दो नावों में पैर

दो नावों में पैर  

निकिता और विनीत का विवाह बारह वर्ष पूर्व हुआ था। विनीत एक डाक्टर था। दोनों का जीवन अत्यंत सुखी था और उनका एक प्यारा सा बेटा भी था। पर विवाह के लगभग 6-7 वर्ष पश्चात अचानक निकिता को लगा कि विनीत अब कुछ अधिक ही देर से घर आने लगा था और घर में उसकी दिलचस्पी भी बहुत कम हो गई थी। किसी भी बात का जवाब देना वह जरूरी नहीं समझता था। धीरे-धीरे यह सिलसिला रात को भी चलने लगा और पूरी-पूरी रात विनीत घर से बाहर रहता । निकिता समझ नहीं पाती कि वह ऐसा क्यों कर रहा है। और जब उसने ज्यादा जवाब तलब किया, तो विनीत ने उसे शारीरिक रूप से प्रताड़ित करके अपनी मर्दानगी दिखाई। निकिता ने जब उसके दोस्तों से पूछताछ की, तो पता चला कि विनीत आजकल ड्रग्स के चक्कर में पड़ गया है तो मानो उसके पैरों तले की जमीन खिसक गई। उसने अत्यंत धैर्य से काम लेते हुए विनीत को बहुत समझाया और उसका साथ निभाने की पूरी कोशिश की पर विनीत अपनी आदत नहीं छोड़ पाया और अंततः न चाहते हुए भी उसने विनीत से सन् 2002 में तलाक ले लिया। अपने पुत्र को निकिता ने अपने साथ रखा और अपनी नई दुनिया बसाने की कोशिश करने लगी। अपनी नई नौकरी में उसकी मुलाकात माइकेल से हुई। माइकेल ने उसकी काफी मदद की और धीरे-धीरे उसका दिल भी जीत लिया। माइकेल भी तलाकशुदा जीवन बिता रहा था और दोनों को अपने जीवन साथी की तलाश थी, इसलिए दोनों ने सोच समझ कर एक साथ विवाह सूत्र में बंधने का फैसला ले लिया। 2004 में निकिता ने माइकेल से विवाह किया और कनाडा में जाकर बस गई। जहां उसे एक और पुत्र की प्राप्ति हुई। माइकेल की प्रथम पत्नी कनाडा में ही थी और तलाक होने के बावजूद वह माइकेल को नहीं भूल पाई थी और वह लगातार उससे मिलने की कोशिश में लगी रहती। धीरे-धीरे माइकेल का झुकाव भी उसकी ओर फिर से बढ़ने लगा और निकिता को फिर से अपनी जिंदगी में खालीपन का अहसास होने लगा। उधर अचानक विनीत, जिसने निकिता के वियोग में ड्रग्स छोड़ दिया था और दूसरा विवाह भी कर लिया था, फिर से निकिता से संपर्क कर रहा था और उससे विनती कर रहा था कि वह फिर से उसके जीवन में आ जाए। यह कैसी विडंबना है कि विनीत निकिता का साथ फिर से चाहता है, निकिता अपने दूसरे पति माइकेल को वापस चाहती है और माइकेल अपनी प्रथम पत्नी के पास फिर से लौटना चाहता है। कहते हैं सारे रिश्ते नाते कच्चे धागों की तरह नहीं होते, जिन्हें हम आसानी से तोड़ सकें। तीनों परिवारों के लोग अलग तो हो गए पर अपनी यादों और संबंधों को नहीं भूल पाए और वे रिश्ते इतने मजबूत थे कि वे सभी एक दूसरे से फिर से जुड़ना चाहते हैं। लेकिन आज जब उन्होंने दूसरा बसेरा बना लिया है, तो इन रिश्तों को फिर से कायम करना बेमानी है। आइए, करें आकलन इन कुंडलियों के आपसी रिश्तों का। निकिता की कुंडली में ज्योतिष के वे योग घटित हो रहे हैं जो ज्योतिष ग्रंथों में पुरुष जातक को माध्यम बना कर लिखे गए हैं, लेकिन फलित करते समय ये योग दोनों के लिए समान रूप से मान्य हैं। निकिता की कुंडली में बहु विवाह योग घटित हो रहा है। सर्वार्थ चिंतामणि के अनुसार कुटुंब कलत्रनायाभ्यां समेतैग्र्रहनाय कैर्वा कलत्र संख्यां प्रवदन्ति सन्त इस श्लोक के अनुसार ही उसकी कुंडली में कुटुंबेश गुरु के साथ दो अन्य ग्रह सूर्य एवं बुध की चतुर्थ भाव में युति है, जिसके फलस्वरूप उसके दो विवाह हुए। सप्तम भाव में पाप ग्रह मंगल और चंद्र की युति भी दो विवाह का योग बना रही है जैसा कि स्त्री जातक में लिखा गया है। उसकी कुंडली में सप्तमेश ग्रह शुक्र की मित्र राशि में तथा कुटुंबेश गुरु की केंद्र में स्थिति और सप्तम स्थान में लग्नेश मंगल तथा भाग्येश चंद्रमा की युति के कारण उसने विनीत को सुधारने का हर संभव प्रयत्न किया इस क्रम में उसने बहुत संयम भी रखा और इतने साल विनीत के साथ बिताए पर अंततः कोई आशावादी नतीजा न निकलने पर ही उससे अलग