योगासन संवारे तन-बदन

योगासन संवारे तन-बदन  

योगासन संवारे तन-बदन स्वामी सत्यार्थ सूत्रा वर्तमान परिवेश में अपने शरीर को सही शेप में रखने व चेहरे की खूबसूरती बढ़ाने की दिलचस्पी कुछ ज्यादा ही बढ़ जाती है। जहंा चेहरे को खूबसूरत बनाने के लिए तरह-तरह के प्रसाधन बाजार में उपलब्ध हैं, वहीं शरीर को सही शेप प्रदान करने के लिए भी बहुत से स्लिमिंग सेंटर खुले हुए हैं। इनकी तरफ लोगों का आकर्षण भी काफी है लेकिन इनके साइडइफेक्ट की आशंका कइयों को परेशानी में डाल देती है। फिर ये काफी खर्चीले भी हैं परन्तु अगर आप बिना एक रुपया खर्च किये अपने चेहरे की कांति को बढ़ाने के साथ शरीर को किसी जौहरी की तरह तराशा हुआ बनाना चाहते हैं, तो योग का सहारा लेना शुरु कर दीजिए। कुछ ही सप्ताह में आप अपने अंदर बहुमूल्य बदलाव महसूस करेंगे। योग में कई ऐसे आसान है, जिन्हें युवा अगर नियमित रुप से करें तो किसी भी सौंदर्य प्रसाधन या जिम जाने की आवश्यकता नहीं पडे़गी। दरअसल योग के इन आसनों से शरीर की मांसपेशियों में रक्त का प्रवाह तेज होता है और हिमोग्लोबिन भी तेज होता है और हिमाग्लोबिन भी तेजी से बढ़ता है और इससे चेहरे पर लाली स्वतः ही उत्पन्न होने लगती है। इसके अलावा बहुत सी बीमारियों से भी स्वतः ही पीछा छूट जाता है। प्रस्तुत हैं ऐसे कुछ महत्त्वपूर्ण आसन- कर्ण शक्ति विकासक क्रिया- दोनों पैरों को मिलाकर खड़े हो जायें और पैर से कंधे तक के हिस्से को एकदम सीधा रखें दोनों हाथों के अंगूठों से दोनों कानों के छिद्रों को बंद कर दें। फिर दोनों हाथों की तर्जनी अंगुलियों से दोनों आंखों को बंद करें। मध्यमा अंगुली से नाक के छिद्र और अनामिका तथा कनिष्ठा अंगुली से मुख को बंद कर लें और कौए की चोंच के समान बना लें। सांस को अंदर की तरफ खींचे और गाल फुला कर गर्दन को नीचे छाती पर लगाएं। इसके बाद सांस छोड़ते हुए आंखे खोल कर गर्दन को सामान्य स्थिति में ले आएं। कपोल शक्ति विकासक क्रिया- दोनों पैरों को मिला कर खड़े हो जायें और पैर से कंधे तक के हिस्से को एकदम सीधा रख दोनों हाथों की आठों अंगुलियों के अगले भाग को आपस में मिला लें और अंगूठों से नाक के नथुनों को बंद कर दें। इसके बाद अपने मुंह को कौवे की चोंच की तरह बना कर बाहर निकालें और जोर लगा कर सांस को अंदर की तरफ खीचें। इस दौरान आंखों को खुला रखें। गालों को फुलाएं, आंख मूंद लें तथा ठोडी को कंठकूप से लगा लें। फिर गर्दन को सामान्य अवस्था में लाकर सामने की ओर देखते हुए सांस को धीरे-धीरे छोड़े। उपरोक्त दोनों आसनों के करने से चेहरे की खूबसूरती बढ़ती है। उत्थित पद्मासन- जमीन पर बैठ कर पैर सामने की तरफ सीध् ो रखते हुए आपस में मिलाएं। फिर बायां पैर दायीं जंघा पर और दायां पैर बायीं जंघा पर रख इस प्रकार बैठें कि दोनों पैरों की एड़ियां नाभि के दोनों तरफ पेट से सटी रहें। कमर,, छाती, सिर आदि को सीध् ाा और तना हुआ रखें। इसके बाद हाथों को दोनों तरफ जमीन पर सीध् ाा जमा दें और पूरे शरीर को ऊपर उठाने का प्रयास करें। चक्रासन- जमीन पर कमर के बल लेट कर दोनों पैरों को घुटने से मोड़ कर कमर के दायें-बायें रखें। ठीक उतनी ही दूरी पर दोनों हाथों को कंधों के नीचे अंगुलियों को अंदर रखते हुए नीचे रखें। इसके पश्चात धीरे-धीरे दोनों हाथों और पैरों के सहारे पूरे शरीर को ऊपर की तरफ उठा कर कमर को सीधा रखें। उच्च रक्तचाप, हर्निया से पीड़ित इस आसन को न करें। मंडूकासन- दोनों घुटनो को मोड़ कर वज्रासन में बैठे और दोनों हाथों की मुट्ठी बनाकर नाभि के बीच मुट्ठी को रख कर दोनों मुट्ठियों से पेट को अंदर की तरफ दबाएं। सांस को सामान्य रखकर आगे झुकें और छाती को घुटनों से लगाएं और फिर गर्दन को ऊपर उठाएं। इस आसन को करने से चेहरे में खून का दौरा बढ़ता है।



तंत्र, मंत्र एवं महालक्ष्मी विशेषांक   नवेम्बर 2007

तंत्र मंत्र का आपसी सम्बन्ध, महालक्ष्मी जी की उपासना एवं दीपावली पूजन, तंत्र मंत्र द्वारा धन प्राप्ति, श्री प्राप्ति में सहायक श्री यंत्र, दीपावली पर की जाने वाली तांत्रिक सिद्धियां, श्री सूक्त, लक्ष्मी सूक्त आदि मन्त्रों का महत्व

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