और पाप जो पूर्वजन्म के कर्मों द्वारा उपार्जित किये गये हैं, उनका फल इस जन्म में ग्रहों की दशा-भुक्ति द्वारा जाना जाता है।’’ अतः किसी व्यक्ति को जीवन में सुख और दुख की अनुभूति कब होगी इसका सटीक मार्गदर्शन इस व्यक्ति की जन्म कुंडली के वैदिक ज्योतिषीय विवेचन द्वारा जाना जा सकता है। इस संदर्भ में लोकप्रिय एक्टर सलमान खान की उपलब्ध जन्मतिथि अनुसार बनाई कुंडली प्रस्तुत है। इन्होंने पिछले कुछ वर्षों में ‘बाॅडीगार्ड’, ‘दबंग’, ‘बजरंगी भाईजान’ तथा ‘प्रेम रतन धन पायो’ जैसी ब्लाॅकबस्टर फिल्में देने तथा बिग बाॅस नामक सीरियल का लगातार तीन साल से सफल निर्देशन करने के साथ ही, वे क्रिमिनल केसों में फंसे रहे। उनके कई नायिकाओं से अंतरंग संबंध विच्छेद होते गये और पचास वर्ष की आयु में भी ये अविवाहित हैं। 27-12-2015 को इन्होंने गोल्डेन जुबली बर्थडे बड़े धूम-धाम से अपने फार्म पर मनाया है। सलमान खान की कुंडली का ज्योतिषीय विश्लेषण: इनॅका अग्नि तत्व मेष लग्न है, जिसका स्वामी मंगल दशम भाव में उच्चस्थ होकर ‘अमलकीर्ति’ और ‘रूचक’ नामक पंच महापुरूष योग बना रहा है। यद्यपि साढ़ेसाती में जन्म हुआ, परंतु जन्म दशा उच्च लग्नेश की होने से जन्म से ही उनका स्वास्थ्य अच्छा रहा और बड़े होकर उसके लिए विशेष प्रयासरत रहे। उच्च लग्नेश की लग्न पर दृष्टि परम सौभाग्यशाली योग बनाती है। ऐसे शुभ योगों में जन्म लेने वाला व्यक्ति सृदृढ़ व सुंदर शरीर वाला, ऊर्जावान और अपने उद्योग से जीवन में सफलता, प्रसिद्धि, धन और उच्च स्थान पाता है। ऐसा मंगल रोष और द्वेष भाव भी देता है। द्वितीय भाव शुभ वृष राशि में स्थित छप्रवेशी राहु और कुंभ राशि का चंद्रमा आकर्षक व्यक्तित्व देता है। बलवान मंगल की शुक्र के साथ दशम भाव में युति का चतुर्थ व पंचम भाव पर प्रभाव ने प्रेमी स्वभाव दिया। उनके अनेक प्रेम प्रसंग बने, परंतु शुक्र से द्वितीय भाव में शनि और पंचम भाव में राहु ने इनको अभी तक विवाह सूत्र में नहीं बंधने दिया। आजकल उनका एक विदेशी युवती से प्रेम प्रसंग चर्चा में है। नवमांश में शुक्र पाप कत्र्तरी योग में, राहु सप्तम भाव में और सप्तमेश मंगल व पंचमेश शनि की षष्ठ भाव (सप्तम से द्वादश) स्थिति, भी प्रेम संबंध विच्छेद से लेकर विवाह न होने की संभावना दर्शाते हैं। नवमेश बृहस्पति तृतीय भाव में सौम्य राशि में है और नवमस्थ पंचमेश का सूर्य से परस्पर दृष्टि-विनिमय हो रहा है। उनके पिता सलीम खान एक सफल और सम्मानित फिल्म लेखक हैं। उन्होंने सलमान को समय-समय पर उचित सलाह देकर विवादों से बचाया है। तृतीय भावस्थ बृहस्पति ने अपने छोटे-भाई बहनों से मधुर संबंध बनाये और मित्रों की सहायता कर, आदर से ये ‘भाईजान’ कहे जाते हैं। बृहस्पति का दशम भाव पर शुभ कत्र्तरी प्रभाव है और स्वक्षेत्री एकादशेश शनि और चतुर्थेश चंद्रमा पर नवम दृष्टि के होने से बृहस्पति की दशा में अपार सफलता, प्रसिद्धि और धन की प्राप्ति हुई। ग्रह दशा व गोचर विचार सलमान खान के भाग्येश बृहस्पति की 16 वर्ष की दशा 6/9/1986 से आरंभ होने पर उनके फिल्म लाईन में प्रवेश पाने का प्रयास सफल होने लगा। सर्वप्रथम कोल्डड्रिंक का एड किया और कुछ समय फिल्म डायरेक्टर के सहायक के रूप में कार्य किया। 1988 (बृहस्पति-बृहस्पति) में उनकी फिल्म ‘बीबी हो तो ऐसी’ रिलीज हुई। 1989 (बृहस्पति-शनि) में दूसरी फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ से उन्होंने अपनी पहचान बनाई। 1990 में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार पाकर स्टार बन गये और बृहस्पति की बाकी दशा में उनको उत्तरोत्तर सफलता, सम्मान, धन तथा प्रसिद्धि प्राप्त हुई। उनकी 19 साल की शनि दशा 6-9-2002 से आरंभ हुई। दशमेश शनि पर नवमेश बृहस्पति की दृष्टि से कार्यक्षेत्र में सफलता मिलती रही। परंतु बाधक शनि की लग्न पर दृष्टि और चंद्रमा से युति (विष योग) के कारण कानून विरोधी कामों से उनकी छवि धूमिल हुई। 28-9-2002 (शनि-शनि) को नशे में कार एक्सीडेंट द्वारा एक व्यक्ति की मृत्यु हो जाने से गिरफ्तार हुए और बेल मिलने के बाद केस चला, जिसमें उतार चढ़ाव आते रहे। 17-2-2006 (शनि-बुध) को चिंकारा हिरण के शिकार मामले में अरेस्ट हुए और बेल मिली। इस केस में 10-4-2006 को एक वर्ष की सजा हुई जिस पर जोधपुर हाई कोर्ट ने रोक लगा दी। राजस्थान सरकार की अपील पर जनवरी, 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने रोक हटाकर केस को पुनः जागृत कर दिया है। कानूनी दांव पेंच के बाद मुंबई सेशन्स कोर्ट ने कार एक्सीडेंट केस में 8 मई 2015 को 5 साल की सजा सुनाई। उसी दिन हाईकोर्ट से बेल मिल गई। हाई कोर्ट ने अपील को स्वीकार करते हुए 10-12-2015 (शनि-मंगल) को उनको बरी कर दिया। इसके विरोध में महाराष्ट्र सरकार ने 23-12-2015 को सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर इस केस को भी जागृत कर दिया है। दशमेश शनि की दशा में उच्च लग्नेश मंगल की भुक्ति (11-3-2015 से 19-4-2016) के समय सब ओर सफलता मिली है, परंतु शनि-राहु के समय उनको अवरोधों का सामना करना पड़ेगा। ‘मानसागरी’ ग्रंथ के अनुसार: वातरोगः कुक्षिपीड़ा देशांतर गतिर्भवेत। बुध द्वेषः सुखाभावो राहौ शनि दशंगतः ।। (अ. 5. 40)।। अर्थात्, ‘‘शनि की दशा में राहु भुक्ति के समय वात रोग, कुक्षि पीड़ा, देशान्तर गमन, बुद्धिमानों से द्वेष तथा सुख का अभाव होता है। ‘‘फलदीपिका’’ के अनुसार इस समय डर, रोग, प्राण भय, हानि आदि कुफल होते हैं। अंकशास्त्र की गणना अनुसार वर्ष 2016 और उनकी जन्म तिथि (27) का योग 9 होता है जिसका स्वामी मंगल है, जो उनका लग्नेश होकर उच्चस्थ है। अतः यह वर्ष उनको शुभ फलदायी होना चाहिए। परंतु गोचर में राहु 9-1-2016 से लग्न से पंचम और चंद्र और शनि से सप्तम आ जायेगा और वहां गोचर के बृहस्पति को दूषित करेगा। बृहस्पति 11-8-2016 से कन्या में गोचर करेगा। उससे पहले 8-1-2016 से 9-5-2016 तक वक्री रहेगा और शनि दशा-राहु भुक्ति (19-4-2016 से 24-2-2019) के अशुभ प्रभाव को रोकने में असमर्थ रहेगा। शनि भी लग्न से अष्टम और चंद्रमा से दशम गोचर करते हुए गोचर राहु पर दशम दृष्टि डालेगा। शनि 25-3-2016 से 13-8-2016 तक वृश्चिक में वक्री रहेगा। मंगल भी 20 फरवरी 2016 से शनि के साथ सितंबर 2016 तक रहेगा और 17-4-2016 से 30-6-2016 तक वक्री रहेगा। उपरोक्त दशा-भुक्ति व ग्रहों के अशुभ गोचरीय प्रभाव स्वरूप मई 2016 से उत्तरोत्तर लगभग दो साल का समय सलमान खान के स्वास्थ्य, कोर्ट केसों और सफलता के लिए कष्टकारी रहना दर्शाता है।

