किससे करें स्थापित प्रेम सम्बन्ध,

किससे करें स्थापित प्रेम सम्बन्ध,  

किससे करें स्थापित प्रेम संबंध? अंकशास्त्र के नजरिए से... सपना ‘प्रेम’ शब्द स्वयं में ही बहुत माधुर्य समेटे हुए है और इस विश्व में रिश्तों की धुरी भी है। सभी गीत, संगीत, कहानियां, चित्रपट, कलाकृतियां प्रेम को संजोए हुए होती हैं। बच्चे के जन्म लेते ही उसे मिलता है मां का, ना मिटने वाला निस्वार्थ प्यार, और किशोरावस्था में कदम रखते ही ‘प्रेम’ शब्द अलग दृष्टिकोण से भी समझ आने लगता है। परंतु सवाल यह पैदा होता है कि फिर भी इस समय के रिश्ते जुड़ने की बजाय अधिक टूट क्यों रहे हैं? आपसी संबंधों में आनी वाली गिरावट किसी से छुपी नहीं है। तलाक के मामलों में वृद्धि हुई है। आपको बताना चाहूंगी इस स्थति को सुधारने के लिए आप अंकशास्त्र की मदद ले सकते हैं और अपने संबंधों में सुधार ला सकते हैं। आपने देखा होगा कि आपके साथ कई बार ऐसा होता है कि आप किसी सामाजिक उत्सव या पार्टी आदि में गये जहां बहुत से लोग हैं और आप सबसे पहली बार मिल रहे हैं, परंतु कुछ व्यक्तियों को मिलकर ऐसा लगता है कि आप उनसे सहज ही बात कर पा रहे हैं और वे आपके अच्छे दोस्त भी बन सकते हैं। परंतु कुछ व्यक्ति जरा भी अच्छे नहीं लगते और आपका उनसे बात करने का भी दिल नहीं करता। प्रत्येक व्यक्ति के अंदर कुछ व्यक्तिगत वाइब्रेशन होता है और जब हमारी वाइब्स किसी दूसरे व्यक्ति की वाइब्स से मिलती जुलती हैं तो परस्पर आकर्षण पैदा होता है या वे इंसान हमें आकर्षित करते हैं। अंकशास्त्र इन्हीं वाइबे्रशन्स का अध्ययन है जिससे आप जान सकते हैं दूसरों के बारे में और स्वयं अपने आस-पास के वातावरण व रिश्तों को ओर अधिक प्रखर बना सकते हैं। 90 प्रतिशत प्रेमी जो परस्पर प्रेम में हैं जरूरी नहीं, कि वे खूबसूरत हैं इसलिए आपसी प्रेम है बल्कि इसलिए कि वे अपने प्रेमी से अजीब सा आकर्षण पाते हैं और जैसे कहा भी जाता है कि ‘‘सुंदरता देखने वालों की आंखों में होती है’’ और उन्हें अपनी प्रेमिका अत्यधिक सुंदर व आकर्षक लगती है। आपने कभी सोचा कि ऐसा, क्यों होता है। ऐसा उनके अंकों में छुपी वाइबे्रशन्स, सूक्ष्म व प्राण ऊर्जा तथा अंकों की अदभुत आभा के कारण होता है। आपके अंक ऐसी आभा व ऊर्जा लिए हुए होता है और यदि दो प्रेमियों के अंक परस्पर अनुकूलता लिए हुए हों तो रिश्ते मधुर होंगे, मजबूत होंगे व हमेशा के लिए होंगे, बस जरूरत है इस विषय में जानने की। नोट- प्रेम संबंध व रिश्ते उच्च कोटि के हों व टिकाऊ हों इसके लिए लड़का व लड़की की जन्मतिथि, नामांक व जीवन पथ संख्या में अनुकूलता का विश्लेषण आवश्यक है। अब हम देखते हैं कि प्रेम व आकर्षण के दृष्टिकोण से कौन से अंक एक दूसरे के अनुकूल हैं व परस्पर आकर्षण एवं आभा