क्रिस्टल बाळ द्वारा फल कथन

क्रिस्टल बाळ द्वारा फल कथन  

व्यूस : 6239 | मई 2007
क्रिस्टल बाॅल द्वारा फल कथन डाॅ. जी. एस. बिंदरा स्टल बाॅल से भूत, वर्तमान और भविष्य देखने की विधि प्राचीन काल से ही चली आ रही है। क्रिस्टल का नाम यूनानी शब्द क्लियर आइस से लिया गया है, जिसका अर्थ है जमा हुआ पानी। क्रिस्टल एक प्राकृतिक ठोस धातु है जिसके चारों ओर एक गोल समतल सतह होती है। कई शताब्दियों तक ऐसा समझा जाता रहा कि पहाड़ों से निकलने वाले पानी के जमाव ने ठोस क्रिस्टल का रूप धारण कर लिया था और यह धारणा सत्रहवीं शताब्दी तक बनी रही। इतालवी में इसे क्रिस्टेला, स्पेनिश में क्रिस्टल, लैटिन में क्रिस्टेलस, फ्रेंच में क्रिस्टल तथा हिंदी में स्फटिक कहते हैं। क्रिस्टल में लौह के कुछ तत्व पाए जाते हैं, जिनमें चुंबकीय शक्ति होती है। प्राचीन काल में क्रिस्टल का प्रयोग शुक्ल पक्ष के समय में किया जाता था जब चांद का आकार बढ़ने की दिशा में होता है। परंतु कुछ प्रश्न प्रयोगकर्ता के समक्ष यह आते हैं कि वह क्रिस्टल का किस प्रकार उपयागे कर े कि इसस े भावी घटनाआंे की जानकारी प्राप्त कर सके। भावी घटनाओं की जानकारी इस प्रकार से प्राप्त की जा सकती है: क्रिस्टल बाॅल पर एकाग्रचित्त होकर अभ्यास करते रहने से उसमें सभी घटनाएं स्पष्ट होने लगती हैं। इच्छाशक्ति के बल पर भावी घटनाओं की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। मन को एकाग्रचित्त कर उसकी आंतरिक शक्ति से मस्तिष्क पटल पर होने वाली घटनाओं को देख सकते हैं। किसी प्रसिद्ध वैज्ञानिक ने यह सिद्ध कर दिया है कि मानव नेत्र में भी आकर्षण की क्षमता होती है, जिसका क्रिस्टल गेजिंग में प्रयोग कर भावी घटनाओं की जानकारी आसानी से प्राप्त की जा सकती है। क्रिस्टल बाॅल में दिखने वाले विषयों को निम्नलिखित वर्गों में रखा गया है- इसमें कुछ अज्ञात, नई कल्पनाएं या इच्छानुसार प्रतिबिंब दृष्टिगोचर होते हैं। इनसे हमें कोई नई जानकारी नहीं मिलती है। क्रिस्टल बाॅल पर पूर्ण ध्यान केंद्रित करने पर भूत, वर्तमान, भविष्य सभी की जानकारी स्पष्ट रूप से मिल जाती है। साधक किसी अन्य तरीके से यह जानकारी प्राप्त नहीं कर सकता। अचेतन मन द्वारा दूसरांे से प्राप्त या टेलीपैथी से प्राप्त प्रतिबिंब, कुछ यादों, विचारों, काल्पनिक परिणाम आदि की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। वे दृश्य और चित्र भी क्रिस्टल पर दिखाई दे जाते हैं जिन्हें व्यक्ति कुछ देर पहले यथार्थतः देख चुका होता है। निरंतर साधना करते रहने पर निकट भविष्य में होने वाली घटनाओं का आभास भी इस पर मिल जाता है। क्रिस्टल बाॅल के प्रयोग से संबंधित कुछ जानकारी क्रिस्टल बाॅल को स्वच्छ रखने के लिए एक घोल बना लें जिसमें छः भाग पानी व एक भाग ब्रांडी हो। इस घोल में क्रिस्टल बाॅल को पंद्रह मिनट रखकर निकाल लें और किसी मुलायम स्वच्छ कपड़े या चमड़े से उसे सावधानी से साफ कर लें। फिर जिसके विषय में जानकारी प्राप्त करनी हो उसके हाथों में प्रयोग से पहले क्रिस्टल बाॅल को कुछ देर के लिए रखें, पर ध्यान रहे, कमरे में कोई तीसरा न हो। जब क्रिस्टल बाॅल धंुधली होने लगे तो समझ लें कि आप जो देखना चाहते हैं, वह कुछ समय में दिखाई देने लगेगा। प्रारंभ में चित्र अस्पष्ट दिखाई देगा परंतु कुछ समय बाद स्पष्ट हो जाएगा। शुरू में बाॅल शीघ्र ही धुंधला और काला होता दिखाई देगा पर कुछ समय बाद वे काले बादल हटते नजर आएंगे और बाॅल के चारों ओर एक प्रकाश दिखाई देगा। जब प्रकाश में कुछ स्थायित्व आने लगेगा तो वह एक दम चमकने लगेगा। प्रयोग से पूर्व शुद्ध मन से प्रार्थना करें। शुक्ल पक्ष में प्रयोग अधिक फलदायी होता है। जिस कमरे में प्रयोग करना हो, उसे साफ रखें। वहां का वातावरण भी स्वच्छ होना चाहिए। कमरे में कोई ऐसी वस्तु न हो जिसके कारण आपका ध्यान भंग हो। कमरे में एक छोटी मेज रखें जिस पर सफेद साफ कपड़ा बिछा हो। साथ में स्टील की एक छोटी प्लेट रखें जिस पर दीप धूप जला सकें। बाॅल को प्रयोगकर्ता के अलावा किसी और को न छूने दें अन्यथा आकर्षण क्रिया में बाधा आ सकती है। प्रयोगकर्ता क्रिस्टल बाॅल को 5 मिनट के लिए अपने दायें हाथ द्वारा ‘पास’ दें। इससे बाॅल में चुंबकीय शक्ति आती हैं। इसी प्रकार बायें हाथ से पास देने पर बाॅल में सचेतन शक्ति आती है। क्रिस्टल बाॅल पर एकाग्र मन से दृष्टि जमाए रखें, केवल क्रिस्टल बाॅल पर ही देखें। ऐसा करने से क्रिस्टल बाॅल और आपकी आंखों के बीच आकर्षण होने लगेगा। क्रिस्टल बाॅल के इस प्रयोग से लापता व्यक्ति, सफलता, बीमारी, प्रेम, नए व्यवसाय, शिक्षा, जमीन व जायदाद, संतान, धन व ख्याति, आय के स्रोत, समस्या आदि के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है। क्रिस्टल बाॅल पर दिखाई देने वाले दृश्यों का फल सफेद साफ बादल दिखाई देना प्रश्नकर्ता के लिए शुभ संकेत है। काले बादल अशुभ घटना का संकेत देते हैं। हरा, नीला व बैगनी रंग किसी खुशी और सफलता का संकेत देते हैं। लाल, पीला व संतरा रंग दुर्घटना या बीमारी का संकेत देते हैं। ऊपर की ओर उठते बादल व्यक्ति के हित में होने वाले कार्य का संकेत देते हैं। नीचे की ओर जाते बादल ऐसे कार्यों का संकेत देते हैं, जो व्यक्ति के हित में नहीं होते। बायें हाथ की ओर दिखाई देने वाले चित्र सही स्थिति का संकेत देते हैं।

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