फेस रीडिंग विशेषांक  मार्च 2016

भविष्य कथन की महत्वपूर्ण पद्धतियां श्रष्टि के प्रारम्भ से ही इस धरा के विभिन्न हिस्सों में मौजूद रही हैं। प्रत्येक सभ्यता में किसी न किसी रूप में भविष्यवक्ता अथवा अन्तर्द्रष्टा भूत एवं भविष्य के विषय में किसी न किसी प्रकार से लोगों को अवगत कराते रहे हैं। भारत में भी इन विधाओं की समृद्ध विरासत रही है जहां हर काल में ज्योतिष, हस्तरेखा शास्त्र, अंक शास्त्र, मुखाकृति विज्ञान आदि पुष्पित-पल्लवित होते रहे हैं तथा इन्होंने लोगों के भविष्य को आकार देने में महती भूमिका अदा की है। फ्यूचर समाचार के इस वर्तमान विशेषांक में मुखाकृति विज्ञान पर विशेष जोर दिया गया है। इस विषय पर अनेक महत्वपूर्ण आलेख समाविष्ट किये गये हैं जिनमें से कुछ अति महत्वपूर्ण आलेख हैं: नैन अन्तःकरण के झरोखे हैं, बनावट के अनुसार भौहें तथा उनके फल, आंखे व्यक्तित्व का आईना, नाक की आकृति स्वभाव एवं भविष्य आदि। इन विशिष्ट आलेखों के अतिरिक्त पूर्व की भांति सभी स्थायी स्तम्भ मौजूद हैं जिनमें विज्ञ ज्योतिर्विदों के आलेखों को स्थान दिया गया है।

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