लिए हुए हैं। अंक एक व प्रेम संबंध वे व्यक्ति जिनका जन्म किसी भी महीने की 1, 10, 19 अथवा 28 तारीख को हुआ उनका मूलांक एक बनता है, ये सूर्य प्रधान व्यक्ति हैं। अत्यधिक महत्वाकांक्षी होते हैं व हर हाल में आगे रहना चाहते हैं। नेतृत्व करने का गुण, निर्णय लेने की शक्ति तो होती ही है थोड़े अभिमानी व कभी-कभी हठी भी हो जाते हैं शासन करना व दूसरे पर काबू पाना भी इनके स्वभाव में शामिल हैं। एक अंक वाले व्यक्ति अपनी आलोचना जरा भी पसंद नहीं करते अपने स्वभाव की इन्हीं बातों की वजह से इनके संबंधों में दरार आ जाती है। देखा गया है कि अंक एक व अंक चार का तालमेल अच्छा होता है यानी कि उनके साथ जिनका जन्म किसी भी महीने की 4, 13, 22, अथवा 31 को हुआ है। इन दोनों अंकों का आकर्षण प्रबल होता है। यदि ये मिलें तो इनमें जल्दी ही प्रेम संबंध कायम होते हैं व अच्छे मित्र भी बने जाते हैं क्योंकि अंक एक अंक चार की अपेक्षा काबू व अधीन करने वाला अंक है। इस तरह के संबंध में अंक चार वाला व्यक्ति बहुत खूबसूरती से इनके अधीन हो जाता है वह सामजस्य स्थापित हो जाता है। देखा गया है कि अंक एक के मित्रे अंक सात वाले व्यक्ति भी होते हैं। अंक दो व प्रेम संबंध वे सभी व्यक्ति जो किसी भी महीने की 2, 11, 20, 29 को पैदा हुए हैं उनका मूलांक है दो। अंक दो का स्वामी ग्रह है चंद्र, तो अंक दो वाले व्यक्ति भी हमेशा चमकती रोशनी में रहना पसंद कतरे हैं। अत्यधिक भावुक, संवेदनशील, काल्पनिक व सहानुभूतिपूर्ण होते हैं। जैसे चंद्र घटता बढ़ता रहता है वैसे ही इनके मूड ऊपर-नीचे होते रहते हैं अधिक सोचते हैं और कई बार हम से ज्यादा संवेदनशील होने के कारण कुछ अजीब-सा व्यवहार करने लगते हैं।े अन्य व्यक्ति इनके व्यवहार के अक्सर बदलाव को समझ नहीं पाते अतः इन्हें समझने में भी परेशानी होती है और अंक दो वाले व्यक्ति अधिकतर अपने आपको अकेला पाते हैं और इसी वजह से इनके संबंधों में भी दरार आ जाती है। देखा गया है कि अंक दो वाले व्यक्ति यदि अंक सात वाले व्यक्ति से मिलें तो अपना दिल जल्दी दे बैठते हैं, ये आकर्षण अत्यधिक प्रबल व शीघ्रता से होता है। हालांकि नौ अंक वालों के साथ भी इनका आकर्षण रहता है परंतु ये सात अंक वाले व्यक्ति ही हैं जिनके लिए वे कुछ भी त्याग करने की क्षमता रखते हैं। परस्पर आकर्षण उच्चकोटि का होता है और इनके मूडस व संवेदनशीलता को समझना किसी और अंक वाले व्यक्ति के बस में नहीं होता तो इन्हें चाहिए कि ये रिश्ते के बारे में गंभीरता से सोचें। अंक तीन व प्रेम संबंध वे सभी व्यक्ति जो किसी भी महीने की 3, 12, 21, 30 तारीख को पैदा हुए उनका मूलांक है तीन। तीन अंक वाले व्यक्ति उच्च महत्वाकांक्षी होते है व आशावादी दृष्टिकोण लिए हुए होते हैं। इनकी प्रवृŸिा