एक बच्चे का अपहरण

एक बच्चे का अपहरण  

व्यूस : 2889 | जुलाई 2007

हमारे एक परिचित के बच्चे का अपहरण 5.10.2006 को शाम सात बजे कानपुर में हो गया। उन्होंने अपनी ओर से हर संभव कोशिश की परंतु बच्चे के बारे में कुछ पता नहीं चला। तब उन्होंने ज्योतिष की शरण ली और दो प्रश्न पूछे-

1. जीवित है या नहीं ?

2. बच्चे के बारे में सूचना कब मिलेगी ? बच्चे का बीजांक 99 है जिसके आधार पर बनी कुंडली का विश्लेषण इस प्रकार है। क्योंकि यह प्रश्न बच्चे के पिता ने किया था इस कारण पंचम भाव को लग्न मानकर प्रश्न का उत्तर ढूंढना पड़ेगा। यह भी समझना होगा कि अपहरण में क्या होता है।

- अपहरण किसी लाभ के लिए किया जाता है।

- अपहरण के लिए बल प्रयोग होता है।

- बच्चे को किसी बंद कमरे में रखा जाता है।

- बच्चा परिवार से अलग होता है। अपहरणकर्ता को लाभ होता है तो पंचम भाव अर्थात सप्तम से एकादश भाव से संबंध होना चाहिए। दूसरा बल प्रयोग मंगल दर्शाता है। तीसरा एक कमरे में बंद अर्थात लग्न से द्वादश भाव। चैथा परिवार से अलग अर्थात लग्न से द्वितीय भाव से द्वादश लग्न भाव को देखना चाहिए। क्योंकि यह प्रश्न जातक के पिता ने किया था, प्रश्नकर्ता लग्न से पंचम भाव जातक हुआ। प्रश्न कुंडली में चंद्र गुरु की राशि में एकादश भाव में स्थित है। चंद्र से सप्तम भाव में सूर्य, मंगल, शुक्र व बुध स्थित हैं। सूर्य चतुर्थ भाव अर्थात पंचम से द्वादश भाव का स्वामी है। (एक कमरे में बंद) मंगल बल प्रयोग, शुक्र पंचम से द्वितीय भाव (परिवार) से द्वादश (अलग होना) भाव में स्थित है।

बुध लग्नेश है अर्थात प्रश्न कुंडली प्रश्न का प्रतिनिधित्व कर रही है। अब यह देखना है कि जातक जीवित है या मर गया है। मृत्यु तब होती है जब लग्न के कस्प के उप स्वामी का मारक व बाधक के स्वामियों से संबंध होता है। पंचम भाव के कस्प का उप स्वामी मंगल और उप उप स्वामी राहु है। बीजांक कुंडली के अनुसार उप स्वामी शनि और उप उप स्वामी शुक्र है। उप स्वामी शनि द्वितीय, षष्ठ, सप्तम, एकादश व द्वादश भाव का कारक ग्रह है। सप्तम व द्वितीय भाव मारक होते हैं। द्वादश भाव परिवार से बिछोह को दर्शाता है। यदि धनु राशि को लग्न मान कर देखें तो शनि द्वितीय भाव का स्वामी होकर द्वादश भाव में स्थित है जो धनु से अष्टम भाव है जो बिछोह की ओर संकेत देता है।

धनु से सप्तम भाव मिथुन मारक व बाधक भाव है जिसका कारक ग्रह शनि है। शनि बुध के नक्षत्र पर स्थित है अर्थात शनि जातक के परिवार से बिछोह का पूर्ण प्रतिनिधित्व कर रहा है। जातक के बारे में सूचना कब मिलेगी इसे तृतीय भाव के कस्प के उप स्वामी से देखते हैं। जातक का लग्न तुला व राशि धनु है। धनु से तृतीय भाव कुंभ हुआ जिसका स्वामी शनि है। कुंभ में राहु स्थित है। कुंभ के कस्प का उप स्वामी भी शनि है। राहु कुंभ राशि में स्थित होने के कारण शनि का प्रतिनिधित्व करेगा। राहु धुआं है जो फल को कभी भी स्पष्ट नहीं होने देता है अर्थात जातक के बारे में सूचना मिलेगी या नहीं मिलेगी की स्थिति बनी रहेगी। किंतु हम देख चुके हैं कि शनि का संबंध एकादश भाव से भी है जिसका अर्थ है कि पिता को सूचना मिलेगी परंतु बहुत समय के बाद।

लग्न पिता का उप स्वामी भी शनि है तथा उप उप स्वामी भी शनि है। इससे यह संकेत मिलता है कि पिता को जातक की सूचना न मिलने के कारण बहुत दुख सहना पड़ेगा। अपहरण के समय जातक की दशा चंद्र/राहु/राहु चल रही थी। शनि कर्क, गुरु तुला व राहु मीन राशि में गोचर कर रहा है। चंद्र दशमेश है तथा नवांश में लग्न में राहु के साथ नीच राशि में स्थित है। जन्म कुंडली में चंद्र, मंगल, सप्तमेश, शुक्र अष्टमेश के साथ तृतीय भाव में स्थित है जो अष्टम से अष्टम होने के फलस्वरूप मृत्यु के कारण व प्रकार की ओर संकेत देता है अर्थात चंद्र मारक हो सकता है।

राहु चंद्र से त्रिकोण में एकादश भाव में स्थित है तथा चंद्र को देख रहा है अर्थात चंद्र व राहु में घनिष्ठ संबंध है, वह फल देने में समर्थ है। चंद्र शुक्र के नक्षत्र में स्थित है। इस कारण चंद्र व राहु की अंतर्दशा मृत्यु का कारण बन सकती है। सप्तमेश व द्वितीयेश मंगल का साथ होना मृत्यु का द्योतक है। नवांश में मंगल शुक्र की राशि वृष में केतु के साथ सप्तम भाव में स्थित है। शनि दशम भाव में, राहु षष्ठ भाव में व नीचस्थ गुरु लग्न में गोचर कर रहा है। यह सब अनिष्ट की ओर ही संकेत दे रहे हैं।

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उच्च फलादेश तकनीक विशेषांक  जुलाई 2007


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