आयुर्वेद में अच्छे खाने का अर्थ है जिसमें घी हो, हल्का और आसानी से पचने वाला हो, थोड़ा गर्म हो। ऐसा खाना पाचन तंत्र को सही रखता है, पेट साफ रखता है, शरीर का पोषण करता है और आसानी से पच जाता है। आयुर्वेद में हर खाने वाली चीज की तासीर को महत्वपूर्ण माना गया है। अर्थात कुछ चीजों की तासीर गर्म है और कुछ की ठंडी, ऐसे में ऐसे दो चीजों को एक साथ खाना जिनकी तासीर विपरीत है हानिकारक होता है। जैसे दूध ठंडा होता है और मछली गर्म इसलिए इन्हें एक साथ नहीं लेना चाहिए। आयुर्वेद के अनुसार किस-किस चीज को एक साथ नहीं खाना चाहिए और क्यों? जानते हैं: दूध के साथ दही दूध और दही की तासीर अलग-अलग है। इसलिए इन्हें एक साथ नहीं लेना चाहिए। यदि हम इन्हें एक साथ लेंगे तो हमें एसिडिटी हो सकती है। पेट में गैस, अपच व उल्टी आदि हो सकती है। इसी तरह दूध के साथ अन्य खट्टी चीजों का प्रयोग हानिकारक हो सकता है। यदि दोनों को खाना ही है तो दोनों में कम से कम दो घंटे का अंतराल होना चाहिए। इसमें भी पहले दूध और बाद में अन्य खट्टा पदार्थ। दूध और मछली दूध की तासीर ठंडी है और मछली की तासीर अति गर्म। इसलिए इन दोनों को साथ नहीं लेना चाहिए। इससे पेट में गैस, एसिडिटी, एलर्जी, और चर्म रोग उत्पन्न हो सकते हैं। इसी प्रकार दही के साथ मछली खाने से भी वैसी ही हानि हो सकती है जैसे दूध और मछली की कही गई है। तला-भूना और नमकीन के साथ दूध दूध में प्रोटीन, विटामिन, मिनरल आदि होते हैं। उसके साथ नमक मिलाने से प्रोटीन जम जाते हैं और पौष्टिकता नष्ट हो जाते हैं। इसलिए दूध के साथ परांठे, पकौड़े और अन्य तली भूनी और नमकीन पदार्थ नहीं खाने चाहिए अन्यथा चर्म रोग हो सकते हैं यदि हम लंबे समय तक ऐसे ही करते रहें। दूध और फलों को साथ-साथ खाना दूध और फलों को साथ-साथ नहीं लेना चाहिए क्योंकि दूध के अंदर का कैल्शियम फलों के कई एंजाइम्स को खुद में समेट लेता है जिससे उनका पोषण शरीर को नहीं मिल पाता। संतरा-अन्ननास जैसे खट्टे फल तो दूध के साथ कभी नहीं लेने चाहिए। बहुत से लोग केले और दूध को लेते हैं जो कि सही नहीं है। केला कफ बढ़ाता है। यदि दोनों को साथ लंे तो कफ बढ़ता है और पाचन पर भी असर पड़ता है। आम और दूध को भी मिलाकर नहीं पीना चाहिए। आम में खटास होती है जो दूध के साथ मिलकर खमीर बना देती है जिससे दूध के पाचन पर प्रभाव पड़ता है। फल और दही साथ-साथ लें या न लें फलों और दही दोनों की तासीर अलग-अलग हैं और इनके एंजाइम्स भी अलग हैं। इस कारण यह एक साथ खाने से पच नहीं पाते इसलिए दोनों को एक साथ नहीं खाना चाहिए। लोग जो फ्रूट रायता बना कर खाते हैं सेहत के लिहाज से अच्छा नहीं माना गया है। कभी-कभी लेने से फर्क नहीं पड़ता, लेकिन बार-बार लेने से नुकसान होता है। खाने के साथ फलों का खाना फलों को पचने में जहां दो घंटे लगते हैं वहीं खाने को पचने में चार से पांच घंटे लगते हैं। कारण कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन के पाचन का मैकेनिज्म अलग होता है। कार्बोहाईड्रेट को पचाने वाला सलाइवा एंजाइम एल्क्लाइन मीडियम में काम करता है जबकि खट्टे-मीठे फल एसिडिक होते हैं। दोनों को साथ खाया जाए तो कार्बोहाइड्रेट या स्टार्च की पाचन प्रक्रिया धीमी हो जाती है। इसलिए खाने के साथ फल न खाएं? फल एवं सलाद खाने से आधा घंटा पहले लें तो अच्छा होता है। इससे पाचन तंत्र सुचारू रूप से कार्य करता है एसिडिटी भी नहीं होती। लस्सी या छाछ खाने के साथ खाने के साथ लस्सी व छाछ ले सकते हैं क्योंकि छाछ बहुत अच्छी पेय या एडिशनल डाइट है और शरीर को पोषण भी ज्यादा मिलता है। यह खुद आसानी से पच जाती है। इसमें