क्या-क्या करते हैं अस्त ग्रह?

अप्रैल 2015

व्यूस: 19014

सूर्य को ग्रहों का राजा कहा जाता है। जो ग्रह सूर्य से एक निष्चित अंषों पर स्थित होने पर अपने राजा के तेज और ओज से ढंक जाता है और क्षितिज पर दृष्टिगोचर नहीं होता तो उसका प्रभाव नगण्य हो जाता है।... और पढ़ें

ज्योतिषग्रहभविष्यवाणी तकनीक

हाथों की रेखाओं में भी राहु

जुलाई 2014

व्यूस: 18868

सामान्यतः मंगल से निकलकर जीवन व भाग्य रेखा को काटकर मस्तिष्क रेखा को छूने या उसे भी काटकर हृदय रेखा तक जाने वाली रेखाएं, ‘राहु रेखा’ कहलाती है। हाथों में इनकी संख्या एक से लेकर तीन या चार तक होती हैं। मोटी ‘राहु रेखाएं... और पढ़ें

हस्तरेखा शास्रग्रह पर्वत व रेखाएंग्रह

नाड़़ी दोष विचार

जनवरी 2011

व्यूस: 18135

नाड़़ी दोष विचार

ब्रजकिशोर शर्मा ‘ब्रजवासी’

नाडि शब्द नाडि मंडल से संबंधित है, जिसका अर्थ है कि आकाशीय विषुवत् सेवा। नाडी कूटं तं संग्राह्यं, कूटानां तु शिरोमणिम्। ब्रह्मणा कन्यका कण्ठ सूत्रत्वेन विनिर्मितम्॥ (अर्थात् जिस प्रकार विवाहित कन्या के लिए मंगल सूत्र आवश्यक है, उस... और पढ़ें

ज्योतिषकुंडली व्याख्याघरविवाहग्रहभविष्यवाणी तकनीक

अष्टम भावस्थ शनि का विवाह पर प्रभाव

जनवरी 2009

व्यूस: 17768

प्राचीन ज्योतिषाचार्यों ने एकमत से जातक की कुंडली के सप्तम भाव को विवाह का निर्णायक भाव माना है और इसे जाया भाव, भार्या भाव, प्रेमिका भाव, सहयोगी, साझेदारी भाव स्वीकारा है।... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगकुंडली व्याख्याघरविवाहग्रहभविष्यवाणी तकनीक

शनि से बनने वाले योग

मार्च 2013

व्यूस: 17751

शनि से बनने वाले योग

अशोक सक्सेना

शनि का नाम सुनकर ही जातक भयभीत/ चिंताग्रस्त हो जाते हैं, जबकि ऐसा सोचना हमेशा सत्य नहीं होता। शनि देव को भगवान शिव ने न्यायधीश का पड़ दिया है। और उसका दायित्व शनिदेव पूर्ण निष्ठां से व बिना किसी दुराग्रह के संपादित करते हैं।... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगकुंडली व्याख्याघरग्रहभविष्यवाणी तकनीक

कुण्डली में शनि शुभ-अशुभ फल देता है

अकतूबर 2014

व्यूस: 16920

जब किसी जातक पर साढ़ेसाती आती है तो जातक में यह जानने की ख्वाहिश बढ़ जाती है कि उनके ऊपर साढ़ेसाती कब तक बुरा प्रभाव देगी, उसके लिए साढ़ेसाती कितनी बुरी या कितनी अच्छी है। शनि की साढ़ेसाती प्रारंभ होना या शनि की ढैया का लगना, यह स... और पढ़ें

ज्योतिषकुंडली व्याख्याग्रहभविष्यवाणी तकनीक

शनि व शुक्र का विचित्र संबंध

फ़रवरी 2017

व्यूस: 16530

शनि व शुक्र परिचय शनि को “सौरमंडल का गहना” (श्रमूमस व िजीम ैवसंत ैलेजमउ) कहा जाता है क्योंकि इनके चारों ओर अनेक सुन्दर वलय परिक्रमा करते हैं। खगोलीय दृष्टिकोण से शनि एक गैसीय ग्रह है और शनि को सूर्य से जितनी ऊर्जा मिलती है ... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय विश्लेषणग्रहभविष्यवाणी तकनीक

ज्योतिष द्वारा कैसे जानें मानसिक रोग

अप्रैल 2011

व्यूस: 16503

मन के हारे हार है 'मन के जीते जीत' उक्त कहावत हमारे जीवन में बहुत सार्थक प्रतीत होती है। मानसिक बल के आगे शारीरिक बल न्यून हो जाता है। व्यक्ति का मन अगर भ्रष्ट या अविवेकी हो जाए तो व्यक्ति का चरित्र लांछित हो जाता है। मन रोगी व कम... और पढ़ें

ज्योतिषस्वास्थ्यकुंडली व्याख्याघरचिकित्सा ज्योतिषग्रहभविष्यवाणी तकनीक

शनि की ढईया और साढ़ेसाती

नवेम्बर 2014

व्यूस: 16477

साढ़े-साती यानि शनि का आपकी राशि के आस-पास भ्रमण। शनि जब कुंडली में चंद्रमा की स्थिति से बारहवें, प्रथम और द्वितीय स्थान पर होते हैं तब शनि की साढ़े-साती होती है, शनि जब कुंडली में चंद्रमा की स्थिति से चैथे और आठवें स्थान पर होते... और पढ़ें

ज्योतिषविविधग्रह

नवग्रहों से रोग ज्ञान

सितम्बर 2006

व्यूस: 16354

नवग्रहों से रोग ज्ञान

फ्यूचर पाॅइन्ट

रोग दो तरह के होते हीं- दोषज एवं कर्मज। जिन रोगों का उपचार दवाओं से हो जाता हों, उन्हें दोषज तथा जिनका उपचार दवाओं से नहीं हो उन्हें कर्मज कहते है। कर्मज रोग मनुष्य को पूर्व जन्म के बुरे कार्यों और पापी ग्रहों से पीड़ित होने के कार... और पढ़ें

ज्योतिषस्वास्थ्यमंत्रग्रहभविष्यवाणी तकनीक

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