चिकित्सा ज्योतिष


हृदय रोग और ज्योतिष

हृदय रोग और ज्योतिष

फ्यूचर पाॅइन्ट

कार्डियाॅलाॅजिकल सोसाइटी के एक सर्वेक्षण के अनुसार हृदय रोग शहरों में 6ः और ग्रामीण क्षेत्रों में 3ः पाया जाता है। कुछ समय पूर्व तक यह रोग प्रौढ़ और वृद्ध लोगों में ही पाया जाता था। किंतु आज बच्चे और युवा भी इससे पीड़ित होते देखे ... और पढ़ें

ज्योतिषचिकित्सा ज्योतिषभविष्यवाणी तकनीक

जुलाई 2005

व्यूस: 4101

रोगों से बचाए सूर्य

पृथ्वी के प्र्राणियों के लिए सूर्य का बहुत ज्यादा महत्व है। समस्त धरा पर निवास कर रहे प्राणि जगत हेतु सूर्य जीवन प्रदाता है। सूर्य वह पिंड या ग्रह है जिससे हमें ऊर्जा प्राप्त होती है। सूर्य से प्राप्त ऊर्जा ही है जो इस संसार ... और पढ़ें

ज्योतिषस्वास्थ्यज्योतिषीय योगचिकित्सा ज्योतिषग्रहभविष्यवाणी तकनीक

जनवरी 2006

व्यूस: 3842

थैलेसीमिया: एक रक्ताल्पता रोग

थैलेसीमिया एक ऐसा रोग है जो विरासत में बच्चे को माता-पिता से मिलता है। इसे समझने और इसके कारणों का ज्योतिषीय आधार जानने के लिए बुनियादी विषय में बुनियादी ज्ञान का होना आवश्यक है। भिन्न-भिन्न समूहों की वंशानुगत अव्यवस्थाओं के कारण... और पढ़ें

ज्योतिषस्वास्थ्यज्योतिषीय योगचिकित्सा ज्योतिष

अप्रैल 2005

व्यूस: 4034

हृदय रोग: कारण और निवारण

हृदय रोग: कारण और निवारण

वेद प्रकाश गर्ग

पूरे विश्व में हृदय के दौरे से मरने वाले लोगों की संख्या अन्य रोगों से मरने वालों की संख्या से अधिक है। अकेले अमेरिका जैसे विकसित देश में ही पांच लाख लोग हृदय रोग से प्रतिवर्ष मर जाते हैं। ये आंकड़े तो तब हैं जब 1963 से अब तक हृ... और पढ़ें

ज्योतिषस्वास्थ्यज्योतिषीय विश्लेषणचिकित्सा ज्योतिष

आगस्त 2006

व्यूस: 3707

आंखों की समस्या और ज्योतिष

ज्योतिष विज्ञान हमारे प्राचीन ऋषियों के द्वारा प्रदान की गई ऐसी विधा है जिससे हमारे जीवन का कोई भी पक्ष अछूता नहीं है। जीवन के अनेक अनसुलझे प्रश्नों के अतिरिक्त जन्मकुंडली हमारे शरीर और स्वास्थ्य की पूरी जानकारी देती है जिससे ह... और पढ़ें

ज्योतिषउपायचिकित्सा ज्योतिषभविष्यवाणी तकनीक

मई 2016

व्यूस: 3455

स्तन कैंसरः एक शोध

स्तन कैंसरः एक शोध

किशोर घिल्डियाल

मानव शरीर के अंगों की रचना विज्ञान के अनुसार कोशिकाओं से होती है जो स्वयं बनती व नष्ट होती रहती हैं। जब किसी भी कारण से इन कोशिकाओं में कोई कमी आदि आती है तब ये कोशिकाएं सुचारु रूप से नष्ट न होकर असामान्य या अनियंत्रित होकर शरीर क... और पढ़ें

