अध्यात्म, धर्म आदि


ध्रुव-चरित्र

ध्रुव-चरित्र

ब्रजकिशोर शर्मा ‘ब्रजवासी’

कर्मयोगी चक्रवर्ती सम्राट महाराज परीक्षित ने पूज्य गुरुदेव श्री शुकदेव जी से पूछा- मुनिवर ! ध्रुव के वनगमन का क्या कारण था? किस प्रकार ध्रुव भगवान की कृपा हुई और अविचल धाम की प्राप्ति हुई? श्री शुकदेवजी कहते हैं - राजन्। प्... और पढ़ें

देवी और देवअध्यात्म, धर्म आदिविविध

दिसम्बर 2014

व्यूस: 10700

भगवान श्री गणेश और उनका मूलमंत्र

हिंदुओं के सभी कार्यों का श्रीगणेश अर्थात शुभारंभ भगवान गणपति के स्मरण एवं पूजन से किया जाता है। भगवान श्री गणेश की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उनके पूजन एवं स्मरण का यह क्रम जीवन भर लगातार चलता रहता है। चाहे कोई व्रत, पर्व, उत्सव,... और पढ़ें

देवी और देवउपायअध्यात्म, धर्म आदिमंत्रयंत्र

जुलाई 2013

व्यूस: 10466

वृक्षों का वैदिक महत्व

पश्चिम के लोग तथा नये पढ़े-लिखे भारतीय भारत देश में प्रचलित वृक्ष पूजा का बड़ा मजाक उड़ाते हैं, जबकि स्वयं पूरे विश्व को क्रिसमस के दिन क्रिसमस ट्री की आराधना करने के लिए प्रेरित करते हंै। भारतीयों को पेड़-पत्ते का पुजारी कहा जाता है।... और पढ़ें

ज्योतिषअन्य पराविद्याएंअध्यात्म, धर्म आदि

अप्रैल 2004

व्यूस: 10385

गर्भाधान संस्कार

गर्भाधान संस्कार

विजय प्रकाश शास्त्री

भारतीय संस्कृति में कलिकाल में मनुष्य के सोलह संस्कारों का वर्णन किया है उसमें प्रथम संस्कार है। हमारे घर में उत्तम संतान का जन्म हो यही सभी चाहते हैं। हर मनुष्य की इच्छा होती है उसकी संतान उत्तम गुणयुक्त, संस्कारी, बलवान, आरोग्यव... और पढ़ें

अध्यात्म, धर्म आदिविविध

अप्रैल 2014

व्यूस: 10322

ब्रह्म सृष्टि विज्ञान

ब्रह्म सृष्टि विज्ञान

गिरजा शंकर प्रसाद

विश्व ब्रह्मांड का रहस्य कौतूहल का विषय है। आज का विज्ञान इन रहस्यों को उजागर करने में प्रयत्नशील है। सृष्टि का प्रादुर्भाव अण्ड विस्फोट से होने की जानकारी आज के वैज्ञानिकों को सन 1926-27 में हुई, जिसे बिग बैग की संज्ञा देकर उन्हो... और पढ़ें

उपायअध्यात्म, धर्म आदिखगोल-विज्ञानविविध

अकतूबर 2008

व्यूस: 10255

क्या है- पूजा में आरती का महत्व

पूजा-पाठ का एक महत्वपूर्ण अंग है, ‘आरती’ं शास्त्रों में आरती को ‘आरक्तिका’ ‘आरर्तिका’ और ‘नीराजन’ भी कहते हैं। किसी भी प्रकार की पूजा-पाठ, यज्ञ-हवन, पंचोपचार-षोडशोपचार पूजा आदि के बाद आरती अंत में की जाती है। पूजा-पाठ में जो त्रुट... और पढ़ें

देवी और देवअध्यात्म, धर्म आदिविविध

जुलाई 2013

व्यूस: 10195

विशिष्ट महत्व है काशी के कालभैरव का

विशिष्ट महत्व है काशी के कालभैरव का

राकेश कुमार सिन्हा ‘रवि’

भारत देश की सांस्कृतिक राजधानी और मंदिरों की महानगरी वाराणसी में मंदिरों की कोई कमी नहीं। काशी तीर्थ में उत्तर से लेकर दक्षिण तक और पूरब से लेकर पश्चिम तक एक से बढ़कर एक मान्यता प्राप्त पौराणिक देवालय हैं पर इनकी कुल संख्या कितनी ह... और पढ़ें

देवी और देवस्थानअध्यात्म, धर्म आदिविविधमन्दिर एवं तीर्थ स्थल

जून 2013

व्यूस: 10182

क्या है पितृ दोष अथवा पितृ ऋण?

लोगों की मृत्यु उपरांत विभिन्न कारणों से अथवा मोह माया वश जब उनकी आत्मा बंधन मुक्त न होकर मृत्यु लोक में ही घूमती रहती है और स्वयं मुक्त न होने के कारण इन पूर्वजों का अपने परिवार पर नकारात्मक अथवा किसी न किसी रूप में... और पढ़ें

ज्योतिषउपायअध्यात्म, धर्म आदिभविष्यवाणी तकनीक

सितम्बर 2014

व्यूस: 10134

अश्वत्थ व्रत एवं महिमा

अश्वत्थ व्रत एवं महिमा

ब्रजकिशोर भारद्वाज

अश्वत्थ पीपल के वृक्ष का ही एक नाम है। पंचदेव वृक्षों में अश्वत्थ का स्थान सर्वोपरि है। प्रस्तुत है ब्रह्मांड पुराण में ब्रह्माजी द्वारा अश्वत्थ व्रत पूजा की महिमा का बखान का वर्णन..... और पढ़ें

देवी और देवउपायअध्यात्म, धर्म आदिपर्व/व्रत

मई 2010

व्यूस: 9789

ज्योतिष विज्ञान है, या अंध्विश्वास?

अभी तक परिचर्चा हुआ करती थीं कि विज्ञान वरदान है, या अभिशाप ? लेकिन समय के बदलते परिवेश में आज परिचर्चा का विषय भी बदला है और आजकल परिचर्चा का सबसे ज्वलंत विषय है - ज्योतिष विज्ञान है, या महज एक अंधविश्वास। यह बात इससे और भी साबित... और पढ़ें

ज्योतिषअध्यात्म, धर्म आदि

अप्रैल 2004

व्यूस: 9596

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