चंचल होती है और इन्हंे जीवन में बंधकर रहना बिल्कुल भी पसंद नहीं होता। ये काफी स्वतंत्र मिजाज के होते हैं अपनी स्वतंत्रता में किसी की दखलंदाजी इन्हें पसंद नहीं आती। बेचैन व व्याकुल रहने की वजह से रिश्तों में स्थायित्व की कमी अक्सर देखी जाती है। बहुत अच्छा हो अगर तीन अंक वाले व्यक्ति थोड़ा सोच समझकर रिश्ते कायम करें। इसका कारण यह है कि देखा गया है कि अंक तीन वाले व्यक्तियों को बहुत लोग पसंद करने लगते हैं यानी इनमें ऐसा आकर्षण होता है कि लगभग अधिकतर लोग इनकी तरफ आकर्षित होते है लेकिन इनका तालमेल अधिकतर नौ अंक या फिर 6 अंक वालों के साथ अच्छा स्थापित होता है। 3, 6 व 9 इस समूह के अंकों में मित्रता भी अच्छी कायम होती है और प्रेम भी, फिर भी नौ का अंक बाजी मारता है और 3 व 9 का आपसी आकर्षण प्रेम व रिश्ते में बदलता है तो स्थायित्व की तरफ बढ़ता है। अंक चार व प्रेम संबंध अंक चार वाले व्यक्ति का दृष्टिकोण विपरीतात्मक होता है। यानी कि ये हर चीज को उल्टे नजरिए से देखते हैं। इनके जीवन में अनिश्चिताएं भी बहुत रहती हैं। किसी भी काम को करने से पहले काफी सोच विचार करते हैं, योजनाएं भी बनाते हैं लेकिन अंत में फिर किसी की सलाह मानकर काम कर लेते हैं जो कई बार इनके अनुकूल नहीं होता। इसलिए चार अंक वाले व्यक्ति जीवन में निर्णय एकदम से नहीं ले पाते। अब विपरीत दृष्टिकोण रखने की वजह से लोग अक्सर इन्हें समझ नहीं पाते और हमेशा इनकी शिकायत करते रहते हैं। अंक चार वाले व्यक्ति किसी पर भी आसानी से विश्वास नहीं कर पाते। हालांकि इनमें मित्र बनाने की कला बखूबी होती है पर इन्हीं बातों की वजह से जीवन में काफी अकेलापन महसूस करते हैं। सब कुछ होते हुए भी अलग लग पड़ जाते हैं और यही अकेलापन अजीब सी उदासी लिए हुए रहता है। यदि अंक एक वाले व्यक्ति इनके जीवन में आए तो प्रेम होता भी है और टिका भी रहता है क्योंकि जो कमी इनमें है वह अंक 1 में नहीं तो दोनों मिलकर जीवन को संभाल लेते हैं और जीवन में स्थायित्व होता है इसके अलावा अंक 2 व अंक 7 वाले व्यक्तियों के साथ भी इनका आकर्षण होता है व उम्र भर की मित्रता व अन्य संबंध भी स्थापित होते हैं। अंक पंाच व प्रेम संबंध वे सभी व्यक्ति जो किसी भी महीने की 5, 14, 23 को पैदा हुए हैं उनका मूलांक है पांच। पांच का अंक कुछ विचित्र अंक है। इनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि कुछ ही क्षणों में ये दूसरे को अपना व अपने अनुकूल बनाने की क्षमता रखते हैं। ये वाकपटु तो होते ही हैं और अन्य व्यक्ति को जानकर उसके अनुसार बातचीत करने की अदभुत कला होती है जो किसी अन्य अंक में नहीं होती। इसीलिए इनके सबसे अधिक मित्र होते हैं। संचार कौशल कमाल का होता है। ये जितनी शीघ्रता से सोचते