अभिषेक व् ऐश्वर्या का वैवाहिक जीवन

अभिषेक व् ऐश्वर्या का वैवाहिक जीवन  

अभिषेक व ऐश्वर्या का वैवाहिक जीवन ाुप्रश्न ः अभिषेक एवं ऐश्वर्या का विवाह हुआ है। (जन्म विवरण अभिषेक 5.2.1976, 23ः56 मुंबई, ऐश्वर्या 1.11. 1973, 12ः10 मंगलोर) उनकी कुंडलियों का विश्लेषण करते हुए उनके वैवाहिक जीवन, संतान पक्ष, कैरियर, व्यवसाय, स्वास्थ्य, धन दोनों के अपने सास-ससुर से संबंध कैसे रहेंगे आदि विभिन्न पक्षों पर विस्तृत फलादेश दें। अभिषेक की जन्म कुंडली का विश्लेषण तुला लग्न बुध के नक्षत्र एवं गुरु की राशि रेवती के नक्षत्र में पैदा हुए अभिषेक सुंदर हैं। उनका कद ऊंचा, शरीर रचना सुंदर तथा व्यक्तित्व प्रभावशाली है। वह लोकप्रिय, धनवान, बुद्धिमान, सत्यनिष्ठ हैं। वह कोई भी काम सोच विचार कर करते हैं। यह गंडमूल नक्षत्र तीसरे चरण में शुभ फलदायक है। इस लग्न वालों की नाटक, सिनेमा आदि से संबंधित कार्यों में विशेष रुचि होती है। गजकेसरी योग कुंडली में यह योग विद्यमान है। गुरु अपने घर में और चंद्र गुरु के घर में स्थित है। यह उच्च कोटि का गजकेसरी योग है। यही कारण है कि अभिषेक कर्मशील, मेधावी और तेज हैं। इस योग के कारण अन्य अरिष्ट योग समाप्त हो जाते हैं। यह योग अभिषेक की दीर्घायु और उच्च कोटि की मानसिक शक्ति का सूचक है। अमला योग चंद्र से दशम भाव में शुभ ग्रह शुक्र है। अभिषेक सदाचारी, धर्म में आस्था रखने वाले तथा अच्छे स्वभाव के व्यक्ति हैं। अभिषेक को मंगल ग्रह को शांत करने के लिए उससे संबंधित वस्तुओं का दान और मंत्र का जप करना चाहिए। गोचर का राहु जब धनु (नीच राशि) में भ्रमण करेगा तो वैवाहिक सुख में कमी आएगी। यह स्थिति 6.1.2012 के बाद आएगी। अतः ऐश्वर्या को राहु ग्रह को शांत करने के लिए इससे संबंधित दान, मंत्र का जप आदि करने चाहिए। अभिषेक की कुंडली तुला लग्न की है और इसका स्वामी शुक्र है। इस लग्न वाले जातक भावनाओं और कर्तव्य में सामंजस्य स्थापित करने की अद्भुत क्षमता रखते हैं और चिरयुवा होते हैं। ये अपने दायित्वों का निर्वाह करते हैं और निरपेक्ष होकर परोपकार भी करते हैं। इनकी रुचि तंत्र, मंत्र, ज्योतिष में अधिक होती है। इनके लिए सर्वाधिक शुभ ग्रह चंद्र, सूर्य और शनि हैं। इनका जीवन साथी सुंदर एवं उग्र प्रकृति का होता है। घर में प्रायः पति-पत्नी में अनबन होती रहती है। वैवाहिक जीवन वैवाहिक जीवन के फलकथन के लिए सप्तम भाव, सप्तमेश व शुक्र की स्थिति का विश्लेषण करते हैं। सप्तमेश अष्टम भाव में है और सप्तम भाव पर राहु, केतु तथा शनि का अशुभ प्रभाव है, सप्तम भाव पाप प्रभाव में है। शुक्र भी तृतीय भाव (गुरु भाव धनु राशि) में है। गुरु शुक्र से शत्रु भाव किंतु, शुक्र गुरु से सम भाव रखता है। यह स्थिति बहुत अच्छी नहीं है पर चलित कुंडली में गुरु व चंद्र सप्तम भाव में हैं। चंद्र तो शुभ है पर गुरु पत्नी के बीमार होने का संकेत देता है। गुरु के तृतीय और छठे भाव के स्वामी होने की स्थिति में पत्नी का व्यवहार जातक के अनुकूल नहीं होता। संतान पक्ष पंचम स्थान का स्वामी शनि है जो दशम भाव में है। उस पर