दस महाविद्या रहस्य

दस महाविद्या रहस्य  

दस महाविद्या रहस्य जय इन्दर मलिक तंत्र साधकों के लिए महत्वपूर्ण विभिन्न शक्ति-रूपों का क्या स्वरूप है और उनकी साधना से क्या-क्या तात्कालिक लाभ प्राप्त किये जा सकते हैं, उसका संक्षिप्त परिचय पायेंगे आप इस लेख में। आगमशास्त्र में अविद्या, विद्या एवं महाविद्या इन तीन शब्दों का वर्णन है। जो सांसारिक कार्यों में हमारी सहायता करती हैं उसे ‘अविद्या’ कहते हैं। जो मुक्ति का मार्ग बताती हैं उसे ‘विद्या’ कहते हैं। और जो भोग और मोक्ष दोनो देती है उसे महाविद्या कहते हैं। दस महा विद्या इस प्रकार है। इन महाविद्याओं के प्रकट होने की कथा महाभागवत देवी पुराण में वर्णित है। उनका रूप तथा कृपा फल कुछ ऐसा है। 1. काली: दस महाविद्याओं में यह प्रथम है। कलियुग में इनकी पूजा अर्चना से शीघ्र फल मिलता है। 2. तारा: सर्वदा मोक्ष देने वाली और तारने वाली को तारा का नाम दिया गया है। सबसे पहले महर्षि वशिष्ठ ने मां तारा की पूजा की थी। आर्थिक उन्नति और बाधाओं के निवारण हेतु मां तारा महाविद्या का महत्वपूर्ण स्थान है। इसकी सिद्धि से साधक की आय के नित्य नये साधन बनते हैं। जीवन ऐश्वर्यशाली बनता है। इस की पूजा गुरुवार से आरंभ करनी चाहिये। इससे शत्रुनाश, वाणी दोष निवारण और मोक्ष की प्राप्ति होती है। 3. छिन्नमस्ता: मां छिन्नमस्ता का स्वरूप गोपनीय है। इनका सर कटा हुआ है। इनके बंध से रक्त की तीन धारायें निकल रही है। जिस में से दो धारायें उनकी सहस्तरीयां और एक धारा स्वयं देवी पान कर रही है। चतुर्थ, संध्या काल में छिन्नमस्ता की उपासना से साधक को सरस्वती की सिद्धि हो जाती है। राहु इस महाविद्या का अधिष्ठाता ग्रह है। 4. त्रिपुर भैरवी: आगम ग्रंथों के अनुसार त्रिपुर भैरवी एकाक्षर रूप है। शत्रु संहार एवं तीव्र तंत्र बाधा निवारण के लिये भगवती त्रिपुर भैरवी महाविद्या साधना बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इससे साधक के सौंदर्य में निखार आ जाता है। इस का रंग लाल है और यह लाल रंग के वस्त्र पहनती हैं। गले में मुंडमाला है तथा कमलासन पर विराजमान है। त्रिपुर भैरवी का मुख्य लाभ बहुत कठोर साधना से मिलता है। 5. धूमावती: धूमावती का कोई स्वामी नहीं है। इसकी उपासना से विपत्ति नाश, रोग निवारण व युद्ध में विजय प्राप्त होती है। 6. बगलामुखी: शत्रु बाधा को पूर्णतः समाप्त करने के लिये बहुत महत्वपूर्ण साधना है। इस विद्या के द्वारा दैवी प्रकोप की शांति, धन-धान्य प्राप्ति, भोग और मोक्ष दोनों की सिद्धि होती है। इसके तीन प्रमुख उपासक ब्रह्मा, विष्णु व भगवान परशुराम रहे हैं। परशुराम जी ने यह विद्या द्रोणाचार्य जी को दी थी और देवराज इंद्र के वज्र को इसी बगला विद्या के द्वारा निष्प्रभावी कर दिया था। युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण के परामर्श पर कौरवों पर विजय प्राप्त करने के लिये बगलामुखी देवी की ही आराधना की थी। मां बगलामुखी के प्रसिद्ध शक्ति पीठ निम्न स्थानों पर हैं। दतिया: यहां मां बगलामुखी का ऐतिहासिक मंदिर है। यह पीतांबरा शक्ति पीठ के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि आचार्य द्रोण के पुत्र अश्वत्थामा अमर होने के कारण आज भी इस मंदिर में पूजा-अर्चना करने आते हैं। वाराणसी: यहां भी मां बगलामुखी का शक्तिपीठ है। वनखंड़ी: यह शक्ति पीठ जिला कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) में है। कोटला: यहां भी मां बगलामुखी का शक्ति पीठ है। यह पठानकोट से 5 किलोमीटर दूर कांगड़ा मार्ग पर है। इस मंदिर की स्थापना 1810 में हुई थी। गंगरेट: यह भी हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना में है। हर वर्ष यहां बहुत भारी मेला लगता है। इसके अतिरिक्त मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र (मुंबई) में भी इनके प्रसिद्ध उपासना स्थल हैं। 7. षोडशी महाविद्या: शक्ति की सब से मनोहर सिद्ध देवी है। इन के ललिता, राज-राजेश्वरी महात्रिपुर सुंदरी आदि अनेक नाम हैं। षोडशी साधना को राजराजेश्वरी इस लिये भी कहा जाता है क्योंकि यह अपनी कृपा से साधारण व्यक्ति को भी राजा बनाने में समर्थ हैं। इनमें षोडश कलायें पूर्ण रूप से विकसित हैं। इसलिये इनका नाम मां षोडशी हैं। इनकी उपासना श्री यंत्र के रूप में की जाती है। यह अपने उपासक को भक्ति और मुक्ति दोनों प्रदान करती है। बुध इनका अधिष्ठातृ ग्रह है। 