अध्यात्म, धर्म आदि


श्री यंत्र का आध्यात्मिक स्वरूप

पूर्ण विधान से श्री यंत्र का पूजन जो एक बार भी कर ले, वह दिव्य देहधारी हो जाता है। दत्तात्रेय ऋषि एवं दुर्वासा ऋषि ने भी श्री यंत्र को मोक्षदाता माना है। इसका मुख्य कारण यह है कि मनुष्य शरीर की भांति, श्री यंत्र में भी 9 चक्र होते... और पढ़ें

उपायअध्यात्म, धर्म आदिसंपत्तियंत्र

जुलाई 2013

व्यूस: 6132

मरने से पहले की सोच

मेरे पास लोग आते हैं। वे कहते हैं - हमें संन्यास लेना है; लेकिन जरा बेटी की शादी हो जाए; क्योंकि अगर शादी न हुई और हमने संन्यास ले लिया तो अड़चनें आ जाएंगी, शादी करना मुश्किल हो जाएगा।... और पढ़ें

अध्यात्म, धर्म आदिविविध

आगस्त 2010

व्यूस: 6102

भगवत कृपा के स्रोत

भगवत कृपा के स्रोत

विश्वनाथ प्रसाद सोनी

भगवत प्राप्ति के अनेक मार्ग बताए गए हैं आइए जानें कि इन सब मार्गों का क्या स्वरूप है और भगवत कृपा कैसे प्राप्त की जाए।... और पढ़ें

देवी और देवअध्यात्म, धर्म आदिविविध

फ़रवरी 2011

व्यूस: 6081

कुंडली में पितृ दोष

कुंडली में पितृ दोष

फ्यूचर पाॅइन्ट

पितृ दोष क्या है? इसके ज्योतिषीय योगों का वर्णन करें। इससे होने वाली परेशानियां व उनके उपायों का वर्णन करें। यदि कुंडली में पितृदोष हैं, परंतु जीवन में कष्ट नहीं है या पितृदोष नहीं है, लेकिन कष्ट है, तो क्या पितृदोष के उपाय किय... और पढ़ें

ज्योतिषदेवी और देवअध्यात्म, धर्म आदिज्योतिषीय विश्लेषणकुंडली व्याख्याभविष्यवाणी तकनीक

आगस्त 2016

व्यूस: 6052

भगवद् तत्व के विषय में संतों एवं महापुरूषों के उदगार

भगवद् तत्व को विभिन्न क्षेत्र के व्यक्तियों ने विभिन्न रूपों में देखा। विश्वप्रसिद्ध ग्रंथों, आचार्यों, दार्शनिकों और संतों ने उसे जिस जिस रूप में देखा, उसको संक्षेप में जानने का अवसर यहां मिलेगा।... और पढ़ें

अध्यात्म, धर्म आदिविविध

फ़रवरी 2011

व्यूस: 6003

लक्ष्मी पूजन विधि एवं शुभ मुहूर्त

मां लक्ष्मी की पूजा किसी भी समय में की जा सकती है। लेकिन सार्थक पूजा के लिए शास्त्र सम्मत विधान की जानकारी होनी आवश्यक है। मां लक्ष्मी की पूजा किस मुहूर्त में किन सामग्रियों के साथ की जाय जिससे कि मां लक्ष्मी का आशीर्वाद शीघ्र... और पढ़ें

देवी और देवअध्यात्म, धर्म आदिपर्व/व्रत

अकतूबर 2014

व्यूस: 5964

देवताओं को हुआ जब अहंकार

संसार में किसी का कुछ नहीं, भौतिक विषयों को व्यर्थ में अपना समझना मूर्खता है, क्योंकि अपना होते हुए भी, कुछ भी अपना नहीं होता। कुछ रुपये दान करने वाला यदि यह कहे कि उसने ऐसा विशेष कार्य किया है, तो उससे बड़ा मूर्ख और कोई नहीं औ... और पढ़ें

देवी और देवअध्यात्म, धर्म आदिविविध

मई 2013

व्यूस: 5901

पुनर्जन्म : एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण

पुनर्जन्म के सिद्धांत का प्रतिपादन जीवन के स्वरूप को आम मनुष्य को समझाने के लिए ही किया गया है। आत्मा तो अमर है और सर्वव्यापक है। जो अमर है उसका पुनर्जन्म हो ही नहीं सकता।... और पढ़ें

ज्योतिषअध्यात्म, धर्म आदिज्योतिषीय योगविविध

सितम्बर 2007

व्यूस: 5894

हिन्दू मान्यताओं का वैज्ञानिक आधार

अनादि काल से ही हिन्दू धर्म में अनेक प्रकार की मान्यताओं का समावेश रहा है। विचारों की प्रखरता एवं विद्वानों के निरंतर चिंतन से मान्यताओं व् आस्थाओं में भी परिवर्तन हुआ।... और पढ़ें

उपायअध्यात्म, धर्म आदिविविध

अप्रैल 2013

व्यूस: 5872

होलिकोत्सव (होली)

होलिकोत्सव (होली)

ब्रजकिशोर भारद्वाज

विराट पुरुष के मुख से ब्राहमण भुजाओं से क्षत्रिय, जांघों से वैश्य और पैरों से शूद्रों की उत्पति हुई हैं। इनके नाम से ही चार वर्णों की प्रधानता हैं। और इनके चार मुख्य त्यौहार क्रमश: रक्षा बंधन, दशहरा, दीपावली और होली हैं।... और पढ़ें

घटनाएँदेवी और देवअध्यात्म, धर्म आदिपर्व/व्रत

मार्च 2013

व्यूस: 5767

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