प्रश्न: उपाय हेतु तंत्र विद्या का प्रयोग किस सीमा तक सफल है? शीघ्र विवाह, प्रेम विवाह, आकर्षण, व्यवसाय में सफलता, बीमारी से छुटकारा, शत्रु बाधा निवारण, उŸाम शिक्षा, संतान प्राप्ति बाधा निवारण व कोर्ट में विजय प्राप्ति व आर्थिक सुधार आदि हेतु तंत्र का प्रयोग किस प्रकार किया जाता है, विस्तृत विधि का वर्णन करें। चाहिए। पैर द्वार की ओर न हों, सिर के सामने क्रिस्टल टांगंे। यह प्रयोग दोनों के लिए है। - कन्या के घर वाले जब वर ढूंढ़ने जाएं तो कन्या अपने बाल खुले रखे। - शुक्ल पक्ष के प्रथम मंगलवार से यह प्रयोग प्रारंभ करें। गौरी शंकर रुद्राक्ष भी मंगा लें। चैकी पर लाल वस्त्र बिछाकर मां दुर्गा का चित्र स्थापित करें। रुद्राक्ष को चांदी की प्लेट में रखकर धूप-दीप जलाएं, लाल पुष्प चढ़ायें, नैवेद्य रखें तथा एक माला ‘‘पति/पत्नी मनोरमां देहि मनोवृŸाानुसारणीयम् तारिणी दुर्गा संसारसागरस्य कुलोद्ववाम्’’ मंत्र का जाप करें। यह प्रयोग 40 दिन का है। 41वें दिन उस रुद्राक्ष को ‘‘ऊँ गौरी शंकराय नमः’’ मंत्र बोलकर गले में धारण करें। प्रेम विवाह या मनवांछित जीवन साथी पाने हेतु तंत्र उपाय: - शुक्ल पक्ष के प्रथम शुक्रवार से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी के चित्र या प्रतिमा के समक्ष शुद्ध घी का दीपक जलाकर 3 माह तक लगातार ‘‘ऊ ँ लक्ष्मीनारायणाय नमः’’ मंत्र की 3 माला नित्य जाप करें तथा दूध निर्मित प्रसाद चढ़ाएं। - एक लाल र ंग का वस्त्र ल ेकर जिसको साथी बनाना है उसका नाम हल्दी के घोल से लिखकर उस पर ‘‘मश्मीना’’ उपरत्न रखें तथा उसका चित्र भी सामने रखें। फिर ‘‘ऊँ यं यां कामयते सिद्धये ऊँ’’ मंत्र का 65 हजार बार जाप करें मंत्र पूरा होने के पश्चात वस्त्र सहित मश्मीना रत्न किसी भी मंदिर में चढ़ाएं। यह प्रयोग किसी भी शुक्ल पक्ष के प्रथम सोमवार से प्रारंभ करें। यह प्रयोग पूर्ण गोपनीय रूप से करें। प्रयोग के पहले पूर्ण विचार कर लें कि यह जीवन साथी ठीक है अथवा नहीं। विशेष: यह दोनों प्रयोग अनुभूत हैं। सोच समझकर ही प्रयोग करें। आकर्षण, मोहन व वशीकरण तंत्र उपाय: - गुरुवार या रविवार के पुष्य नक्षत्र में लाल रंग के कागज पर अनार की कलम से चंदन घिसकर निम्न यंत्र को लिखकर, इत्र में भिगोकर रख दें। जिस व्यक्ति को वश में करना हो उसके कपड़ों से यह इत्र लगा दें, वह व्यक्ति वश में होगा। इत्र हिना का लें। परंतु ध्यान रखें वशीभूत व्यक्ति से कोई अनुचित कार्य न कराएं। यह प्रयोग पूर्ण शक्तिशाली व अनुभूत है। यंत्र - इसी यंत्र से भूत बाधा भी दूर की जा सकती है। पीड़ित व्यक्ति का नाम लिखकर रात म े ं 12 बज े पीपल के नीचे शनिवार के दिन श्मशान की राख व अष्टगंध से अनार की कलम से यंत्र लिखें (भोजपत्र पर) फिर किसी ताबीज में भरकर व्यक्ति के गले में डाल दें। भूत बाधा दूर होगी। - पांच प्रकार के बेदाग फलों का रस निकालकर तिलक करने से आकर्षण शक्ति उत्पन्न होती है। - पति-पत्नी में मतभेद हो, शत्रु को मित्र