होने का फैसला किया। दूसरी ओर उसकी कुंडली में सप्तम स्थान में स्थित मंगल प्रबल मंगली योग बना रहा है। चंद्रमा की युति वैवाहिक जीवन में अस्थिरता का संकेत दे रही है। जिस समय निकिता विनीत से अलग हुई, उस समय राहु में चंद्रमा की ही अंतर्दशा चल रही थी और जब दूसरा विवाह हुआ, उस समय राहु में मंगल की अंतर्दशा चल रही थी। अर्थात उसके वैवाहिक जीवन में मंगल और चंद्र की भूमिका अहम रही। गुरु की महादशा आरंभ होने पर निकिता का विवाह माइकेल से हुआ और पुत्र रत्न की प्राप्ति भी हुई। पर वर्तमान समय में गुरु की महादशा में शनि की अंतर्दशा जब से आरंभ हुई है, उनके वैवाहिक जीवन में कुछ अशांति आई है और उसे यह महसूस हो रहा है कि माइकेल अब उसमें उतनी रुचि नहीं ले रहा और प्रथम पत्नी की ओर अधिक आकर्षित है। इसका मुख्य कारण शनि की अंतर्दशा है और शनि लग्न से अष्टम भाव में स्थित है। परंतु अक्तूबर 2006 में, जब गुरु लग्न में भ्रमण करेगा और लग्न से दशम भाव में शनि स्थित होगा, तब माइकेल के साथ संबंध सुधरेंगे लेकिन माइकेल की जन्म राशि पर गुरु का चलन और चंद्रमा की महादशा सप्तमेश सूर्य उच्च राशि में स्थित होकर निकिता से लाभ का संकेत दे रहा है। सप्तम भाव से सप्तम भाव में गुरु लग्न में दो पाप ग्रहों के मध्य पापकर्तरी योग से पीड़ित है। षष्ठेश चंद्रमा सूर्य के साथ अस्त हुआ है और षष्ठ भाव में राहु पर शनि की दृष्टि है। राहु की महादशा में मन कारक ग्रह चंद्रमा का प्रभाव होने से वह ड्रग्स से चक्कर में पड़ा और मानसिक रूप से पीड़ित रहा और राहु की महादशा में शनि की अंतर्दशा में पत्नी से तलाक हुआ। उस समय राहु उसकी जन्म राशि मेष पर गोचर में भ्रमण कर रहा था। लग्न में गुरु सप्तम भाव को देख रहा है और राहु की महादशा में बुध की अंतर्दशा में विनीत का दूसरा विवाह हुआ क्योंकि 2006 में गोचर में गुरु चंद्र लग्न से सप्तम भाव में भ्रमण कर रहा है। चंद्र लग्न से सप्तम भाव का स्वामी शुक्र बुध के साथ सुख भाव में स्थित है। विनीत के सप्तम के स्वामी सूर्य का उच्च राशि में होने के कारण उसे पत्नी से आर्थिक सुख प्राप्त हुआ, लेकिन दूसरी पत्नी से इस सुख के अभाव के कारण वह फिर से उसकी ओर आकर्षित हो रहा है। माइकेल की कर्क लग्न की कुंडली है और प्रायः कर्क लग्न वालों को दाम्पत्य सुख की अक्सर कमी रहती है। उसकी कुंडली में कलत्र कारक शुक्र सप्तम भाव में अस्त है और सप्तम भाव में सूर्य शनि की दृष्टि में है सूर्य की महादशा में उसका पहली पत्नी से तलाक हुआ परंतु सप्तमेश शनि पर गुरु की दृष्टि के कारण सूर्य की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा में फिर से उसका अपनी पहली पत्नी की तरफ झुकाव हो रहा है। लग्नेश चंद्र, जो मन का कारक है, दो शुभ ग्रहों गुरु और बुध के मध्य शुभकर्तरी योग में शुभ फल देने में सक्षम है। इसलिए चंद्रमा की महादशा में भी उसका मन पहली पत्नी की ओर जाना स्वाभाविक है। अंततः यही कहना चाहूंगी कि पुरुष अथवा स्त्री भावावेग में आकर चाहे एक विवाह करें या अधिक, दाम्पत्य सुख का भोग निश्चित रूप से ग्रहों की स्थिति पर ही निर्भर करता है। अप्रत्यक्ष रूप से हम सब ग्रहों के धागों से बंधे कठपुतली की तरह कार्य करते हैं परंतु हमें अपनी बुद्धि विवेक का साथ एवं संयम कभी नहीं छोड़ना चाहिए। सद्बुद्धि, सत्कर्म एवं सन्मार्ग पर चल कर ही पूजा पाठ, रत्न एवं मंत्र द्वारा हम अपने ग्रहों को अनुकूल बना सकते हैं। त नोट: यह कथा सत्य है लेकिन पात्रों के नाम काल्पनिक हैं।


पराविद्याओं को समर्पित सर्वश्रेष्ठ मासिक ज्योतिष पत्रिका  अकतूबर 2006

प्लेनचिट से करें आत्माओं से बात | फ्लूटो अब केवल लघु ग्रहों की श्रेणी में | नवरात्र में क्यों किया जाता है कुमारी पूजन | शारदीय नवरात्र एवं पंच पर्व दीपावली के शुभ मुहूर्त

सब्सक्राइब

अपने विचार व्यक्त करें

blog comments powered by Disqus
.