शनि का सिंह राशि में प्रवेश : शुभ या अशुभ

शनि का सिंह राशि में प्रवेश : शुभ या अशुभ  

शनि 15 जुलाई 2007 को 28 बजकर 45 मिनट पर कर्क से सिंह राशि में प्रवेश कर रहा है और 9 सितंबर 2009 तक इसी राशि में रहेगा। कर्क राशि में अधिकांशतः शनि ने मानसिक कष्ट एवं तनावयुक्त वातावरण रखा। जिन किन्हीं जातकों की साढ़ेसाती या ढैया चल रही थी उन्होंने अत्यंत मानसिक कष्ट झेले। उन सबको अब एक विशेष शांति का अनुभव प्राप्त होगा। सिंह राशि सूर्य की राशि है एवं शनि सूर्य का पुत्र है, लेकिन बिगड़ा हुआ है, जिसे सूर्य की अवज्ञा में कोई कष्ट महसूस नहीं होता। लेकिन सूर्य शनि को सर्वदा पुत्र समझते हुए उसकी रक्षा ही करते हैं और उसे केवल अपना पुत्र ही समझते हैं और उसके क्रूर स्वभाव को भी नजर अंदाज कर देते हैं। सिंह राशि में शनि का यह गोचर केवल कन्या एवं मकर राशियों के लिए अशुभ रहेगा अन्यथा सभी राशियों के लिए शुभ रहेगा। विशेषकर मिथुन राशि वालों के लिए साढ़ेसाती पूर्णतया समाप्त हो जाएगी और वे आगे अपने कर्म क्षेत्र में सफलता प्राप्त करेंगे। वृष राशि के लिए शनि का यह गोचर कोई विशेष संताप लेकर नहीं आएगा बल्कि कुछ शांति प्रदायक ही सिद्ध होगा, क्योंकि तीसरे भाव में कर्क के शनि की तुलना में चतुर्थ में सिंह का शनि कम तनाव देता है। कन्या व मकर राशियों के जातकों को कर्म व आर्थिक क्षेत्रों में कुछ कष्ट दे सकता है। यदि संभव हो, तो अपनी पूंजी का बहुत सोच समझकर ही निवेश करें। कर्क व सिंह राशियों के जातकों की साढ़ेसाती अभी जारी रहेगी लेकिन फिर भी शनि के इस राशि परिवर्तन से उन्हें कुछ शांति ही मिलेगी क्योंकि कर्क राशिगत शनि अधिक कष्टदायक है। लेकिन उन्हें शनि की शांति के उपाय जारी रखने चाहिए ताकि उसके किसी महा प्रकोप से बचाव हो सके। शनि के राशि परिवर्तन का विभिन्न राशियों पर प्रभाव इस प्रकार है: मेष: शनि की लघु ढैया समाप्त होने के कारण इस राशि के जातकों को मानसिक शांति मिलेगी, घर का वातावरण अनुकूल होगा, नए काम बनेंगे और आय के स्रोत बढ़ेंगे। वृष: शनि का तीसरे भाव में कोई शुभ बल नहीं था व अशांति बनी हुई थी। लेकिन अब शनि के राशि परिवर्तन से उसमें कुछ कमी आएगी। नए वाहन खरीदने का योग बनेगा। आवास परिवर्तन की भी संभावना है। अविवाहितों के विवाह के योग बनेंगे। मिथुन: साढ़ेसाती पूर्णतया समाप्त हो जाने के कारण शनि का राशि परिवर्तन शांति एवं सौभाग्यवर्धक होगा। अब आप बेहिचक नए काम और पूंजी निवेश शुरू कर सकते हैं, चहुमुखी लाभ मिलेंगे। कर्क: साढ़ेसाती का मुख्य प्रकोप अब शांत होता नजर आएगा। बिगड़े काम संवरने लगेंगे। शनि की शांति के उपाय करते रहें ताकि सर्वाधिक लाभ प्राप्त हो और कष्ट दूर हो सके। कुछ अचानक लाभ के भी योग बनेंगे। सिंह: आपकी साढ़ेसाती का प्रथम एवं सबसे कष्टदायक भाग समाप्त होने जा रहा है इसलिए काफी