नक्षत्र: फल कथन की सूक्ष्मता का आधार

प्राचीन ग्रंथों में नक्षत्र ज्ञान को ही ज्योतिष शास्त्र कहा गया है फलित ज्योतिष की सूक्ष्मता तक पहुंचने के लिए नक्षत्रों का ज्ञान होना आवश्यक है। जीव जिस नक्षत्र में जन्म लेता है उसमें उसी नक्षत्र के तत्वों की प्रधानता होती है। ज... और पढ़ें

ज्योतिषनक्षत्रभविष्यवाणी तकनीक

अप्रैल 2008

व्यूस: 30379

नक्षत्र, राशियां और ग्रह

गगन मंडल में ग्रहों की स्थिति का पता करने के लिए देवताओं ने वृताकार आकाश या भचक्र के ३६० अंशों को १२ समान खण्डों में बांटा। तीस अंश के ये भाग राशि कहलाये। जिस भाग का जैसा स्वरूप दिखाई देता है उसी के आधार पर राशियों का नामकरण किया ... और पढ़ें

ज्योतिषनक्षत्रग्रहराशि

फ़रवरी 2013

व्यूस: 26911

राशि -ग्रह-नक्षत्र के अनुसार रुद्राक्ष धारण

वर्तमान समय में शुद्ध एवं दोषमुक्त रत्न बहुत कीमती हो चले हैं, जिससे वे जनसाधारण की पहुंच से बाहर है। अतः विकल्प के रूप में रूद्राक्ष धारण एक सरल एवं सस्ता उपाय है। ग्रह राशि नक्षत्र के अनुसार रूद्राक्ष धारण का संक्षिप्त विवरण यहा... और पढ़ें

ज्योतिषअंक ज्योतिषउपायनक्षत्रव्यवसायरूद्राक्षराशि

मई 2010

व्यूस: 24666

नक्षत्रों के दर्पण में शुभ मुहूर्त

नौ ग्रह एवं सताइस नक्षत्र भारतीय ज्योतिष का वह आधार है जो हमारे जीवन के महत्वपूर्ण कार्यो को प्रभावित करता है। अतः गृह प्रवेश, मुंडन, विवाह, कृषि वाहन खरीदने के लिए नक्षत्रों का उपयोगी एवं व्यवहारिक ज्ञान बहुत आवश्यक है।... और पढ़ें

ज्योतिषमुहूर्तनक्षत्रभविष्यवाणी तकनीक

जून 2011

व्यूस: 19406

ज्योतिष फलित में निखार लाने के सूत्र

ज्योतिष में राशियों का अपना महत्व है, परंतु हमारे वैदिक ज्योतिष में राशियों से कहीं अधिक महत्ता नक्षत्रों की बताई गई है। पुरानी परिपाटी के ज्योतिर्विद प्रायः राशियों तथा ग्रहों की स्थिति के आधार पर ही फलित का विचार करते हैं, परंतु... और पढ़ें

ज्योतिषनक्षत्रभविष्यवाणी तकनीक

जुलाई 2005

व्यूस: 13350

नक्षत्र और उसके द्वारा जन्मफल

नक्षत्र तारों समूहों से बने हैं आकाश में जो असंख्य तारक मंडल विभिन्न रूपों और आकारों में दिखलाई पड़ते हैं, वे ही नक्षत्र कहे जाते हैं। ज्योतिष शास्त्र में ये नक्षत्र एक विशिष्ट स्थान रखते हैं।... और पढ़ें

ज्योतिषनक्षत्रभविष्यवाणी तकनीक

फ़रवरी 2013

व्यूस: 13072

नक्षत्रों से आजीविका चयन और बीमारी का अनुमान

आजीविका चयन का ज्योतिष में प्राचीन और सर्वमान्य नियम यह है की कर्मेश / दशमेश जिस ग्रह के नवांश घर में हो उस ग्रह के गुण धर्म के अनुसार व्यक्ति की आजीविका होगी। इसके अतिरिक्त ज्योतिष ग्रंथों और वृहत संहिता खंड एक के अनुसार १५ में उ... और पढ़ें

ज्योतिषस्वास्थ्यनक्षत्रभविष्यवाणी तकनीकव्यवसाय

फ़रवरी 2013

व्यूस: 11959

नक्षत्रों का ज्योतिषीय विवरण

वैदिक काल में वार के स्थान पर नक्षत्र दिवस के प्रयोग की परम्परा नक्षत्र ज्ञान की प्राचीनता का साक्षात उदाहरण हैं। शास्त्रों से विदित होता हैं। उस काल में वर्तमान व् भविष्य के दिशा निर्देशन या फलादेश में राशियों की जगह नक्षत्रों या... और पढ़ें

ज्योतिषमुहूर्तनक्षत्रराशि

फ़रवरी 2013

व्यूस: 11672

गंडमूल संज्ञक नक्षत्र

संधिकाल या संक्रमण काल सदैव से ही अशुभ हानिकारक, कष्टदायक एवं असमंजसपूर्ण माना जाता रहा हैं। संधि से तात्पर्य है एक की समाप्ति तथा दूसरे का प्रारंभ, चाहे वह समय हो या स्थान हो या परिस्थिति हो।... और पढ़ें

ज्योतिषनक्षत्रभविष्यवाणी तकनीक

फ़रवरी 2013

व्यूस: 10856

नक्षत्रों का महत्व

नक्षत्रों की खोज राशियों से पहले हुई थी। पृथ्वी से नक्षत्र राशियों से भी अधिक दूरी पर स्थित हैं। पृथ्वी से नक्षत्र राशियों से भी अधिक दूरी पर स्थित हैं। नक्षत्रों को अन्य धर्म में तारों के नाम से भी जाना जाता हैं।... और पढ़ें

ज्योतिषनक्षत्रराशि

फ़रवरी 2013

व्यूस: 9777

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