राहू कि महादशा में नवग्रहों कि अंतर्दशाओं का फल एवं उपाय

राहू मूलत: छाया ग्रह है, फिर भी उसे एक पूर्ण ग्रह के समान ही माना जाता है। यह आर्द्रा, स्वाति एवं शतभिषा नक्षत्र का स्वामी है। राहू कि दृष्टि कुंडली के पंचम, सप्तम और नवम भाव पर पड़ती है। जिन भावों पर राहू कि दृष्टि का प्रभाव पडता ... और पढ़ें

ज्योतिषउपायग्रहहस्तरेखा सिद्धान्त

आगस्त 2008

व्यूस: 285134

राहु की विभिन्न ग्रहों के साथ युति फल

ज्योतिष शास्त्र में सात मुख्य ग्रहों और दो छाया ग्रहों को सर्वसम्मति से मान्यता प्राप्त है। राहु केतु छाया ग्रह हैं। छाया ग्रह होते हुये भी राहु की फलादेश में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। कोई भी ग्रह जब कुंडली में राहु ... और पढ़ें

ज्योतिषग्रह

जुलाई 2014

व्यूस: 199949

गर्भ रक्षा एवं श्रेष्ठ संतान प्राप्ति के योग सूत्र एवं उपाय

पुरुष के वीर्य और स्त्री के रज से मन सहित जीव (जीवात्मा) का संयोग जिस समय होता है उसे गर्भाधान काल कहते हैं। गर्भाधान का संयोग (काल) कब आता है ? इसे ज्योतिष शास्त्र बखूबी बता रहा है। चरक संहिता के अनुसार - आकाश, वायु, अग्नि, जल और... और पढ़ें

ज्योतिषउपायबाल-बच्चेघरमुहूर्तग्रह

जनवरी 2012

व्यूस: 165765

कुंडली में कारक, अकारक और मारक ग्रह

ग्रहों को नैसर्गिक ग्रह विचार रूप से शुभ और अशुभ श्रेणी में विभाजित किया गया है। बृहस्पति, शुक्र, पक्षबली चंद्रमा और शुभ प्रभावी बुध शुभ ग्रह माने गये हैं और शनि, मंगल, राहु व केतु अशुभ माने गये हैं। सूर्य ग्रहों का राजा है ... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय विश्लेषणग्रहभविष्यवाणी तकनीक

जनवरी 2015

व्यूस: 81023

राहु का प्रभाव

राहु का प्रभाव

सुरेंद्र कुमार शर्मा

ब्रह्मांड में स्थित नव-ग्रहों में से प्रमुख सात ग्रहों (सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, तथा शनि) को छोड़कर शेष दो छाया ग्रहों (राहु-केतु) में राहु का विशेष स्थान है। हालांकि इन छाया ग्रहों का कहीं भौतिक अस्तित्व नहीं ह... और पढ़ें

ज्योतिषघरग्रह

अप्रैल 2015

व्यूस: 79724

कुंडली विश्लेषण के कुछ महत्वपूर्ण नियम

कुंडली का विश्लेषण करते हुए कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों जैसे- सभी ग्रहों की स्थिति, डिग्री, दृष्टि, गति, नवांश और चलित की स्थिति आदि को अवश्य ही ध्यान में रखना चाहिए और उन्हीं के अनुसार भविष्यकथन करना चाहिए। इन सभी पहलुओं को देख कर अगर ... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगकुंडली व्याख्याघरग्रहभविष्यवाणी तकनीक

अकतूबर 2010

व्यूस: 57026

वक्री गुरु का प्रभाव

वक्री ग्रहों के संबंध में ज्योतिष प्रकाशतत्व में कहा गया है कि-“क्रूरा वक्रा महाक्रूराः सौम्या वक्रा महाशुभा।।” अर्थात क्रूर ग्रह वक्री होने पर अतिक्रूर फल देते हैं तथा सौम्य ग्रह वक्री होने पर अति शुभफल देते हैं।... और पढ़ें

ज्योतिषग्रहभविष्यवाणी तकनीक

अप्रैल 2015

व्यूस: 53123

ग्रह शांति की विधियां

प्रस्तुत लेख में ग्रहों की शांति के लिए कुछ सरल व अचूक उपाय प्रस्तुत है-जिनमें लाल किताब व ऋषि पाराशर प्रणीत ज्योतिष शास्त्र के उपाय सम्मिलित हैं।... और पढ़ें

ज्योतिषउपायग्रहभविष्यवाणी तकनीकराशि

सितम्बर 2010

व्यूस: 52110

शनि दोष शांति उपाय

शनि दोष शांति उपाय

अंकुर नागौरी

मंगलवार को वानरों को गुड़ चना खिलाना/ हनुमान चालीसा शनि उपाय हेतु रामबाण औषधि है। हनुमान मंदिर में जाकर हनुमान चालीसा पढने से चमत्कारिक फल मिलता है... और पढ़ें

ज्योतिषउपायग्रह

नवेम्बर 2011

व्यूस: 51091

बारहवें भाव में शनि, राहु एवं केतु का फल एवं उपाय

बारहवां घर खुले आकाश का, व्यय का तथा मोक्ष का भाव है। शनि बारहवें घर का शनि व्यक्ति को असाधारण बनाता है, वह नेक भी हो सकता है बद भी। इस घर के शनि वाला व्यक्ति बिना किसी खास कारण के अपने को संतुष्ट महसूस नहीं करता। शनि व्यक्तिगत वि... और पढ़ें

ज्योतिषउपायग्रह

अप्रैल 2014

व्यूस: 49061

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