अद्भुत समानता- सगे सम्बन्धियों की कुण्डली में

अद्भुत समानता- सगे सम्बन्धियों की कुण्डली में  

भारतीय ज्योतिष व उसके रचयिताओं की जितनी भी प्रशंसा की जाये वह कम होगी। क्योंकि केवल भारतीय ज्योतिष ही बता सकता है कि एक ही परिवार की विभिन्न पीढ़ियों के सदस्यों की जन्म कुंडलियों में एक अद्भुत समानता होती है जो यह सिद्ध करती है कि सभी सदस्य पूर्व जन्मों से ही एक दूसरे से जुड़े रहते हैं। हम उन्हीं परिवारों में जन्म लेते हैं जिनसे हमारा पूर्व जन्मों में भी संबंध था। ये सब कैसे होता है - ये केवल ईश्वर ही जानता है या फिर हमारा भारतीय ज्योतिष। आज हम ज्योतिष के माध्यम से ये जानने की कोशिश करते हैं कि ये समानता विभिन्न सदस्यों की जन्म कुंडलियों में किस प्रकार की होती है। इसके लिये हम एक परिवार (रानी आहुजा का परिवार) के तीन पीढ़ियों (कुल 12 जातक) की कुंडलियों का अध्ययन करते हैं जिसमें रानी के दो भाई सर्वेश व ओम प्रकाश तथा बहन रज्जो हैं। रानी व उसके दोनों भाइयों के दो-दो बच्चे हैं। इसके अतिरिक्त परिवार में रानी के पति रमेश आहुजा व मां रामेश्वरी देवी हैं। इन कुंडलियों में हम पायेंगें कि किस प्रकार उनकी कुंडलियां ये सिद्ध करती हैं कि वे सभी एक ही परिवार के सदस्य हैं। 1. रानी आहुजा (27.03.1945, 22ः30, फरीदाबाद), उनके बडे भाई सर्वेश (08.11.1937) और उनकी माता रामेश्वरी देवी (05.05.1909, 01ः20, रोपड) की जन्म कुंडलियों में समानता देखिये। रानी आहुजा का तुला लग्न है तो उनकी माता रामेश्वरी की तुला राशि है. दोनों की कुंडलियों में सूर्य व चंद्र का दृष्टि संबंध है। सर्वेश व रामेश्वरी देवी की कुंडलियों में मकर राशि का उच्च का मंगल है। सर्वेश व रामेश्वरी की कुंडलियों में सूर्य व शुक्र की युति है। रानी के मातृ भाव की राशि मकर ही रामेश्वरी देवी का लग्न है। दोनों का ही शुक्र मेष राशि में है। दोनों का गुरु सिंह राशि में है। रानी व सर्वेश दोनों के मातृ भाव का स्वामी ग्रह शनि है। 2. माता रामेश्वरी, उनकी बेटी रानी व रानी की बेटी रूचिका (26.03.1970, 05ः40, फरीदाबाद) की कुंडलियों में देखें तो पाते हैं कि रानी का लग्न तुला है और रूचिका व उसकी नानी की चंद्र राशि तुला है। रानी व रूचिका का मंगल-गुरू एक दूसरे को देख रहे हैं. रानी व उसके दोनांे बच्चों रूचिका व राजीव (28.03.1971, 18ः50, फरीदाबाद) का सूर्य भी मीन राशि में है। माता रामेश्वरी के पंचम संतान भाव में शुक्र की राशि है तो उसकी बेटी रानी के लग्न में भी शुक्र की राशि आई। रानी के पंचम संतान भाव में शनि की राशि है तो उसकी बेटी रूचिका के लग्न में भी शनि की राशि आई। 