हैं उतनी ही तेजी से परिणाम की परवाह किए बिना काम भी कर लेते हैं चाहे उस काम में इन्हें जोखिम ही क्यों न उठाना पडे़ क्योंकि इनके मित्र भी बन जाते हैं और ये दूसरे के अनुसार स्वयं को ढाल भी लेते हैं तो मुश्किल कहां आती है? इनके जीवन में सबसे बड़ी परेशानी होती है स्थायित्व की कमी। जितनी जल्दी से काम को शुरु करते हैं उतनी ही जल्दी में अंत तक नहीं पहुंचते। पहला लक्ष्य प्राप्त किये बिना ही दूसरा काम शुरु कर देते हंै। यही स्थायित्व की कमी रिश्तों में भी दिखाई देती है। हालांकि पांच अंक वालों के संबंध बाकी सभी अंकों से होते हंै और सभी अंक इनके मित्र होते हैं परंतु अंक एक वालों के साथ अधिक स्थायित्व देखा गया है, नौ से भी पाया जाता है। अंक छः व प्रेम संबंध अंक छः वाले व्यक्ति बहुत अधिक आकर्षक होते हैं संसार के सुंदरतम स्त्री व पुरुष छः अंक वाले व्यक्ति ही देखे गये हैं। इनमें दूसरों को आकर्षित करने का विशेष गुण होता है। विशेषता यह होती है कि ये हमेशा अपने शरीर को व्यवस्थित रखते हैं व स्मार्ट नजर आते हैं। अस्तव्यस्तता, गंदगी, फूहड़पन और कुरुपता से घृणा होती है। इस अंक के पुरुषों का स्वभाव नैसर्गिक रूप से महिलाओं की तरह होता है। कला प्रेमी होते हैं। संगीत, काव्य आदि में भी रुचि होती है। छः अंक वाले व्यक्तियों के रोमान्टिक व शौकीन मिजाज कहा जा सकता है। ये व्यक्ति जीवन में अकेले नहीं रह सकते, एकांत इन्हें काटने को दौड़ता है, हर समय ये किसी का साथ चाहते हैं तो अत्यधिक रोमांटिक व नैसर्गिक झुकाव की वजह से यदि इन्हें सही साथी न मिलें तो इनके कई संबंध भी बन सकते हैं। इनके प्रेम के अत्यधिक उच्च स्तर व अपने पार्टनर से उतनी ही अपेक्षाओं के रहते इनके लिए यदि छः अंक वाला पार्टनर मिला तो उŸाम रहता है। इसके अलावा अंक नौ व अंक तीन के साथ भी इनका आकर्षण प्रबल होता है रिश्ते कायम होते हैं और यदि अंक नौ वाला व्यक्ति इनके जीवन में आए तो जीवन और व्यवस्थित हो जाता है। अंक सात व प्रेम संबंध अंक सात के बारे में आपने बहुत कुछ सुना होगा। सात रंग, सात फेरे, सात ग्रह, सात दिन इत्यादि। सात का अंक काफी आध्यात्मिक अंक है। यह बहुत अधिक संवेदनशील व भावना प्रधान अंक है। कल्पना शक्ति काफी उर्वर होती है जो इन्हें कवि बनाती है। निरंतर नई-नई बातें सोचने और नए-नए कार्यों में रुचि लेने वाले होते हैं इनका विशेष गुण है मौलिकता। किसी भी चीज को घिसे पिटे तरीके से नहीं सोचते और सोच नवीनता लिए होती है इनमें स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता होती है। व्यक्गित स्वतंत्रता में विश्वास रखते हैं। अन्याय को सहना बहुत कठिन हो जाता है। स्वाभिमानी होते हैं और इनके व्यक्ति में एक करिश्मा होता है लेकिन इनकी