औद्योगिक संस्थान एवं फैक्ट्री (भाग-2)

औद्योगिक संस्थान एवं फैक्ट्री (भाग-2)  

निर्माण कार्य का प्रारंभ निर्माण कार्य का प्रारंभ उत्तर-पूर्व (ईशान) से उचित पूजा-पाठ के उपरांत करना चाहिए। निर्माण कार्य सुचारू रूप से दुर्घटना रहित चले इसके लिए वास्तु शास्त्र के कुछ नियमों एवं सिद्धांतों का परिपालन आवश्यक है। सबसे पहले उत्तर-पूर्व में बोरवेल अथवा अंडरग्राउंड वाटर टैंक का नर्माण करें। ऐसा करने से निर्माण कार्य में खर्च होने वाले धन की आपूर्ति सुचारू रूप से होती रहेगी। जब नींव की खुदाई प्रारंभ करें तो क्रम का ध्यान रखें। सर्वप्रथम उत्तर-पूर्व, फिर उत्तर-पश्चिम, तब दक्षिण-पूर्व तथा अंत में दक्षिण-पश्चिम में नींव की खुदाई करें। दीवारों के लिए गड्ढे की खुदाई उत्तर से दक्षिण तथा पूर्व से पश्चिम दिशा में करना चाहिए। नींव बनाने का कार्य विपरीत दिशा से प्रारंभ करना चाहिए अर्थात् पहले दक्षिण-पश्चिम, फिर दक्षिण-पूर्व तब उत्तर-पश्चिम एवं अंत में उत्तर-पूर्व में फाउंडेशन डाला जाना चाहिए। निर्माण कार्य के दौरान प्रतिदिन इस बात का ख्याल रखें कि राजमिस्त्री उत्तर की अपेक्षा दक्षिण की दीवार ऊंची बनाए। भवन निर्माण सामग्री, ईंट, पत्थर, बालू इत्यादि भूखंड के दक्षिण-पश्चिम भूभाग में रखना चाहिए। लोहे का सरिया एवं छड़ आदि पश्चिम भूभाग में रखना चाहिए। सैनिटरी पाइप एवं फिटिंग्स के सामान आदि भूखंड के उत्तर-पश्चिम कोने में रखना चाहिए। भूखंड के उत्तर एवं पूर्व की बजाय इस सामानों को दक्षिण एवं पश्चिम भूभाग में रखने से निर्माण कार्य तेजी से होता है तथा जल्दी पूरा हो जाता है। वाचमैन के लिए आउट हाउस दक्षिण-पूर्व कोने में पूर्व एवं दक्षिण दिशा से 2-3 फीट की दूरी पर बनाना लाभदायक है। कुआं अथवा बोरवेल के निर्माण के तुरंत बाद आउट हाउस का निर्माण कर लेना चाहिए। इसके उपरांत कम्पाउंड वाल (चारदीवारी) का निर्माण करना चाहिए फिर मुख्य निर्माण प्रारंभ करना चाहिए। रात्रि में एक बल्ब दक्षिण दिशा में सबसे उच्च स्थान पर जलाना चाहिए। इससे ऊर्जा बढ़ती है तथा निर्माण कार्य समय से पहले पूर्ण हो जाता है। कई बार ऐसा देखने में आता है कि किसी भूखंड के खरीदने के तुरंत बाद से कई प्रकार की परेशानियां प्रारंभ हो जाती हैं। या तो निर्माण कार्य में विलंब हो जाता है अथवा बार-बार किसी कारण से कार्य को रोकना पड़ता है अथवा विवाद तथा लड़ाई-झगड़े प्रारंभ हो जाते हंै। यदि ऐसी परिस्थिति पैदा होती है तो वास्तु सिद्धांतों के अनुरूप आपको यह सलाह है कि आप हल-बैल से परंपरागत रूप से खेत की जुताई करें। यदि जुताई के दौरान बाल, हड्डियां, नाखून एवं अन्य नकारात्मक चीजें मिलें तो उन्हें निकाल दें तथा भूखंड की पुनः जुताई करें साथ ही वास्तु पूजा, सुदर्शन होम एवं शांति पूजन करवाएं। उत्पादन ब्लाॅक भूखंड में मुख्य मशीनें दक्षिण-पश्चिम में रखें तथा उत्तर एवं पूर्व दिशा में अधिकाधिक खुली जगह छोड़ें। उत्पादन ब्लाॅक आकार में वर्गाकार अथवा आयताकार होना चाहिए। उत्पादन ब्लाॅक के चारों ओर रास्ता होना अच्छा है क्योंकि इससे न सिर्फ आवागमन में सुविधा होती है बल्कि ऊर्जा का सम प्रवाह भी होता है। भारी मशीनें उत्पादन ब्लाॅक के दक्षिण एवं पश्चिम भाग में तथा हल्की मशीनें उत्तर एवं पूर्व भाग में स्थापित की जानी चाहिए। इलेक्ट्रिक मोटर, मेन स्विच, बोर्ड इत्यादि उत्पादन ब्लाॅक के