सूर्य व बुध की सप्तम तथा गुरु की पंचम दृष्टि है। इस प्रकार स्त्री ग्रह शनि स्त्री राशि में स्थित है। बुध भी स्त्री ग्रह है, किंतु सूर्य व गुरु पुरुष ग्रह हैं। इस प्रकार दो ग्रह स्त्री और दो पुरुष हैं। सूर्य व गुरु बलवान हैं, इसलिए पुत्र की प्राप्ति अवश्य होगी। कैरियर व्यवसाय तुला लग्न में कार्य भाव का स्वामी चंद्र, आय भाव का स्वामी सूर्य तथा धन भाव का स्वामी मंगल है। इन ग्रहों में मित्रता है। किंतु इसके विपरीत भाग्येश बुध व लग्नेश शुक्र दोनों ही सूर्य, चंद्र व मंगल के शत्रु हैं। ऐसे में भाग्य जातक का साथ नहीं देता। जातक स्वयं सदैव असमंजस में रहता है कि जीवन यापन के लिए कौन सा व्यवसाय अपनाया जाए क्योंकि जो ग्रह धन और कार्य क्षमता देते हैं उनमें जातक की रुचि नहीं रहती और न भाग्य साथ देता है। जब जातक अपनी रुचि के अनुसार कार्य करता है, तो उसे पर्याप्त धन और यश नहीं मिलता। लग्नेश और कार्येश दोनों ही चर राशि के स्वामी होते ह।ंै अतः जातक स्वभावतः घुमक्कड़ होता है अर्थात वह एक जगह बैठकर कार्य व्यवसाय नहीं कर सकता। दशम भाव में कर्क राशि उदित हो रही है। इस भाव में शनि शत्रु राशि में है, दशमेश छठे भाव में है। यह योग प्रत्येक कार्य में बाधाएं खड़ी करता है। दसवें भाव में शनि के कारण जातक की अपने पिता से अनबन रहती है। नित नई समस्याओं से जूझना पड़ता है। इसी कारण विवाह में विलंब होता है व दाम्पत्य जीवन कष्टमय होता है। ऐसे जातक का भाग्योदय संतान प्राप्ति के बाद होता है। स्वास्थ्य तुला लग्न में शुक्र लग्नेश होने के कारण अशुभ फल नहीं देता किंतु आठवें भाव से संबंध होने के कारण कुछ मात्रा में अशुभ प्रभाव छोड़ता है। शुक्र पर मंगल की अष्टम दृष्टि है, मंगल मारकेश है। लग्न भाव पर राहु व केतु का प्रभाव है, इसलिए अशुभ है। शुक्र की दृष्टि भाग्य भाव पर है, जो बुध की राशि है। इसलिए भाग्य और धर्म की वृद्धि करेगा। लेकिन चलित कुंडली में राहु द्वितीय भाव में है। केतु मंगल के साथ अष्टम भाव में है, जो अधिक अशुभ है। क्योंकि मंगल मारक होकर मृत्यु स्थान में बैठा है इसलिए मृत्यु तुल्य कष्ट दे सकता है। धन इस लग्न में मंगल धन भाव का स्वामी है और अष्टम भाव में होने के कारण दरिद्र योग का निर्माण करता है। इस योग के कारण विवाह के पश्चात जातक की स्थिति और खराब हो जाती है। पैतृक धन नष्ट हो जाता है। दशम भाव का स्वामी चंद्र छठे भाव में है, जो दशम से नौवां है। यह योग शुभ फल देगा। आय भाव का स्वामी सूर्य है, जो चतुर्थ भाव में शनि की राशि मकर में विराजमान है और सप्तम दृष्टि दशम भाव में सूर्य की राशि कर्क पर है, जो शुभ है। इस कारण पिता के सहयोग से धन प्राप्त हो रहा है। चलित कुंडली में चंद्र मन का अधिकारी है, इसीलिए उनकी मानसिक शक्ति प्रबल है। वह अपने सुंदर कर्मों के बल पर ध् ान अर्जित करेंगे। साथ ही पत्नी और पिता का सहयोग मिलता रहेगा। धन भाव पर गुरु की नवम दृष्टि भी है, जो धन की वृद्धि करेगा। सास ससुर से संबंध अभिषेक के सास ससुर से संबंध मध्यम रहेंगे। सूर्य और शनि कुछ अशुभ प्रभाव