मौलिकता, नवीनता, व्यक्तिगत आभा व समान न्याय की व्यवहार की वजह से अक्सर दूसरे इन्हें समझ नहीं पाते और कहा गया है कि अक्सर इस वजह से इनके आपसी रिश्तों में दरार आ जाती है। लेकिन जब ये दो अंक वाले व्यक्तियों से मिलते हैं आकर्षण प्रबल व एकदम से होता है और जल्द ही दिलों का आदान-प्रदान भी हो जाता है क्योंकि ये दोनों ही संवेदनशील अंक एक दूसरे को समझते हैं और अपने ही अंक यानी अन्य सात अंक वालों से रिश्ता भी बेहतरी की तरफ बढ़ता है। इनकी गहरी मित्रता, एक, चार व आठ के अंक से भी देखी गई है। अंक आठ व प्रेम संबंध अंक आठ का स्वामी ग्रह है शनि जिसे बुजुर्ग ग्रह कहा जाता है। वे सभी व्यक्ति जिनका जन्म किसी भी महीने की 8, 17, 26 तारीख को हुआ उनका मूलांक है आठ। शनि के प्रभाव की वजह से आठ अंक वाले व्यक्ति अपनी उम्र से बड़ा व्यवहार करते हैं। इनका जीवन सरल नहीं होता और इनके जीवन में ऐसी घटनाएं होती हैं जो आकस्मिक व अप्रत्याशित होती हैं। ये अंतर्मुखी, अलग-अलग रहने वाले, सहनशील, व्यवहारिक व गंभीर प्रवृति के होते हैं। अंदर से तकलीक भी होगी तो भी आपके चेहरे पर सम्पूर्ण शांति बनी रहती है। मन के विचेार चेहरे पर नहीं आ पाते इसीलिए कोई आपकी समझ नहीं पाता। इसी आपसी समझ की कमी रिश्तों में दरार उत्पन्न करती है क्योंकि रिश्ते निभाने के लिए कई बार आपको मुखर भी होना पड़ता है और अपने दिल में छुपे विचारों की बताना भी पड़ता है, अंक आठ के व्यक्ति बड़ी सहजता से अंक चार की तरफ आकर्षित होते हैं क्योंकि एक दूसरे के अनुकूल है परंतु भौतिकवादी दृष्टिकोण से दोनों का संयोग उŸाम नहीं रहता। इनके अलावा अंक दो, अंक सात व अंक एक भी इनके अच्छे मित्र हो सकते हैं। अंक नौ व प्रेम संबंध अंक नौ सर्वाधिक सशक्त व बलवान अंक है, ये साहसी होते हं और रिस्क लेने की क्षमता भी अत्यधिक होती है लेकिन कभी ये दुसाहसी होकर ऐसे कार्य भी कर देते है जो इनके लिए अनुकूल नहीं होते। इनका स्वभाव उग्र होता है और जरा सी बात विपरीत होने पर तुरंत भड़क जाते हैं। क्रोध बहुत आता और ऐसे समय इनका विवेक लगभग समाप्त हो जाता है, ये स्वतंत्र कारणों से इनके रिश्तों में दरार तो आती है पर उन्मुक्त आचरण के होने की वजह से इनके दूसरी स्त्रियों से संबंध भी बन जाते हैं, ये अपने प्रेम के प्रति वासनात्मक भी होते हैं और प्रबल रूप से प्रेम पर अधिकार भी करना चाहते हैं। अंक नौ का आकर्षण जिस अंक के साथ सर्वाधिक देखा गया है वह है अंक तीन व अंक छः। इसके अलावा बाकी अंकों के साथ इनका तालमेल थोड़ा कम रहता है। अंक तीन और अंक छः वालों के साथ इनके रिश्ते भी बनते हें और कायम भी रहते हैं। ये तो था अंक एक से अंक नौ तक के पारस्परिक आकर्षण का विवेचन परंतु इसके आलावा भी दो व्यक्ति एक ही जन्मांक