- शीघ्र विवाह हेतु: लड़कों के शीघ्र विवाह एवं सुलक्षणा पत्नी की प्राप्ति के लिए अपने पूजा घर में चैकी पर लाल रेशमी वस्त्र बिछा कर दुर्गा मां की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। शुक्ल पक्ष के प्रथम मंगलवार को या नवरात्र के प्रथम नवरात्र को मूर्ति के समीप गौरीशंकर रुद्राक्ष भी चांदी की प्लेट में रखें। धूप दीप जलाएं, लाल फूल चढ़ाएं। नैवेद्य रखें। निम्न मंत्र की एक माला का जाप प्रतिदिन करें: पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम्। तारिणी दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम्।। चालीस दिन कम से कम प्रयोग जारी रखें। फिर गौरीशंकर रुद्राक्ष को ¬ गौरीशंकराभ्यां नमः मंत्र जपते हुए गले में धारण कर लें। शीघ्र लाभ महसूस करेंगे। गौरीशंकर रुद्राक्ष सोने की चेन में धारण करें तो अति उत्तम होगा। - पूर्व जन्म के पाप: शालिग्राम स्थापित कर पूजा घर में शुभ मुहूर्त में नित्य श्रद्धा से पूजा करें। घी के दीपक में एक छोटी इलायची डाल कर जलाएं। गुलाब की अगरबत्ती जलाएं, खीर का भोग रखें और स्फटिक की माला से ¬ विष्णवे नमः का प्रतिदिन जाप करें। ऐसा नियमित करने से सब पापों का नाश होता है। मनोरथ पूर्ण होते हैं, सुख-समृद्धि बनी रहती है। - हृदय रोग: यदि कुंडली में हृदय रोग के योग विद्यमान हों तो आरंभ से ही ज्योतिषीय और धार्मिक उपाय द्वारा बचाव कर लेना चाहिए। परिणाम चमत्कार से कम नहीं होते। ऐसे में एक, पांच या नौ मुखी रुद्राक्ष विधि-विधान के साथ धारण करना चाहिए। रविवार का उपवास, भगवान सूर्य को अघर््य और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना भी लाभकारी होता है। कुंडली विश्लेषण करा कर लग्नेश, पंचमेश एवं नवमेश के रत्न धारण करने चाहिए। - जनसंपर्क: आधुनिक समय में जनसंपर्क प्रत्येक प्रकार के कैरियर के लिए आवश्यक है। इसके लिए शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से गौरीशंकर रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। ¬ सोमेश्वराय नमः का प्रतिदिन एक माला जप करें। जिन-जिन व्यक्तियों से संपर्क रहता है, उनके साथ मधुर संबंध बनते हैं। व्यवसाय में साझेदारी हो तो साझेदारी लंबे समय तक बनी रहती है। व्यवसाय में सफलता कदम चूमती है। - मंगली दोष: मंगली दोष के प्रभाव को कम करने के लिए मूंगे के हनुमान जी की उपासना कारगर है। शुभ मुहूर्त में मूंगे के हनुमान जी की स्थापना करके और यथाविधि पूजन करके निम्न मंत्र का एक माला जप करें। ¬ अंजनी पुत्राय विद्महे रामदूताय धीमहि, तन्नोप्हनुमत् प्रचोदयात्। - दाम्पत्य जीवन: मंगली दोष के कारण यदि दाम्पत्य जीवन में तनाव उत्पन्न हो रहा हो तो पति-पत्नी दोनों को गौरीशंकर रुद्राक्ष विधि-विधान से धारण करना चाहिए। जीवन धीरे-धीरे सुखमय, आनंदित हो जाता है। - घुटनों का दर्द और तनाव दूर करने के लिए: सोते वक्त दक्षिण की तरफ सिरहाना रखें। सवा पांच रत्ती का मोती और उतने ही वजन का मूंगा पहनना चाहिए। शयन कक्ष में किसी खुले बर्तन में 1 किलो सेंधा नमक रखें। प्रतिदिन थोड़ा सा भोजपत्र का टुकड़ा किसी प्लेट में रख कर जलाएं, लाभ महसूस होगा। - मधुमेह और रक्तचाप: अपने शयन स्थान में बदलाव लाना चाहिए। सोते समय सिरहाना दक्षिण की तरफ रखें। शयन कक्ष में रात को हल्का नीला प्रकाश रखें। कमरे में प्रतिदिन सायं घी का दीपक जलाएं। तकिये का खोल आसमानी रंग का रखें। - शरारती बच्चा: बच्चा गुस्सैल हो, पढ़ाई से मन चुराता हो, मनमानी का व्यवहार करता हो तो बच्चे के शयन कक्ष में रोज थोड़ा सा कपूर, देसी गाय का घी मिला कर जलते हुए उपले पर धूनी दें। बच्चे का सिरहाना पूर्व की तरफ रखें। उसके तकिये का खोल हल्के पीले रंग का रखें। बच्चे को सवा पांच रत्ती का चंद्रमणि चांदी में जड़वाकर सोमवार शुभ समय में पहनाएं। उसके नहाने के पानी में थोड़ा सा एप्सम साल्ट मिलाएं। पढ़ाई की मेज पर एजुकेशन टावर रखें। एजुकेशन टावर की खिड़कियों का मुंह बच्चे के सामने की ओर रहे। - पैतृक संपत्ति में बाधा: परिवार वालों से अनबन के कारण पैतृक संपत्ति से यदि वंचित हों तो पहले तो अपने शयन स्थान में थोड़ा बहुत परिवर्तन करें। तकिये का खोल पीले रंग का तथा बेडशीट हल्के रंग की रखें। शयन कक्ष में एक सप्ताह तक रात के समय सरसों के तेल का दीपक जलाएं। दीपक में एक बूंद मालकांगनी के तेल की भी डालें। कमरे में सेंधा नमक रखें। जहां पैसे, जेवरात रखते हों वहां एक कटोरे में थोड़ा सा साबुत धनिया तथा साबुत नमक साथ-साथ रखें। किसी से चर्चा न करें। धीरे-धीरे अनबन दूर होगी और पैतृक संपत्ति मिलने के आसार नज़र आने लगेंगे।