बनाना हो, किसी अधिकारी को वश में करना हो, किसी को नियंत्रण में करना हो तब इस दिव्य मोती शंख तंत्र का प्रयोग करें। शुक्ल पक्ष के प्रथम रविवार को प्रातः स्नानादि से निवृŸा होकर एक चांदी की थाली में मोती शंख को गंगाजल से धोकर रखें। फिर उस पर कुमकुम का तिलक लगायें। घी का दीपक जलाकर स्फटिक माला पर एक माला ‘‘ऊँ फ्रीं (नाम) में वशमानय स्वाहा’’ मंत्र का एक माह तक जाप करंे। यह प्रयोग बहुत ही बलशाली है। - चांदी की थाली में साबुत चावल रखकर मोती शंख स्थापित करें। एक महीन े पश्चात ् मा ेती श ंख चावल सहित किसी सफेद वस्त्र में बांधकर सुरक्षित स्थान पर रख दें। ऐसा करने पर संसार का कोई भी स्त्री-पुरुष वश में होगा जो चाहेंगे वह करेगा परंतु ध्यान रखें देश, समाज व व्यक्ति के प्रति दुराभाव न करावें अन्यथा बुरा फल प्राप्त होता है। यह प्रयोग पूर्णतः सिद्ध व प्रयोग किया गया है। पुनः निवेदन है कि इस प्रयोग से अनुचित लाभ न लें वर्ना हानि ही होगी। - किसी भी स्त्री-पुरुष या जीवित प्राणी से कोई कार्य कराना है तो उस पर पांच गोमती चक्र पांच बार उतार कर बहते पानी में डाल दें वह प्राणी आपका कहना मानेगा। अनुचित लाभ लेने के लिए यह प्रयोग कदापि न करें। - किसी श ुभ दिन रा ेली, च ंदन, गोरोचन, कपूर सामने पूजा में रखें फिर उस पर हाथ रखकर ‘‘ऊँ ह्रीं (नाम) वे वशमानय स्वाहा’’ मंत्र का एक हजार जाप करें। इसके बाद सभी सामग्री को गाय के दूध में पीसकर उसका तिलक लगावें। संबंधित व्यक्ति के सामने जाएं तो वह वशीभूत होकर आपका कहना मानेगा। यह प्रयोग अनुभूत है। - शुक्ल पक्ष के प्रथम गुरुवार के दिन गेंदे के फूल को पूजा स्थल पर अपने इष्ट के समक्ष रखें, हल्दी को पानी में घोलकर उसके छींटे उस फूल पर दें। फिर गंगाजल के साथ उस फूल को पीस लें। कहीं भी जाते समय इसका तिलक लगाकर जायें, जहां भी जायेंगे सामने वाला आपके सम्मुख नतमस्तक होगा। प्रेमी या प्रेमिका या अफसर से अनुकूलता प्राप्त करने के लिए यह प्रयोग करें। यह प्रयोग पूर्ण प्रभावी है। व्यवसाय में सफलता तथा नौकरी पाने हेतु तंत्र उपाय: - शनिवार को एक पीपल का पŸाा तोड़कर उसे गंगाजल से धोकर 21 बार गायत्री मंत्र पढ़कर उसे जेब, गल्ले या गद्दी के नीचे रखें, व्यापार में सफलता प्राप्त होगी। हर शनिवार को पŸाा बदल दें। पुराना पŸाा वहीं पेड़ के नीचे रख आयें। - व्यवसाय में घाटा हो रहा हो तो एक चुटकी में आटा लेकर रविवार के दिन स्थल के द्वार के दोनों ओर थोड़ा-थोड़ा छिड़क दें और कहें जिसकी नजर लगी है उसको लग जाए, बुरी नजर वाले तेरा मुंह काला। यह प्रयोग शुक्ल पक्ष के रविवार को गुप्त रूप से करें कोई टोके नहीं। यह अचूक उपाय है। - एक बेदाग पीला नीबू लें। उसके बराबर चार टुकड़े कर लें दिन ढलने पर किसी चैराहे पर जाकर चारों दिशाओं में फेंक दें। पीछे मुड़कर न देंखें। यह उपाय सात दिन लगातार करें। नौकरी या काम धंधा अवश्य मिलेगा। - थोड़ा सा कच्चा सूत लेकर उसे केसर में रंग लें तथा उस