अथवा मूलांक या जीवन पथ अंक ओर एक समान नामांक वाले होते हैं उन सब में परस्पर आकर्षित होने की बहुत सी संभावनाएं होती हैं। उपाय और हां आपसी सामंजस्य स्थापित करने का एक उपाय भी है। यदि आप चाहते हैं कि आपका प्रेमी अथवा प्रेमिका सदैव आपकी रहे, तो उनके नामांक में ऐसा बदलाव लाए जो आपके नामांक जैसा हो अथवा उसके अनुकूल है। यदि आप ऐसा करेंगे तो आप दोनों का अलग होना काफी कठिन हो जाएगा। आखिर में यही कहना चाहूंगी कि जीवन के सबसे कठिन पल वह नहीं होते जब कोई दूसरा आपको समझ नहीं पाता, बल्कि वह होता है जब आप अपने आपको नहीं समझ पाते, क्योंकि सब यह सोचते हैं कि दुनिया को कैसे बदलें और इसके लिए जरूरी है खुद को समझना और फिर बदलना। बेहतरी के लिए अंकशास्त्र, ज्योतिषशास्त्र जैसे शास्त्र आपकी इसमें हमेशा मदद कर सकते हैं और आपको अधिक सक्षम बना सकते हैं। त अंक आठ का स्वामी ग्रह है शनि जिसे बुजुर्ग ग्रह कहा जाता है। वे सभी व्यक्ति जिनका जन्म किसी भी महीने की 8, 17, 26 तारीख को हुआ उनका मूलांक है आठ। शनि के प्रभाव की वजह से आठ अंक वाले व्यक्ति अपनी उम्र से बड़ा व्यवहार करते हैं। इनका जीवन सरल नहीं होता और इनके जीवन में ऐसी घटनाएं होती हैं जो आकस्मिक व अप्रत्याशित होती हैं। प्रवृति के होते हैं और अपनी योजनाओं में किसी की दखलंदाजी प्रसंद नहीं करते। इनका व्यवहार खुलापन लिए हुए होता है अंक नौ वाले व्यक्तियों में एक विचित्र बात देखी गई है कि अधिकतर ये अपने घर की स्त्री को कोई महत्व नहीं देते परंतु दूसरी स्त्रियों के गुणों की कद्र करते हैं।



तंत्र एवं दश महाविद्या विशेषांक  अकतूबर 2012

फ्यूचर समाचार पत्रिका के तंत्र एवं दशमहाविद्या विशेषांक में दस महाविद्याओं का संक्षिप्त परिचय व मंत्र, तंत्र एवं दस महाविद्या, तंत्र में प्रयुक्त शब्दों की धारक मारक शक्ति, शिव शक्ति का साक्षात श्री विग्रह श्रीयंत्र, तंत्र का आरंभि अर्थ एवं अंतिम लक्ष्य, तंत्र मंत्र अभिन्न संबंध, तंत्र परिभाषा एवं महत्वपूर्ण प्रयोग, दैनिक जीवन में तंत्र, दश महाविद्याओं का लौकिक एवं आध्यात्मिक विवेचन तथा इनके प्रसिद्ध शक्ति पीठों की जानकारी, तंत्र व् महाविद्या की प्राचीनता, मूल एवं विकास के विभिन्न प्रक्रम, तंत्र के अधिपति देव एवं मूल अधिष्ठात्री देवी, दश महाविद्या रहस्य, इसके अतिरिक्त तंत्र की शिक्षा भूमि तारापीठ, फलादेश में अंकशास्त्र की भूमिका, वास्तु परामर्श, वास्तु प्रश्नोतरी, विवादित वास्तु, यंत्र समीक्षा/मंत्र ज्ञान, हेल्थ कैप्सुल, लाल किताब, ज्योतिष सामग्री, मंत्र चिकित्सा, सम्मोहन, मुहूर्त विचार, टैरो कार्ड, सत्यकथा, अंक ज्योतिष के रहस्य, आदि विषयों पर गहन चर्चा की गई है।

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