8. भुवनेश्वरी: महाविद्याओं में भुवनेश्वरी महाविद्या को आद्या शक्ति कहा गया है। मां भुवनेश्वरी का स्वरूप सौम्य और अंग कांतिमय है। मां भुवनेश्वरी की साधना से मुख्य रूप से वशीकरण, वाक सिद्धि, सुख, लाभ एवं शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। पृथ्वी पर जितने भी जीव हैं सब को इनकी कृपा से अन्न प्राप्त होता है। इसलिये इनके हाथ में शाक और फल-फूल के कारण इन्हें मां ‘शाकंभरी’ नाम से भी जाना जाता है। चंद्रमा इनका अधिष्ठातृ ग्रह है। 9. मातंगी: इस नौवीं महा विद्या की साधना से सुखी, गृहस्थ जीवन, आकर्षक और ओजपूर्ण वाणी तथा गुणवान पति या पत्नी की प्राप्ति होती है। इनकी साधना वाम मार्गी साधकों में अधिक प्रचलित है। 10. कमला: मां कमला कमल के आसन पर विराजमान रहती है। श्वेत रंग के चार हाथी अपनी संूडों में जल भरे कलश लेकर इन्हें स्नान कराते हैं। शक्ति के इस विशिष्ट रूप की साधना से दरिद्रता का नाश होता है और आय के स्रोत बढ़ते हैं। जीवन ‘सुखमय होता है। यह दुर्गा का सर्व सौभाग्य रूप है। जहां कमला है वहां विष्णु है। शुक्र इनका अधिष्ठातृ ग्रह है।
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das mahavidya rahasyajay indar maliktantra sadhkon ke lie mahatvapurn vibhinn shakti-rupon ka kya svarup hai aur unki sadhnase kya-kya tatkalik labh prapt kiye ja sakte hain, uska sankshipt parichay payengeap is lekh men.agmshastra men avidya, vidya evanmhavidya in tin shabdon ka varnanahai. jo sansarik karyon men hamarishayta karti hain use ‘avidya’khte hain. jo mukti ka marg batatihain use ‘vidya’ kahte hain. aur jobhog aur moksh dono deti hai usemhavidya kahte hain. das maha vidyais prakar hai.in mahavidyaon ke prakat hone kiktha mahabhagavat devi puran menvarnit hai. unka rup tatha kripafal kuch aisa hai.1. kali: das mahavidyaon men yahapratham hai. kaliyug men inki pujaarchana se shighra fal milta hai.2. tara: sarvada moksh dene valiaur tarne vali ko tara ka namdiya gaya hai. sabse pahle maharshivshishth ne man tara ki puja kithi. arthik unnati aur badhaon kenivaran hetu man tara mahavidya kamahatvapurn sthan hai. iski siddhi sesadhak ki ay ke nitya naye sadhnbnte hain. jivan aishvaryashali bantahai. is ki puja guruvar se aranbhkrni chahiye. isse shatrunash, vanidosh nivaran aur moksh ki praptihoti hai.3. chinnamasta: man chinnamasta kasvarup gopniya hai. inka sar katahua hai. inke bandh se rakt ki tindharayen nikal rahi hai. jis men sedo dharayen unki sahastariyan auraek dhara svayan devi pan kar rahihai. chaturth, sandhya kal men chinnamastaki upasna se sadhak ko sarasvatiki siddhi ho jati hai. rahu ismhavidya ka adhishthata grah hai.4. tripur bhairvi: agam granthon keanusar tripur bhairvi ekakshar ruphai. shatru sanhar evan tivra tantra badhanivaran ke liye bhagvti tripur bhairvimhavidya sadhna bahut mahatvapurnamani jati hai. isse sadhak kesaundarya men nikhar a jata hai. iska rang lal hai aur yah lal rangke vastra pahnti hain. gale men mundmalahai tatha kamlasan par virajman hai.tripur bhairvi ka mukhya labh bahutkthor sadhna se milta hai.5. dhumavti: dhumavti ka koisvami nahin hai. iski upasna sevipatti nash, rog nivaran v yuddh menvijay prapt hoti hai.6. baglamukhi: shatru badha kopurnatah samapt karne ke liye bahutamahatvapurn sadhna hai. is vidya kedvara daivi prakop ki shanti, dhan-dhanyaprapti, bhog aur moksh donon kisiddhi hoti hai. iske tin pramukhaupasak brahma, vishnu v bhagvanprshuram rahe hain. parshuram