छोड़ेंगे। कभी-कभी संबंधों में कड़वाहट आ सकती है क्योंकि चतुर्थ भाव में शनि की मकर राशि उदित हो रही है जिसमें सूर्य शत्रु तथा बुध मित्र राशि में विराजमान है। चतुर्थ भाव का स्वामी शनि दशम भाव में है, जो अपनी सप्तम दृष्टि के द्वारा बल प्रदान कर रहा है। सूर्य व बुध दशम भाव पर सप्तम दृष्टि डाल रहे हैं। सूर्य दशम भाव के लिए और शनि चतुर्थ भाव के लिए शुभ है। ऐश्वर्या राय की कुंडली का विश्लेषण मकर लग्न, पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र और गुरु की राशि (धनु) तथा शुक्र के नक्षत्र में जन्मी ऐश्वर्या अच्छे मित्रों से युक्त, भाग्यवान, लोकप्रिय, आकर्षक व्यक्तित्व की स्वामिनी, सुंदर, लंबे और अंडाकार चेहरे, नीली गंहरी आंखों और घने बाल वाली, हंसमुख स्वभाव, सत्यपरायण् ाा, बोल्ड, स्पष्टवादी, विलासिता के सुखों से संपन्न, खर्च अधिक करने वाली, कार्य कुशल, मिलनसार एवं कामुक प्रकृति की हैं। वह विभिन्न प्रकार के भोजन की शौकीन हैं। कुंडली में किसी ग्रह का नीच राशि में स्थित होना खराब माना गया है। किंतु अगर उस ग्रह का नीच भंग हो जाता है, तो वह शुभ फल देता है। इसे नीच भंग राजयोग कहते हंै। ऐश्वर्या की कुंडली में लग्न में बैठे गुरु का नीच भंग है क्योंकि यह ग्रह लग्न में ही स्थित है। दूसरा इस राशि म ंे स्वास्थ्य का हाने े वाला ग्रह मंगल लग्न से केंद्र (चैथे) में स्थित है। इसलिए कुंडली में लग्न शुभस्थ है। लग्न का बलवान और शुभ होना कुंडली में राज योग का कार्य करता है। ऐश्वर्या स्वस्थ जीवन व्यतीत करेंगी।  कुंडली में दशम भाव में बैठे तुला के सूर्य का भी नीच भंग है, क्योंकि सूर्य भी लग्न से केंद्र में स्थित है और इस राशि में उच्च का होने वाला ग्रह शनि चंद्र कुंडली से केंद्र में स्थित है। अतः दशम भाव का कारक ग्रह सूर्य शुभ फल देगा। पिता का सुख, विश्व सुंदरी के उच्च एवं प्रतिष्ठित पद की प्राप्ति, प्रतियोगिता में कामयाबी और प्रतिष्ठा आदि इस सूर्य ग्रह की ही देन हंै। इस स्थिति के कारण ससुर से संबंध मधुर रहेंगे और आगे फिल्मों में काम मिलते रहेंगे। केंद्र (चतुर्थ भाव) माता एवं भूमि के घर में स्वराशि का मंगल रुचक नामक पंचमहापुरुष योग बना रहा है। ऐसे जातक बलवान, आकर्षक शरीर वाले, धन तथा शक्ति से युक्त, मंत्र शास्त्रों के ज्ञाता, राजा के समान सुखी, भूमि से युक्त, मातृसुख से संपन्न और शत्रुंजय होते हैं। छठे भाव में मित्र के घर में स्थित लग्नेश शुभ फलदायक है। अतः शत्रु अपने आप खत्म हो जाएंगे। बीमारी भी शत्रु होती है। अतः ऐश्वर्या स्वस्थ जीवन व्यतीत करेंगी।  सप्तमेश चंद्र बारहवें भाव के शुभ कर्तृ योग में है। अतः वैवाहिक जीवन सुखमय रहेगा। भोग विलास का कारक शुक्र योग कारक होकर बारहवें भाव में शुक्र योग बनाता है, जिसे शुभ माना गया है। मंत्रेश्वर ने कहा है कि बारहवें भाग का शुक्र जातका को धनवान और तेजस्वी बनाता है तथा पति सुख से युक्त रखता है। इस योग ने ऐश्वर्या को ख्याति और प्रतिष्ठा दी। भाग्येश बुध लाभ स्थान में स्थित है जो मंगल का घर है जहां चैथे भाव में स्थित मंगल अपनी