एक सही तिथिपत्रक का गणितीय आधार

हिंदू संस्कृति में पंचांग का अपना विशेष महत्व है। जीवन के विभिन्न संस्कारों, यात्राओं, किसी कार्य के आरंभ आदि में पंचांग की सहायता ली जाती है। उद्देश्य केवल एक होता है... और पढ़ें

ज्योतिषखगोल-विज्ञानपर्व/व्रतआकाशीय गणितनक्षत्रपंचांगग्रहगोचर

अप्रैल 2010

व्यूस: 3304

संक्रांति की खिचड़ी

संक्रांति की खिचड़ी

सुनील जोशी जुन्नकर

मकर संक्रांति का दिनं खिचड़ी पर्व के रूप में मनाया जाता है। शास्त्रीय मतभेद के चलते भारतीय पंचांगों ने हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी मकर संक्रांति की खूब खिचड़ी पकाई है।... और पढ़ें

ज्योतिषआकाशीय गणितपंचांगभविष्यवाणी तकनीक

जनवरी 2011

व्यूस: 3564

पर्व-त्योहारों की तारीखों में मतांतर क्यों?

भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति की गरिमा के प्रतीक पर्व-त्यौहारों के संबंध में कई बार मतांतर हो जाने से पर्व-त्यौहारों की तिथियों एवं तारीखों के बारे में भ्रांतियां उत्पन्न हो जाती हैं। फलस्वरूप, धर्म परायण लोगों के मन में कई प्रकार की... और पढ़ें

ज्योतिषपर्व/व्रतआकाशीय गणित

जनवरी 2004

व्यूस: 4225

सर्वोत्तम माह: पुरूषोत्तम मास

श्री विक्रम संवत् 2072 में आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा से आषाढ़ कृष्ण अमावस्या तक अर्थात् 17 जून से 16 जुलाई सन् 2015 तक अधिक मास रहेगा। अधिक मास क्यों होता है और कब पड़ता है, आइये इसे समझें। वे महीने शुद्ध कहलाते हैं, जिनमें सूर्य की सं... और पढ़ें

ज्योतिषआकाशीय गणितपंचांग

जून 2015

व्यूस: 4742

पांच अंगों का संयोग : पंचांग

इस अनुपम विशेषांक में पंचांग के इतिहास विकास गणना विधि, पंचांगों की भिन्नता, तिथि गणित, पंचांग सुधार की आवश्यकता, मुख्य पंचांगों की सूची व पंचांग परिचय आदि अत्यंत उपयोगी विषयों की विस्तृत चर्चा की गई है। पावन स्थल नामक स्तंभ के अं... और पढ़ें

ज्योतिषआकाशीय गणितपंचांग

अप्रैल 2010

व्यूस: 5370

कालसर्प योग की सार्थकता

कालसर्प योग राहु और केतु की धुरी के एक और सभी ग्रहों के आ जाने से बनता हैं। यदि राहु के मुख में सभी ग्रह आ रहे हैं। तो उसे उदित योग की संज्ञा दी गई हैं। और यदि दूसरी और हो तो अनुदित योग कहा जाता हैं।... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगआकाशीय गणित

मार्च 2013

व्यूस: 5463

कैलेंडर व पंचांग में भिन्नता क्यों

आधुनिक (ग्रेगोरियन) कैलेंडर में प्रति चार वर्ष पश्चात एक लीप वर्ष होता है, 100 वर्ष पश्चात लीप वर्ष नहीं होता एवं 400 वर्ष पश्चात पुनः लीप वर्ष होता है।... और पढ़ें

ज्योतिषखगोल-विज्ञानग्रहणआकाशीय गणितपंचांगगोचर

अप्रैल 2010

व्यूस: 1996

पंचांगों में भिन्नता क्यों?

इस अनुपम विशेषांक में पंचांग के इतिहास विकास गणना विधि, पंचांगों की भिन्नता, तिथि गणित, पंचांग सुधार की आवश्यकता, मुख्य पंचांगों की सूची व पंचांग परिचय आदि अत्यंत उपयोगी विषयों की विस्तृत चर्चा की गई है। पावन स्थल नामक स्तंभ के अं... और पढ़ें

ज्योतिषआकाशीय गणितपंचांग

अप्रैल 2010

व्यूस: 6417

पंचांग इतिहास - विकास - गणना विधि

इस अनुपम विशेषांक में पंचांग के इतिहास विकास गणना विधि, पंचांगों की भिन्नता, तिथि गणित, पंचांग सुधार की आवश्यकता, मुख्य पंचांगों की सूची व पंचांग परिचय आदि अत्यंत उपयोगी विषयों की विस्तृत चर्चा की गई है। पावन स्थल नामक स्तंभ के अं... और पढ़ें

ज्योतिषखगोल-विज्ञानआकाशीय गणितपंचांग

अप्रैल 2010

व्यूस: 22464

सटीक जन्म समय का निर्धारण

सटीक जन्म समय का निर्धारण

बी. पी. विश्वकर्मा

भारतीय ज्योतिष में जन्मकुंडली निर्माण में सही समय का होना परम आवश्यक है। परंतु यह विषय हमेशा से ही विवादित रहा है। शिशु जन्म के विभिन्न चरणों में से योनि द्वार का मुख खुलने से लेकर शिशु की नाल काटे जाने तक कौन से चरण को जन्म समय क... और पढ़ें

ज्योतिषआकाशीय गणित

जुलाई 2011

व्यूस: 25670

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