शांति का अनुभव करेंगे। लेकिन अभी यदा कदा कष्ट व मानसिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है, अतः शनि की आराधना जारी रखें। कन्या: आपकी साढ़ेसाती शुरू होने जा रही है। शनि के प्रकोप को कम करने के लिए दान, मंत्र जप, देव दर्शन आदि का सहारा लें अन्यथा बड़ी हानि होने की संभावना है। जुए, शराब व सट्टेबाजी से दूर रहें और पूंजी का बहुत सोच समझकर ही निवेश करें। किसी एक परियोजना में बहुत अधिक धन निवेश न करें। हो सके तो पत्नी व बच्चों के नाम से कारोबार करें। तुला: शनि का सिंह में प्रवेश आपके लिए अति लाभदायक रहेगा। समय का सदुपयोग करें और शुभ समय का पूर्ण लाभ प्राप्त करने का यत्न करें। वृश्चिक: आपके नए काम शुरू होने की प्रबल संभावनाएं हैं। सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति हो सकती है। कर्मप्रधान बनें और शुभ समय का पूर्ण लाभ उठाएं। धनु: पिछला समय काफी कष्टमय रहा होगा। शनि के राशि परिवर्तन से सभी कष्ट अनायास दूर हो जाएंगे, कारोबार चलने लगेगा। यदि कार्य में कोई परेशानी रही है, तो वह दूर हो जाएगी। आने वाला समय बहुत अच्छा है। समय का सुदपयोग करें। मकर: शनि का राशि परिवर्तन आपके लिए शुभ नहीं है। उत्तेजना से बचें, धैर्य बनाए रखें। अपने वरिष्ठ से किसी प्रकार का विवाद आदि न करें। शनि के दोष के शमन के लिए सरसों के तेल का छायादान तथा हनुमान चालीसा व सुंदरकांड का पाठ करें। कुंभ: समय शुभ है। लंबी यात्राएं हो सकती हैं। साझीदार को विश्वास में रखें। धन लाभ के अच्छे आसार हैं। मीन: शत्रुओं का शमन होगा, रुके हुए काम बनेंगे और कार्य क्षेत्र में विस्तार होगा। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। बहुत अधिक परिश्रम से बचें। भारत की राशि कर्क है व चंद्र के साथ सूर्य, शनि, बुध व शुक्र ग्रह तीसरे भाव में स्थित हैं। इस प्रकार भारत पर शनि की साढ़ेसाती पूर्ण प्रभाव के साथ विद्यमान है, लेकिन शनि के सिंह में प्रवेश करने के साथ इस साढ़ेसाती का शुभ प्रभाव नजर आएगा व चहुमुखी विकास तेजी से होगा। कर्क राशिगत शनि के कारण मुद्रास्फीति की दर अधिक रही, जो अब बहुत हद तक नियंत्रण में आ जाएगी। शनि का पूर्ण शुभ प्रभाव तो भारत की कुंडली में कन्या राशि में जाने पर ही होगा, लेकिन फिर भी सिंह राशि के शनि का फल बहुत संतोषजनक होगा। कुल मिलाकर भारत के लिए आने वाला समय स्वर्णिम काल होगा और देश की उन्नति से हर भारतवासी को लाभ मिलेगा।


शिव शक्ति   जुलाई 2007

शिव कौन है ? शक्ति बिना शव है शिव , शिव शक्ति के स्त्रोत, वेदों में शिव का स्वरूप, श्विया पूजन का महात्मय, कालजयी महामृत्युंजय मन्त्र, शिव और तन्त्र शास्त्र का सम्बन्ध, तंत्र शास्त्र शिव प्रणीत है और तीन भावों में विभक्त हैं- आगम, यामल और मुख्य

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