अध्ययन कक्ष का सर्वोत्तम स्थान वास्तु मंडल के अनुसार सुग्रीव तथा दौवारिक के पदों पर आता है। वास्तु मंडल के पश्चिम भाग पर विद्यमान इन देवताओं की प्रकृति एक छात्र के लिए अत्यंत उपयोगी होती है। सुग्रीव का अर्थ है जिसकी ग्रावा सुंदर हो। जिसकी अपने विषय को समझाने में दक्षता हो। दौवारिक का अर्थ है जो द्वारपाल की तरह सजग हो, निरंतरता जिसका गुण है। ऐसे पदों पर बने अध्ययन कक्ष में पढ़ाई करने से छात्रों में एकाग्रता बैठती है तथा अध्ययन के विषय के पृष्टिकरण की विशेष योग्यता उत्पन्न होती है। दिशाओं के अनुसार सुग्रीव तथा दौवारिक के पद नैक्षत्र व पश्चिम के मध्य आते हैं। अध्ययन कक्ष में पीले, केशरिया, हरे रंग का प्रयोग करना चाहिए। अध्ययन कक्ष में ऐज्युकेशन टावर सफेद ईन्द्रजाल (असली) रखें और गले में रुद्राक्ष तीन $चार $छः मुखी साथ में बुध का (ओमेक्ष) का पेन्डल चांदी में लगवाया हुआ प्रयोग पुजा किया हुआ पहनना चाहिए। हर अमावस के बाद पांचम आता है, उस दिन सफेद फूल 108 बार सरस्वतीजी का मंत्र बोलकर ऐज्युकेशन टावर में सफेद इन्द्रजाल पर चढ़ाना मत भूलना, यादशक्ति अच्छी बनती जाएगी और कसौटी में फल अच्छा मिलेगा ये आजमाया हुआ है, इसमें कोई शंका नहीं करना।


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