कैरियर निर्माण की अनुभूत ज्योतिषीय प्रक्रिया

अकतूबर 2005

व्यूस: 8940

ज्योतिष ग्रंथों में कर्मक्षेत्र के चयन हेतु असंख्य सिद्धांत एवं नियम प्रतिपादित हैं। इन नियमों को किसी जातक की जन्मकुंडली में लागू कर उसके वास्तविक व्यवसाय का निर्धारण कर पाना अत्यंत कठिन एवं दुरूह है। सारे सिद्धांतों को लागू कर ल... और पढ़ें

ज्योतिषप्रसिद्ध लोगज्योतिषीय विश्लेषणज्योतिषीय योगकुंडली व्याख्याघरकृष्णामूर्ति ज्योतिषनक्षत्रग्रहभविष्यवाणी तकनीकव्यवसायसफलता

योगों में नक्षत्रों की भूमिका

फ़रवरी 2013

व्यूस: 7474

योगों में नक्षत्रों की भूमिका

राजेंद्र कुमार जोशी

प्रत्येक व्यक्ति किसी शुभ कार्य को शुभ समय इमं प्रारम्भ करना चाहता हैं ताकि वह कार्य सफल, लाभकारी तथा मंगलमय हो। ऐसे अनेक शुभ समय विभिन्न कालांगों तथा वार, तिथि, नक्षत्र आदि के सम्मिश्रण से बनाते हैं।... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगनक्षत्रभविष्यवाणी तकनीक

तेजी-मंदी वार व मास शकुन के द्वारा विचार

अप्रैल 2016

व्यूस: 7364

रवि, सोम, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि ये सात वार होते हैं। इनका नाम ग्रह के ऊपर रखा गया है। वैसे ज्योतिष शास्त्र में वारों के द्वारा तेजी-मंदी का कोई उल्लेख नहीं मिलता। परंतु बड़े-बड़े वायदा व्यापार के व्यापारियों एवं सटोरियों के ... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय विश्लेषणमेदनीय ज्योतिषनक्षत्रभविष्यवाणी तकनीकगोचर

नक्षत्र एवं संबंधित दान

सितम्बर 2014

व्यूस: 6360

- अश्विनी नक्षत्र में कांस्य पात्र में घी भरकर दान करने से रोग मुक्ति होती है। - भरणी नक्षत्र में ब्राह्मण को तिल एवं धेनु का दान करने से सद्गति प्राप्त होती है व कष्ट कम होता है। - कृतिका नक्षत्र में घी और खीर से युक्... और पढ़ें

ज्योतिषउपायनक्षत्रभविष्यवाणी तकनीक

सवार्थसिद्धिकारक अभिजित मुहूर्त

जनवरी 2011

व्यूस: 6102

मनुष्य का जन्म अपने 'प्रारब्ध' (पूर्वजन्म के कर्म फल) अनुसार होता है। अच्छे 'प्रारब्ध' वाले शिशुओं की जन्म कुंडलियों में स्थित बलवान शुभ ग्रह योग उनके जीवन में सुख, सफलता, और समृद्धि प्रदान करते हैं। इसके विपरीत बुरे 'प्रारब्ध' वा... और पढ़ें

ज्योतिषमुहूर्तनक्षत्र

नक्षत्र

फ़रवरी 2013

व्यूस: 5786

नक्षत्र

डॉ. अरुण बंसल

पृथ्वी सूर्य के चरों ओर चक्कर लगाती रहती हैं। एक चक्कर लगाने में पृथ्वी को 365.2422 दिन लगते हैं। यही एक वर्ष का मान हैं। चन्द्रमा की दो प्रकार की गति हैं। एक पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाने में इसे 27.32 दिन लगते हैं।... और पढ़ें

ज्योतिषनक्षत्रराशि

गंडमूल नक्षत्र विचार

सितम्बर 2006

व्यूस: 4070

गंडमूल नक्षत्र विचार

रमेश शास्त्री

व्यक्ति का जन्म जिस ग्रह स्थिति और नक्षत्र में होता है, उसी के अनुसार जीवन में शुभ तथा अशुभ घटनाएं घटित होती हैं। ज्योतिष शास्त्र के फलित ग्रंथों में ग्रह नक्षत्रों की स्थिति से बनने वाले अशुभ योगों की शांति के लिए उपायों का... और पढ़ें

ज्योतिषनक्षत्र

ज्योतिष की आर्ष पद्धति

अप्रैल 2004

व्यूस: 3957

वैदिक ग्रंथों तथा वेदांग ज्योतिष का अध्ययन करने से स्पष्ट होता है कि भारत में नक्षत्र ज्ञान अपने उत्कर्ष पर रहा है। इसी कारण नक्षत्र ज्ञान तथा नक्षत्र विद्या का अर्थ ‘ज्योतिष’ माना जाने लगा। ज्योतिष का प्रचलित अर्थ हुआ वह षास्त्र ... और पढ़ें

ज्योतिषनक्षत्र

2011 का लग्न नक्षत्रानुसार भविष्यफल

जनवरी 2011

व्यूस: 3529

किस मास में किस वार को पड़ता है इस लग्न नक्षत्र के आधार पर वार्षिक फलादेश की जानकारी प्राप्त कीजिए इस लेख द्वारा।... और पढ़ें

ज्योतिषनक्षत्रभविष्यवाणी तकनीक

रत्नों का ज्योतिषीय एवं वैज्ञानिक आधार

जून 2010

व्यूस: 2971

रत्नों के प्रयोग से ज्योतिषीय उपाय के वैज्ञानिक आधार को स्पष्ट करने के लिए यह समझना अति आवश्यक है कि मानव शरीर मात्र एक भौतिक रूप नहीं है।... और पढ़ें

ज्योतिषउपायरत्ननक्षत्रसफलताराशि

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