पूर्ण आठवीं दृष्टि से अपने घर में स्थित भाग्येश बुध को देख रहा है। यही कारण है कि ऐश्वर्या भाग्य की धनी हैं। उनकी आय के साधन किसी न किसी रूप में बनते रहेंगे और धन की कमी नहीं आएगी। पंचमेश शुक्र और सप्तमेश चंद्र का योग शुभ कर्तृ योग में है। इस योग ने ऐश्वर्या को अभिनय में सफलता दिलाई और उन्होंने फिल्मी दुनिया में नाम कमाया। ऐसे जातक सुंदर एवं आकर्षक व्यक्तित्व के होते हैं। चैथे भाव में स्थित मंगल जहां अपनी चैथी दृष्टि से सप्तम भाव को देख रहा है, वहीं लग्न में बैठा गुरु अपनी सातवीं उच्च दृष्टि से सप्तम भाव को देख रहा है। सप्तमेश चंद्र भी शुभ स्थिति में है। अतः वैवाहिक जीवन सुखमय रहेगा। लग्नेश शनि और केंद्रेश शुक्र (केंद्र और त्रिकोण का दृष्टि संबंध) एक दूसरे को सातवीं पूर्ण दृष्टि से देख रहे हैं जो अभिनय के लिए शुभ फलदायक है। शनि दूसरे घर का और शुक्र पांचवें घर का स्वामी है। शुभ दुरुधरा योग: चंद्र से दोनों ओर शुभ ग्रह हों, तो दुरुधरा योग बनता है। ऐश्वर्या अपने कामों के प्रति निष्ठावान और धर्मपरायणा हंै। वह दानशील हैं तथा अपने वचन पर अटल रहती हैं। सप्तमेश चंद्र अपने घर से छठे भाव (बारहवें) में नीच के राहु से युक्त होकर ग्रहण योग बना रहा है। साथ में शुक्र भी स्थित है। शुक्र 1 अंश पर स्थित है। यह योग ऐश्वर्या को भावुक बनाता है। नवमांश कुंडली में चंद्र भी नीच राशि का है। अतः उन्हें चंद्र ग्रह को शांत करने के लिए उसका दान, पूजा पाठ आदि करते रहना चाहिए। वर्तमान समय में प्रभावी राहु की महादशा में शनि का अंतर 19.6. 2009 तक रहेगा। नवमांश में राहु उच्च का है और शनि अपने घर में स्थित है। कुंडली में शनि की अष्टम ढैया दशा जारी है। अर्थात शनि की ढैया दशा 23.9. 2007 तक चलेगी। वहीं गोचर का गुरु वृश्चिक राशि में चला हुआ अपनी नौवीं उच्च दृष्टि से शनि को देख रहा है, जो कर्क राशि में है। राहु का गोचर भी कुंभ राशि तीसरे भाव में शुभ फलदायक है। अतः शनि की ढैया का अशुभ फल कम होगा। आगामी 30 नवंबर 2007 को गुरु जब धनु राशि में प्रवेश करेगा, तो संतान योग बनेगा, क्योंकि गुरु की पांचवीं दृष्टि पंचम भाव पर पड़ेगी। केंद्र के स्वामी के साथ राहु हो, तो शुभ फल देता है। यहां सप्तमेश चंद्र से राहु युक्त है। आगामी सितंबर 2007 तक शनि और राहु को शांत करने के लिए उनका दान करते रहना चाहिए। इसके लिए पन्ना और हीरा रत्न बहुत ही अनुकूल हैं। ऐश्वर्या की कुंडली मकर लग्न की है। इस लग्न में जन्म पूर्व जन्म के पापों का प्रायश्चित करने के लिए होता है। क्योंकि इस लग्न की राशि का स्वामी मंद गति ग्रह शनि है और दूसरे भाव का स्वामी भी शनि है इसलिए जातक को जीवन पर्यंत किसी न किसी प्रकार का तनाव भोगना पड़ता है। मकर लग्न वाले ख्याति भी प्राप्त करते हैं। इनका जीवनसाथी चंचल और सुंदर होता है। प्रायः कन्या संतानें अधिक होती हैं। इनके लिए चंद्र व शुक्र सर्वाधिक शुभ ग्रह होते हैं। वैवाहिक जीवन वैवाहिक जीवन का विश्लेषण करने के लिए सप्तमेश, सप्तम भाव व गुरु की स्थिति देखी जाती है। ऐश्वर्या की लग्न कुंडली