ललाट के प्रकार एवं उस पर अंकित रेखाओं से भविष्यज्ञान

ललाट के प्रकार एवं उस पर अंकित रेखाओं से भविष्यज्ञान  

प्राचीन समय से जैसे हाथ की रेखाओं, चिह्नों आदि से भविष्य ज्ञात करके भविष्यवाणी की जाती है, उसी प्रकार यदि रेखा शास्त्री शरीर के अन्य अंगों के विषय में जानकार होता है तो भविष्यवाणी काफी सटीक होती है। वास्तव में शरीर के अन्य अंगों से फल जानकर रेखाओं के साथ यदि भविष्यवाणी की जाय तो वह अधिक सही होती है। हथेली की रेखाओं के बाद मनुष्य के ललाट की रेखाओं का अध्ययन करके की गई भविष्यवाणी जन्मकुंडली और हस्त रखाओं से की गई भविष्यवाणी के समकक्ष होती है। ललाट की बनावट निम्न प्रकार की हो सकती है- 1. धनुषाकार ललाट 2. उन्नत, साफ-सुथरा, अर्द्धचन्द्राकार, उन्नत ललाट 3. संकुचित, संकरा, भीतर को धंसा और छोटा ललाट। मनुष्य के ललाट पर अधिकतम सात प्रकार की रेखाएं पायी जाती हंै। ललाट पर पाई जाने वाली रेखायें क्रम से निम्न होती हैं: 1. बालों के नीचे जो सबसे पहली रेखा होती है वह शनि रेखा कहलाती है। 2. इस रेखा के नीचे वाली रेखा को गुरु रेखा कहते हैं। 3. इसको मंगल रेखा कहते हैं। 4. चतुर्थ पर सूर्य रेखा होती है। 5. पंचम पर चंद्र रेखा होती है। 6. छठी रेखा शुक्र रेखा होती है। 7. अंतिम रेखा को बुध रेखा कहते हैं। रेखाओं के आधार पर भविष्यवाणी 1. यदि शनि रेखा स्पष्ट सीधी है तो मनुष्य बुद्धिमान होगा। इसके विपरीत अर्थात यदि टेढ़ी-मेढ़ी तो चिड़चिड़ा तथा मूर्ख होगा। 2. यदि गुरु रेखा सीधी तो मनुष्य ईमानदार, सच्चरित्र, विद्वान होगा और यदि टेढ़ी-मेढ़ी तो व्यक्ति अनैतिक कार्य करने वाला होगा। 3. यदि मंगल रेखा उपरोक्त प्रकार से हो तो व्यक्ति कार्य में सफल होने वाला होता है। विपरीत होने पर कार्य में असफलता मिलती है। 4. सूर्य रेखा सीधी एवं स्पष्ट हो तो व्यक्ति बुद्धिमान तथा जीवन में सफल होता है। यदि टेढ़ी-मेढ़ी हो तो लोभी, कंजूस होता है। 5. चंद्र रेखा सीधी हो तो व्यक्ति चतुर, दूरदर्शी, सूक्ष्मदर्शी होता है और यही रेखा टेढ़ी-मेढ़ी हो तो व्यक्ति मूर्ख, अज्ञानी, कमजोर मस्तिष्क वाला होता है। 6. शुक्र रेखा सीधी हो तो व्यक्ति समस्त सुखों का भोग करने वाला, सच्चाई पर चलने वाला होता है। यदि टेढ़ी-मेढी हो तो प्रेम में बदनाम होता है। 7. बुध रेखा सीधी हो तो व्यक्ति भाषण कला में माहिर तथा सामने वालों को प्रभावित कर लेने वाला होता है। यदि रेखा टेढ़ी-मेढ़ी हो तो व्यक्ति झूठ बोलने वाला तथा धोखा देने में उस्ताद होता है। विशेष ललाट रेखाओं के फल इस प्रकार भी कहे गये हैं: 1. मंगल रेखा छोटी हो तो गरीबी की सूचक है। 2. मंगल और गुरु की रेखायें बीच में टूट जायें तो भी दरिद्रकारक होती हैं। 3. मंगल रेखा सांप के आकार की हो तो मनुष्य हत्यारा हो सकता है। 4. गुरु और शनि रेखा धनुषाकार हो जाय तो यह लंपट होने की सूचक है। 5. मंगल, गुरु, शनि की रेखायें टूटी हो तो भाग्यहीनता की सूचक है। 6. मंगल और शनि की रेखायें टूटी हों तथा गुरु की रेखा नीचे की ओर झुकी हो तो सौभाग्य एवं धन लाभ की सूचक है। 7. ललाट में तीन रेखायें स्पष्ट, सीधी और गहरी हों तो भाग्यवान होने की सूचक है। 8. ललाट में तीन से अधिक रेखायें टूटी या छिन्न-भिन्न हो तो यह दुर्भाग्य की सूचक है। 9. गुरु रेखा में शाखायंे हांे तो यह झूठ बोलने की सूचक है। 10. ललाट में सांप के आकार की एक रेखा बली होने की सूचक है। 11. सूर्य रेखा छोटी और शुक्र रेखा इससे लंबी हो तो सच्चरित्रता की सूचक है। 12. सूर्य रेखा का बीच में कटा होना क्रोधी, झगड़ालू और कामी होने की सूचक है। 13. सूर्य रेखा का वक्राकार होना कठोरता की सूचक है। 14. सूर्य रेखा और मंगल रेखा सांप की आकृति की हो तो दरिद्रता सूचक है। 15. शनि रेखा लंबी और मंगल रेखा सांप आकृति की हो तो यह धार्मिक, उच्च वर्ग के सत्संग में रहने और दयावान होने की सूचक है। 16. शनि और गुरु की रेखाओं के ऊपरी भाग में अर्धचंद्र रेखायें बन रही हैं तो सौभाग्य की सूचक है। 17. सूर्य रेखा धनुषाकार और शुक्र रेखा बीच में खंडित हो तो रसायन शास्त्री और धार्मिक होने की सूचक है। 18. शनि और मंगल रेखायें सर्पफन की भांति है तो फांसी से मृत्यु की सूचक है। 19. शनि रेखा लघु, गुरु रेखा टूटी तथा मंगल रेखा शाखा युक्त हो तो हत्यारा होने की सूचक है। 20. शनि रेखा और गुरु रेखा आपस में मिल जाय तो यह भी हत्यारा होने की सूचक है।