ji ne yahvidya dronacharya ji ko di thi aurdevraj indra ke vajra ko isi baglavidya ke dvara nishprabhavi kar diyatha. yudhishthir ne bhagvan krishn kepramarsh par kaurvon par vijay praptakarane ke liye baglamukhi devi kihi aradhna ki thi.man baglamukhi ke prasiddh shakti pithnimn sthanon par hain. datiya: yahan man baglamukhi kaaitihasik mandir hai. yah pitanbrashakti pith ke nam se jana jatahai.manyata hai ki acharya dron ke putraashvatthama amar hone ke karnaj bhi is mandir men puja-archanakrne ate hain. varansi: yahan bhi man baglamukhika shaktipith hai. vankhanri: yah shakti pith jilakangra (himachal pradesh) men hai. kotla: yahan bhi man baglamukhika shakti pith hai. yah pathankot se5 kilomitar dur kangra marg parhai. is mandir ki sthapna 1810 menhui thi. gangret: yah bhi himachal pradeshke jila una men hai. har varsh yahanbhut bhari mela lagta hai.iske atirikt madhya pradesh,chattisagarh aur maharashtra (munbai) menbhi inke prasiddh upasna sthal hain.7. shodshi mahavidya: shakti kisab se manohar siddh devi hai. inke lalita, raj-rajeshvari mahatripursundri adi anek nam hain. shodshisadhna ko rajrajeshvari is liyebhi kaha jata hai kyonki yah apnikripa se sadharan vyakti ko bhi rajabnane men samarth hain. inmen shodshklayen purn rup se viksit hain.isliye inka nam man shodshi hain.inki upasna shri yantra ke rup menki jati hai. yah apne upasak kobhakti aur mukti donon pradan kartihai. budh inka adhishthatri grah hai.8. bhuvneshvari: mahavidyaon menbhuvneshvari mahavidya ko adya shaktikha gaya hai. man bhuvneshvari kasvarup saumya aur ang kantimay hai.man bhuvneshvari ki sadhna se mukhyarup se vashikaran, vak siddhi, sukh,labh evan shatruon par vijay praptahoti hai. prithvi par jitne bhi jivhain sab ko inki kripa se ann praptahota hai. isliye inke hath menshak aur fal-ful ke karan inhenman ‘shakanbhri’ nam se bhi jana jatahai. chandrama inka adhishthatri grah hai.9. matangi: is nauvin maha vidyaki sadhna se sukhi, grihasth jivan,akarshak aur ojpurn vani tathagunvan pati ya patni ki praptihoti hai. inki sadhna vam margisadhkon men adhik prachlit hai.10. kamla: man kamla kamal keasan par virajman rahti hai. shvetrang ke char hathi apni sanudon men jalbhre kalash lekar inhen snan karatehain. shakti ke is vishisht rup kisadhna se daridrata ka nash hota haiaur ay ke srot barhte hain. jivn‘sukhamay hota hai. yah durga ka sarvasaubhagya rup hai. jahan kamla hai vahanvishnu hai. shukra inka adhishthatri grahhai.
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तंत्र एवं दश महाविद्या विशेषांक  अकतूबर 2012

फ्यूचर समाचार पत्रिका के तंत्र एवं दशमहाविद्या विशेषांक में दस महाविद्याओं का संक्षिप्त परिचय व मंत्र, तंत्र एवं दस महाविद्या, तंत्र में प्रयुक्त शब्दों की धारक मारक शक्ति, शिव शक्ति का साक्षात श्री विग्रह श्रीयंत्र, तंत्र का आरंभि अर्थ एवं अंतिम लक्ष्य, तंत्र मंत्र अभिन्न संबंध, तंत्र परिभाषा एवं महत्वपूर्ण प्रयोग, दैनिक जीवन में तंत्र, दश महाविद्याओं का लौकिक एवं आध्यात्मिक विवेचन तथा इनके प्रसिद्ध शक्ति पीठों की जानकारी, तंत्र व् महाविद्या की प्राचीनता, मूल एवं विकास के विभिन्न प्रक्रम, तंत्र के अधिपति देव एवं मूल अधिष्ठात्री देवी, दश महाविद्या रहस्य, इसके अतिरिक्त तंत्र की शिक्षा भूमि तारापीठ, फलादेश में अंकशास्त्र की भूमिका, वास्तु परामर्श, वास्तु प्रश्नोतरी, विवादित वास्तु, यंत्र समीक्षा/मंत्र ज्ञान, हेल्थ कैप्सुल, लाल किताब, ज्योतिष सामग्री, मंत्र चिकित्सा, सम्मोहन, मुहूर्त विचार, टैरो कार्ड, सत्यकथा, अंक ज्योतिष के रहस्य, आदि विषयों पर गहन चर्चा की गई है।

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