3. पति रमेश आहुजा (21.08.1943, 20ः00, फरीदाबाद) और उनकी पुत्री रुचिका दोनों की जन्म कुंडली में कुंभ लग्न है। दोनों की कुंडलियों में सूर्य व शुक्र की युति है। दोनों की कुंडलियों में गजकेसरी योग है। पति रमेश आहुजा और उनके पुत्र राजीव दोनो की जन्म कुंडली में चंद्र राशि मेष है. दोनो के चतुर्थ भाव में मंगल विराजमान है। दोनों के ही सप्तम भाव में सूर्य देव हैं। रमेश का लग्नेश शनि है तो राजीव के लग्नेश का संबंध शनि से है। बहन रूचिका व भाई राजीव की कुंडलियों मंे शनि मेष राशि में हैं। रूचिका की कुंडली में गुरू मंगल आमने सामने हैं और राजीव की कुंडली में दोनों ग्रह एक दूसरे की राशि में बैठे हैं। दोनों के सूर्य मीन राशि में हैं। 4. रानी व उसके बेटे राजीव की कुंडलियों में पंचम भाव में शनि की राशि है। राजीव का कन्या लग्न है तो रानी की कन्या राशि है। दोनों का बुध मेष राशि का है। रानी का शनि-राहु एक साथ हैं तो राजीव के राहु पर शनि की दृष्टि है। 5. भाई सर्वेश व उनके बेटा संजीव (02.01.1972, 05ः00, दिल्ली) और उनकी बेटी सारिका (24.10. 1968, 03ः15, दिल्ली) की कुंडलियों को देखें तो पाते हैं कि सर्वंेश व संजीव की कुंडलियों में वृश्चिक लग्न है। दोनों के पंचम भाव पर राहू-केतु का प्रभाव है। दोनो के गुरू चंद्र परस्पर योग बना रहे हैं। सर्वेश का वृश्चिक लग्न है तो सारिका की वृश्चिक राशि है। इन दोनों के शनि-गुरू का दृष्टि संबंध है। दोनों भाई बहन के चंद्र-शुक्र व राहु-शनि का दृष्टि संबंध भी है। 6. रानी आहुजा और उनकी बहन रज्जो (01.09. 1935) दोनों की चंद्र राशि कन्या है। इन दोनांे व उनके छोटे भाई ओम प्रकाश (19.12.1948) की कुंडलियों में गुरु मंगल का परस्पर संबंध है। शनि व गुरु का भी परस्पर संबंध है। दोनों बहनों के मातृ भाव का स्वामी ग्रह शनि है। 7. रानी आहुजा और उनके भतीजे आंेकार (02.03. 1976, 22ः35, नोएडा) की कुंडलियों में दोनो का तुला लग्न है और बुध-शुक्र की युति भी है। शनि की गुरु पर दृष्टि है। गुरु व केतु का भी संबंध है। इस प्रकार तीन पीढ़ियों की जन्मकुंडलियों का हमने अध्ययन किया। इन सभी कुंडलियों में परस्पर कोई न कोई समानता है जिससे इस तथ्य की पुष्टि होती है कि हमारा जन्म उन्हीं परिवारों में होता है जिनसे हम जन्म जन्मान्तर से बंधे होते हैं।


पराविद्या विशेषांक  अप्रैल 2014

ज्योतिष की शोध पत्रिका रिसर्च जर्नल आॅफ एस्ट्रोलोजी के इस पराविद्या विशेषांक में ज्योतिष, हस्तरेखा, वास्तु और विभिन्न पहलुओं पर अनुसंधान उन्मुख लेख सम्मलित किये गये हैं। इंदु लग्न द्वारा जानिए जातक की सम्पत्ति की जानकारी, लोकसभा चुनाव 2014, हस्तरेखाएं और रोग, साइक्लिक कन्सट्रक्सन, अस्पताल का वास्तु, फेंगशुई में सद्भाव की अवधारणा, नेल्सन मंडेला एक विश्लेषण,खोए विमान का रहस्य अंक ज्योतिष के आइने में, चिकित्सक बनने के ग्रह योग, नेत्र रोग, रिश्तेदारों की कुंडली में समानता का रहस्य, चार्टर्ड एकाउंटेंट, विदेश यात्रा योग और वास्तु के दृष्टिकोण से वैष्णो देवी मन्दिर आदि आलेख विशेष ज्ञानवर्धक हैं

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