श्मशान के पास घर का निषेध क्यों

श्मशान के पास घर का निषेध क्यों  

श्मशान के पास घर का निषेध क्यों रश्मि चतुर्वेदी वा स्तु शास्त्र में भूखंड के आस-पास य ा आमने-सामने के स्थानों का बहुत महत्व है। भूखंड की शुभ या अशुभ दशा का अनुमान आस-पास की चीजों को देखकर किया जा सकता है। घर मनुष्य की गतिविधियों का केंद्र होता है, जहां पर वह अपनी पारिवारिक, सामाजिक एवं आर्थिक गतिविधियों की रूपरेखा तैयार करता है। इसलिए घर बनाने से पूर्व घर के आस-पास के स्थान का विचार कर लेना चाहिए। वास्तु शास्त्र में घर के समीप श्मशान का होना भयंकर दोष माना गया है। प्रत्येक मनुष्य जन्म लेता है तथा उसकी मृत्यु भी निश्चित है। यह बात सब जानते हैं, परंतु मृत्यु के आभास मात्र से ही व्यक्ति असंतुलित हो जाता है तथा उसकी मनस्थिति भावशून्य हो जाती है। घर के समीप श्मशान की स्थिति घर में रहने वाले सदस्यों में डर एवं भय का संचार करती है। यह भय मनुष्य की बुद्धि को असंतुलित कर देता है जिसके प्रभाव से मनुष्य का आत्मविश्वास बाधित होता है और मनष्ु य की कायक्षर्् ामता पभ््र ाावित हाते ी ह।ै श्मशान के पास घर होने से प्रतिदिन शव देखने के कारण मनुष्य में शोक का संचार रहेगा। शोक हृदय की वह अवस्था है जो मनुष्य को किंकर्तव्यविमूढ़ बना देती है। शोक का एहसास बार-बार होने से मनुष्य के अंदर वैराग्य की भावना भी जन्म ले सकती है। घर के अंदर इस प्रकार की भावना के संचार से तथा प्रतिदिन रोते लोगों को देखने से घर में रहने वाले बच्चों के बालसुलभ मन पर प्रभाव पड़ सकता है। बच्चों में कई प्रकार की शंकाएं उत्पन्न हो सकती हैं जिससे बच्चों का विकास भी बाधित होता है। घर का निर्माण व्यक्ति सुखपूर्वक जीवनयापन करने के लिए करता है परंतु श्मशान घर के पास होने से सुख का स्थान दुख ले लेता है। श्मशान में प्रतिदिन शव को जलाने से उत्पन्न होने वाली चर्बी की दुर्गंध भी आस-पास के वातावरण को प्रभावित करती है। प्रदूषित वातावरण घर में रहने वाले सदस्यों के क्रियाकलापों को प्रभावित करता है जिससे घर के अंदर तनावमय वातावरण बन सकता है। श्मशान में शव के साथ आने वाले जनसमूह के कारण आस-पास के घरों की शांति भंग होती है तथा परिवार के सदस्यों में एकाग्रता की कमी होने लगती है। बार-बार जनसमूह के आवागमन से घर के आस-पास असामाजिक तत्व भी सक्रिय हो जाते हैं जिनसे घर की सुरक्षा भी प्रभावित होती है। घर का निर्माण मनुष्य शांति एवं निजता के लिए करता है परंतु श्मशान घर के पास होने से उसका संतुलन प्रभावित होता है। इन सब कारणों को देखते हुए वास्तुशास्त्र में श्मशान के पास घर बनाने का निषेध किया गया है।



पराविद्याओं को समर्पित सर्वश्रेष्ठ मासिक ज्योतिष पत्रिका  अप्रैल 2006

सभ्यता के आरम्भिक काल से ही फलकथन की विभिन्न पद्धतियां विश्व के विभिन्न हिस्सों में प्रचलित रही हैं। इन पद्धतियों में से अंक ज्योतिष का अपना अलग महत्व रहा है यहां तक कि अंक ज्योतिष भी विश्व के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग रूपों में प्रचलित है तथा इन सब में आपस में ही विभिन्नता देखने को मिलती है। हालांकि सभी प्रकार के अंक ज्योतिष के उद्देश्य वही हैं तथा इनका मूल उद्देश्य मनुष्य को मार्गदर्शन देकर उनका भविष्य बेहतर करना तथा वर्तमान दशा को सुधारना है। फ्यूचर समाचार के इस विशेषांक में अंक ज्योतिष के आधार पर फलकथन को वरीयता दी गयी है। इसमें मुख्यतः कीरो की पद्धति का अनुशरण किया गया है। इसके अन्तर्गत समाविष्ट महत्वपूर्ण आलेखों में- अंक ज्योतिष का परिचय एवं महत्व, अंक फलित के त्रिकोण प्रेम, बुद्धि एवं धन, मूलांक से जानिए भाग्योदय का समय, नाम बदलकर भाग्य बदलिए, हिन्दी के नामाक्षरों द्वारा व्यवसाय का चयन, अंक ज्योतिष का महत्वपूर्ण पहलू स्तूप, अंक एवं आॅपरेशन दुर्योधन, मूलांक, रोग और उपाय, अंक विद्या द्वारा जन्मकुण्डली का विश्लेषण आदि। इन आलेखों के अतिरिक्त दूसरे भी अनेक महत्वपूर्ण आलेख अन्य विषयों से सम्बन्धित हैं। इसके अतिरिक्त पूर्व की भांति स्थायी स्तम्भ भी संलग्न हैं।

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