दक्षिण-पूर्व में लगाना चाहिए। कच्चे माल एवं भारी सामग्रियों का स्टाॅक उत्पादन ब्लाॅक के दक्षिण अथवा दक्षिण-पश्चिम हिस्से में रखना चाहिए। उत्तर-पूर्व क्षेत्र को यथासंभव साफ-सुथरा एवं हल्का रखना आवश्यक है। प्रशासनिक ब्लाॅक प्रशासनिक ब्लाॅक कारखाने के उत्तरी क्षेत्र में अवस्थित होना चाहिए। प्रशासनिक ब्लाॅक की उंचाई उत्पादन ब्लाॅक से कम होनी चाहिए। फैक्ट्री का निर्माण इस प्रकार किया जाना चाहिए कि दक्षिणी भाग की उंचाई हमेशा पश्चिमी भाग से अधिक हो। तिरछी छत होने की स्थिति में इसकी ढलान पश्चिम से पूर्व तथा दक्षिण से उत्तर की ओर होनी चाहिए। किसी भी परिस्थिति में निर्मित कोई भी भवन चारदीवारी से छूना नहीं चाहिए। प्रशासनिक ब्लाॅक पउ.प. उ. उ.पूद.प. द. द.पूपूचेयरमैन, निदेशक, उच्च अधिकारी आदि के बैठने की व्यवस्था प्रशासनिक ब्लाॅक के दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में होनी चाहिए। कैशियर, एकाउन्टेंट की व्यवस्था उत्तरी भाग में की जा सकती है तथा रिसर्च एंड डवलपमेंट विभाग प्रशासनिक विभाग के उत्तर-पूर्व हिस्से में होना वास्तु सम्मत है। सेल्स स्टाफ की व्यवस्था ब्लाॅक के उत्तर-पश्चिम में की जा सकती है। कैन्टीन की व्यवस्था प्रशासनिक ब्लाॅक के दक्षिण-पूर्व में करना उचित है। औद्योगिक प्रतिष्ठान की सामान्य योजना: दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र का और भागों से ऊंचा होना हर जगह लागू होता है। भारी मशीन दक्षिण एवं पश्चिम तथा हल्की मशीनें उत्पादन ब्लाॅक के उत्तर एवं पूर्व में व्यवस्थित की जा सकती हैं। बाॅयलर, ट्रांसफाॅर्मर, बिजली के उपकरण, भट्ठी, एसिड टैंक, कैंटीन आदि फैक्ट्री के दक्षिण-पूर्व भाग में होना चाहिए। रसायन, सेप्टिक टैंक, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट उत्तर-पश्चिम अथवा दक्षिण-पूर्व के क्षेत्र में बनाये जा सकते हैं। इनकी उत्तर-पूर्व एवं दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में स्थिति विभिन्न प्रकार की समस्याओं जैसे धन हानि, फैक्ट्री में तालाबंदी एवं विकास का अवरूद्ध हो जाना आदि को जन्म देता है। टाॅयलेट, गेस्ट रूम, सर्वेंट क्वार्टर, निर्मित सामानों का स्टोरेज, गैरेज, पैकिंग यूनिट आदि फैक्ट्री के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में बनाना चाहिए। निर्मित सामानों की लोडिंग अथवा डिलीवरी के लिए उत्तर-पश्चिम के पश्चिम में द्वार बनाना चाहिए। इससे निर्मित सामानों के यथाशीघ्र बिक जाने तथा धन के आगमन में सहायता मिलती है। ओवरहेड टैंक मुख्य भवन के दक्षिण-पश्चिम के पश्चिम में स्थापित करना चाहिए। इससे फैक्ट्री के मालिक एवं फैक्ट्री को स्थायित्व मिलता है। वजन करने की मशीन उत्तर-अथवा पूर्व दिशा में चारदीवारी से थोड़ी दूरी पर होनी चाहिए। उत्पादन प्रवाह वास्तु के अनुसार उत्पादन का प्रवाह दक्षिण से उत्तर की ओर होना चाहिए। अधात्विक वस्तुओं के लिए उत्पादन प्रवाह पश्चिम से पूर्व की ओर होना चाहिए। अर्ध निर्मित वस्तुएं पश्चिम क्षेत्र के केंद्र में तथा पूर्ण निर्मित उत्पाद उत्तर-पश्चिम में रखा जाना चाहिए। स्टाफ क्वार्टर कर्मचारियों के लिए स्टाफ क्वार्टर पश्चिम से उत्तर-पश्चिम के बीच अथवा उत्तर से उत्तर-पश्चिम के बीच के क्षेत्र में बनाना चाहिए। उच्च प्रबंधकीय कर्मचारियों के लिए रहने की व्यवस्था दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व में की जा सकती है। स्टाफ क्वार्टर उत्तर-पूर्व में बनाना वर्जित है क्योंकि इससे यह क्षेत्र भारी हो जायेगा। साथ ही स्टाफ क्वार्टर के साथ बने टाॅयलेट से भूखंड का यह सबसे शुभ भाग प्रदूषित हो जाएगा। स्टाफ क्वार्टर दक्षिण-पश्चिम में भी बनाना वास्तु सम्मत नहीं है क्योंकि इस क्षेत्र मे क्वार्टर बनाने से कर्मचारी बहुत अधिक हावी एवं शक्तिशाली हो जाएंगे जो कि फैक्ट्री के स्वास्थ्य के लिए हितकर नहीं है। गार्ड रूम सुरक्षा कर्मचारियों के लिए गार्ड रूम की व्यवस्था उत्तर-पूर्व के दक्षिण भाग में की जा सकती है यदि गेट उत्तर-पूर्व के पूर्व है। यदि गेट उत्तर-पूर्व के उत्तर है तो गार्ड रूम उत्तर-पूर्व के पश्चिम में बनाना चाहिए। सुरक्षा कर्मचारियों का मुंह सदैव उत्तर अथवा पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। वजन करने की मशीन वजन करने की मशीन फैक्ट्री के मुख्य द्वार के समीप पूर्वी क्षेत्र के मध्य अथवा उत्तरी क्षेत्र के मध्य में अवस्थित होना चाहिए। कुछ ध्यान देने योग्य बातें - टाॅयलेट उत्तर-पूर्व में कभी नहीं बनाएं। यह आपके सम्मान एवं धन दोनों को बर्बाद कर देगा। - उत्तर-पूर्व कोने में कटाव आपके उत्पाद को आउटडेटेड बना देता है जो अन्ततः दिवालियेपन का कारण बनता है। - उत्तर पूर्व में भारी वजन नये आविष्कारों एवं नई सोच को रोक देता है। - भवन का उत्तर-पूर्व ऊंचा होना दुर्भाग्य एवं बदनामी का द्योतक है। - उत्तर-पूर्व में ओवरहेड टैंक विकास को अवरूद्ध करता है। - उत्तर-पूर्व में जेनरेटर होने से फैक्ट्री में आग लगने की संभावना प्रबल होती है। - सीढ़ियां दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में होना चाहिए। - बेसमेंट पूर्व, उत्तर अथवा उत्तर-पूर्व कोने में बनाया जा सकता है। - फैक्ट्री के उत्तर-पूर्व एवं मध्य हिस्से में किसी भी तरह का भारी सामान रखना वर्जित है। - निर्माण में काॅलम एवं बीम की संख्या हमेशा सम होनी चाहिए। - बीम मशीन अथवा कर्मचारियों के ऊपर से नहीं गुजरना चाहिए। -पूजा रूम अथवा मंदिर उत्तर-पूर्व के कोने में बनाना चाहिए तथा इसे हमेशा साफ-सुथरा रखना चाहिए। - पानी का बहाव उत्तर, पूर्व अथवा उत्तर-पूर्व की तरफ होना चाहिए। - यदि फैक्ट्री में लाॅन चाहते हैं तो इसके लिए उत्तर एवं पूर्व हिस्सा उपयुक्त है। - पार्किग की व्यवस्था मुख्य रूप से उत्तर-पश्चिम या उत्तर में करनी चाहिए।


साईं विशेषांक  मई 2015

फ्यूचर समाचार का साँई बाबा विशेषांक विेश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु श्री शिरडी साँई बाबा से सम्बन्धित सर्ब प्रकार की जानकारी देता है। इस विशेषांक में आपको साँई बाबा के उद्भव, बचपन, आध्यात्मिक शक्तियाँ, महत्वपूर्ण तथ्य, सबका मालिक एक व श्रद्धा और सबुरी जैसी लोकप्रिय शिक्षाओं की व्याख्या, साँई बाबा के चमत्कार, विश्व प्रसिद्ध सन्देश, साँई बाबा की समाधि का दिन तथा शीघ्र ब्रह्म प्राप्ति आदि अनेक विषयों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी। इसके अतिरिक्त महत्वपूर्ण व ज्ञानवर्धक लेख विवाह संस्कार, वास्तु परामर्श, फलित विचार, हैल्थ कैप्सूल तथा पंचपक्षी आदि को भी शामिल किया गया है। सत्यकथा, विचार गोष्ठी और ज्योतिष व महिलाएं इस विशेषांक के मुख्य आकर्षण हैं।

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