ज्योतिषस्वास्थ्यकुंडली व्याख्याघरचिकित्सा ज्योतिषग्रहभविष्यवाणी तकनीक

जनवरी 2014

व्यूस: 4652

स्तन कैंसर

स्तन कैंसर

अविनाश सिंह

महिलाओं को होने वाले रोगों में सबसे भयंकर रोग स्तन कैंसर है, जो बड़ी उम्र की महिलाओं में अधिक पाया जाता है। इस रोग की प्रारंभिक अवस्था में वक्ष में एक छोटी सी गांठ होती है। यह धीरे-धीरे बढ़ती है। यदि समय रहते प्रारंभिक अव... और पढ़ें

ज्योतिषस्वास्थ्यचिकित्सा ज्योतिषभविष्यवाणी तकनीक

फ़रवरी 2017

व्यूस: 1905

मानसिक रोग

मानसिक रोग

सुखविंदर सिंह

आज के बदलते सामाजिक परिवेश तथा उच्च अभिलाषाओं एवं अपने कार्यों की सही रूपरेखा निर्धारण न कर पाने के कारण आज मनुष्य मानसिक स्तर पर अनेक रोगों से ग्रस्त है। भावनाओं तथा संवेदनाओं का सीधा संबंध मस्तिष्क एवं बुद्धि तथा मन से होता है। ... और पढ़ें

ज्योतिषस्वास्थ्यकुंडली व्याख्याघरचिकित्सा ज्योतिषग्रहभविष्यवाणी तकनीक

अकतूबर 2010

व्यूस: 7951

मधुमेह

मधुमेह

किशोर घिल्डियाल

वर्तमान समय मं तेजी से बढ़ते हुये रोगों में से एक “डायबिटिस” अर्थात मधुमेह नामक रोग है। यह रोग “साइलेंट किलर” की भांति धीरे-धीरे प्रत्येक 10 में से 4 व्यक्तियों को अपने कब्जे में लेता जा रहा है। आजकल के इस भागदौड़ वाले समय में हमारी... और पढ़ें

स्वास्थ्यउपायकुंडली व्याख्याघरचिकित्सा ज्योतिषग्रहभविष्यवाणी तकनीक

अकतूबर 2012

व्यूस: 7989

कैसे किया जाए आयु निर्णय

पराशर जी ने आयु के सात प्रकार बताए हैं - बालारिष्ट, योगारिष्ट, अल्प, मध्य, दीर्घ, दिव्य व अमितायु ये सात प्रकार की आयु होती है। अब इनकी अवधि के बारे में विचार करते हैं।... और पढ़ें

ज्योतिषस्वास्थ्यकुंडली व्याख्याघरचिकित्सा ज्योतिषग्रहभविष्यवाणी तकनीक

अप्रैल 2009

व्यूस: 9109

बालारिष्ट योग (आयु निर्णय)

बच्चे तथा उसके माता-पिता द्वारा किए गए पूर्व जन्म के दुष्कृत्यों से संचित शिशु की जन्मकालिक क्रूर ग्रह स्थिति आदि को रिष्ट या अरिष्ट कहा गया है। रिष्ट तथा अरिष्ट का अर्थ शब्दकोश के अनुसार शुभ और अशुभ है, किंतु आयु निर्णय में इसका ... और पढ़ें

ज्योतिषस्वास्थ्यकुंडली व्याख्याघरचिकित्सा ज्योतिषग्रहभविष्यवाणी तकनीक

अकतूबर 2012

व्यूस: 13679

रोगों के कारक ग्रह और उनके ज्योतिषीय उपाय

रोग कारक ग्रह जब गोचर में जन्मकालीन स्थिति में आते हैं और अंतर-प्रत्यंतर दशा में इनका समय चलता है तो उसी समय रोग उत्पन्न होता है। यदि षष्ठेश, अष्टमेश एवं द्वादशेश तथा रोग कारक ग्रह अशुभ तारा नक्षत्रों में स्थित होते हैं तो रोग की... और पढ़ें

ज्योतिषस्वास्थ्यउपायज्योतिषीय योगचिकित्सा ज्योतिषभविष्यवाणी तकनीक

जनवरी 2006

व्यूस: 14380

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Some problems are too personal to share via a written consultation! No matter what kind of predicament it is that you face, the Talk to an Astrologer service at Future Point aims to get you out of all your misery at once.

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