(4 लेख)
ज्योतिष की आर्ष पद्धति

अप्रैल 2004

व्यूस: 1797

वैदिक ग्रंथों तथा वेदांग ज्योतिष का अध्ययन करने से स्पष्ट होता है कि भारत में नक्षत्र ज्ञान अपने उत्कर्ष पर रहा है। इसी कारण नक्षत्र ज्ञान तथा नक्षत्र विद्या का अर्थ ‘ज्योतिष’ माना जाने लगा। ज्योतिष का प्रचलित अर्थ हुआ वह षास्त्र ... और पढ़ें

ज्योतिषनक्षत्र

आवश्यकता है शोध की

जुलाई 2007

व्यूस: 1536

पिछले कुछ दषकों सेे काल सर्प योग धूमकेतु के समान भारतीय फलित ज्योतिष पर छाया हुआ है। इस योग का जनमानस पर इतना अधिक प्रभाव हुआ है कि अल्पज्ञ, या अर्ध शिक्षित ज्योतिषी भी इसके लक्षण, उपलक्षण, फलित तथा अनिष्ट और अरिष्ट फलों का बखान अ... और पढ़ें

ज्योतिष

मंगल दोष परिहार

जुलाई 2015

व्यूस: 1496

ज्योतिष ग्रंथों में बताये गये मांगलिक दोषों के परिहारों के आधार पर भावी वर एवं वधू की कुंडलियों में मांगलिक दोष होने पर मंगल दोष समाप्त हो जाता है, परंतु इसमें भी यह देखना आवश्यक ह ै कि दा ेष समान रूप से हो।... और पढ़ें

ज्योतिषग्रहभविष्यवाणी तकनीक

अंक एवं आपरेशन दुर्योधन

अप्रैल 2006

व्यूस: 483

अंकों का प्रभाव समकालीन घटनाओं पर प्रत्यक्ष रूप से देखा जा सकता है। वर्ष 2005 के अंतिम मास में खोजी पत्रकारों ने 2 ऐसी घटनाओं का पता लगाया जिन की गूंज स्वतंत्र भारत के इतिहास में सदैव गूंजती रहेगी। पहली घटना आपरेषन दुर्योधन... और पढ़ें

अंक ज्योतिषभविष्यवाणी तकनीक

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