सूत को ग्यारह बार ‘‘ऊँ हनुमंते नमः’’ मंत्र से अभिमंत्रित कर लें। व्यापारी बंधु अपने व्यापार स्थल पर बांधे तो व्यापार आगे बढ़ेगा। नौकरी पेशा वाले बंधु अपनी मेज की दराज में रखें तो तरक्की का योग बनेगा। हर प ्रकार की मना ेकामना प ूरी होगी। - व्यापार न चलता हो, नौकरी नहीं मिल रही हो तो शुक्ल पक्ष के प्रथम मंगलवार से यह प्रयोग प्रारंभ करें। पीपल के 11 पŸो तोड़कर प्रत्येक पŸो पर राम-राम-राम-राम इस प्रकार चार बार लाल चंदन से लिखें तथा श्री हनुमान जी महाराज को चढ़ावें तथा अपने कार्य सिद्ध करने की प्रार्थना करें। मंदिर से आत े वक्त पीछ े न द ेख े ं। सात मंगलवार लगातार करने से कार्य पूर्ण होता है। पूर्णतः सिद्ध प्रयोग है, करके देखें। - नौकरी या साक्षात्कार में जाने से पूर्व गुरुवार के दिन 9 केले 9 मंदिर में चढ़ावें तथा उसी केले को उसी मंदिर में किसी भी दस वर्ष तक की आयु के बालकों को दें पूर्ण सफलता प्राप्त होगी। अचूक उपाय है। 81 केले खरीदें। - बेल वृक्ष (बिल्व पत्र वृक्ष) के समीप 43 दिन तक गाय के शुद्ध घी का दीपक जलायें तथा गूगल धूप जलायें प्रार्थना करें। नौकरी अवश्य प्राप्त होगी। - शुक्रवार के दिन गुड़ और चना व खट्टी-मीठी गोली मिलाकर आठ वर्ष की आयु के बालकों को बांटें तो व्यवसाय व नौकरी में सफलता प्राप्त होगी 11 शुक्रवार करें अचूक प्रयोग है। बीमारी से छुटकारा पाने हेतु तंत्र उपाय: बवासीर: विशाखा नक्षत्र में धतूरे की जड विधिपर्व क काल धाग म अपनी कमर में बांध लें, दोनों प्रकार की बवासीर में लाभ होगा व जड़ से समाप्त होगा। मिर्गी: शनिवार के दिन ब्रह्मबूटी को न्योता देकर रविवार को विधिपूर्वक लायें व काले धागे में डालकर रोगी के गले में पहना दें, मिर्गी रोग जड़ से समाप्त होगा। पीलिया: पुनर्ववा बूटी की जड़ को शनिवार को न्योता देकर रविवार को लाकर सफेद सूती धागे में नौ की संख्या में लेकर बूटी की जड़ के 21 ट ुकड ़ े करक े माला की तरह बना लें तथा ‘‘नासै रोग हरे सब पीरा जपत निरंतर हनुमत बीरा’’ मंत्र से अभिमंत्रित कर रोगी को पहना दें। रोग ठीक होने पर वह माला हरे वृक्ष पर लटका कर घर आ जायें। सिरदर्द/आधा सीसी: मजीठ की जड़ या द्रोण पुष्पी की जड़ को शनिवार के दिन न्योता देकर रविवार को लाकर सफेद धागे में लाकर सफेद धागे में लपेटकर उसी धागे के साथ मरीज के सिर पर बांध दें। कैसा भी पुराने से पुराना सिरदर्द का रोग जड़ से समाप्त हो जाएगा। रविवार के दिन सूर्यमुखी की जड़ सफेद धागे में सात गांठ लगाकर रोगी के बाजू या सिर में बांधने से आधा सीसी का दर्द दूर होता है। आजमाया हुआ प्रयोग है। प्रदर रोग: यह रोग महिलाओं को होता है इस रोग के होने पर संतान बाधा भी हा ेती ह ै। उŸाराफाल्ग ुनी नक्षत्र में अपने घर की उŸार दिशा की ओर से व्याघ्र बूटी की जड़ लाकर उस े सफ ेद स ूत क े धाग े म े ं पा ंच गांठ लगाकर रोगी महिला की कमर में बांधने से इस रोग की समाप्ति होती है। दाद-खाज, फोड़े-फुंसी: शनिवार के