अध्यात्म, धर्म आदि


दीपावली के दिन किये जाने वाले धनदायक उपाय

अकतूबर 2015

व्यूस: 4489

आज का युग अर्थप्रधान युग है। इस युग में बिना रुपये-पैसे के कोई भी काम असंभव है। अतः दीपावली के पावन पर्व पर कुछ महत्वपूर्ण उपाय करने से हर व्यक्ति की तिजोरी रुपये-पैसे से भरी रहेगी। बस श्रद्धा और विश्वास के साथ इन उपायों को करे... और पढ़ें

देवी और देवउपायअध्यात्म, धर्म आदिपर्व/व्रत

महाशिवरात्रि की महिमा

फ़रवरी 2015

व्यूस: 4465

भारत में प्रचलित त्यौहारों, अनुष्ठानों व धार्मिक क्रियाकलापों का विवेचन करें तो यह स्पष्ट हो जाता है कि ये न केवल अध्यात्म की दृष्टि से उपयोगी हैं वरन् व्यावहारिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं। शिवरात्रि व्रत इसका अपवाद नहीं ... और पढ़ें

देवी और देवअध्यात्म, धर्म आदिपर्व/व्रत

ज्ञान और भक्ति का दीप जलाएं

नवेम्बर 2010

व्यूस: 4398

भगवान् ने कहा है कि हृदय में स्थित मैं दीप जलाता हूं। जो ज्ञान अंतरात्मा से फूट पडे़, वह परम कृपा प्रसाद है, परम् मृदुल प्रेम है, परम अनुकम्पा है, परम कल्याणमयी ज्ञानगंगा है।... और पढ़ें

देवी और देवअध्यात्म, धर्म आदिआकर्षणयशविविध

अष्टलक्ष्मी सुख समृद्धि की देवी

अकतूबर 2014

व्यूस: 4397

यदि मनुष्य को जीवन में लक्ष्मी को प्राप्त करना है तो अष्टलक्ष्मी रहस्य जानना आवश्यक है और इनकी उपासना करना आवश्यक है। इसका शास्त्रों में वर्णन एवं मंत्र निम्नलिखित रूप में प्राप्त होते हैं:... और पढ़ें

देवी और देवउपायअध्यात्म, धर्म आदिपर्व/व्रतसंपत्ति

क्यों

जुलाई 2014

व्यूस: 4374

क्यों

यशकरन शर्मा

अनादि काल से ही हिंदू धर्म में अनेक प्रकार की मान्यताओं का समावेश रहा है। विचारों की प्रखरता एवं विद्वानों के निरंतर चिंतन से मान्यताओं व आस्थाओं में भी परिवर्तन हुआ। क्या इन मान्यताओं व आस्थाओं का कुछ वैज्ञानिक आधार भी है? ... और पढ़ें

अध्यात्म, धर्म आदिविविध

सांचोली मां का व्रत

मार्च 2010

व्यूस: 4326

सांचोली मां का व्रत

ब्रजकिशोर शर्मा ‘ब्रजवासी’

सांचोली मां का व्रत विशेषकर चैत्र या आश्विन मास की नवरात्रियों में करने का विधान है। आषाढ़ व माघ मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली नवरात्रि भी इस व्रत के लिए उत्तम है।... और पढ़ें

देवी और देवअध्यात्म, धर्म आदिपर्व/व्रत

अन्त्येष्टि संस्कार

जुलाई 2015

व्यूस: 4301

अन्त्येष्टि संस्कार

विजय प्रकाश शास्त्री

यदि मरण-वेला का पहले आभास हो जाए तो- आसन्नमृत्यु व्यक्ति को चाहिए कि वह समस्त बाह्य पदार्थों और कुटुंब मित्रादिकों से चित्त हटाकर परब्रह्म का ध्यान करे। गीता में कहा है- ओमित्येकाक्षरं ब्रह्म व्याहरन् मामनुस्मरन्।... और पढ़ें

अध्यात्म, धर्म आदिविविध

प्राचीन वेदों में ज्योतिष का वर्णन

अकतूबर 2016

व्यूस: 4272

वेद शब्द संस्कृत भाषा के विद् धातु से बना है। विद् का आशय विदित अर्थात जाना हुआ, विद्या अर्थात ज्ञान, विद्वान अर्थात ज्ञानी। वेद भारतीय संस्कृति में सनातन धर्म के मूल अर्थात प्राचीनतम और आधारभूत धर्म ग्रन्थ हंै, जिन्हें ईश्वर की... और पढ़ें

ज्योतिषअध्यात्म, धर्म आदिप्राणिक हीलिंग

ज्ञान प्रदायिनी तारा महाविद्या साधना

फ़रवरी 2010

व्यूस: 4260

तंत्र में दस महाविद्याओं को शक्ति के दस प्रधान स्वरूपों के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है। ये दस महाविद्याएं हैं: काली, तारा, षोडशी, छिन्नमस्ता, बगलामुखी, त्रिपुरभैरवी, मातंगी, धूमावती, भुवनेश्वरी तथा कमला।... और पढ़ें

देवी और देवउपायअध्यात्म, धर्म आदिशिक्षा

विवाहिता की मांग में सिंदूर लगाना अनिवार्य

अप्रैल 2004

व्यूस: 4246

विवाह संस्कार के समय ही वर वधू की मांग में सिंदूर लगाता है। मस्तक पर जिस स्थान पर सिंदूर लगाया जाता है, वह स्थान ब्रह्मरंध्र और अधिप नामक मर्म के ठीक ऊपर का भाग है। स्त्री जातक के शरीर में यह भाग, पुरुष की अपेक्षा, अधिक कोमल होता ... और पढ़ें

अध्यात्म, धर्म आदि

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