में सप्तमेश चंद्र बारहवें भाव में है जो शुक्र और राहु के साथ है, जो चंद्र से शत्रुता रखते हैं। चंद्र का व्यय भाव में होना पति के लापरवाह होने का सूचक है। वैसे व्यय भाव शुभकर्तृ योग में है और चलित कुंडली में चंद्र लग्न भाव में है, जो अत्यंत शुभ है। चंद्र के शुभ प्रभाव के कारण ही ऐश्वर्या को शारीरिक सौंदर्य प्राप्त हुआ है। चंद्र कोमलता व सुंदरता का प्रदाता है। लग्न में स्थित गुरु चंद्र के साथ गजकेसरी योग बना रहा है। यह सप्तम भाव को शुभता प्रदान कर रहा है। इसी कारण उन्हें अच्छे घर व वर की प्राप्ति हुई। गुरु का नीच भंग राज योग भी है। मंगल स्वगृही है। उनका दाम्पत्य जीवन पूर्णतः सफल होगा। कुंडली पर अशुभ प्रभाव राहु और चंद्र के कारण हो सकता है। संतान पक्ष पंचम भाव में वृष राशि (स्त्री राशि) उदित हो रही है। इसका स्वामी शुक्र है, जो स्त्री ग्रह है और व्यय भाव में स्थित है। एकादश भाव में स्थित बुध की दृष्टि भी पंचम भाव पर है। बुध स्त्री ग्रह है, इसलिए पुत्र की तुलना में कन्याएं अधिक होंगी। लग्न भाव से गुरु की पंचम दृष्टि संतान भाव पर है। गुरु पुरुष ग्रह है और शुक्र व बुध से बलवान है इसलिए पुत्र की प्राप्ति अवश्य होगी। कैरियर व व्यवसाय इस लग्न की कुंडली में आय स्थान का स्वामी मंगल, धन भाव का स्वामी शनि तथा कार्य भाव का स्वामी शुक्र होता है। चूंकि धनेश, लग्नेश व कार्येश परम मित्र हैं तथा आयेश मंगल की शुक्र और शनि से परम शत्रुता है, अतः जातक को व्यवसाय और धन प्राप्ति के बीच सदैव संघर्ष करना पड़ता है। दशम भाव में तुला राशि उदित हो रही है और सूर्य भी दशम भाव में नीच भंग राजयोग बना रहा है, जो सामान्य राजयोग से अच्छा फल देता है। मकर लग्न की कुंडली में सूर्य आठवें भाव का स्वामी होता है। अष्टमेश दोष के कारण वह जिस भाव में होगा उस भाव के शुभ फलों में कुछ कमी करेगा। इसलिए विख्यात होने पर भी जातक को संघर्ष का सामना करना पड़ता है। दशम भाव पर मंगल की सप्तम दृष्टि और सूर्य का नीच भंग राजयोग दोनों ने मिलकर उन्हें ख्याति दिलाई। सास ससुर से संबंध सास ससुर दोनों से ऐश्वर्या के संबंध अच्छे रहेंगे, पर ससुर के साथ अध् िाक अच्छे रहेंगे। मंगल के स्वगृही होने के कारण उन्हें हर प्रकार की सुख सुविधाएं, गाड़ी, बंगले, भोग विलास के साधन, जनता का प्यार आदि प्राप्त हुए। स्वास्थ्य मकर लग्न में बृहस्पति तृतीय, द्वादश भाव का स्वामी होता है अतः स्थान दोष होने पर उसमें कुछ पापत्व आ जाता है। लग्नेश छठे भाव में है। इन योगों के फलस्वरूप कोई चिरकालिक रोग हो सकता है। धन धनेश वक्री होकर छठे भाव में है, जो धन के लिए अशुभ है। अतः धन अर्जित करने में कठिनाइयां आ सकती हैं। मंगल चतुर्थ भाव में स्वगृही है जो रुचक योग बना रहा है। अष्टम दृष्टि एकादश भाव पर है, जो धन के लिए शुभ है। भाग्येश बुध भी एकादश भाव में है, जो भाग्य से धन दिलाता रहेगा। वक्री मंगल व वक्री बुध के कारण धन की आवश्यकता पड़ने पर आवश्यकता के अनुरूप उपलब्ध नहीं होता। इस कारण कर्ज भी लेना पड़ सकता है। ऐश्वर्या के जन्म कालीन पंचांग पर