हर बच्चे का हक है कि उसे अपने माता-पिता का नाम मिले ताकि वह समाज में अपना सर ऊंचा कर चल सके पर यदि कोई पिता इसके लिए आनाकानी करे तो पुत्र को अपना हक छीनना पड़ता है जैसा कि रोहित शेखर ने किया। भारतीय राजनीति की जानी मानी हस्ती श्री नारायण दŸा तिवारी हाल ही में 87 वर्ष की आयु में कोर्ट द्वारा पिता बनाए गये। सुनने में यह अजीब लगता है परंतु यह बिल्कुल सच है। रोहित शेखर नाम के शख्श ने कोर्ट के समक्ष यह दावा किया था कि श्री नारायण दŸा तिवारी उनके पिता हैं और उसे यह हक मिलना चाहिए कि वह अपने को नाजायज संतान कहलाने की बजाय गर्व से अपने पिता का नाम अपने नाम के साथ लिख सके। वैसे तो यह हर बच्चे का अधिकार होता है कि वह अपने मां-बाप का नाम जाने और सोसायटी में किसी के आगे शर्मिन्दा न हो, पर रोहित शेखर को जन्म से ही इस अपमान को सहना पड़ा यह जानते हुए भी कि नारायण दŸा तिवारी उसके जन्मदाता हैं। वह चुप रहा क्योंकि तिवारी जी उसे झूठे आश्वासन देते रहे, कि वे शीघ्र उसे अपना लेंगे और पूरी दुनिया के आगे उसे अपना पुत्र घोषित कर देंगे लेकिन रोहित के जवान हो जाने पर भी जब उन्होंने उसे कोई घास नहीं डाली, तो पेशे से वकील रोहित ने उन पर केस कर दिया और काफी लंबी लड़ाई के बाद दिल्ली हाइकोर्ट ने तिवारी जी और रोहित शेखर के रक्त का डी.एन.ए टेस्ट कराने के आदेश दिये तिवारी जी ने अपना डी.एन.ए टेस्ट रोकने के लिए काफी कानूनी दांव पेंच आजमाए लेकिन उनका हर पैंतरा कोर्ट के सामने नाकाम साबित हो गया और दिल्ली उच्च न्यायालय ने 27 अप्रैल को अपने आदेश में तिवारी को पितृत्व के मामले में डी.एन.ए जांच कराने को कहा और उन पर 25000/- रूपये का जुर्माना भी लगाया। अंत में डी.एन.ए रिपोर्ट से यह साबित हो गया कि रोहित के पिता एन.डी. तिवारी तथा मां उज्जवला तिवारी हैं और पुत्र रोहित को अपना हक मिल गया। एन. डी. तिवारी के जीवन पर रोशनी डालें, तो इनका जन्म 1925 में नैनीताल के छोटे से गांव में हुआ उन्होंने अपनी शिक्षा नैनीताल में ली। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ही वे राजनीति में आये, 1942 में प्रथम बार जेल गये। उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा इलाहाबाद से ली तथा वहां के विद्यार्थी परिषद के अध्यक्ष भी बने। 1954 में उन्होंने सुशीला जी से विवाह किया लेकिन उनकी उनसे कोई संतान नहीं हुई। 1957 में वह पहली बार विधायक बने। उसके बाद वह राजनीति के क्षेत्र में लगातार नये सोपान पर चढ़ते रहे। तीन बार वह उŸार प्रदेश के मुख्य मंत्री रहे तथा केंद्र सरकार में भी अनेक शीर्ष मंत्रालयों में मंत्री रहे, 1990 में उनके प्रधानमंत्री बनने के भी आसार दिख रहे थे लेकिन पी.वी.नरसिंहराव के सितारे अधिक बुलंद थे। 1994 में वे मात्र 800 बोटों से लोकसभा का चुनाव हार गये। उसके बाद उन्होंने अपनी खुद की पार्टी बना ली। लेकिन सोनिया गांधी के राजनीति में आने से वे दोबारा कांगे्रस में आये तथा 2002 से 2007 तक उŸाराखंड के मुख्यमंत्री पद का कार्यभार संभाला। 