हस्त रेखा विशेषज्ञ से जानिए

हस्त रेखा विशेषज्ञ से जानिए  

हस्त रेखा विशेषज्ञ से जानिए आचार्य रमेश शास्त्री प्रश्न: मेरी पुत्री की शिक्षा एवं कैरियर के संदर्भ में उचित मार्गदर्शन प्रदान कर अनुग्रहीत करें। -डाॅ. पी.के. माथुर, भीलवाड़ा उत्तर: 21 वर्ष तक की अवस्था तक 5 ( रत्ती का गोमेद पंचधातु में बुधवार को सूर्य अस्त होने के बाद धारण करें। प्रश्न: मेरे हाथ में संतान योग है या नही अध्ययन के क्षेत्र में अधिक परिश्रम करना पड़ेगा, इसके पश्चात 22वें वर्ष में शिक्षा, प्रतियोगिता, कैरियर के क्षेत्र में सफलता प्राप्ति के योग बनेंगे। हाथ में बुध ग्रह कमजोर है जिसके कारण परिश्रम के अनुपात में फल प्राप्त होने में कमी हो सकती है। बुधवार के दिन ऊँ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः इस मंत्र का 108 बार जप करें। बायें हाथ की बीच वाली उंगली में 5 ( रत्ती का गोमेद पंचधातु में बुधवार को सूर्य अस्त होने के बाद धारण करें। प्रश्न: मेरे हाथ में संतान योग है या नही?ं व्यापार कब तक ठीक चलेगा? उत्तर: ग्रहों का उपाय करने से संतान होगी। जून 2006 से 2008 की अवधि के भीतर संतान होने के अधिक योग बन रहे हैं। जुलाई 2006 के पश्चात आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। संतान प्राप्ति के लिए निम्न उपाय करें: 7 ( रत्ती से 9 ( रत्ती तक का उत्तम कोटि का मोती चांदी की अंगूठी में दायें हाथ की सबसे छोटी उंगली में सोमवार को सुबह के समय धारण करें। 31 बृहस्पतिवार के व्रत पति/ पत्नी में से कोई भी करें। ऊँ ह्रीं क्लीं शक्तिरूपाय मम गृहे संतान सुखं कुरु कुरु स्वाहा। इस मंत्र का सोमवार अथवा बृहस्पतिवार से प्रारंभ कर पति-पत्नी नित्य 108 बार जप करें। प्रश्न: दाम्पत्य तथा पारिवारिक जीवन में अशांति, तनाव की स्थिति विवाह के बाद से ही बनी हुई है। कोई प्रभावी उपचार बताने का कष्ट करें। -उपेंद्र मेनारिया, रावतभाटा उत्तर: आपकी हस्ताकृति से प्रतीत हो रहा है कि आपके अंदर धैर्य की कमी है। छोटी-छोटी बातों को भी आप गहराई से ले लेते हैं जिसके कारण लोग आप पर कम विश्वास करते हैं। अपने व्यवहार में सुधार लाएं। 4 ( से 5 ( रत्ती तक का नीलम सोने में दायें हाथ की बीच वाली उंगली में शनिवार सायंकाल के समय धारण करें। ¬ प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः इस मंत्र का नित्य एक



पराविद्याओं को समर्पित सर्वश्रेष्ठ मासिक ज्योतिष पत्रिका  अप्रैल 2006

सभ्यता के आरम्भिक काल से ही फलकथन की विभिन्न पद्धतियां विश्व के विभिन्न हिस्सों में प्रचलित रही हैं। इन पद्धतियों में से अंक ज्योतिष का अपना अलग महत्व रहा है यहां तक कि अंक ज्योतिष भी विश्व के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग रूपों में प्रचलित है तथा इन सब में आपस में ही विभिन्नता देखने को मिलती है। हालांकि सभी प्रकार के अंक ज्योतिष के उद्देश्य वही हैं तथा इनका मूल उद्देश्य मनुष्य को मार्गदर्शन देकर उनका भविष्य बेहतर करना तथा वर्तमान दशा को सुधारना है। फ्यूचर समाचार के इस विशेषांक में अंक ज्योतिष के आधार पर फलकथन को वरीयता दी गयी है। इसमें मुख्यतः कीरो की पद्धति का अनुशरण किया गया है। इसके अन्तर्गत समाविष्ट महत्वपूर्ण आलेखों में- अंक ज्योतिष का परिचय एवं महत्व, अंक फलित के त्रिकोण प्रेम, बुद्धि एवं धन, मूलांक से जानिए भाग्योदय का समय, नाम बदलकर भाग्य बदलिए, हिन्दी के नामाक्षरों द्वारा व्यवसाय का चयन, अंक ज्योतिष का महत्वपूर्ण पहलू स्तूप, अंक एवं आॅपरेशन दुर्योधन, मूलांक, रोग और उपाय, अंक विद्या द्वारा जन्मकुण्डली का विश्लेषण आदि। इन आलेखों के अतिरिक्त दूसरे भी अनेक महत्वपूर्ण आलेख अन्य विषयों से सम्बन्धित हैं। इसके अतिरिक्त पूर्व की भांति स्थायी स्तम्भ भी संलग्न हैं।

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