दृष्टिपात करें, तो निम्नलिखित तथ्य प्राप्त होते हैं जिनके आधार पर उनके सुखी वैवाहिक जीवन, संतान पक्ष, धर्म में आस्था, धन दौलत, स्वभाव, व्यवहार, कला कौशल, ख्याति, यश, मान-प्रतिष्ठा आदि का आकलन किया जा सकता है। तिथि फल ऐश्वर्या का जन्म षष्ठी तिथि को हुआ। जो नारी षष्ठी तिथि जन्म लेती है, वह पतिव्रता स्त्रियों में प्रधान और जन मानस को प्यारी होती है। उसे कफ की बीमारी होती है। वह क्रोध् ाी भी होती है। वार फल जिस स्त्री का जन्म गुरुवार को होता है, वह पापकर्मों से विरक्त और धनधान्यादि से संपन्न, भगवान और ब्राह्मणों की पूजा करने वाली होती है। ऐश्वर्या का जन्म गुरुवार को ही हुआ। पापकर्म विहीना च धन धान्य समन्विता। देवद्विजार्चिता नारी या जाता गुरुवासरे।। नक्षत्र फल ऐश्वर्या का जन्म नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिस कन्या का जन्म इस नक्षत्र में होता है वह अपने घर परिवार अर्थात कुल के अनुरूप/अनुकूल, बंधुगणों में प्रमुख, संपूजनीय कर्म करने वाली, अति बलवान, पतिव्रता, विशालाक्षी, अद्भुत रूपवती एवं संसार में यश कमाने वाली होती है। ऐसी नारी धर्मव्रती, विनीत, सत्यवादी और पुण्य कार्यों में रत भी होती है। योग फल ऐश्वर्या के जन्म वाले दिन धृति योग था। धृति योग में जन्म लेने वाली नारी हमेशा सत्यनिष्ठ, बुद्धिमती और नम्र होती है। वह सभी कलाओं की ज्ञाता, व्रत नियमों का पालन करने वाली और शांत स्वभाव होती है, घमंड जिसे छू भी नहीं पाता। वह बहुत से पुत्र-पौत्रों वाली होती है। करण फल ऐश्वर्या के जन्म काल में तैतिल करण था। जो कन्या तैतिल करण में पैदा होती है, वह बुद्धिमान, उत्तम वचन बोलने वाली, सब कलाओं की मर्मज्ञ, अच्छी कांति वाली, गृह कार्यों में दक्ष, नम्रता युक्त स्वरूप वाली, अच्छे संुदर वस्त्राभूषणों से युक्त एवं सुशील होती है। अभिषेक व ऐश्वर्या का कुंडली मिलान कुंडली मिलान विश्लेषण दोनों के नवमांश पति शत्रु हंै। आयु में ऐश्वर्या अभिषेक से 2 वर्ष 9 महीने बड़ी है। केवल मंगल ही नहीं, कोई भी क्रूर या पापी ग्रह कुंडली में भाव 1, 4, 7, 8 या बारह में हो, तो विवाह सुख में कमी करता है। ऐश्वर्या मंगली नहीं है क्योंकि मंगल चैथे भाव में अपने घर स्थित होकर रुचक नामक पंचमहापुरुष योग बना रहा है। अभिषेक लग्न कुंडली से मंगली है क्योंकि मंगल अष्टम भाव में है। चंद्र से अष्टम भाव में राहु शुभ नहीं होता है क्योंकि वह मन का कारक है। विवाह के कारक शुक्र से अष्टम भाव में शनि अशुभ है। अतः अभिषेक तीनों लग्नों से मंगली है। 27 गुण से अधिक मिलान हो, राशि मैत्री और गण वही हों, तो मंगल दोष कम हो जाता है। यहां ऐश्वर्या का गण मनुष्य और अभिषेक का देव है। अतः मंगल दोष भंग नहीं होता। विवाह के समय का ज्योतिषीय विश्लेषण तिथि 20.4.2007 सूर्य उदय 6.20 भद्रा 17.04 से 27.42 स्थान मुंबई सूर्य अस्त 6.56 चंद्र वृष राशि में। चंद्र वृष राशि में तथा भद्रा स्वर्ग लोक में होने से भद्रा शुभ फलदायक है। दिन की भद्रा रात्रि को खत्म हो, तो वह दोष रहित हो जाती है। अतः ऊपर वर्णित तथ्यों के