अंजीर

अंजीर  

व्यूस : 11832 | अकतूबर 2011
अंजीर अंजीर एक मीठा, मुलायम, गूदेदार तथा स्वास्थ्यवर्द्धक फल है। इसका गूदा मीठा होता है और बीज छोटे होते हैं। इसके कई आकार और रंग होते हैं। इसमें नमी, प्रोटीन, चिकनाई और कार्बोहाइड्रेट् तत्त्व होते हैं। सूखी अंजीर में पोषक तत्व अधिक होते हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व शर्करा है। अंजीर में अनेक रोगनाशक गुण होते हैं, जो, बीमारी से आयी कमजोरी को दूर कर, सामान्य स्वास्थ्य प्राप्त करने में सहायता करते हंै। यह, शारीरिक और मानसिक तनाव दूर कर, शरीर को स्फूर्ति और शक्ति प्रदान करता है। अंजीर को दूध में उबाल कर पीने से शारीरिक शक्ति में वृद्धि होती है। यह एक उत्तम शक्तिवर्द्धक औषधि है। जिनके होंठ फूल जाते हैं और जीभ पर छाले हो जाते हैं, उन्हें अंजीर के सेवन से लाभ होता है। यह हृदय रोगों में उपयोगी है और नाक से खून गिरना बंद करता है। सूखे अंजीर में मधुमेह और श्वास रोगनाशक गुण हैं। अंजीर सब सूखे मेवों से अधिक लाभदायक है। यह चेहरे की कांति बढ़ाता है, बलगम को पिघला कर बाहर करता है। वह पुरानी खांसी में हो, बुध सप्तम भाव में, राहु लग्न में, पंचमेश मंगल द्वितीय भाव में हांे, तो जातक को नाभि से संबंधित विकार होता है। मकर लग्न: पंचमेश शुक्र अस्त हो कर त्रिक भावों में, गुरु पंचम भाव में मंगल से युक्त, या दृष्ट हो, लग्नेश शनि सूर्य से षष्ठ, सप्तम, या अष्टम हो, तो जातक को नाभि से संबंधित रोग होता है। कुंभ लग्न: लग्नेश शनि लग्न में हो और किसी ग्रह से दृष्ट, या युक्त नहीं हो, गुरु षष्ठ भाव और पंचम भाव की संधि के निकट हो कर षष्ठ भाव में हो, पंचमेश बुध त्रिक भावो में सूर्य से अस्त हो, षष्ठेश चंद्र पंचम भाव में हो, तो जातक को नाभि से संबंधित रोग होता है। मीन लग्न: लग्नेश गुरु लग्न में अपने ही नक्षत्र में हो, पंचमेश चंद्र सूर्य से अस्त हो कर षष्ठ भाव में हो, बुध-शुक्र पंचम भाव और शनि के नक्षत्र में हों, तो जातक को नाभि से संबंधित रोग विकार होता है। रोग, संबंधित ग्रह की दशा, अंतर्दशा और गोचर के प्रतिकूल रहने से उत्पन्न होता है। जबतक संबंधित ग्रह प्रभावी रहेगा, तबतक रोग देगा। उसके उपरांत रोग से राहत मिलेगी। त लाभदायक है तथा पथरी, लकवा, प्यास और जिगर के रोगों को ठीक करता है। विभिन्न रोगों में अंजीर का उपयोग: बवासीर: प्रतिदिन पानी में भीगे हुए 2-3 अंजीर खाने और उनका पानी पीने से बवासीर की शिकायत दूर होती है। मोतियाबिंद: अंजीर का दूध आंख में लगाने से मोतियाबिंद की बीमारी ठीक होने लगती है, मुंह पर लगाने से मुहांसे ठीक हो जाते हैं तथा चेहरा साफ और कांतिदायक होता है। कब्ज: जब भोजन ठीक से नहीं पचता, तब कब्ज होती है। अंजीर खाने से स्थायी कब्ज दूर होती है। सूखे अंजीर कब्ज में लाभ करते हैं, क्योंकि इनमें न्यूसिन की मात्रा अधिक होती है। रात भर भीगा अंजीर प्रातः काल खाने से मल साफ आता है। दमा: अंजीर के सेवन से बलगम (कफ) बाहर निकल आता है और रोगी को आराम मिलता है। इससे दमे के रोग में भी आराम मिलता है। जुकाम-खांसी में भी अंजीर लाभदायक है। खून की कमी और शुद्धि: अंजीर को, दूध में बादाम की गिरी के साथ उबाल कर, चीनी मिश्रित कर, प्रतिदिन प्रातः काल खाने से खून की वृद्धि होती है और खून साफ होता है। स्त्रियों के लिए: जो स्त्रियां गर्भ धारण करना चाहती हैं, उन्हें अंजीर का सेवन करना चाहिए। इससे शरीर में गर्भधारण करने की शक्ति बढ़ती है। गर्भावस्था में भी इसका सेवन स्त्रियों के लिए लाभदायक है। नपुंसकता: जिन पुरुषों की संभोग शक्ति कम हो गयी हो, उनके लिए अंजीर का सेवन विशेष लाभदायक है। अंजीर को दूध के साथ खाने से नपुंसकता दूर होती है। दुबलापन: जो लोग दुबले-पतले हैं, उन्हें चालीस दिन तक 4-5 अंजीर, सौंफ के साथ कूट कर प्रातः दूध में मिलाकर खाने से शरीर का दुबलापन दूर होता है और शरीर भरने लगता है। सावधानियां: अंजीर को हमेशा धो कर खाना चाहिए। मधुमेह से पीड़ित रोगी सूखी अंजीर का सेवन सीमित मात्रा में करें और अपने वैद्य, या डाॅक्टर से पूछ कर ही इसका सेवन करें।

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दीपावली विशेषांक   अकतूबर 2011

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