दिन वाकुची के बीजों को काले धाग े म े ं पिरा ेकर रा ेगी क े गल े म े ं पहनाने से समस्त प्रकार की त्वचा रोग समाप्त हो जाते हैं। पुराने सड़े गले घावों हेतु: रवि पुष्य नक्षत्र में विठकदिर की जड़ पांच अंगुल के नाप की लाकर सफेद कच्चे धागे में ग्यारह गांठ लगाकर रोगी के गले में पहनाने से सभी प्रकार के पुराने से पुराने घाव ठीक हो जाते हैं। सूखा रोग: मजीठ की लकड़ी के 21 टुकड़े लाल या सफेद सूती धागे में पिरोकर माला तैयार कर सूखा रोग से पीड़ित बच्चे को रविवार के दिन पहनायें तो रोग समाप्त हो जाता है। स्वप्न दोष: काले धतूरे की जड़ चांदी के ताबीज में भरकर काले धागे के साथ कमर में शनिवार को बांधें। कंठमाला या गंडमाला: लाल अपामार्ग की लकड़ी की माला काले धागे में रविवार के दिन तैयार करें। माला में केवल तीन टुकड़े ही बांधें कंठमाला रोग जड़ से समाप्त होगा। आजमाया हुआ प्रयोग है। बच्चों के दांत निकलने में आने वाली परेशानी दूर करने के लिए सिरस के बीजों की माला काले धागे में पिरोकर पहना दे ं। दा ंत सुखप ूर्वक निकल आयेंगे। टूटी हड्डी जोड़ने हेतु: हड़जोड़ बूटी का एक टुकड़ा सफेद धागे में पिरोकर पीड़ा वाले स्थान पर बांधने से धीरे-धीरे टूटी हड्डी जुड़ जाती है। अतिसार: अपामार्ग (आंेगा-चिरचिटा) की जड़ सफेद धागे में सात गांठ लगाकर गले में पहनने से अतिसार रोग में आराम मिलता है। चेचक: बहेड़े की गुठली सफेद धागे में पिरोकर पहनने से इस रोग से मुक्ति मिलती है। मोटापा कम करने हेतु: दायंे हाथ की अनामिका अंगुली में काला धागा लपेटें तथा रांगे की अंगूठी से उसे ढ ंक ल े ं ता े मा ेटापा द ूर हा ेता है। शनिवार को प्रयोग करें। आजमाया हुआ प्रयोग है। समस्त प्रकार के रोगों से छुटकारा पाने हेतु विशेष तंत्र प्रयोग: सामग्री: मिट ्टी का एक घड ़ा, (ढक्कन सहित), आक, धतूरा, अपामार्ग की जड़ें, दूर्वा, बरगद, शीशम और गूलर के पŸो, गाय का कच्चा दूध, छाछ (मठा), गोमूत्र, चावल, चना, मूंग, गेंहू, काले व सफेद तिल, पीला सरसों, लाल व सफेद चंदन का टुकड़ा तथा शहद उस घड़े में क्रमानुसार डाल दें फिर ढक्कन बंद कर दें। रोगी उस घड़े को लेकर किसी पीपल के पेड़ के समीप जायें व वहां रख दें फिर एक डेढ़ हाथ गहरा गड्ढा खोदकर उस घड़े को उसमें रखकर ऊपर से मिट्टी डालकर पूरा ढंक दें। गाय के घी का दीपक जलाकर उस पर रखे धूपबŸाी जलाकर हाथ जोड़कर पांच मिनट तक इस मंत्र का जाप करें - ‘‘ऊँ नमो भास्कराय सर्व ग्रहाणां पीड़ां नाश ं क ुरु क ुरु स्वाहा’’ फिर हाथ जोड़कर वापस आयें पीछे मुड़कर न देखें। इस प्रयोग को शनिवार शाम को करें तथा सहयोग हेतु किसी को साथ भी ले सकते हैं। अचूक व आजमाया हुआ प्रयोग है। सभी प्रकार के रोग दूर हो जाते हैं। शत्रु बाधा निवारण तंत्र उपाय: आपका किसी भी प्रकार का कोई शत्रु हो, उससे छुटकारा पाने हेतु यह अचूक उपाय है तथा आजमाया हुआ है। रविवार या मंगलवार के दिन प्रातः बिस्तर से उठते ही बिना शौचादि किए अपने शत्रु का नाम लेकर