दर्पण भी दूर करता है वास्तु दोष

दर्पण भी दूर करता है वास्तु दोष  

आज के युग में विशेष तौर पर बड़े शहरों में जहां रहने के लिए घरों का मिलना ही बहुत बड़ी उपलब्धि माना जाता है, ऐसे में संपूर्ण वास्तु सम्मत निवास का मिलना असंभव सा प्रतीत होता है। ऐसे में किसी दिशा विशेष का विस्तार कम हो या दिशा विपरीत हो विशेष तौर पर जब सीढ़ियों की दिशा वामावर्ती हो या घर के सम्मुख कोई वेध हो या निर्माण की दिशा विपरीत हो तो दर्पण विशेष रूप से वास्तु दोष को बिना तोड़ फोड़ दूर करता है वास्तु एक प्राचीन विज्ञान है। भवन निर्माण में भूखंड और उसके आस-पास के स्थानों का महत्व अहम होता है। हर मनुष्य की इच्छा होती है कि उसका धर सुंदर और सुखद हो जहां सकारात्मक ऊर्जा का वास हो और वहां रहने वालों का जीवन सुखमय हो। उसके लिए आवश्यक है कि घर वास्तु के अनुरूप हो। घर के वास्तु का प्रभाव घर के सभी सदस्यों पर पड़ता है। चाहे वह मकान मालिक हो या किरायेदार। आजकल इस मंहगाई के दौर में मकान बनाना एक बहुत बड़ी समस्या है। आजकल फ्लैटों का बहुत चलन है। यह फ्लैट अनियमित आकार के भूखंडों पर बने होते हैं। एक छोटे से भूखंड पर ज्ञाना भाव के कारण मकान के कई अंगों का निर्माण गलत स्थानों पर हो जाता है। इस प्रकार मकान में वास्तु दोष आ जाता है। वास्तु सिद्धांत के अनुरूप निर्मित भवन में रहने वाले लोगों का जीवन शांतिपूर्ण और सुखमय होता है। इसके अनुरूप भवन निर्माण से उसमें सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। परिवार के हर सदस्य को कार्य में सफलता मिलती है। हमारे ऋषि मुनियों ने बिना तोड़ फोड़ के वास्तु दोषों को दूर करने के उपाय बताये हैं। जिन्हें अपनाकर विभिन्न दिशाओं से जुड़े दोषों को दूर किया जा सकता है। यहां तक कि घर में अगर दर्पण गलत दिशा में लगा हो तो उसका भी दुष्प्रभाव होता है। सबसे पहले हमें यह देखना है कि दर्पण किस दिशा में शुभ होता है और गलत दर्पण का दोष कैसे दूर किया जा सकता है। Û दर्पण को उत्तर या उत्तर-पूर्व, पूर्व दिशा में लगाना चाहिए। इससे आर्थिक उन्नति एवं प्रतिष्ठा मिलती है। Û दक्षिण दिशा में लगा दर्पण आपको बीमारी दे सकता है। Û दक्षिण-पूर्व में लगा दर्पण आपको वैचारिक मतभेद, संबंधों में अलगाव और आपके गुस्से को बढ़ा सकता है। Û पश्चिम की दिशा में लगा दर्पण आपको चुस्त व आराम पसंद बना देगा। Û उत्तर-पश्चिम में लगा दर्पण आपकी अपनों से दुश्मनी बढ़ा सकता है। मुकदमेंबाजी करवा सकता है। Û दक्षिण-पश्चिम में लगा दर्पण घर के मुखिया को घर से बाहर रहने व अनावश्यक और आकस्मिक खर्चों का कारण बन सकता है। Û दर्पण को कभी भी अंधेरे कमरे में न लगाएं। Û धुंधले एवं दूषित दर्पण जीवन की खुशियों को धुंधला बना देते हैं। अतः अच्छे दर्पणों का ही प्रयोग करना चाहिए। Û ‘दर्पण टूटा भाग्य फूटा’ यह कहावत है। टूटे दर्पण को तुरंत हटाकर नए दर्पण का प्रयोग करें। Û रात को सोते समय पलंग अगर दर्पण में दिखाई दे तो गृह स्वामी के वैवाहिक जीवन के लिए अति घातक हो सकता है। पलंग पर सोने वाले लोगों के बीच अनबन व मतभेद उत्पन्न करके जीवन में कड़वाहट भर देते हैं। Û रात को सोते समय दर्पण में शरीर का कोई अंग नहीं दिखना चाहिए। जिससे आप ब्लड-प्रेशर, हाईपरटेंशन इत्यादि कई बीमारियों से बच सकते हैं। रात को सोते समय दर्पण को मोटे कपड़े से ढ़क देना चाहिए। Û घर के मुख्य द्वार में घुसते ही सामने लगा बड़ा आईना जो पूरे द्वार के बराबर हो उस घर से सकारात्मक ऊर्जा घुसते ही वापिस परिवर्तित कर देता है जिससे घर में अभाव, दुख, कष्ट एवं क्लेश व्याप्त रहते हैं। Û यदि घर का मुख्य द्वार लिफ्ट के सामने हैं तो दहलीज ऊंची बना लें और द्वार पर अष्टकोणीय दर्पण लगाने से लाभ होगा। Û डायनिंग रूम में दर्पण लगाना अच्छा रहता है। Û बैठक और गलियारे में भी बड़ा अष्टकोणीय आकार का दर्पण रखना अच्छा होता है। क्योंकि अष्टकोणीय दर्पण आठ दिशाओं का प्रतीक है। दर्पण अगर गलत दिशा में लगा हो तो उसको वहां से हटाना ही सर्वोत्तम उपाय है। दर्पण समझदारी से लगाकर हम सौर ऊर्जा को वापस लाकर वास्तु दोष को दूर कर सकते हैं।

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