रुद्राक्ष एवं सन्तान गोपाल विशेषांक  मई 2006

ऐसा माना जाता है कि रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के अश्रु कणों से हुई है। ज्योतिष में प्रचलित अनेक उपायों में से रुद्राक्ष का उपयोग ग्रहों की नकारात्मकता एवं इनके दोषों को दूर करने के लिए किया जाता है ताकि पीड़ा को कमतर किया जा सके। अनेक प्रकार के रुद्राक्षों को या तो गले में या बांह में धारण किया जाता है। रुद्राक्ष अनेक प्रकार के होते हैं। इनमें से अधिकांश रुद्राक्षों का नामकरण उनके मुख के आधार पर किया गया है जैसे एक मुखी, दो मुखी, तीन मुखी इत्यादि। इस विशेषांक में रुद्राक्ष के अतिरिक्त सन्तान पर भी चर्चा की गई है। इस विशेषांक के विषय दोनों है। इसमें रुद्राक्ष एवं संतान दोनों के ऊपर अनेक महत्वपूर्ण आलेखों को सम्मिलित किया गया है जैसे: रुद्राक्ष की उत्पत्ति एवं महत्व, अनेक रोगों में कारगर है रुद्राक्ष, सन्तान प्राप्ति के योग, कैसे जानें कि सन्तान कितनी होंगी, लड़का होगा या लड़की जानिए स्वर साधना से, सन्तान बाधा निवारण के ज्योतिषीय उपाय, इच्छित सन्तान प्राप्ति के सुगम उपाय, सन्तान प्राप्ति के तान्त्रिक उपाय आदि। इन आलेखों के अतिरिक्त दूसरे भी अनेक महत्वपूर्ण आलेख अन्य विषयों से सम्बन्धित हैं। इसके अतिरिक्त पूर्व की भांति स्थायी स्तम्भ भी संलग्न हैं।

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