उसे तीन बार गाली दें फिर सफेद कागज पर काली स्याही से तीन बार उसका नाम लिखें फिर काले धागे में उस कागज को लपेटकर अपने पास रख लें। शाम के समय पीपल वृक्ष की जड़ के पास उसे दबा दें। सात रविवार या सात मंगलवार को प्रयोग करने से उक्त शत्रु की बाधा से छुटकारा हमेशा के लिए मिल जाता है। पूर्ण प्रभावशाली प्रयोग है। उŸाम शिक्षा प्राप्त करने हेतु: - शुक्लपक्ष के प्रथम मंगलवार को लाल रंग के झण्डे में घी और सिंदूर मिलाकर अनार की कलम से ‘‘बल ब ुद्धि विद्या द ेह ु मा ेहि हरह ु क्ल ेश विकार’’ लिखकर उस झण्ड े का े हनुमान मंदिर पर लगा दें सभी प्रकार की उŸाम शिक्षा में सफलता प्राप्त होगी ही। अचूक रामबाण प्रयोग है। - मयूर पंख को हमेशा अपने पास रखें। - लक्ष्मणा बूटी को सिंदूर के साथ घिसकर तिलक लगाने से उŸाम शिक्षा की प्राप्ति होती है। - श्व ेत प ूर्वा व हरताल घिसकर तिलक लगायें। - कार्ति क मास क े श ुक्लपक्ष की चतुर्दशी के दिन शंखाहुली बूटी को एक पान, सुपारी व सिक्का लेकर न्योता दे आयें तथा जब हस्त नक्षत्र हो तो उस बूटी को ले आयें तथा कूट-पीसकर गोली बना लें। जिस व्यक्ति को यह गोली खिलाई जायेगी उसे अधिक बुद्धि व ज्ञान प्राप्त होगा भल े ही उसक े भाग्य म े ं ब ुद्धिमान बनना न लिखा हो। आजमाया हुआ प्रयोग है। - ऊँ ऐं शारदायै नमः मंत्र का रोजाना 21 बार जाप करने से उŸाम शिक्षा प्राप्त करने के अवसर प्राप्त होते हैं। संतान प्राप्ति हेतु तंत्र: - जिस महिला को बार-बार गर्भपात की शिकायत हा े वह म ुलहठी, देवदास, सिरस के बीज काली गाय के दूध में पीसकर पांच दिन पिएं तो गर्भपात नहीं होगा। - नाग केशर के चूर्ण को ऋतु स्नान के पश्चात सात दिन तक गाय के दूध के साथ सेवन करने से संतान बाधा दूर होती है। - शिवलिंग के बीज पंसारी की दुकान से लाकर ऋतु स्नान से निवृŸा होकर घर की देहली के बीच बैठकर गाय के दूध के साथ ऊँ नमः शिवाय मंत्र का जाप करते हुए सेवन करने से अवश्य संतान प्राप्त होती है। कोर्ट कचहरी में विजय प्राप्ति हेतु तंत्र उपाय: - अगहन मास की पूर्णिमा के दिन मोरशिखा की जड़ ले आयें फिर रवि पुष्य नक्षत्र में किसी छोटी कन्या से उस पर लाल धागे के सात लपेटे दिलवाकर आठवें लपेटे में गांठ लगवा दें। फिर उसे दायीं भुजा में बांधकर अदालत में जायें मुकद्दमें में जीत अवश्य होगी। - अशोक वृक्ष के पŸाों को शनिवार को न्योत दें, रविवार को लायें। उसे अपने साथ लेकर अदालत जायें जीत होगी। लोकसभा, विधानसभा या कोई भी चुनाव जीतने हेतु तंत्र उपाय: - पांच प्रकार के फलों के रस का तिलक लगाकर प्रचार करें। चुनाव में टिकट प्राप्त करने हेतु तंत्र उपाय: - वट वृक्ष की जड़ को शनिवार को न्योत आवें। प्रातः चार बजे फिर सफेद चंदन के साथ गंगाजल में घिसकर घोल तैयार करें, फिर उसका तिलक लगायंे 43 दिन तक। इसके बाद अपने नेता से निवेदन करें। - रविपुष्य योग में लाल चंदन, रोली, कप ूर, गा ेरा ेचन सममात्रा म े ं ल ेकर काली गाय के घी में पीसकर 