अगर नमक, जीरा, काला नमक डालकर लें तो बेहतर होगा। मीठी लस्सी पीने से अतिरिक्त कैलोरी मिलती है इसलिए मीठी लस्सी न पिएं। नमकीन लस्सी खाने के साथ लेना या बाद में लेना बेहतर है। खाने में पहले लेने से पेट भरा महसूस होगा जिससे भरपूर खाना नहीं खा पाएंगे। लेकिन अगर वजन घटाना हो तो खाने से पहले लस्सी पिएं ताकि फालतू खाने से बच सकें। खाने के साथ पानी पीना चाहिए या नही खाने के साथ पानी पीने से बचना चाहिए ताकि खाना लंबे समय तक पेट में रहे और शरीर का पोषण करे। यदि खाने में मसाले तेज हैं और पेट में जलन पैदा करते हैं तो अवश्य पानी पिएं ताकि जलनशील तत्व पानी में घुल कर नीचे चले जाएं। सादे खाने के साथ पानी नहीं पिएं। यदि मौसम के अनुसार पानी पीने की इच्छा हो तो घूंट-घूंट कर पानी पिएं ताकि खाने में कुछ तरावट रहे और आसानी से पच जाए। वैसे पानी खाने से आधा घंटा पहले या खाने के एक घंटे बाद पिएं। प्रोटीन और फैट साथ-साथ लें या नहीं प्रोटीन और फैट एक साथ खाने में नहीं लेना चाहिए क्योंकि दो तरह के खाने अगर एक साथ खाए जाएं तो वह एक-दूसरे की पाचन प्रक्रिया में दखल देते हैं। इससे पेट में दर्द और पाचन गड़बड़ा जाता है। पराठे के साथ दही लें या नहीं सिद्धांत अनुसार पराठे या पूरी आदि तली भूनी चीजों के साथ दही नहीं खाना चाहिए क्योंकि दही, फैट पाचन में रूकावट डालता है और फैट्स से मिलने वाली एनर्जी शरीर को नहीं मिल पाती। दही खाना ही है तो उसमें काली मिर्च, सेंधा नमक या आंवला पाउडर मिला दें। खाने के बाद चाय लें या न लें खाने के बाद चाय पीना कोई लाभदायक नहीं है बल्कि पाचन तंत्र को बिगाड़ने वाली बात है क्योंकि कुदरती पचाने वाला सलाइवा-एंजाइम नष्ट हो जाता है जिससे हमारा पाचन तंत्र अपना कुदरती स्वभाव छोड़ चाय पर निर्भर हो जाएगा जो भविष्य के लिए ठीक नहीं होगा। प्याज, लहसुन खाना चाहिए या नहीं? लहसुन को रोजाना खाना चाहिए बल्कि इसे रोज के खाने का हिस्सा बना लें। लहसुन फैट कम करता है और खराब कोलेस्ट्राॅल घटाकर अच्छा कोलेस्ट्राॅल पैदा करता है। इसमें एंटी-बाॅडीज और एंटी आॅक्सिडेंट गुण होते हैं। प्याज भूख बढ़ाता है और खून के नलियों के आसपास फैट जमा होने से रोकता है। इसके अतिरिक्त ये सर्दी-जुकाम और सांस संबंधी एलर्जी का मुकाबला अच्छी तरह से करता है। लहसुन-प्याज कच्चा या भूनकर कैसे भी खाया जा सकता है। लेकिन लहसुन को कच्चा खाना अच्छा है। कच्चे लहसुन को निगलंे नहीं, चबा कर खाएं क्योंकि कच्चे लहसुन में कई ऐसे तेल होते हैं जो चबाने से ही निकलते हैं जो शरीर के लिए लाभकारी होते हैं। आहार (डाइट) कैसी हो? हमेशा संतुलित आहार ही खाना चाहिए जिसमें कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन, फैट, मिनरल्स और विटामिन्स आदि भरपूर मात्रा में हांे। आयुर्वेद के अनुसार विपरीत गुणों और मिजाज के खाने से, ज्यादा मात्रा में साथ-साथ खाने से हानि हो सकती है।


शारीरिक हाव भाव एवं लक्षण विशेषांक  आगस्त 2014

सृष्टि के आरम्भ से ही प्रत्येक मनुष्य की ये उत्कट अभिलाषा रही है कि वह किसी प्रकार से अपना भूत, वर्तमान एवं भविष्य जान सके। भविष्य कथन विज्ञान की अनेक शाखाएं प्रचलित हैं जिनमें ज्योतिष, अंकषास्त्र, हस्त रेखा शास्त्र, शारीरिक हाव-भाव एवं लक्षण शास्त्र प्रमुख हैं। हाल के वर्षों में शारीरिक हाव-भाव एवं अंग लक्षणों से भविष्यवाणी करने का प्रचलन बढ़ा है। वर्तमान अंक में शारीरिक हाव-भाव एवं अंग लक्षणों से भविष्यवाणी कैसे की जाती है, इसका विस्तृत विवरण विभिन्न लेखों के माध्यम से समझाया गया है।

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