नजर दोष निवारक लाॅकेट

नजर दोष निवारक लाॅकेट  

फ्यूचर समाचार में मार्च अंक के साथ मुफ्त उपहार नजर दोष निवारण लाॅकेट पाठकों के लिए विशेष उपहार दिया जा रहा है। जिस जातक कोे किसी की नजर लग गई हो या बार-बार नजर लग जाती हो या उसके घर या व्यवसाय को किसी ने बांध दिया हो तो वे नजर दोष निवारण लाॅकेट पहन कर लाभ उठा सकते हैं। आज के युग में पग-पग पर नजर दोष का प्रभाव देखा जा रहा है। आज के युग में हर व्यक्ति को किसी न किसी रूप में नजर लग ही जाती है। और उसका बना-बनाया काम बिगड़ जाता है। उसे समझ में नहीं आता कि ऐसा क्या हो गया कि जो काम होने वाला था वह होते-होते रह गया। ऐसी स्थिति में यह नजर दोष निवारण लाॅकेट बहुत कारगर होता है। इसे धारण करने से किसी की बुरी नजर नहीं लगती है। इस लाॅकेट को सभी व्यक्ति पहन सकते हैं। चाहे वह स्त्री हो या पुरुष, बड़ा हो या छोटा। बच्चो को नजर दोष अधिक लगती है। रोज खुश रहने वाला बच्चा अचानक रोने लगता है। स्कूल जाने से डरता है। अर्थात उसे किसी न किसी की नजर लग जाती है। उनकी यह लाॅकेट नजर दोष से रक्षा करता है। उपयोग विधि एवं लाभ इस लाॅकेट को मंगलवार या शनिवार को गंगाजल में धोकर हनुमान चालीसा पढ़ कर मंगल की होरा में धारण करें। एवं निम्न मंत्रों का 108 बार जप करें। मंत्र: ¬ ऐं ींीं क्लीं चामुंडाय विच्चैः। मंत्र: ¬ हं हनुमते नमः। लाभ Û इसे पहनने से भूत-प्रेत, बाधा, नजर, टोटके से बचाव होता है। Û इसे पहनने से जातक में आत्मविश्वास, महत्वाकांक्षा, एवं शक्ति को पुनः बढ़ावा मिलता है और वह पहले की तरह से कार्य करने लगता है। Û यदि घर में किसी ने टोना-टोटका किया हुआ हो तो इसे पहनने से टोने का असर समाप्त हो जाता है। Û यदि व्यवसाय में किसी प्रकार का बंधन हो और मेहनत करने के बाद भी फल प्राप्त नहीं हो रहे हों तो यह लाॅकेट अवश्य पहनें, लाभ मिलेगा। Û नजर दोष निवारण लाॅकेट विशेष तौर पर विद्यार्थियों को नयी दिशा प्रदान करता है और बच्चे का मन इधर-उधर नहीं भटकता है। Û जो बच्चा रात को सोते समय बहुत डरता हो तो उसके गले में लाॅकेट डालने से बच्चे को डर नहीं लगता है। Û बच्चा यदि रोता ही चला जाए, दूध न पीए और प्रतिदिन कमजोर होता चला जाए तो उसे नजर दोष निवारण लाॅकेट पहनाने से फर्क महसूस होता है।


नजर व बंधन दोष मुक्ति विशेषांक  मार्च 2010

नजरदोष के लक्षण, बचाव व उतारने के उपाय, ऊपरी बाधा की पहचान, कारण व निवारण, नजरदोष का वैज्ञानिक आधार तथा नजर दोष निवारक मंत्र व यंत्र आदि विषयों की जानकारी प्राप्त करने हेतु यह विशेषांक अत्यंत उपयोगी है। इस विशेषांक में महान आध्यात्मिक नेता आचार्य रजनीश की जन्मकुंडली का विश्लेषण भी किया गया है। इसके विविधा नामक स्तंभ में ÷हस्ताक्षर विज्ञान द्वारा रोगों का उपचार' नामक लेख उल्लेखनीय है।

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