21 दिन तक तिलक करें। फिर तिलक लगाकर अपने नेता के पास जायें। - किसी भी पुष्य नक्षत्र में (मंगलवार को छोड़) आक, धतूरे का फूल एवं लट लटेरी की जड़ लाकर उसका चूर्ण बना लें। उस चूर्ण को टिकट देने वाले के वस्त्रों पर चुपचाप डाल दें, कार्य हो जायेगा। - शुद्ध गोरोचन का तिलक करने से भी कार्य संपन्न होगा। आर्थिक सुधार हेतु तंत्र उपाय: - इमली की टहनी काटकर अपने पास रखें आर्थिक सुधार होगा। - दीपावली की स ंध्या क े समय अशा ेक व ृक्ष का प ूजन कर े ं फिर द्वितीया के दिन उसकी जड़ ले आयें उसे अपने पास हमेशा रखें धनागमन अवश्य होगा। - 54 हकीक दानों की माला शुक्रवार के दिन माता लक्ष्मी की तस्वीर पर पहना दें। - शुक्रवार के दिन 9 फूल हरशृंगार (पारिजात) के लाल कपड़े में रख दें, फिर 9 गुलाब के फूल उनके साथ रखे ं तथा 21 दिन लगातार नित्य कमलगट्टे की माला पर उस पोटली के समक्ष ‘‘ऊँ लक्ष्मीनारायणाय नमः’’ मंत्र का जाप करें। - शुक्लपक्ष के प्रथम सोमवार को एक ग्यारह मुखी रुद्राक्ष लेकर गंगाजल से धोकर पीले धागे में ‘ऊँ सर्वशक्मिान इष्ट देवाय नमः’ मंत्र का जप करते हुए धारण करें। - अपने घर के ईशान कोण में पांच रंगों का झंडा बनाकर ‘‘ऊँ सर्वेभ्यो देवेभ्यो नमः’’ का ग्यारह बार जाप कर लगा दें आर्थिक सम्पन्नता होगी। - रविपुष्य में बहेड़े की जड़ व पŸाा लाकर विधि पूर्वक पूजन करंे फिर लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखें। - प्रत्येक शनिवार को तेल से चुपड़ी रोटी काले कुŸो को खिलाएं। - लकड़ी के बाजोट पर पीला रेशमी वस्त्र बिछाकर पांच लाल फूल रखें। प्रत्येक फूल पर एक-एक कमल के बीज रख े ं। ध ूप-दीप, न ैव ेद्य रख े ं। पूजन करें, पीले कागज पर रोली से निम्न मंत्र को 21 बार लिखें ‘‘ऊँ शिवाय श्रीं ऊँ’’ फिर उसी कागज में कमल बीज तथा फूलों को लपेटकर शुक्लपक्ष के बुधवार की रात्रि में किसी तिराहे पर डाल दें व पीछे मुड़कर न देखें।


शनि पर विशेष-दीपावली विशेषांक  नवेम्बर 2014

फ्यूचर समाचार के शनि पर विशेष दीपावली विशेषांक में अनेक रोचक व ज्ञानवर्धक लेख जैसे सम्पत्ति प्राप्ति के उपाय, दीपावली पर किये जाने वाले उपयोगी टोटके व उपाय आदि अनेक लेख सम्मिलित किये गये हैं। आवरण कथा में शनि देव पर एक परिचय के अतिरिक्त शनि की ढैया, साढ़ेसाती, दशा, गोचर फल व शनि के बारे में उनकी एक मित्र या शत्रु के रूप में धारणा, शनि की न्याय ज्ञान व वैराग्य के कारक के रूप में मान्यता आदि जैसे अनेक लेख हैं। अन्य लेखों में शनि के रत्न नीलम तथा शनि शमन के अन्य उपाय, व्रत व शनि के विभिन्न धामों के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी गई है। सत्य कथा, शनि व करियर, अध्यात्म, भागवत कथा, क्या आप जानते हैं?, टोटके, पंच-पक्षी, शेयर बाजार, ग्रह, स्थिति व व्यापार, विचार गोष्ठी, हैल्थ कैप्सूल,व विभिन्न वास्तु सम्बन्धी लेख पत्रिका की शोभा बढ़ा रहे हैं।

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