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वास्तु का कुंडली से सम्बन्ध

वास्तु का कुंडली से सम्बन्ध  

वास्तु शास्त्र: मूल सिद्धांत व उपयोगिता जय इन्दर मलिक वावास्तव में वास्तु शास्त्र में प्रकृति के नियमों और सिद्धांतों के अनुसार किसी भवन का निर्माण कहां होना चाहिए या किस दिशा में क्या बनना चाहिये और क्या नहीं बनना चाहिये, इसका मार्गदर्शन होता है। क्या करने से भवन के स्वामी के जीवन में सुख-शांति व समृद्धि आए इसकी व्याख्या भी वास्तु के सिद्धांत बखूबी करते हैं। इस लेख में वास्तु शास्त्र के मूल सिद्धांतों एवं उसकी वर्तमान जीवन में बढ़ती उपयोगिता पर प्रकाश डाला गया है। स्तु सिद्धांत के आधार पर ऐसा भवन निर्माण किया जा सकता है जो सर्व प्रकार से अनुकूल होने के साथ-साथ प्रकृति से भरपूर लाभ कराये। वास्तु आधारित निर्माण सुख समृद्धि का कारक है।


वास्तु विशेषांक  दिसम्बर 2012

फ्यूचर समाचार पत्रिका के वास्तु विशेषांक में वास्तुशास्त्र के सिद्धांत - वर्तमान समय में उपयोगिता, ज्योतिष, वास्तु एवं अंकशास्त्र के संयुक्त क्रियान्वयन की रूपरेखा, वास्तुशास्त्र एवं फेंगशुई- समरूपता एवं विभिन्नता, वास्तु पुरूष का प्रार्दुभाव एवं पूजन विधि, वास्तु शास्त्र का वैज्ञानिक दृष्टिकोण, भूखंड चयन की गणीतीय विधि, गृह निर्माण एवं सुख समृद्धि का वास्तु, वास्तु एवं फेंगशुई, वास्तु दोष कारण व निवारण, वास्तु एवं बागवाणी, वृक्षों व पौधों से वास्तु लाभ कैसे लें, वास्तु मंत्र, वास्तु शास्त्र एवं धर्म, वास्तुशास्त्र में शकुन एवं अपशकुन, लाभदायक वास्तु सामग्री, क्रिस्टल की उपयोगिता, फलादेश में अंकशास्त्र की भूमिका, पाइथागोरियन अंक ज्योतिष, वास्तु के अनुसार शेक्षणिक संस्थान, हवन प्रदूषण में कमी लाता है, मां त्रिपुर सुंदरी का चमत्कारी शक्तिपीठ, वास्तु परामर्श, वास्तु प्रश्नोतरी, विवादित वास्तु, यंत्र समीक्षा/मंत्र ज्ञान, हेल्थ कैप्सुल, अंक ज्योतिष के रहस्य, आदि विषयों पर गहन चर्चा की गई है।

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