हस्तरेखा एवं ग्रह योग से जाने कौन ही नशे का आदी

हस्तरेखा एवं ग्रह योग से जाने कौन ही नशे का आदी  

हस्तरेखा एवं ग्रह योग से जाने कौन है नशे का आदी सुश्री भारती आनंद वर्तमान में नशे का दायरा बढ़कर समाज के लगभग हर वर्ग और आयु के स्त्री पुरुषों को असमर्थताओं की सीमा तक ले जा रहा है। इस स्थिति से बचना और ऐसे व्यक्तियों की पहचान करना जरूरी हो गया है। ऐसे में ज्योतिष और हस्तरेखा का ज्ञान पर्याप्त सहायक हो सकता है। आईये जाने ऐसे कुछ ग्रह योगों और हस्तरेखाओं के बारे में जो व्यक्ति को नशे के चंगुल में फंसा देती है। ज्योतिष के आधार पर यदि नशाखोर को देखें तो लग्न में पाप ग्रह नीच के होकर विद्यमान हों, तुला और बृष लग्न को छोड़कर शुक्र ग्रह छठे या आठवें भाव में विद्यमान हो, 12वें घर में शुक्र के साथ मंगल राहु, केतु आदि ग्रह बैठे हों तो व्यक्ति को नशा बीमारी के रूप में आ सकता है। नशे की आदत इतनी बढ़ जाती है कि उसके प्राण भी जा सकते हैं तथा उसकी कमाई का अधिकतम हिस्सा नशा लेने में लग जाता है। तुला और बृष लग्न में चंद्र छठे या आठवें घर में हो या 12वें घर में शुक्र और मंगल के साथ बैठा हो तो भी व्यक्ति नशे का आदी हो सकता है। यदि पत्री में शुक्र, बुध, राहु नीच के हों, तो इन ग्रहों की महादशा या अंतर्दशा के समय में व्यक्ति इन व्यसनों का आदी होकर अपने स्वास्थ्य और धन का नाश करने की ओर अग्रसर हो सकता है। यदि 12वें घर पर एक से अधिक पाप ग्रहों की दृष्टि हो, तो जातक का खर्चा नशीले पदार्थों के सेवन पर हो सकता है। यदि भाग्य रेखा मोटी होकर, मस्तिष्क रेखा पर रुकती हो, हाथ का रंग काला हो, तो नशे की आदत बहुत पक्की हो जाती है। हथेली व नाखूनों पर काले धब्बे हों, अंगुलियां व अंगूठा मोटा हो तो हाथ सखत होने पर भी जातक किसी न किसी नशे का शिकार होता है। हृदय रेखा व मस्तिष्क रेखा एक हो, किंतु जीवन रेखा, भाग्य रेखा से मोटी हो तो व्यक्ति को अगर कोई लत लग जाये जैसे शराब, सिगरेट, गुटके की तो वह इसका नियमित रूप से सेवन करता है। यदि शुक्र पर्वत पर तिल हो, भाग्य रेखा में द्वीप हो, तो भी जातक को नशे की आदत हो जाती है। यह आदत उसे गलत संगति की वजह से ज्यादा हो जाती है। मस्तिष्क रेखा मोटी हो, मस्तिष्क रेखा के ऊपर मोटी-मोटी राहू रेखांए आती हों, तो भी व्यक्ति को नशा अंधकार की तरफ ले जाता है। हाथ नरम व गुलाबी और लालिमा लिए हो, तो व्यक्ति उच्च कोटि के नशे वाले पदार्थ उच्च कोटि की सोसाइटी में लेता है। हाथ का रंग लाल हो, उस पर लाल धब्बे हों, मंगल ग्रह उठा हुआ हो, भाग्य रेखा पर द्वीप होने पर जातक शराब या सिगरेट का नशा करता है। हाथ भारी हो, शुक्र ग्रह उभार लिए हो, अंगुलियां मोटी हों, हाथ सखत होने पर जातक कई प्रकार के व्यसनों से युक्त होता है। हृदय रेखा खंडित हो या जंजीराकार हो तो दिल टूटने पर व्यक्ति व्यसनों का शिकार हो जाता है। यदि मंगल और शुक्र पर्वत हाथ में अत्यधिक उभार लिए हों, तो व्यक्ति व्यसनों का शिकार हो जाता है और किसी की नहीं सुनता है।



पुनर्जन्म विशेषांक  सितम्बर 2011

पुनर्जन्म की अवधारणा और उसकी प्राचीनता का इतिहास पुनर्जन्म के बारे में विविध धर्म ग्रंथों के विचार पुनर्जन्म की वास्तविकता व् सिद्धान्त परामामोविज्ञान की भूमिका पुनर्जन्म की पुष्टि करने वाली भारत तथा विदेशों में घटी सत्य घटनाएं पितृदोष की स्थिति एवं पुनर्जन्म, श्रादकर्म तथा पुनर्जन्म का पारस्परिक संबंध

सब्सक्राइब

अपने विचार व्यक्त करें

blog comments powered by Disqus
.