2017 नववर्ष मंगलकारी कैसे हो !

2017 नववर्ष मंगलकारी कैसे हो !  

व्यूस : 2237 | जनवरी 2017

नये साल में ग्रहों व नक्षत्रों का प्रभाव हम पर किस प्रकार का होगा? हम क्या उपाय करें कि नववर्ष हमारे लिये मंगलकारी हो - यह उत्सुकता हम सभी में, नववर्ष आने से पहले ही जन्म ले लेती है। नये साल में हमें अनेक विपदाओं व अशुभताओं का भी सामना करना पड़ सकता है। ग्रह व नक्षत्र तो शुभ व अशुभ दोनांे प्रकार के फल देंगे परंतु अशुभता को हम अपने जीवन में कैसे स्थान दे सकते हैं। शुभता तो हम सभी को स्वीकार्य है

जबकि अशुभता व परेशानियों से बचने की हम सभी कोशिश करते हैं। किसी को तो सफलता मिल जाती है परंतु अधिकांश उचित उपाय ढूंढ़ते ही रह जाते हैं। आईये हम जानते हैं कि नववर्ष 2017 में शुभता में वृद्धि व अशुभता का नाश किन उपायों से किया जा सकता है। अंक विद्यानुसार वर्ष ‘2017’ के अंकों का कुल योग 2$0$1$7 = 10 = 1$0 = 1 आता है। शास्त्रों में कहा गया है कि अंक 1 सूर्य ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है अर्थात वर्ष 2017 में सूर्य का प्रभाव अधिक रहेगा।

शास्त्रानुसार सूर्य अग्नि तत्व की राशि सिंह का स्वामी है। सिंह राषि की त्रिकोण राशियां धनु व मेष हैं तथा सूर्य की उच्च राशि भी मेष कही जाती है। अतः मेष, सिंह व धनु राशि वालों के लिये यह वर्ष कुछ विशेष ही रहेगा यानि कि शुभ सूर्य जातक के जीवन को उत्थान व अषुभ सूर्य जातक के जीवन को पतन भी दे सकता है। नववर्ष 2017 में सूर्य देव की पूजा व आशीर्वाद से शुभत्व में वृद्धि और अशुभता का नाश किया जा सकता है। वर्ष 2017 में विभिन्न जातक अपनी चंद्र राशि या नाम राशि अनुसार सूर्य देव के विभिन्न मंत्रों का जाप कर सुख, समृद्धि, शांति प्राप्त कर सकते हैं।

उन्हें चाहिये कि निम्न मंत्रों में से अपनी राशि अनुसार सूर्य के मंत्र चुनें। फिर श्रद्धा-भक्ति से नववर्ष में पहले शुक्ल पक्ष के पहले रविवार से शुरू कर रोजाना सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर, रुद्राक्ष की माला लेकर, सूर्य देव के सम्मुख उचित आसन पर बैठकर, धूप दीपादि जलाकर, लाल पुष्प, डाॅ. संजय बुद्धिराजा अक्षत, वस्त्र, फल आदि अर्पण कर, सूर्य देव के मंत्रों की एक माला यानि 108 बार जाप करें। तत्पश्चात भोजपत्र पर बने सूर्य के यंत्र के सम्मुख पुष्प, मिष्टान्न आदि अर्पण कर, सूर्य के अन्य मंत्रों की एक माला का जाप करें। राशि अनुसार सूर्य के विभिन्न मंत्र इस प्रकार से हैं:


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यदि किसी जातक की जन्म चंद्र राशि व नाम राशि में अंतर हो तो जातक को दोनों राशियों के मंत्रों का जाप करना चाहिये। जैसे कि यदि जन्म पत्रिकानुसार नाम तो ‘सन्नी’ निकलता है और रखा है ‘राजन’ तो जन्म चंद्र राशि हुई कुंभ व नाम राशि हुई तुला तब जातक को कुंभ व तुला दोनों राशियों के मंत्रों का जाप करना चाहिये। यदि जन्म चंद्र राशि न मालूम हो तो केवल नाम राशि के मंत्रों का जाप करना चाहिये।

यदि वर्ष 2017 में किसी विशेष काम की इच्छापूर्ति की अभिलाषा हो जैसे कि काफी प्रयास करने से भी विवाह नहीं हो पा रहा हो या कारोबार में असफलता हाथ लग रही हो या स्वास्थ्य की परेशानी चल रही हो या विद्याध्ययन में बाधाएं आ रही हों या संतान होने में रूकावट आ रही हो तो निम्न मंत्रोच्चार व उपायों को श्रद्धानुसार लगातार कर जरुर आजमाना चाहिये:-

1 पुत्र प्राप्ति के लिये - ऊँ भास्कराय पुत्रं देहि महातेजसे। धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्।।

2 रोग निवारण हेतु - ऊॅं ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः।।

3 व्यवसाय में वृद्धि हेतु - ऊँ घृणि सूर्य आदित्य ओम्।।

4 शत्रु नाश के लिये: शत्रु नाशाय ऊँ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः।।

5 रविवार को निम्न मंत्र बोलते हुये बहते पानी में गेहूं, गुड़ प्रवाहित करें - ऊँं रवये नमः।।

6 रोजाना सूर्य को जल दें और निम्न मंत्र 11 बार बोलें - ऊँ भानवे नमः।।

7 रविवार का व्रत रखें और निम्न मंत्र की एक माला जाप करें - ऊँ खगय नमः।। सूर्य देव के आशीर्वाद से सभी जातकों को नववर्ष में शुभत्व की प्राप्ति होगी व जीवन सुख, समृद्धि व शांति से भरपूर रहेगा।

राशि सूर्य के मंत्र 1 मेष, वृश्चिक नवनीत समुत्पन्नं सर्व संतोष कारकम् घृत तुभ्यं प्रदा स्यामि स्रानार्थ प्रति गृह यन्ताम् एवं ऊँ हिरण्यगर्भाय नमः।।

2 वृषभ, तुला शीत वातोष्ण संत्राणं लज्जाया रक्षणं परम् देहा लंकारणं वस्त्र मतः शांति प्रयच्छ मे एवं ऊँं मारिचाये नमः।।

3 मिथुन, कन्या विचित्र रत्न खन्चित दिव्या स्तरण संयुक्तम् स्वर्ण सिंहासन चारु गृहीश्व रवि पूजिता एवं ऊँं आदित्याय नमः।।


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4 कर्क दिव्यं गन्धाढ्य सुमनोहरम् वबिलेपनं रश्मि दाता चंदनं प्रति गृह यन्ताम् एवं ऊँ सावित्रे नमः।।

5 सिंह ऊँं सर्वतीर्थसमूद्भूतं पाद्यगन्धदिभिर्युतम् प्रचंड ज्योति गृहाणेदं दिवाकर भक्त वत्सलां एवं ऊँं आर्काय नमः।।

6 धनु, मीन नवभि स्तन्तुमिर्यक्तं त्रिगुनं देवता मयम् उपवीतं मया दतं गृहाणां परमेश्वरः एवं ऊँ भास्कराय नमः।।

7 मकर, कुंभ ऊँ सूर्य देवं नमस्ते स्तु गृहाणं करुणाकरं अघ्र्यं च फलं संयुक्त गन्ध माल्याक्षतै युतम् एवं ऊँ पुष्णे नमः।।

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