अध्यात्म, धर्म आदि


क्यों?

क्यों?

डॉ. अरुण बंसल

अनादि काल से ही हिंदू धर्म में अनेक प्रकार की मान्यताओं का समावेश रहा है। विचारों की प्रखरता एवं विद्वानों के निरंतर चिंतन से मान्यताओं व आस्थाओं में भी परिवर्तन हुआ। क्या इन मान्यताओं व आस्थाओं का कुछ वैज्ञानिक आधार भी है? यह प्र... और पढ़ें

ज्योतिषअध्यात्म, धर्म आदिविविध

जुलाई 2013

व्यूस: 4288

पितृ दोष: समस्या और समाधान

जन्मपत्री का नवम भाव भाग्य भाव कहलाता है। इसके अतिरिक्त इस भाव से पिता और पूर्वजों का विचार भी किया जाता है। धर्म शास्त्रों में यह मान्यता है कि पूर्व जन्म के पापों के कारण पितृ दोष का निर्माण होता है। व्यक्ति का जीवन सुख-द... और पढ़ें

ज्योतिषदेवी और देवउपायअध्यात्म, धर्म आदिभविष्यवाणी तकनीक

सितम्बर 2016

व्यूस: 4446

उत्तरायण और मकर संक्रांति की भ्रांति

हर वर्ष की तरह जनवरी-2016 में भी, सूर्य देवता के मकर राशि में प्रवेश करते ही, भारत में मकर संक्रांति बड़ी धूम-धाम से मनाई जायेगी और हर वर्ष की तरह एक-दूसरे को फोन पर और ॅींजे।चच आदि पर शुभकामनाएं देने का तांता सा लग जायेगा। मकर स... और पढ़ें

ज्योतिषदेवी और देवअध्यात्म, धर्म आदिपर्व/व्रतभविष्यवाणी तकनीक

जनवरी 2016

व्यूस: 4431

जन्माष्टमी निर्णय

जन्माष्टमी निर्णय

डॉ. अरुण बंसल

हाल ही में जन्माष्टमी 1 व 2 सितंबर को मनाई गई। वृन्दावन व अनेक मंदिरों में 1 सितंबर को व मथुरा, बिड़ला मन्दिर आदि में 2 सितंबर को।... और पढ़ें

ज्योतिषदेवी और देवअध्यात्म, धर्म आदिखगोल-विज्ञानयशपर्व/व्रत

सितम्बर 2010

व्यूस: 4269

दीपावली महापर्व ज्योतिष के आइने में

पूर्ण आभामय स्वरूप में सोलह श्रृंगार किये जब पृथ्वी पर महालक्ष्मी का पदार्पण होता है तब यह रात्रि साक्षात महारात्रि बन जाती है जो दीपावली की रात्रि कहलाती है।... और पढ़ें

ज्योतिषअन्य पराविद्याएंअध्यात्म, धर्म आदिज्योतिषीय विश्लेषणवशीकरणपर्व/व्रत

नवेम्बर 2010

व्यूस: 1857

पितृदोष/ऋण का सार्थक विवेचन

जहां ‘कालसर्प योग’ में राहु व केतु की प्रमुख भूमिका होती है वहीं ‘पितृ दोष’ में राहु व शनि की भूमिका बताई जाती है। कुछ आचार्य इसे ‘पितृ ऋण’ की संज्ञा देते हैं। ‘कालसर्प योग’ के समान ही ‘पितृ दोष/ऋण’ से ग्रसित होने के लक्षण इ... और पढ़ें

ज्योतिषउपायअध्यात्म, धर्म आदिभविष्यवाणी तकनीक

सितम्बर 2014

व्यूस: 5062

भगवान श्रीराम की गया यात्रा एवं गया श्राद्ध

राज्याभिषेक होने के बाद राजतंत्र को सृदृढ़ कर प्रजा की रक्षा के लिए विधि व्यवस्था कर भगवान श्रीराम ने तीर्थों की यात्रा की थी। अयोध्या से चलकर पूर्व दिशा के शोराभद्रादि तीर्थों में अवगाहन एवं अपने पितरों का तर्पण पिंड दान करते हुए ... और पढ़ें

देवी और देवस्थानउपायअध्यात्म, धर्म आदिसुखमन्दिर एवं तीर्थ स्थल

अकतूबर 2008

व्यूस: 4885

सिद्धपीठ ‘रजरप्पा’

सिद्धपीठ ‘रजरप्पा’

राकेश कुमार सिन्हा ‘रवि’

प्रकारान्तर से भारतवर्ष में शक्ति पूजा की विशद् परंपरा रही है। यहां देवी विभिन्न रूपों में युगों-युगों से देवताओं, संतों, ऋषि-मुनियों एवं जनसामान्य द्वारा पूजित इस चराचर जगत् में घटित समस्त कार्यों की हेतु प्रतीत होती हैं। संप... और पढ़ें

देवी और देवस्थानअध्यात्म, धर्म आदिमन्दिर एवं तीर्थ स्थल

अकतूबर 2014

व्यूस: 5080

महाकुम्भ का महात्म्य

महाकुम्भ का महात्म्य

फ्यूचर पाॅइन्ट

हिन्दुओं के धार्मिक ग्रंथों में अनेक प्राचीन धार्मिक उत्सवों के प्रमाण मिलते हैं। उनमें कुम्भ एवं महाकुम्भ भी हैं। इस अवसर पर भव्य एवं विशाल मेला लम्बे समय तक चलता हैं। जहाँ, मनोरंजन के साथ साथ, मानव चरित्र को आवश्यक विधियों की ओर... और पढ़ें

देवी और देवस्थानअध्यात्म, धर्म आदिपर्व/व्रत

फ़रवरी 2013

व्यूस: 6868

द्वादश ज्योतिर्लिंग के प्रतीक श्री पशुपति नाथ

नेपाल में नागमति के किनारे स्थित कांतिपुर में पशुपतिनाथ विराजमान है। पशुपतिनाथ का मंदिर धर्म, कला, संस्कृति की दृष्टि से अद्वितीय है। इस मंदिर के दर्शन से मनुष्य का अगला जन्म पशु योनि में नहीं होता ऐसा लोगों का विश्वास है। चलिए चल... और पढ़ें

देवी और देवस्थानअध्यात्म, धर्म आदिमन्दिर एवं तीर्थ स्थल

फ़रवरी 2010

व्यूस: 7049

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