2007 से दिसंबर 2009 तक यह आंध्रप्रदेश के राज्यपाल रहे। लेकिन 2009 के अंत में इनके चरित्र पर बहुत बड़ा आक्षेप लगने के कारण इन्हें अपने पद से त्याग पत्र देना पड़ा। इनके जीवनकाल में इनके अनेक स्त्रियों से संबंध रहे जिसकी चर्चा अनेक बार समाचार पत्रों में होती रही। उज्जवला शर्मा से भी उनके संबंध 1990 के बाद बने तथा उन्हें अपने पुत्र रोहित शेखर को अंत में सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष स्वीकार करना पड़ा। तिवारी जी की कुंडली का विश्लेषण: नारायण दŸा तिवारी जी की कुंडली में चंद्रमा से द्वितीय एवं बारहवें भाव में ग्रह होने से सुनफा, अनफा और दुरधरा नामक योग बन रहे हैं, इन योगों में जन्म लेने वाला व्यक्ति राजपुरुष, राजा, वैभवशाली, अनेक नौकर-चाकरों से युक्त प्रभावशाली व्यक्ति होता है, इस योग के कारण यह छोटी अवस्था से राजनीति में कूद पड़े तथा अनेक उच्चस्थ पदों पर सुशोभित हुए। बृहस्पति ग्रह का केंद्र में अपनी स्वराशि में होने से अति उŸाम शुभ पंचमहापुरुष योग में हंस नामक महापुरुष योग बन रहा है जिसके फलस्वरूप यह छोटी अवस्था में ही स्वतंत्रता संग्राम जैसे देशहित के कार्य में जुट गये। उसके लिए उन्हें जेल जाने में भी परेशानी नहीं हुई। इस योग के कारण इन्हें उच्च मान-सम्मान प्रतिष्ठा तथा सुंदर शरीर, उच्चशिक्षा तथा दीर्घायु प्राप्त हुई। कुंडली में लग्नेश बृहस्पति से भाग्येश मंगल केंद्र स्थान में होने से इन्होंने अपने व्यवहार, बुद्धि, चातुर्य एवं भाग्य के द्वारा कार्य क्षेत्र में शीघ्र सफलता प्राप्त की तथा कुशल राजनैतिज्ञ भी बने। विशेष रूप से इनकी कुडली में सप्तम भाव सप्तमेश, सप्तम कारक ग्रह सभी पाप ग्रहों से पीड़ित है, सप्तम भाव में मंगल, सप्तमेश बुध अष्टम स्थान में सूर्य, शनि जैसे पाप ग्रहों से पीड़ित है एवं सप्तम कारक ग्रह शुक्र भी पाप ग्रह राहु से दृष्ट होने से पाप पीड़ित हो गया जिसके कारण इनको अपनी पत्नी की ओर से पूर्ण सुख प्राप्त नहीं हुआ। सप्तमेश बुध का अष्टम स्थान में तीन ग्रहों के साथ होने से तथा पंचम स्थान में स्थित राहु की शुक्र पर दृष्टि होने से इनके अपने जीवन काल में अनेक स्त्रियों से प्रेम-संबंध बने रहे तथा कई बार इनको इन संबंधों के कारण समाज में बदनामी भी सहनी पड़ी। तिवारी जी के जीवन की एक बात गौर करने लायक यह भी है कि इनकी अपनी पत्नी से कोई संतान नहीं है और उज्जवला से भी जो संतान हुई उसे इन्होंने मान्यता नहीं दी अर्थात् संतान सुख बिल्कुल नहीं है बल्कि संतान द्वारा जगहंसाई ही हुई तथा जीवन की सांध्य वेला में अपमान ही झेलना पड़ा। तिवारी जी की कुंडली में पंचम भाव में राहु बैठा है जो शनि की पूर्ण दृष्टि में है व किसी भी शुभ ग्रह से दृष्ट नहीं है तथा पंचमेश चंद्र अष्टम भाव में पाप ग्रह सूर्य व शनि के साथ अष्टम भाव में चंद्रमा मंगल और राहु दृष्ट शुक्र के बीच पाप कत्र्तरी योग में है। अर्थात् पंचम भाव व पंचमेश दोनों ही पाप ग्रहों से पीड़ित हंै इसलिए बुढ़ापे में संतान से कोई सुख प्राप्त नहीं हुआ और वयोवृद्ध अवस्था में संतान से प्रताड़ना ही मिली। इनकी कुंडली में कालसर्प नामक योग भी बन रहा है, जिसके कारण इनको जीवन में अनेक बार उतार-चढ़ाव का सामना भी करना पड़ा। वर्तमान में इनकी अष्टमेश शुक्र की महादशा चल रही है जिसके कारण इनको अनेक कठिनाइयों जैसे कोर्ट कचहरी आदि मामलों से गुजरना पड़ रहा है तथा इनका दांव इन्हीं के ऊपर भारी पड़ रहा है। वर्तमान में इनकी राशि तुला पर शनि की साढ़ेसाती भी चल रही है, इस समय इनके सभी ग्रह गोचर इनके प्रतिकूल चल रहे हैं जिसके कारण यह समाज तथा अपनी ही पार्टी कांग्रेस में भी अलग थलग पड़ गये हैं, कोई इनक साथ देने वाला नहीं है। आगे भविष्य में शुक्र में बुध की अंतर्दशा अर्थात 01 नवंबर 2013 से 01 सितंबर 2016 तक का समय भी इनके निजी स्वास्थ्य और आयु की दृष्टि से अधिक प्रतिकूल रहेगा।


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