भूखंड चयन की गणितीय विधि

भूखंड चयन की गणितीय विधि  

व्यूस : 4107 | दिसम्बर 2012
डाॅ भूखंड चयन की गणितीय विधि . निर्मल कोठारी कोई भी भूखंड हर किसी भी व्यक्ति के लिए भवन-निर्माण के लिए उपयुक्त नहीं होता है। नहीं? यह जानने की कुछ सरल विधि किसी स्थान पर भवन निर्माण उस व्यक्ति और उसके परिवार हेतु फलीभूत होगा भी अथवायां हमारे प्राचीन ग्रंथों में वर्णित की गई हैं। इन विधियों को आजमाकर कोई भी व्यक्ति किसी भूखंड के बारे में उचित निर्णय ले सकता है। प्रथम विधि: यह गणना ‘मुहूर्तराज’ नामक गं्रथ में बतायी गयी है। इसे निम्न बिंदुओं के अंतर्गत समझा जा सकता है। Û सर्वप्रथम भूखंड का क्षेत्रफल पता करें। यदि वह क्षेत्रफल पूर्ण संख्या में न हो तो उसे आगामी संख्या तक बढ़ाकर पूर्ण कर लें। जैसे- किसी भूखंड का क्षेत्रफल 508.5 हो तो उसे 509 कर लें। Û उपर्युक्त क्षेत्रफल नौ काॅलम वाली एक तालिका के (देखें तालिका नं. 1) खंड ‘प्’ के नौ खंडों में रख दें। अब इन ‘काॅलम’ के अंकों को क्रमशः 9, 9, 6, 8, 3, 8, 8, 4 तथा 8 से गुणा करें और गुणनफल की तालिका काॅलम ‘प्प्’ में रखें। Û अब काॅलम ‘प्प्’ में जो अलग-अलग अंक प्राप्त हुए हैं, उन्हें क्रमशः 8, 7, 9, 12, 8, 27, 15, 27 और 120 से भाग दें तथा भाग देने के पश्चात् जो शेषफल बचे उसे तालिका के काॅलम ‘प्प्प्’ में लिखें। Û इसके पश्चात तालिका के काॅलम ‘प्ट’ में क्रमशः आय, वार अंश, धन, ऋण, नक्षत्र, तिथि, योग और आयु लिखें। अंत में तालिका के काॅलम ‘ट’ में गणना का परिणाम लिखें। इसके लिए तालिका के काॅलम ‘प्प्प्’ के शेष अंकों को देखें। यदि शेषांक विषम संख्या में हो तो उसी की सीध में काॅलम ‘ट’ में अशुभ लिख दें और शेषांक सम संख्या में हो तब काॅलम ‘ट’ में उसी के समक्ष शुभ लिख दें। Û अब यदि कम से कम ‘आय’, ‘धन’, ‘योग’ और ‘आयु’ वाले खंड ‘शुभ’ दर्शा रहे हों, तब निश्चय ही वह भूखंड क्रय करना अथवा उस पर निर्माण करना शुभ होगा। यदि सभी काॅलम में शुभ सूचना प्राप्त हो तो ऐसे प्लाॅट को अवश्य खरीदना चाहिए। उस पर निर्माण कराना चाहिए। ऐसा भूखंड बहुत ही शुभ फलप्रद होंगे। द्वितीय विधि: यह एक अत्यंत ही सरल विधि है जो एक प्राचीन गं्रथ से लिया गया है। इस विधि से भी यह जाना जा सकता है कि भूखंड क्रय करना या निर्माण कार्य करवाना शुभ होगा अथवा अशुभ। इस विधि को निम्नलिखित बिंदुओं के आधार पर समझा जा सकता है- भूखंड का क्षेत्रफल पता करें। क्षेत्रफल वाली संख्या यदि पूरी हो तो ठीक है, नहीं तो उसके आगे वाली संख्या लें (प्रथम विधि के अनुसार)। Û अब भख्ू ाडं क े क्षत्रे फल म ंे क्रय कर्ता की राशि का गुणांक जोड़ें। विभिन्न राशियों के गुणांक तालिका संख्या-2 मंे दिए गये हंै। नोट: यदि भूखंड एक से अधिक लोगों के नाम से खरीदा जा रहा हो, तो सभी क्रय कर्ताओं के गुणांकों को क्षेत्रफल पूर्णांक में जोड़ें। Û क्षेत्रफल और राशि गुणांकों के योग के पश्चात जो योगांक प्राप्त हों उसमें उस स्थान अथवा माहे ल्ले क े गण्ु ााकं स े गण्ु ाा कर।ंे य े गुणांक तालिका-3 में दिये गये हैं- नोट- यदि किसी शहर या गांव या नगर में रहने वाला व्यक्ति उसी नगर में भूखंड खरीद रहा हो तब वहां ‘मोहल्ले’ का गुणांक गणना में लें और यदि वह किसी अन्य शहर में तालिका-3 क्र.संनक्ष् ात्र के नाम गुणांक 1 अश्विनी 1 2 भरणी 2 3 कृŸिाका 3 4 रोहिणी 4 5 मृगशिरा 1 6 आद्र्रा 2 7 पुनर्वसु 3 8 पुष्य 4 9 अश्लेषा 1 10 मघा 2 11 पु.फाल्गुनी 3 12 उ.फाल्गुनी 4 13 हस्त 1 14 चित्रा 2 15 स्वाति 3 16 विशाखा 4 17 अनुराधा 1 18 ज्येष्ठा 2 19 मूल 3

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