अध्ययनरत बच्चों के लिए उपाय

अध्ययनरत बच्चों के लिए उपाय  

अध्ययन करने वाले बच्चे हमेशा पूर्वमुखी होकर ही अध्ययन करें। परीक्षा के समय उत्तरमुखी होकर अध्ययन कर सकते हैं। इससे उनकी स्मरण शक्ति उत्तम होने के साथ ही साथ विषय भली-भांति याद रहता है। - यदि कोई बच्चा बार-बार किसी परीक्षा में असफल हो रहा हो, तो वह श्री सरस्वती जयंती पर भोजपत्र पर अष्टगंध में गंगाजल मिलाकर निम्न मंत्र को लिखकर अपने सामने मां सरस्वती की तस्वीर रखकर 108 बार निम्न मंत्र का जाप करें। फिर भोजपत्र को चांदी के ताबीज में बांध कर अपने दाहिने हाथ में अथवा गले में बांध लें। अब जब भी अध्ययन आरंभ करें तो इस मंत्र का एक बार मानसिक जप अवश्य करें। कुछ ही दिनों में चमत्कार प्रत्यक्ष होगा। मंत्र है: ऊँ सरस्वती वाग्वादिनी काश्मीरवासिनी हंसवाहिनी बहु बुद्धि दायिनी यम जिह्वाग्रे स्थिर भव स्वाहाः। - रविवार को जल में रोली, शक्कर व गुलाब का पुष्प डालकर सूर्य देव को अर्पित करें तथा किसी लाल वस्तु का दान करें। मंदिर में माचिस का जोड़ा अर्पित करने के साथ नमक रहित भोजन करें। यह कार्य रविवार को ही करें। गुरुवार: गुरुवार को सूर्यास्त से ठीक पहले किसी दोने में पांच अलग-अलग मिठाई तथा हरी इलाचयी का जोड़ा पीपल के वृक्ष के नीचे अर्पित करें। ऐसा लगातार तीन गुरुवार को करें। - प्रातः सूर्योदय के समय बाल गीले कर सूर्य के समक्ष हाथ फैलाकर 21 गायत्री मंत्र का जाप करें। मंत्र के बाद तीन बार ‘ऊँ’ का उच्चारण करें, फिर 11 बार पुनः गायत्री मंत्र का उच्चारण कर हथेलियों को परस्पर रगड़ कर अपने मुख पर फिरायें। इस प्रयोग से बच्चे की स्मरण शक्ति में वृद्धि होगी। यदि बच्चा नियमित रूप से यह प्रयोग करता है तो उसे परीक्षा में सफल होने में सुगमता होगी। - परीक्षा से सवा महीना पूर्व आने वाले शुक्ल पक्ष के प्रथम गुरुवार को प्रातः स्नान कर घर के पूजा-स्थल पर अथवा किसी भी देवालय में श्री गणेश की मूर्ति के सामने 14 बेसन के लड्डू का भोग लगाकर, हरे हकीक की माला से निन्म मंत्र का 11 माला जप कर अपनी परीक्षा में सफलता के लिए प्रार्थना करने से भी लाभ प्राप्त होता है। इसमें आप यह बात स्पष्ट समझ लें कि ईश्वर भी परिश्रमी लोगों की सहायता करता है। मंत्र है: वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि सम्प्रभ। निर्विघ्न कुरू मे देव सर्व कार्येषु सर्वदा। एकदन्तो महाबुद्धिये, सर्वषे गणनायकः। सर्वसिद्धि करो देवा गौरी पुत्र विनायकः।। - परीक्षा से कम से कम 11 मंगलवार पहले वाले शुक्त पक्ष के प्रथम मंगलवार को किसी भी हनुमान के मंदिर में प्रभु की मूर्ति के समक्ष गुड़ व चने का भोग अर्पित कर परीक्षा में सफलता के लिए प्रार्थना कर निम्न मंत्र की एक माला का जाप करें। 11वें मंगलवार को उनके बायें पैर के सिंदूर से तिलक करें। परीक्षा में प्रश्न-पत्र आने पर निम्न मंत्र का 5 बार स्मरण करने से अपेक्षित परिणाम आता है। परिणाम अच्छा होने के बाद आप प्रभु को धन्यवाद के साथ चोला भी अर्पित करें। मंत्र है: बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौ पवन कुमार। बल, बुद्धि विद्या देहु मोहि, हरहु क्लेश विकार। - अध्ययन करते समय कभी भी वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम कोना) में न बैठें। इस कोण में अध्ययन करने वाले बच्चों को कभी भी दीर्घ समय तक स्मरण नहीं रहता है क्योंकि यह क्षेत्र वायु का है और अध्ययन करने वाला विषय वायु की भांति उड़ जाता है। - विद्यार्थी अपने अध्ययन कक्ष में मां सरस्वती की तस्वीर अवश्य लगायें तथा नियमित अध्ययन से पूर्व तस्वीर पर 3 अगरबत्ती अर्पित करें और जो विद्यार्थी पूजा-पाठ में विश्वास रखते हों, उन्हें नियमित रूप से निम्न मंत्र का जप भी सरस्वती के तस्वीर के सामने अवश्य करना चाहिए। इस उपाय से बुद्धि में तीक्ष्णता के साथ परीक्षा फल भी शुभ होता है। मंत्र संख्या बच्चे अपने समय के अनुसार निश्चित कर लें परंतु एक बार जितना मंत्र जप करें, उससे कम या अधिक फिर कभी न करें। मंत्र है: ‘ऊँ हृीं ऐं हृीं ऊँ सरस्वत्यै नमः।’ जिन बच्चों की स्मरण शक्ति कमजोर हो उनको नियमित रूप से 11 तुलसी के पत्तों का रस मिश्री के साथ देने से स्मरण शक्ति में वृद्धि होती है। - शुक्लपक्ष में प्रथम रविवार को इमली के 22 पत्ते लाकर उनमें से 11 पत्ते सूर्यदेव को अर्पित कर, शेष बचे पत्ते अपनी किसी भी पुस्तक के अंदर रखने से पढ़ाई में अधिक मन लगता है। - जो बच्चे पढ़ते समय शीघ्र ही सोने लगते हैं अथवा मन भटकने के कारण पढ़ नहीं पाते हैं तो उनके अध्ययन कक्ष में हरे रंग के पर्दे लगवायें तथा जब भी अध्ययन के लिए बैठे तब वह सरस्वती का ध्यान 21 बार ‘ऊँ ऐं सरस्वत्यै नमः’ का जाप करके करें।

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विद्या बाधा निवारण विशेषांक  फ़रवरी 2016

फ्यूचर समाचार का यह विशेषांक पूर्ण रूपेण शिक्षा को समर्पित है। हम जानते हैं कि शिक्षा किसी व्यक्ति के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण अवयव है तथा शिक्षा ही उस व्यक्ति के जीवन में सफलता के अनुपात का निर्धारण करता है। किन्तु शिक्षा अथवा अध्ययन किसी तपस्या से कम नहीं है। अधिकांश छात्र लगातार शिक्षा पर ध्यान केन्द्रित करने में परेशानी का अनुभव करते हैं। प्रायः बच्चों के माता-पिता बच्चों की पढ़ाई पर ठीक से ध्यान न दे पाने के कारण माता-पिता मनोवैज्ञानिक अथवा ज्योतिषी से सम्पर्क करते हैं ताकि कोई उन्हें हल बता दे ताकि उनका बच्चा पढ़ाई में ध्यान केन्द्रित कर पाये तथा परीक्षा में अच्छे अंक अर्जित कर सके। फ्यूचर समाचार के इस विशेषांक में इसी विषय से सम्बन्धित अनेक महत्वपूर्ण लेखों को समाविष्ट किया गया है क्योंकि ज्योतिष ही एक मात्र माध्यम है जिसमें कि इस समस्या का समाधान है। इस विशेेषांक के अतिविशिष्ट लेखों में शामिल हैंः जन्मकुण्डली द्वारा विद्या प्राप्ति, ज्योतिष से करें शिक्षा क्षेत्र का चुनाव, शिक्षा विषय चयन में ज्योतिष की भूमिका, शिक्षा का महत्व एवं उच्च शिक्षा, विद्या प्राप्ति हेतु प्रार्थना, माता सरस्वती को प्रसन्न करें बसंत पंचमी पर्व पर आदि। इनके अतिरिक्त कुछ स्थायी स्तम्भ जैसे सत्य कथा, हैल्थ कैप्सूल, विचार गोष्ठी, मासिक भविष्यफल आदि भी समाविष्ट किये गये हैं।

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