अनुसार भद्रा का परिहार हो जाता है। ऐश्वर्या प्रतीक्षा के बने मंडप पर सायं 7 बजे पहुंची और सायं 7.15 पर उसने अभिषेक के गले में वर माला डाली। यह शुभ कार्य गोधूलि काल में संपन्न हुआ जिसे विवाहादि मांगलिक कार्यों के लिए शुभ माना जाता है। सायं 8‑45 पर वृश्चिक लग्न में वर वधू का गठबंधन हुआ जो स्थिर लग्न था। अतः कह सकते हैं कि यह शुभ कार्य हर मुहूर्त का ध्यान रख कर संपन्न किया गया। फलस्वरूप कई अशुभ योगों का परिहार हुआ। अभिनेता अभिषेक बच्चन और अभिनेत्री ऐश्वर्या राय की शादी 20 अप्रैल 2007 अक्षय तृतीया के दिन हुई। वर का जन्म नक्षत्र रेवती और वधू का पूर्वाषाढ़ा होने से अष्टकूटों का मिलान करने पर 32) गुण प्राप्त होते हैं। अतः गुणों का मेलांकन उत्तमोत्तम कहलाएगा। दोनों की राशियों में राशि तत्व की मित्रता नहीं है। अभिषेक की मीन राशि जल तत्वीय और ऐश्वर्या की धनु राशि अग्नि तत्वीय है। एक दूसरे से चैथी एवं दसवीं होने के कारण ये राशियां सुखमय जीवन का स्पष्ट संकेत देती हैं। गण मैत्रीपूर्ण है। गण मैत्रीपूर्ण होने से वर वधू में प्रीति बनी रहती है। दोनों की राशियों का स्वामी गुरु होने से विवाह अति शुभ होता है। वर का शुक्र जिस राशि में बैठा हो वही राशि कन्या की हो, तो शुभ मानी जाती है। अभिषेक बच्चन का शुक्र धनु में स्थित है और ऐश्वर्या की राशि धनु ही है, अतः शुभ है। ऐश्वर्या का शुक्र भी धनु लग्न और धनु राशि में ही स्थित है। किंतु एक का सप्तमेश अष्टम भाव में और दूसरे का द्वादश में होना शुभ नहीं कहा जा सकता। दोनों की पत्रियों में पापी ग्रह राहु की पूर्ण दृष्टि सप्तम भाव पर होने के कारण वैवाहिक जीवन में क्लेश की संभावना रहती है। ऐश्वर्या राय की राहु ग्रह की 18 वर्षीय महादशा चल रही है। राहु आकस्मिकता का द्योतक है। यह आश्चर्यजनक रूप से उन्नति के सर्वोच्च शिखर पर पहुंचा देता है तो अचानक धराशयी भी कर सकता है। कैरियर में अवरोध बन सकता है। अभिनेता अभिषेक की शुक्र की महादशा चल रही है जो लग्नेश की महादशा है। यह उनके लिए 3.1.2011 तक शुभ फलदायक है। कुंडली का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि फिल्म जगत का ग्रह शुक्र है। अभिषेक का लग्नेश शुक्र तृतीय भाव में बैठा है जो प्रसिद्धि और धन दिलाने में पूर्ण रूपेण सक्षम है। उनकी पत्नी का आयेश भी शुक्र है, अतएव पत्नी से भी उन्हें धन समृद्धि प्राप्त होती रहेगी। उनकी शुक्र की महादशा भी चल रही है जो उन्हें वैवाहिक जीवन में पूर्ण सुख की प्राप्ति कराएगी। दोनों का स्वास्थ्य सदा अच्छा रहेगा। कैरियर, व्यवसाय आदि उत्तम रहेंगे। परिजनों एवं संबंधियों के साथ व्यवहार स्नेहपूर्ण रहेगा। धन की प्रचुरता रहेगी।



शिव शक्ति   जुलाई 2007

शिव कौन है ? शक्ति बिना शव है शिव , शिव शक्ति के स्त्रोत, वेदों में शिव का स्वरूप, श्विया पूजन का महात्मय, कालजयी महामृत्युंजय मन्त्र, शिव और तन्त्र शास्त्र का सम्बन्ध, तंत्र शास्त्र शिव प्रणीत है और तीन भावों में विभक्त हैं- आगम, यामल और मुख्य

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