आज कल Big FM पर सभी R J जनता से दरियादिली के लिये अपील करते सुने जा सकते हैं जिसमें वे दिल्ली की जनता से दिल खोल कर गरम कपड़े दान देने की अपील करते हैं जिससे गरीब और जरूरतमंद लोगों को सर्दी से बचने के लिए कुछ कपड़े, स्वेटर आदि मिल सकें और यह बड़ी खुशी की बात है कि वे अपनी इस मुहिम में कामयाब भी हुए हंै और लोगों ने दिल खोलकर कपड़े, स्वेटर, कंबल आदि दान किये हैं। जरूरतमंद व्यक्तियों की मदद करना या फिर उसमें एक कड़ी बनना वास्तव में बहुत ही नेक काम है क्योंकि दरियादिली का जज्बा सबमें नहीं होता। कुछ न कुछ तो हर व्यक्ति दान दे देता है चाहे उसके पीछे उनकी मंशा कुछ भी हो लेकिन बिरले ही ऐसे होते हैं जो अपना सब कुछ दान करने का दम-खम रखते हैं और यदि उनके तन के कपड़े भी मांग लिये जाएं तो वे उन्हें भी देने में नहीं हिचकिचाते। एक शख्स की चर्चा मैं करना चाहूंगी। सुमित बचपन से ही बहुत होशियार और पढ़ने लिखने में तेज था लेकिन इसके साथ-साथ वह भावुक भी बहुत था। इस उम्र में जहां बच्चे अपने खिलौने बहुत संभाल कर रखते हैं और किसी को भी देने में हिचकते हैं सुमित के घर पूरे मोहल्ले के बच्चों का जमावड़ा रहता था और वह अपने सभी खिलौने तुरंत ही सभी दोस्तों को खेलने के लिए दे देता था। उनके जल्दी ही टूटने पर जहां उसकी मां उस पर नाराज होती तो वह खुद डांट खा लेता पर अपने दोस्तों को मना नहीं करता था। इसी तरह से अपने जेब खर्च के पैसे भी वह अपने स्कूल में दोस्तों पर खर्च कर देता था। मां-बाप उसे समझाते तो भी उस पर कोई असर नहीं होता था। 12वीं पास करने के बाद उसकी काबिलियत से सुमित को दिल्ली के निफ्ट संस्थान में दाखिला मिल गया और उसने वहां से फैशन डिजाइनिंग का कोर्स किया। उसको इस काम में बहुत आनंद मिलता था। निफ्ट से ग्रेजुएशन के पश्चात उसे बहुत नामी डिजाइनर के पास काम भी मिल गया। सुमित बहुत खुश था। वह जी तोड़ मेहनत कर उस डिजाइनर के यहां काम करने लगा। चूंकि वह नया था इसलिए उससे कहा गया कि उसको तनख्वाह कुछ महीने बाद ही मिलेगी। सुमित के लिए पैसे कुछ मायने नहीं रखते थे वह केवल काम करना चाहता था। उसके बनाए हुए कपड़े बहुत पसंद किये गये और प्रदर्शनी में उसके मालिक को काफी आॅर्डर मिले लेकिन जब सुमित ने अपनी तनख्वाह मांगी तो उसे टका सा जवाब दे दिया कि इतना अनुभव उसे और कहां मिल पाता। वहां पर प्राप्त किया अनुभव ही उसका पारितोषिक है। सुमित ने वहां से काम छोड़ दिया और खुद अपना काम शुरू कर लिया और अपने माता-पिता से बड़ी तादाद में पैसा लेकर अपने बिजनेस में लगाया। माता-पिता को उससे बहुत उम्मीद थी कि वह अवश्य ही अपना काम ठीक ढंग से चलाएगा। सुमित ने अपना अच्छा Set Up भी बनाया। खूब सारी डेªसेज बनाई लेकिन चूंकि सब उसकी आदत से भली भांति परिचित थे इसलिए काफी लोग उधार ले गये और कुछ पैसे आये भी तो भैय्या जी से बहुतों ने मांग लिया। इधर उसकी मां, बहन बहुत आस लगाए बैठी थीं कि इस बार सुमित अच्छे पैसे लेकर आएगा। परंतु इस बार भी ठन-ठन गोपाल की तरह भैय्या जी बिना कुछ लिए ही घर पहुंचे। उसकी मां उसकी इन आदतों से बहुत परेशान हो गई। सुमित को कोई भी कुत्ता अपने मोहल्ले में आवारा घूमता मिलता तो उसे अपने घर ले आता। घर में करीब 15-20 कुत्तों का राज हो गया था जिनका खाना बनाते-बनाते मां बेहाल हो जाती पर कुछ बोलने से भी कोई फायदा नहीं था सुमित अपने हिस्से का खाना भी उन्हें खिला देता। अपने पुत्र प्रेम के आगे मां बेबस हो जाती। इसी तरह एक दिन उसने अपनी काम वाली की बेटी को फटी फ्राॅक में देखा तो अगले दिन ही उसके लिए तीन फ्राॅक बहुत महंगे कपड़े की बनवाकर ले आया। खुश तो वह बहुत हो गई लेकिन जब उसने उसे उन्हें पहनकर मिट्टी में लोटते देखा तो उसे बहुत गुस्सा आया। तब मां ने समझाया कि तुम्हें सोच समझकर ही किसी को कुछ देना चाहिए। सुमित अब 32 वर्ष का हो चला है पर अभी भी बहुत बचपना है। विवाह वह करना नहीं चाहता क्योंकि उसे भी मालूम है कि मां ने तो उसे झेल लिया पर कोई भी लड़की उसकी ऐसी दरियादिली को नहीं झेल पाएगी। मां को भी इंतजार है कि कब उसके भैय्याजी अपनी जिम्मेदारी समझ कर सब कुछ लुटाना बंद करेंगे और घर के प्रति भी अपना कर्तव्य समझेंगे। आइये देखें सुमित की कुंडली के सितारे- सुमित की कुंडली दिनांक: 3/4/1982 समय: 03ः30 स्थान- दिल्ली विंशोत्तरी दशा शनि: 7 वर्ष 9 माह 2 दिन शुक्र 04/01/2014 04/01/2034 शुक्र 06/05/2017 सूर्य 06/05/2018 चंद्र 05/01/2020 मंगल 06/03/2021 राहु 06/03/2024 गुरु 05/11/2026 शनि 04/01/2030 बुध 04/11/2032 केतु 04/01/2034 हरकतों के बावजूद भी इनकी माता का इनके प्रति दया और प्यार बना हुआ है। व्यय स्थान में केतु होने से तथा सुखेश मंगल की व्यय भाव पर पूर्ण दृष्टि होने से ये अपने सुख की परवाह न करके दूसरों पर अधिक व्यय करते हैं। केंद्र स्थान में शुभ ग्रहों का प्रभाव होने से इनकी सात्विक वृत्ति होने से ये परोपकार के कार्यों में ही तन, मन, धन से अपना योगदान दे रहे हैं। सप्तमेश चंद्र ग्रह समराशि में ग्यारह अंश पर होने से वृद्धावस्था में है तथा कारक शुक्र भी बाल अवस्था में है एवं राहु की दृष्टि में है जिसके कारण इनका विवाह होने में बाधाएं आ रही हैं। आगे भविष्य में विवाह हो भी गया तो वैवाहिक जीवन में स्थिरता की संभावना कम रहेगी। कुंडली का सकारात्मक पक्ष केंद्र में केवल शुभ ग्रहों के स्थित होने, गजकेसरी योग से संपन्न निर्दोष व बली गुरु के केंद्र भाव में स्थित होने से संपन्न है। चतुर्थ भाव का स्वामी लग्नेश के साथ धर्म के भाव में स्थित है। लग्नेश व चतुर्थेश की यह स्थिति अत्यधिक सात्विक प्रवृत्ति को इंगित करती है। चतुर्थ से चतुर्थ भाव में मन की कोमल भावनाओं का कारक चंद्रमा व चंद्रमा से चतुर्थ भाव में मन की उदारता व दया की भावना का कारक गुरु स्थित है जिसकी चतुर्थ (हृदय) भाव पर पूर्ण दृष्टि है। इसलिए सचमुच ही सुमित दरियादिल इन्सान है। उसके अंदर संतोष की भावना भरी हुई है। इसलिए अपने इन गुणों के कारण वह सदा सर्वदा सुखी रहेगा क्योंकि जो मानस दूसरों की चिंता व दुखों के बारे में ही सोचता रहता है उसके स्वयं के जीवन में दुख नहीं हो सकते। सुमित की कुंडली में लग्नेश के शुभ भाव में होने, गुरु के केंद्रस्थ होने व दशमेश के धन भाव में स्थित गुरु से दृष्ट होने तथा साथ ही राहु के षष्ठ भाव में स्थित होने से इनका न केवल सुंदर लक्ष्मी योग व श्रेष्ठतम राजयोग बन रहा है अपितु तृतीय भाव में स्थित सूर्य के प्रभाव से इनके शौर्य में भी निरंतर अभिवृद्धि होती रहेगी। अभी वर्तमान समय में शुक्र की महादशा में धीरे-धीरे सुमित अपने व्यावसायिक जीवन में सुधार करके खूब धन-ऐश्वर्य कमाने में सक्षम हो जाएंगे। इनके दरियादिल होने से इनके लिए यह शुभ रहेगा। ये किसी समाज सुधार संस्था अथवा एन. जी. ओआदि से जुड़ कर अपनी कुंडली के सकारात्मक पक्ष से लाभान्वित हो सकेंगे।

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विद्या बाधा निवारण विशेषांक  फ़रवरी 2016

फ्यूचर समाचार का यह विशेषांक पूर्ण रूपेण शिक्षा को समर्पित है। हम जानते हैं कि शिक्षा किसी व्यक्ति के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण अवयव है तथा शिक्षा ही उस व्यक्ति के जीवन में सफलता के अनुपात का निर्धारण करता है। किन्तु शिक्षा अथवा अध्ययन किसी तपस्या से कम नहीं है। अधिकांश छात्र लगातार शिक्षा पर ध्यान केन्द्रित करने में परेशानी का अनुभव करते हैं। प्रायः बच्चों के माता-पिता बच्चों की पढ़ाई पर ठीक से ध्यान न दे पाने के कारण माता-पिता मनोवैज्ञानिक अथवा ज्योतिषी से सम्पर्क करते हैं ताकि कोई उन्हें हल बता दे ताकि उनका बच्चा पढ़ाई में ध्यान केन्द्रित कर पाये तथा परीक्षा में अच्छे अंक अर्जित कर सके। फ्यूचर समाचार के इस विशेषांक में इसी विषय से सम्बन्धित अनेक महत्वपूर्ण लेखों को समाविष्ट किया गया है क्योंकि ज्योतिष ही एक मात्र माध्यम है जिसमें कि इस समस्या का समाधान है। इस विशेेषांक के अतिविशिष्ट लेखों में शामिल हैंः जन्मकुण्डली द्वारा विद्या प्राप्ति, ज्योतिष से करें शिक्षा क्षेत्र का चुनाव, शिक्षा विषय चयन में ज्योतिष की भूमिका, शिक्षा का महत्व एवं उच्च शिक्षा, विद्या प्राप्ति हेतु प्रार्थना, माता सरस्वती को प्रसन्न करें बसंत पंचमी पर्व पर आदि। इनके अतिरिक्त कुछ स्थायी स्तम्भ जैसे सत्य कथा, हैल्थ कैप्सूल, विचार गोष्ठी, मासिक भविष्यफल आदि भी समाविष्ट किये गये हैं।

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