फेस रीडिंग विशेषांक  मार्च 2016

भविष्य कथन की महत्वपूर्ण पद्धतियां श्रष्टि के प्रारम्भ से ही इस धरा के विभिन्न हिस्सों में मौजूद रही हैं। प्रत्येक सभ्यता में किसी न किसी रूप में भविष्यवक्ता अथवा अन्तर्द्रष्टा भूत एवं भविष्य के विषय में किसी न किसी प्रकार से लोगों को अवगत कराते रहे हैं। भारत में भी इन विधाओं की समृद्ध विरासत रही है जहां हर काल में ज्योतिष, हस्तरेखा शास्त्र, अंक शास्त्र, मुखाकृति विज्ञान आदि पुष्पित-पल्लवित होते रहे हैं तथा इन्होंने लोगों के भविष्य को आकार देने में महती भूमिका अदा की है। फ्यूचर समाचार के इस वर्तमान विशेषांक में मुखाकृति विज्ञान पर विशेष जोर दिया गया है। इस विषय पर अनेक महत्वपूर्ण आलेख समाविष्ट किये गये हैं जिनमें से कुछ अति महत्वपूर्ण आलेख हैं: नैन अन्तःकरण के झरोखे हैं, बनावट के अनुसार भौहें तथा उनके फल, आंखे व्यक्तित्व का आईना, नाक की आकृति स्वभाव एवं भविष्य आदि। इन विशिष्ट आलेखों के अतिरिक्त पूर्व की भांति सभी स्थायी स्तम्भ मौजूद हैं जिनमें विज्ञ ज्योतिर्विदों के आलेखों को स्थान दिया गया है।

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