पूर्व जन्म व पुनर्जन्म के विषय में ज्योतिषीय नियम

पूर्व जन्म व पुनर्जन्म के विषय में ज्योतिषीय नियम  

पूर्व जन्म व पुनर्जन्म के विषय में ज्योतिषीय नियम नीरज शर्मा श्री कृष्ण का यह कथन ज्योतिष विज्ञान के नियमों से संपुष्ट है कि जीव को अपने कर्म फल से अस्थिर सुख या दुःख को भोगकर उन्हें पृथ्वी लोक पर लौटकर आना पड़ेगा क्योंकि ज्योतिष से इस स्थिति की गणना जन्मकुंडली के बारहवें भाव से की जा सकती है। और पूर्व जन्म के विषय में जानने के लिए नवम भाव से क्या और कैसे विचार किया जाय, इसका विस्तृत वर्णन पढ़िए इस लेख में। मृत्यु उपरांत जीव की कैसी गति होगी, इसके लिये कुंडली के द्वादश भाव, द्वादशेश तथा इन्हें प्रभावित करने वाले ग्रहों पर विचार करना होगा। द्वादशेश यदि उच्च राशि, स्वराशि, मित्र राशि व सौम्य ग्रहों के वर्गों में हो तो जीव की सदगति (स्वर्ग आदि) तथा नीच, शत्रु राशि, पाप ग्रह युक्त हो तो अधोगति (नरक आदि) होगी। इसी के अंतर्गत फलदीपिकाकार ने द्वादशेश के भिन्न-भिन्न ग्रहों से संबंध से क्या गति होगी, यह वर्णित किया है। यदि यह ग्रह सूर्य या चंद्र है तो शिवलोक, मंगल से शीघ्र पृथ्वी पर वापसी, बुध से बैकुंण्ठ, गुरु से ब्रह्मलोक, शुक्र से स्वर्ग व राहु से दूसरे द्वीप में गति होगी। पूर्व जन्म के विषय में जानने के लिये नवम भाव व नवमेश की स्थिति तथा किन ग्रहों से प्रभावित है, यह देखना चाहिए। इसी प्रकार पुनर्जन्म का विचार पंचम भाव से करें और देखें कि पंचम भाव व पंचमेश किस स्थिति में व किन ग्रहों से प्रभावित हैं। पूर्व जन्म की दिशा, वर्ण, गुण आदि के लिये नवमेश की राशि, स्थिति तथा नवमेश ग्रह के गुण के समान समझें तथा पुनर्जन्म के वर्ण, गुण, दिशा आदि पंचमेश ग्रह के गुणों के आधार पर समझें। ये ग्रह यदि उच्चादि अच्छी स्थिति में हैं तो जन्म देवतुल्य स्थान में, नीच शत्रु राशि आदि में है तो द्वीपान्तर में (पूर्व जन्म स्थान से दूर) व स्वराशि में है तो अपने ही स्थान में जन्म समझें। सूर्य से पर्वत व जंगल वाले स्थान, चंद्रमा व शुक्र से नदियों व जल के स्थान, मंगल से शुष्क क्षेत्र, बुध से तीर्थ वाले स्थान, गुरु से पृथ्वी या देश आदि की सीमा वाले स्थान तथा शनि से कठिनाई युक्त स्थान स्थान जानना चाहिए। यदि नवमेश स्थिर राशि और स्थिर नवांश में हों तो पूर्व जन्म में तथा यदि पंचमेश स्थिर राशि और स्थिर नवांश में हो तो अगले जन्म में, व्यक्ति स्थावर अर्थात वृक्षादि होगा। यदि नवमेश चर राशि और चर नवांश में हो तो मनुष्य पूर्व जन्म में तथा यदि पंचमेश चर राशि व चर नवांश में हो तो पुनर्जन्म में मनुष्य होगा। यदि नवमेश लग्नेश की उच्च, या स्व राशि में है तो पूर्व जन्म में और यदि पंचमेश, लग्नेश की उच्च या स्वराशि में है तो अगले जन्म में जीव का मनुष्य योनि में ही जन्म होगा। यदि नवमेश लग्नेश की सम राशि में है तो पूर्व जन्म में तथा पंचमेश, लग्नेश की सम राशि में है तो अगले जन्म में, पशु योनि होगी। यदि नवमेश, लग्नेश की नीच या शत्रु राशि में है तो पूर्व जन्म में और यदि पंचमेश, लग्नेश की नीच या शत्रु राशि में है तो अगले जन्म में पक्षी योनि में जन्म होगा। यदि नवमेश लग्नेश की उच्च, या स्व राशि में है तो पूर्व जन्म में और यदि पंचमेश, लग्नेश की उच्च या स्वराशि में है तो अगले जन्म में जीव का मनुष्य योनि में ही जन्म होगा।



पुनर्जन्म विशेषांक  सितम्बर 2011

पुनर्जन्म की अवधारणा और उसकी प्राचीनता का इतिहास पुनर्जन्म के बारे में विविध धर्म ग्रंथों के विचार पुनर्जन्म की वास्तविकता व् सिद्धान्त परामामोविज्ञान की भूमिका पुनर्जन्म की पुष्टि करने वाली भारत तथा विदेशों में घटी सत्य घटनाएं पितृदोष की स्थिति एवं पुनर्जन्म, श्रादकर्म तथा पुनर्जन्म का पारस्परिक संबंध

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