वृक्षारोपण संबंधी कुछ विशिष्ट बातें

वृक्षारोपण संबंधी कुछ विशिष्ट बातें  

वृक्षारोपण संबंधी कुछ विशिष्ट बातें पं. जयप्रकाश शर्मा, लाल धागे वाले प्रकृति द्वारा प्रदत्त सभी वृक्ष और पौधे मानव के कल्याण के लिए हैं। पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए पौधों का विशिष्ट महत्त्व है। विभिन्न रोगों के उपचार के लिए हमारे आयुर्वेद में जड़ी-बूटियों, वृक्षों की छाल, फल, फूल व पत्तों से निर्मित औषधियों का बहुत महत्त्व है। कुछ पौधों की जड़ों का तंत्र में भी प्रयोग होता है। गृह और औद्योगिक वास्तु में बगीचा उत्तर, पूर्व व ईशान में बनाया जा सकता है। बगीचे में फूलों वाले पौधों को ही अधिक लगाना चाहिए। कैक्टस व दूध वाले वृक्ष गृह या व्यावसायिक वास्तु में नहीं लगाने चाहिए। बड़े-बड़े वृक्ष घर से बाहर पश्चिम या दक्षिण में लगा सकते हैं। कुछ वृक्षों व पौधों का यहां उल्लेख कर रहे हैं- बरगद : यह एक विराट वृक्ष है जिसका तना बहुत मोटा और शाखाएं खूब फैली होती हैं। घर से पूर्व दिशा में वट वृक्ष होना शुभ माना गया है। इससे व्यक्ति की कामनाओं की पूर्ति होती है। आग्नेय दिशा में होने पर पीड़ा व मृत्यु देने वाला है। पश्चिम में होने से राजपीड़ा, स्त्रीनाश व कुलनाश होता है। आयुर्वेद में इसकी छाल, दूध, जटाओं और कोपलों का विभिन्न रोगों के इलाज के लिए प्रयोग किया जाता है। अनार : ये वृक्ष छोटे होते हैं। अनार एक स्वादिष्ट एवं पौष्टिक फल है। विटामिनों और खनिजों का भंडार यह फल हृदय रोग, संग्रहणी, वमन में लाभकारी व बलवीर्यवर्धक है। घर से आग्नेय दिशा में लगाना शुभ माना गया है। बंजर जाति के अनार का वृक्ष घर में नहीं होना चाहिए। गूलर : यह मध्यम आकार का वृक्ष है। इसका तना मोटा, लंबा और कुछ टेढ़ा होता है। इसकी शाखाएं सीधी ऊपर की ओर बढ़ती हैं। घर से दक्षिण दिशा में इसे शुभ माना गया है। उत्तर दिशा में होने से नेत्र रोग होता है। जामुन : इसके पौधे सड़क के किनारे व बाग-बगीचों में लगाए जाते हैं। इसके काले-मीठे फल बहुत ही स्वादिष्ट व गुणकारी होते हैं। इसे घर से दक्षिण व र्नैत्य के बीच में लगाना शुभ माना गया है। कदंब : इसके पत्ते बड़े और मोटे होते हैं। इससे गोंद भी निकलता है। इसके फल नीबू के समान होते हैं। फलों के ऊपर ही छोटे-मोटे सुगंधयुक्त फूल लगते हैं। इसे घर से दक्षिण व नैत्य के बीच में लगाना शुभ माना गया है। इमली : इमली खट्टी होती है। इमली के पत्तों का शाक और फूलों की चटनी बनाई जाती है। इमली की लकड़ियां बहुत मजबूत होती हैं। घर से नैत्य दिशा में इसे शुभ माना जाता है। पीपल : हिंदुओं के लिए पीपल बहुत ही पूजनीय वृक्ष है। यह मान्यता है कि शनिवार के दिन पीपल के पेड़ को कच्चे दूध और जल से सींचने पर शनि के अशुभ प्रभावों में कमी आती है और लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। अग्नि पुराण के अनुसार घर से पश्चिम में पीपल का वृक्ष होना अत्यंत शुभ माना गया है। पूर्व दिशा में होने पर भय और निर्धनता देने वाला व आग्नेय में होने पर पीड़ा व मृत्यु देने वाला है। बेल : बेल का फल कैथ जैसा होता है। इसके वृक्ष की छाया बहुत ही शीतल और गुणकारी होती है। बेल के पत्ते शिव-पूजा में काम आते हैं। शिवरात्रि को इन पत्तों से शिवलिंग की पूजा करने पर शिव जी प्रसन्न होते हैं। इसके फूल सफेद और सुगंधित होते हैं। इसकी लकड़ी चंदन के समान पवित्र मानी जाती है। इस वृक्ष का घर से वायव्य में होना शुभ माना गया है। पाकड़ : इस वृक्ष को कैथ व प्लक्ष भी कहा जाता है। यह वृक्ष बड़ा होता है। इसके फल को कैथ कहते हैं। यह बिल्व वृक्ष के समान होता है। घर से उत्तर दिशा में इसे शुभ माना गया है।



पुनर्जन्म विशेषांक  सितम्बर 2011

पुनर्जन्म की अवधारणा और उसकी प्राचीनता का इतिहास पुनर्जन्म के बारे में विविध धर्म ग्रंथों के विचार पुनर्जन्म की वास्तविकता व् सिद्धान्त परामामोविज्ञान की भूमिका पुनर्जन्म की पुष्टि करने वाली भारत तथा विदेशों में घटी सत्य घटनाएं पितृदोष की स्थिति एवं पुनर्जन्म, श्रादकर्म तथा पुनर्जन्म का पारस्परिक संबंध

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